मुख्यमंत्री ही नहीं गृहमंत्री के तौर पर भी फेल हैं ममता बनर्जी : दिलीप घोष Featured

कोलकाता। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर करारा हमला बोला है। कोलकाता में कॉम्बैट फोर्स के पुलिसकर्मियों द्वारा अपने ही डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और हाथापाई को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया।

दरअसल ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री होने के साथ‑साथ गृहमंत्री भी हैं। इसको लेकर दिलीप ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ‑साथ गृहमंत्री के तौर पर भी विफल रही हैं। दिलीप ने बुधवार को एक वीडियो मैसेज जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल की राशन व्यवस्था, स्वास्थ्य व्य्वस्था एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह से चरमरा गयी है। राशन वितरण को लेकर जिले-जिले में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। बेलघरिया एक राशन डीलर की हत्या की गयी है। राज्य सरकार कोरोना मामले को संभालने में पूरी तरह से विफल रही हैं। दर्जनों अस्पताल बंद हो गये हैं। नर्सें राज्य छोड़कर जा रही हैं। अस्पतालों में चिकित्सा के लिए डॉक्टर नहीं हैं। विभिन्न अस्पतालों में पीपीइ के लिए नर्सों ने विरोध प्रदर्शन किया है। पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था चरमरा गयी है। उन्होंने कहा कि मंगलवार रात को पीटीएस के कम्बैट फोर्स के जवानों ने रास्ते में उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। अंतत: मुख्यमंत्री को बारिश में जाकर स्थिति को संभालनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि भाजपा बार‑बार कह रही है कि स्वास्थ्यकर्मियों एवं पुलिसकर्मियों को कोरोना से बचने के लिए सुरक्षा कवच नहीं दिये जा रहे हैं। पुलिस साधारण पोशाक में ड्यूटी करने के लिए बाध्य है। इस कारण वे बीमार हो रहे हैं। उन्हें एक ही बैरक में रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री घटनास्थल पर गयीं और ऐसी सवाल पूछ रही थी, जैसे प्रतीत होता है कि वह अन्य राज्य से आयी थीं। वह पूछ रही थी कि क्या वहां कैंटीन है? क्या उन्हें वहां से खाना मिलता है?

दिलीप घोष ने सवाल किया कि वह कैसी गृह मंत्री हैं, जिन्हें पुलिस की सुविधाओं के बारे में भी जानकारी नहीं है? उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य मंत्री व पुलिस मंत्री के रूप में पूरी तरह से फेल हैं। इससे साबित हो जाता है कि मुख्यमंत्री प्रशासनिक कामकाज संभाल पाने में पूरी तरह से असमर्थ हैं और वह केवल राजनीति कर रही हैं।

दिलीप घोष ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने विफलता स्वीकार कर पुलिसकर्मियों के साथ भेदभाव की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

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