नगरीय निकाय चुनाव की मोर्चाबंदी करती भाजपा और कांग्रेस- अरुण पटेल Featured

 

मध्यप्रदेश में आगामी माहों में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के लिए सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अभी से अपनी रणनीति और तैयारियों को अंतिम रूप देना प्रारंभ कर दिया है। 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के पूर्व इन चुनावों को सेमीफाइनल के रूप में लिया जा रहा है इसलिए भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व इसको लेकर अभी से गंभीर हो गया है और कोई भी इसकी तैयारियों में तनिक भी कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता। भाजपा में मोर्चा मुख्यरूप से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने संभाल लिया है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ इस मोर्चे पर काफी सक्रिय हैं। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि दोनों पार्टियां अपने-अपने चुनावी हथियारों की धार तेज करने तथा रणनीति को अंतिम रूप देने में भिड़ गई हैं।
कांग्रेस की हर बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ इस बात पर जोर दे रहे हैं की इन चुनावों को हल्के में ना लें तथा कोई चुनाव छोटा या बड़ा नहीं होता है। नगरीय निकाय चुनाव पूरी ताकत से लड़ना है और विधायकों से भी कहा है कि इन चुनावों के जरिए अभी से अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों भी करते जाएं। पूर्व मंत्री वरिष्ठ कांग्रेस विधायक सज्जन सिंह वर्मा का कहना है कि कांग्रेस किसी भी रूप में भाजपा से पीछे नहीं बल्कि आगे चल रही है और उसने अपने पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं। कमलनाथ 16 जनवरी से अपने प्रदेश के दौरे का कार्यक्रम बना रहे हैं। किसान सम्मेलन के साथ ही साथ निकाय चुनाव को लेकर भी फीडबैक लेंगे। इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी युवाओं को अधिक मौका देने की रणनीति बना रही है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी का कहना है कि मुख्यमंत्री चौहान और प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने जिलों के दौरे प्रारंभ कर दिए हैं जिनके जरिए वह स्थानीय स्तर पर जमीनी हकीकत परखेगें और दावेदारों की मैदानी पकड़ का भी जायजा लेंगे।
निकाय चुनाव : शिवराज- कमलनाथ होंगे आमने-सामने
नगरीय निकाय चुनावों में एक बार फिर शिवराज और कमलनाथ आमने-सामने होंगे। इन चुनावों को भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व इसलिए गंभीरता से ले रहा है क्योंकि इनके नतीजों से बनने वाली शहरों की सत्ता जिस पार्टी के पास रहेगी उसे विधानसभा चुनाव में सत्ता शिखर तक पहुंचने में अपेक्षाकृत आसानी रहेगी। भाजपा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने जिलों के दौरे चालू कर दिए हैं जबकि कमलनाथ ने आज मंगलवार को धार जिले के मोहनपुरा तीर्थस्थल मेंआयोजित प्रदेश में निर्वाचित हुए युवा कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारियों के तीन दिवसीय समापन सत्र में मार्गदर्शन दिया। जिलों के प्रवास का उनका कार्यक्रम तीन जिलों का बन चुका है और आगे भी कार्यक्रम बन रहे हैं। 16 जनवरी को छिंदवाड़ा में किसान सम्मेलन होने जा रहा है और उसके साथ ही कमलनाथ के दौरों का सिलसिला चालू हो जाएगा। 20 जनवरी को कमलनाथ मुरैना में एक बड़े किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे ।28 विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार की कमान संभालने के बाद फिर से निकाय चुनावों में एक बार शिवराज और कमलनाथ आमने सामने होंगे। शिवराज की कोशिश होगी की निकाय चुनाव में भाजपा को एकतरफा जीत हासिल हो ताकि उनके अपने आभामंडल में नई चमक-दमक जो आई है उसमें और तेज चमक दमक और निखार आए। कमलनाथ की कोशिश होगी कि इन चुनाव नतीजों में कांग्रेस को भी सम्मानजनक जीत मिल सके ताकि डेढ़ दशक बाद आई सत्ता के डेढ़ साल में ही हाथ से फिसल जाने और 28 विधानसभा उपचुनावों में शिवराज की अगुवाई में भाजपा को अच्छी जीत मिली है उसके कारण कार्यकर्ताओं में जो हताशा और निराशा आई है उसे दूर करने में मदद मिल सके। प्रदेश में कुल 16 नगर निगम, 99 नगरपालिका और 292 नगर परिषदों के चुनाव होना है। मुख्य चुनावी मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहेगा, यदि इन चुनाव में कांगेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली तो उसे अपने सिकुड़ते जनाधार को बचाना काफी मुश्किलों से भरा हो जाएगा। ग्वालियर चंबल संभाग में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी प्रचार में मुख्य भूमिका निभाएंगे लेकिन भाजपा शिवराज की नीतियों पर वोट मांगेगी और चुनाव प्रचार में मुख्य भूमिका में शिवराज के साथ विष्णु दत्त होंगे। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का दावा है कि भाजपा नगरीय निकाय चुनाव में भी जीत हासिल करेगी। उनके अनुसार इसका कारण यह है कि कांग्रेस के पास ना तो नेता है और ना ही मुद्दे तथा कमलनाथ की असलियत भी प्रदेश की जनता जान चुकी है।
कार्यकर्ताओं में जोश भरना बड़ी समस्या
कमलनाथ के सामने सबसे बड़ी चुनौती और समस्या यही है कि उन्हें पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जीत के प्रति आत्मविश्‍वास पैदा करना होगा और उनमें जो हताशा घर कर गई है उसे दूर कर नई ऊर्जा का संचार करना होगा, यह वह कैसे करते हैं आने वाले कुछ समय बाद ही पता चल सकेगा। उनकी पहली कोशिश यही है कि चुनाव के पूर्व कार्यकर्ताओं को रिचार्ज कर उनमें जोश-खरोश पैदा किया जाए। अपने जिलों के दौरे में वे स्थानीय स्तर पर वहां के हालातों के अनुकूल रणनीति भी बनाएंगे। धार जिले के मोहनखेड़ा तीर्थस्थल पर युवा कांग्रेस के बुनियाद प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर कमलनाथ युवाओं से आज रूबरू हुए और उन्हें भी आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए टिप्स दिए। इस शिक्षण शिविर में 450 नवनिर्वाचित पदाधिकारी भाग ले रहे हैं।
और अंत में............
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने युवा कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में पहले दिन कांग्रेस की तरुणाई को भरोसा दिलाया कि पार्टी नगरीय निकाय चुनाव में युवा कांग्रेस प्रत्याशियों को बड़ी संख्या में चुनाव लड़ाएगी और वह इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने देवास के हाटपिपल्या में साफ तौर पर कहा है कि नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार केवल पार्टी के प्रति वफादार और समर्पित कार्यकर्ताओं को ही बनाया जाएगा। कांग्रेस अब केवल उन्हें ही टिकट देगी जिनकी रगों में कांग्रेसी खून दौड़ता हो और जिसने कभी भी कांग्रेस से मुंह ना मोड़ा हो, ऐसा ही करेंगे और हमें इस बात का कोई गम नहीं रहेगा भले ही वह चुनाव हार जाए।

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