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नई दिल्ली। लॉकडाउन के दिनों में अब घरों में रहने वाले लोग अपना समय इंटरनेट सर्फिंग में गुजार रहे हैं। जिसकी वजह अचानक से इंटरनेट पर लोगों की निर्भरता बढ़ गई है। इसे आप इस तरह भी समझ सकते है कि बंदी के वक्त अब इंटरनेट ही लोगों का सहारा बन गया है। लॉकडाउन की वजह से घरों में कैद लोग अपना ज्यादातर समय टीवी या इंटरनेट पर गुजार रहे हैं। इंटरनेट का मजा लेने वाले लोग अपना ज्यादातर समय वीडियो देखने में या फिर ऑनलाइन गेम खेलने में गुजार रहे हैं। जिसकी वजह से इंटरनेट पर खासा दबाव बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि भारत में हर माह औसतन 11 करोड़ जीबी डाटा का इस्तेमाल किया जाता है, जो दुनिया में सबसे अधिक है।
दरअसल, इंटरनेट की बैंडविथ पर असर न पड़े इस पर ध्यान देते हुए केंद्र सरकार ने वीडियो प्लेटफॉर्म की क्वालिटी को एसडी पर डिफॉल्ट करने का फैसला किया है और रामायण तथा महाभारत जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों को फिर से प्रसारण शुरू कर दिया है। लॉकडाउन के बाद ज्यादातर लोग अपने घरों में पर इंटरनेट पर समय गुजार रहे हैं। चीन के लगभग 85 करोड़ लोग इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल करते हैं, जबकि भारत में 56 करोड़ के आस-पास लोग डाटा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक डेटा का इस्तेमाल पहले दिनों की तुलना में डबल हो गया है। सीओएआई की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन में कुछ सर्किल में डाटा की मांग में 100 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है। पहले की तुलना में डाटा की मांग में 30 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक का इजाफा देखा गया है। यहां तक की एक एडवाइजरी भी जारी की जा चुकी हैं। जिसमें कहा गया है कि सुबह 9 बजे से लेकर 11 बजे तक और शाम में 4 बजे से लेकर 10 बजे तक लोग हैवी फाइल डाउनलोड न करें। साथ ही साथ वीडियो कॉल भी न करने की हिदायद दी है।

एक वीडियो भी खूब वायरल हुई थी जिसमें झुग्गियों में घोषणा करवाई जा रही है कि आनंद विहार और दिल्ली से बाहर जाने के लिए बसें चलाई जा रही हैं। हालांकि यह घोषणा किसने करवाई थी और क्यों करवाई गई थी इस पर अभी कोई स्पष्टीकरण कहीं से भी नहीं आया है।

भले ही कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन की स्थिति में केजरीवाल बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं लेकिन उन पर अब सवाल उठने लगे है। दरअसल मामला प्रवासियों को दिल्ली से बाहर भेजने का है। दिल्ली की सरकार और यहां के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लग रहे है कि उन्होंने बकायदा जान-बूझकर प्रवासियों को दिल्ली के बाहर भिजवाया। आपको बता दें कि देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद ही दिल्ली से हजारों की तादाद में प्रवासी मजदूर अपने राज्य के लिए लौटने लगे। इन मजदूरों के पलायन को रोकना केंद्र की सरकार और राज्य सरकारों के लिए मुश्किल हो गया। दिल्ली में स्थिति इतनी बिगड़ी कि लॉकडाउन के बावजूद भी सड़कों पर हजारों मजदूर पैदल चलते दिखाई दे रहे थे। यह मजदूर रिक्शा चालक, फैक्ट्री कर्मचारी आदि थे जो अपने गांव जाने के लिए निकल पड़े थे।
 
अब यह दावा किया जा रहा है कि भले ही दिल्ली सरकार और अरविंद केजरीवाल पलायन कर रहे मजदूरों को रोकने के लिए तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं पर सच यही है कि दिल्ली सरकार की ही वजह से मजदूरों का पलायन हुआ। दरअसल यह कहा जा रहा है कि लॉक डाउन की स्थिति में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के 300 बस ड्राइवरों से बात की थी और उन्हें दिल्ली से बाहर जाने का परमिशन दिया था। उन बस ड्राइवरों से कहा गया था कि पलायन कर रहे मजदूरों को उनके गांव तक आपको छोड़ कर आना है। दिल्ली बस एसोसिएशन का दावा है कि 28 मार्च को दिल्ली सरकार ने यह बैठक रात के 12 बजे से 2 बजे के बीच की थी। इस बैठक में दिल्ली सरकार ने मजदूरों को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाने के लिए 300 बसों के इंतजाम करने की बात कही थी। लगभग 2:30 बजे रात को सभी बस ड्राइवर को यह सूचित कर दिया गया था कि उन्हें बस को लेकर यूपी के अलग-अलग हिस्सों में जाना होगा।
 
सुबह 8:00 बजे तक कई बसें रवाना हो चुकी थी। यह बसें मेरठ, लखनऊ और कानपुर की तरफ जा रही थी लेकिन जैसे यह भनक दिल्ली पुलिस को लगी तो कार्रवाई की शुरुआत की गई। बसों को खाली करवाया गया। मजदूरों से ना जाने की बात कही गई और बसों को जप्त भी कर लिया गया। इससे पहले भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर दावा किया था कि केजरीवाल सरकार जगह-जगह से आनंद विहार के लिए डीटीसी बस चलवा रही है। इन्हीं बसों से लाखों की भीड़ आनंद विहार में इकट्ठा हो रही है। साफ-साफ यह तमाशा जानबूझकर किया जा रहा है और उन्होंने पूछा था केजरीवाल जी आप क्या चाहते हो? आपको बता दें कि आनंद विहार बस अड्डे के पास मजदूरों का ऐसा रेला लगा था जैसे मानो कि उन्हें यहां से भगाया जा रहा है।
 
एक वीडियो भी खूब वायरल हुई थी जिसमें झुग्गियों में घोषणा करवाई जा रही है कि आनंद विहार और दिल्ली से बाहर जाने के लिए बसें चलाई जा रही हैं। हालांकि यह घोषणा किसने करवाई थी और क्यों करवाई गई थी इस पर अभी कोई स्पष्टीकरण कहीं से भी नहीं आया है। भले ही अरविंद केजरीवाल यह दावा कर रहे हैं कि वे 6 लाख लोगों को दो वक्त का खाना दे रहे हैं, उन्हें रहने की सुविधा मुहैया करा रहे हैं लेकिन सच तो यही है कि उनकी यह कोशिश अब तक गरीब मजदूरों तक नहीं पहुंच पा रही है। वह एक तरफ जहां मजदूरों को पलायन रोकने के लिए कहते हैं तो दूसरी तरफ उनके ही राज्य से बसे चलवाई जाती है और मजदूरों को दिल्ली से बाहर निकलवाया जाता है। एक मुख्यमंत्री के नाते उन्हें इसकी जिम्मेदारी तो लेनी पड़ेगी आखिर दिल्ली से बसें चली तो चली कैसे और चली भी तो क्यों चलाई गई जबकि देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा की गई थी।

डीडी नेशनल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी पहले ही दर्शकों को दे दी थी। डीडी नेशनल ने ट्वीट किया था कि दोस्तों, आज सुबह रामायण 9 बजे शुरू न होकर थोड़ी देर से शुरू होगी। रामायण पीएम नरेंद्र मोदी के वीडियो मैसेज के खत्म होने के तुरंत बाद ही शुरू हो जाएगी।

1987 में प्रसारित हुई रामानंद सागर की रामायण लॉकडाउन के चलते फिर से दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हो रही है। सालों पहले भी रामायण दर्शकों की पहली पसंद थी और आज जब इसे दोबारा से री-टेलीकास्ट किया जा रहा है तो इस शो ने टीआरपी में रिकॉर्ड कायम किया है। रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण सुबह 9 और रात को 9 बजे दूरदर्शन पर हो रहा है।

लेकिन आज के दिन यानी शुक्रवार को फैंस को रामायण के देश के प्रधानमंत्री और लिए रामभक्त नरेंद्र मोदी की वजह से थोड़ा इंतजार करना पड़ा। दरअसल, शुक्रवार सुबह 9 बजे पीएम नरेंद्र मोदी का एक वीडियो मैसेज रिलीज किया गया, जिसके कारण रामायण का समय बदला गया।

इसे भी पढ़ें: कोरोना को लेकर सही जानकारी शेयर करना अपराध नहीं, जानें डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट का सरल भाषा में पूरा निचोड़
डीडी नेशनल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी पहले ही दर्शकों को दे दी थी। डीडी नेशनल ने ट्वीट किया था कि दोस्तों, आज सुबह रामायण 9 बजे शुरू न होकर थोड़ी देर से शुरू होगी। रामायण पीएम नरेंद्र मोदी के वीडियो मैसेज के खत्म होने के तुरंत बाद ही शुरू हो जाएगी।
बता दें कि कोरोना संकट काल में प्रधानमंत्री मोदी तीसरी बार देश की जनता से मुखातिब हुए। उन्होंने सुबह 9 बजे देशवासियों को वीडियो संदेश में कहा कि रविवार को रात नौ बजे 9 मिनट तक घर की लाइट बंद कर दीप जलाने की अपील की। पीएम ने सोशल डिस्टेंनसिंग की लक्ष्मण रेखा को कभी भी लांघना नहीं है और इसे किसी भी हालत में तोड़ना नहीं है। कोरोना की चेन तोड़ने का यही रामबाण इलाज है। जहां तक बात रामायण की करें तो इस टीवी सीरीज को 82% व्यूअरशिप मिल थी,  ये किसी भी टीवी सीरीज के लिए रिकॉर्ड है।

नईदिल्ली। खुद को हाइड्रेटेड और तरोताजा रखने के लिए रोज एक तरबूज खाना काफी फायदेमंद है। तरबूज न केवल हेल्दी होता है बल्कि इससे शरीर में पानी की कमी भी दूर होती है। तरबूज के सेवन से आपको तुरंत एनर्जी मिलती है, इसलिए गर्मियों में तरबूज जरूर खाएं। एनर्जी देने के अलावा भी तरबूज हमारे लिए कई तरह से फायदेमंद है. तरबूज में हाई लाइकोपीन होता है जो आपकी त्वचा की चमक को बनाए रखता है। अगर आप वजन कम करना चाहते हों तो तरबूज से बेहतर ऑप्शन कुछ और नहीं हो सकता है क्योंकि इसमें फाइबर और पानी की मात्रा सबसे ज्यादा होती है और कैलरी बिलकुल नहीं होती। दिल के मामले में भी तरबूज एक औषधी की तरह काम करता है। इससे आपका हार्ट कई रोगों से दूर रहता है। साथ-साथ आपकी किडनी भी हेल्दी बनी रहती है। तरबूज के सेवन से आपका बीपी भी कंट्रोल में रहता है। तरबूज में शूगर न के बराबर होती है इसलिए शूगर के मरीज भी बेफिक्र होकर तरबूज खा सकते हैं। तरबूज में विटमिन-सी और ए काफी तादाद में पाया जाता है। विटमिन-सी हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाता है, फ्लू होने से भी बचाता है और स्किन भी हेल्दी रहती है। 

नई दिल्ली। क्या आपको पता है कि कुछ चीजों को साथ में खाने से आप बीमार भी पड़ सकते हैं। तो जानते हैं कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें साथ में खाना हानिकारक हो सकता है। केला और दूध साथ खाने की खूब चलन है लेकिन आयुर्वेद में भी वजनी लोगों के लिए इसे साथ-साथ खाना मना है। ये खाने में काफी भारी होते हैं और शरीर में टॉक्सिन पैदा करते हैं। साथ ही ये सोचने और समझने की शक्ति को भी बाधित करते हैं। नाश्ते में केला और दूध साथ लेने से आप पूरा दिन सुस्त महसूस करते हैं। खाने के बाद फल सेहत के लिए खराब साबित हो सकते हैं। इससे पाचन क्रिया में काफी परेशानी होती है। फल हमारे शरीर में आसानी से पच जाते हैं। लेकिन खाने में मौजूद फैट और स्टार्च पचने में काफी समय लेता है, जिस वजह से फल में मौजूद शुगर पूरी तरह से पच नहीं पाती और सड़ने लगती है। इससे बीमारियां हो सकती हैं। अगर आप फल और योगर्ट साथ में खा रहे हैं, तो आपको कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे थकान, एलर्जी। इसे खाने से शरीर के काम करने की प्रक्रिया भी काफी धीमी हो जाती हैं। सेहतमंद और संतुलित भोजन शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि अपने आहार में कई तरह के खाद्य पदार्थों को शामिल करने से आप सेहतमंद रहते हैं।

नई दिल्ली। वनप्लस 8 प्रो स्मार्ट फोन 14 अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा। यह स्मार्टफोन पिछले कुछ समय से चर्चा में बना हुआ है। पता चला है कि इस सीरीज का  स्मार्टफोन्स में 120हर्ट्ज रिफ्रेश रेट और 5जी नेटवर्क के साथ आएगा। अभी तक ऑनलाइन सामने आई जानकारी के मुताबिक इस सीरीज का प्रो मॉडल ऑनिक्स ब्लैक, ग्लैशियल ग्रीन और अल्ट्रामरीन ब्लू कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। वहीं वनप्लस 8 इंटरस्टेलर ग्लो कलर में आएगा। इसके अलावा यह फोन ग्लैशियल ग्रीन कलर में भी उपलब्ध होगा। वनप्लस 8 प्रो में सोनी आईएमएक्स689 सेंसर के साथ 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है। फोन के रियर में 48 मेगापिक्सल का एक और कैमरा मौजूद है जो सोनी के आईएमएक्स 586 अल्ट्रा-वाइड ऐंगल सेंसर से लैस हो सकता है।
वहीं दूसरे कैमरों की बात करें तो इनमें 3एक्स ऑप्टिकल जूम के साथ 8 मेगापिक्सल का टेलिफोटो और एक 5 मेगापिक्सल का कलर फिल्टर होने की उम्मीद है। लीक्स के जरिए पता चला है कि कैमरों की एक और खास बात है कि यह 3एक्स ऑप्टिकल जूम के अलावा 30एक्स डिजिटल जूम भी दिया गया है। फोन के कैमरे नाइट पोर्ट्रेट मोड, इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेबिलाइजेशन, ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन, 3-एचडीआर और सिनेमैटिक इफेक्ट्स दिए गए हैं। यह फोन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 865 प्रोसेसर दिया जाएगा। इसके अलावा यह फोन एलपीडीडीआर5 रैम और यूएफएस3।0 स्टोरेज से लैस हो सकता है।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मृत 65 वर्षीय एक मुस्लिम व्यक्ति के परिजनों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि उपनगर मलाड में कब्रिस्तान के न्यासियों द्वारा शव दफनाने से मना करने के बाद उसे जलाना पड़ा।

मुंबई। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मृत 65 वर्षीय एक मुस्लिम व्यक्ति के परिजनों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि उपनगर मलाड में कब्रिस्तान के न्यासियों द्वारा शव दफनाने से मना करने के बाद उसे जलाना पड़ा।

यह घटना बुधवार की है। मृतक मालवाणी के कलेक्टर परिसर में रहता था और जोगेश्वरी स्थित बीएमसी के अस्पताल में बुधवार तड़के उसकी मौत हुई थी।

मृतक के परिवार के सदस्य ने आरोप लगाया कि शव को मलाड के मालवाणी कब्रिस्तान ले जाया गया लेकिन न्यासियों ने यह कह कर शव को दफनाने से इनकार कर दिया कि मृतक कोरोना वायरस से संक्रमित था। उन्होंने कहा, ‘‘यह तब किया गया जब महानगर पालिका ने सुबह चार बजे शव को दफनाने की अनुमति दी थी।’’ परिवार के सदस्य ने बताया कि स्थानीय पुलिस और एक स्थानीय नेता ने हस्तक्षेप की कोशिश की और न्यासियों से शव दफनाने की अनुमति देने का आग्रह किया लेकिन वे नहीं माने।

उन्होंने बताया कि इसके बाद कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया और नजदीक स्थित हिंदू शमशान भूमि में शव को जलाने का अनुरोध किया। परिवार की सहमति से अंतत: सुबह दस बजे शव को जलाया गया। महाराष्ट्र के मंत्री और मालवानी से विधायक असलम शेख ने पीटीआई को बताया, ‘‘सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमित मुस्लिम मृतक के शव को उस स्थान के नजदीक स्थित कब्रिस्तान में दफनाया जाना चाहिए, जहां पीड़ित का निधन हुआ हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इस मामले में परिवार के लोग मृतक का शव कब्रिस्तान के न्यासियों सहित किसी को बताए बिना सीधे मलाड मालवाणी कब्रिस्तान ले गए और उसे दफनाने की मांग करने लगे।’’ शेख ने कहा, ‘‘महानगर पालिका कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए जिन्होंने शव को दिशानिर्देश के बावजूद ले जाने दिया।’’

उन्होंने कहा कि इससे एक दिन पहले ही एक और कोरोना वायरस संक्रमित मृतक को उस कब्रिस्तान में दफनाया गया था। मृतक के बेटे ने कहा, ‘‘ अस्पताल में पिता की मौत होने के बाद कोई मदद को आगे नहीं आया। मैं अस्पताल के बाहर तीन घंटे तक शव के करीब बैठा रहा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हम शव को मलाड मालवाणी कब्रिस्तान में दफनाना चाहते थे लेकिन कब्रिस्तान के न्यासियों ने, मृतक के कोरोना वायरस संक्रमित होने की वजह से शव दफनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। बाद में पुलिस और अन्य अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद शव को हिंदू शमशन भूमि में जलाया गया।

नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।

पिछले कुछ दिनों से एक मैसेज या कहे सर्कुलर खूब वायरल हो रहा है। जिसमें कहा गया है कि आज की आधी रात के बाद से देशभर में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू हो रहा है, इसके बाद कोरोना वायरस को लेकर किसी भी तरह की जानकारी शेयर करना अपराध होगा।

दुनियाभर में कोरोना वायरस ट्रेंडिंग टॉपिक है। यहां तक कि इन दिनों गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला शब्द भी कोरोना वायरस ही है। ऐसे में तुर्कमेनिस्तान ने कथिततौर पर ‘कोरोना वायरस’ शब्द पर बैन लगा दिया है। सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों में भी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। बताते हैं कि ‘कोरोना वायरस’ शब्द की जगह ‘बीमारी’ या ‘सांस की बीमारी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आप कह रहे होंगे विदेशी बात है हमे इससे क्या। लाकडाउन चल रहा है और ऐसे में घर से बाहर निकल नहीं सकते तो टीवी पर रामायण देख लेते है या थोड़ा मोबाइल चला लेते हैं, सोशल मीडिया को स्काल कर लेते हैं।  तो ये खबर, वायरल खबर आपने भी जरूरी सुनी या पढ़ी होगी।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से एक मैसेज या कहे सर्कुलर खूब वायरल हो रहा है। जिसमें कहा गया है कि आज की आधी रात के बाद से देशभर में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू हो रहा है, इसके बाद कोरोना वायरस को लेकर किसी भी तरह की जानकारी शेयर करना अपराध होगा। इसके अलावा फेसबुक पर इस मैसेज के साथ में एक पुलिस अधिकारी का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अधिकारी कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि, 'कोई किसी भी तरह का आपत्तिजनक पोस्ट करता है तो उसके ग्रुप एडमिन को आवश्यक रूप से आरोपी बनाया जाएगा। ग्रुप एडमिन यह सुनिश्चित कर लें कि कम से कम उनके जो मेंबर हैं, उन पर उनका नियंत्रण होना चाहिए। वरना ऐसे मेम्बर्स को तुरंत बाहर कर दें।

अब आपको इसकी हकीकत से रूबरू करवाते हैं। ये तमाम दावे पूरी तरह से निराधार है, अर्धसत्य हैं और तथ्यात्मक रूप से गलत भी हैं। दरअसल, कोरोना नहीं, बल्कि किसी भी तरह की भ्रामक गौर किजिएगा भ्रामक या गलत जानकारी वायरल कर यदि भय का माहौल बनाया जाता है या आपसी सौहार्द बिगाड़ा जाता है तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है। इसका ये कतई मतलब नहीं है कि आप कोई भी खबर या कोरोना से जुड़ी तथ्यात्मक रूप से सही चीजें पोस्ट करें और पुलिस तुरंत आएगी और आपको अपने साथ ले जाएगी। पत्र सूचना कार्यालय यानी पीआईबी ने भी स्पष्ट किया है कि कोरोना वायरस से संबंधित किसी भी पोस्ट को शेयर करना दंडनीय अपराध नहीं है। कोरोना वायरस पर आधिकारिक और सटीक जानकारी को ही साझा करके आप अपनी और अपने परिजनों की सुरक्षा कर सकते हैं।

अब आपको थोड़ा उस एक्ट के बारे में भी बताते हैं जिसके नाम पर अफवाहें फैलाने और लोगों को डराने का काम किया जा रहा है। आखिर क्या है डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट? इसके अंतर्गत क्या-क्या नियम हैं और क्या-क्या सजाओं का प्रवाधान इसके उल्लंघन पर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (24 मार्च) रात 12 बजे से अगले 21 दिनों के लिए तीन सप्ताह के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी जिसके बाद ही गृह मंत्रालय (एमएचए) ने उसी दिन से आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 को लागू किया।

आपदा प्रबंधन अधिनियम राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लिए सहायता प्रदान करता है और इस अधिनियम की धारा-6 प्राधिकरण की शक्तियों से संबंधित है- जिसके अंतर्गत प्राधिकरण ने राज्य सरकारों औऱ केंद्र सरकारों को ये निर्देश जारी किए हैं। इसके अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 51 से 60 तो पूरे देश में लागू किया जाता है।

क्या है इसका मकसद
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का मकसद आपदाओं का प्रबंधन करना है, जिसमें रणनीति, क्षमता निर्माण, शमन और अन्य चीजें शामिल हैं। आमतौर पर एक आपदा जैसी कि चक्रवात या भूकंप से समझा जा सकता है। इस अधिनियम की धारा 2 (डी) में आपदा की परिभाषा में कहा गया है कि आपदा का अर्थ है किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानव कारणों से या उपेक्षा से उत्पन्न कोई महा विपत्ति या महा बिमारी।

वर्तमान में महामारी के प्रकोप को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने कोविड-19 को गंभीर चिकिकत्सा स्थिति या महामारी की स्थिति के रूप में अधिसूचित आपदा के रूप में शामिल किया है।
अब आते हैं असल मुद्दे पर यानी कि इस अधनियम के प्रावधानों की बात करते हैं जिन्हें मौजूदा समय में देश भर में लागू किया गया है।
धारा 51
यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी कर्मचारी को उनके कर्तव्यों को पूरा करने से रोकता या बाधा डालता है, या केंद्र/राज्य सरकारों या एनडीएमए द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करने से इनकार करता है तो वह व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दंडित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इस धारा के अंतर्गत, दिशानिर्देशों का कोई भी उल्लंघन, जिसमें पूजा स्थल पर जाना, सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन करना आदि शामिल हैं, सभी को इस धारा के तहत अपराध माना जाएगा।

धारा 52
धारा के अंतर्गत, वह मामले आयेंगे जहाँ यह आरोप लगाया जाए कि अभियुक्त ने कुछ ऐसा लाभ (राहत, सहायता, मरम्मत, निर्माण या अन्य फायदे) का दावा किया जो कि मिथ्या या केवल भ्रम फैलाने वाला हो पर इस धारा के तहत कार्यवाई की जा सकती है।
धारा 53 राहत कार्यों के पैसों का दुरूपयोग और धारा 54 मिथ्या चेतावनी या घबराहट फैलानी कोशिश जैसे कृत्यों पर दंड को परिभाषित करता है।

धारा 55, सरकार के विभागों द्वारा अपराध से सम्बंधित है। हमें कुछ अधिकार दिए गए हैं तो हरेक अधिकार अपने साथ कुछ जिम्मेदारियां भी लेकर आता है। धारा 56 इसको ही परिभाषित करती है। यदि एक सरकारी अधिकारी, जिसे लॉकडाउन से संबंधित कुछ कर्तव्यों को करने का निर्देश दिया गया है, और वह उन्हें करने से मना कर देता है, या बिना अनुमति के अपने कर्तव्यों को पूरा करने से पीछे हट जाता है तो वह इस धारा के अंतर्गत दोषी ठहराया जा सकता है।
धारा 57 अध्यपेक्षा के आदेश पर उल्लंघन और अधिनियम की धारा 58, कंपनियों द्वारा अपराध से सम्बंधित है। इसके अलावा धारा 59 अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी (धारा 55 और धारा 56 के मामलों में) से सम्बंधित है, वहीं धारा 60 न्यायालयों द्वारा अपराधों के संज्ञान से संबंधित है।

अमेरिका में इस विषाणु के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में कोरोना वायरस के अब तक लगभग 1,90,000 मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमण के मामलों की संख्या महज पांच दिन के भीतर ही दुगुनी हो गई है।

पेरिस। कोरोना वायरस की महामारी बुधवार तक के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार अकेले यूरोप में ही 30 हजार से अधिक लोगों की जान ले चुकी है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इसे दूसरे विश्वयुद्ध के बाद मानवता के समक्ष सबसे भीषण संकट करार दिया है। इटली और स्पेन में कोरोना वायरस ने कहर मचा रखा है और पूरे महाद्वीप में प्रत्येक चार मौतों में से तीन मौत इन देशों में हो रही हैं। स्थिति यह है कि पृथ्वी की लगभग आधी आबादी इस समय लॉकडाउन की जद में है, ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में पिछले 24 घंटों की अवधि के सर्वाधिक खतरनाक रहने के बीच आगाह किया कि समूचे अटलांटिक के लिए दो सप्ताह बहुत दर्दनाक हो सकते हैं। उन्होंने इस स्थिति को ‘‘प्लेग’’ करार दिया। अमेरिका में इस विषाणु के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में कोरोना वायरस के अब तक लगभग 1,90,000 मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमण के मामलों की संख्या महज पांच दिन के भीतर ही दुगुनी हो गई है।
चीन में दिसंबर में महामारी के उभरने के बाद से समूचे विश्व में अब तक लगभग 41 हजार लोगों की मौत हो चुकी है और 8,30,000 से अधिक मामले सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस का मानना है कि वायरस की वजह से असाधारण आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति पैदा हो रही है तथा विश्व भीषण खतरे का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘...हमारा मानना है कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद हम सबसे बड़े चुनौतीपूर्ण संकट का सामना कर रहे हैं।’’ कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर में लॉकडाउन के चलते कंपनियां बंद हो गई हैं और श्रमशक्ति को घरों में बैठना पड़ रहा है। इसके चलते विश्व में आर्थिक अनिश्चितता और अशांति के दृश्य सामने आ रहे हैं। इटली में नि:शुल्क भोजन वितरण केंद्रों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, जबकि कुछ सुपर बाजारों में लूटपाट की खबरें हैं। विकासशील देशों में लॉकडाउन का आर्थिक दर्द काफी ज्यादा है। इसके चलते दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है और लाखों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। लॉकडाउन के चलते संकट अभी और गहरा सकता है। वहीं, अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 का केंद्र रहे वुहान को बंद करने के चीन के फैसले से हजारों नए मामलों को रोकने में मदद मिली।
 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर डिये ने कहा, ‘‘हमारा आकलन कहता है कि वुहान में यात्रा प्रतिबंध और राष्ट्रीय आपदा मोचन जैसे कदम न उठाए गए होते तो फरवरी के मध्य तक ही वुहान के बाहर सात लाख से अधिक मामले हो जाते।’’ इसके साथ ही ध्यान अब लक्षणमुक्त मामलों से वायरस के प्रसार की ओर केंद्रित हो रहा है। चीन ने बुधवार को कहा कि उसके यहां कोरोना वायरस के 1,300 से अधिक लक्षणमुक्त मामले हैं। चीन ने इस चिंता के बाद पहली बार इस तरह का आंकड़ा जारी किया है कि जांच में संक्रमित, लेकिन लक्षणमुक्त लोगों से वायरस का प्रसार हो सकता है। जर्मनी और फ्रांस अपने लोगों की जांच में तेजी ला रहे हैं। न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में तंबुओं के लगभग एक दर्जन फील्ड अस्पताल खड़े किए गए हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें अब भी विकल्प चुनने पड़ रहे हैं। बेथ इजराइल अस्पताल के शमित पटेल ने कहा, ‘‘यदि रोगियों की संख्या अधिक हो और आपके पास वेंटिलेटरों की संख्या सीमित हो, तो आप आवश्यक रूप से सभी रोगियों को वेंटिलेटर पर नहीं रख सकते। तब आपको चुनना पड़ता है कि वेंटिलेटर पर रखने के लिए किसे प्राथमिकता देनी है।

कक्षा नौवीं और 11 वीं में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं को अब तक हुए प्रोजेक्ट, समय-समय पर होने वाली परीक्षाएं, आदि के मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा/दर्जे में प्रोन्नत किया जाएगा।

नयी दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को देश में कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हालात के कारण कक्षा एक से आठवीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का निर्देश दिया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ‘‘कोरोना वायरस के कारण मौजूदा हालात के मद्देनजर मैंने सीबीएसई को कक्षा एक से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने की सलाह दी है।’’
उन्होंने कहा कि कक्षा नौवीं और 11 वीं के छात्र-छात्राओं को स्कूलों में अब तक हुए मूल्यांकन के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। इस बार प्रोन्नत नहीं हुए छात्र स्कूल स्तर पर ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षाओं में शामिल हो सकते हैं। निशंक ने ट्वीट किया, ‘‘कक्षा नौवीं और 11 वीं में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं को अब तक हुए प्रोजेक्ट, समय-समय पर होने वाली परीक्षाएं, आदि के मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा/दर्जे में प्रोन्नत किया जाएगा। इस बार प्रोन्नत नहीं होने वाले छात्र स्कूल स्तर पर ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षाओं में बैठ सकते हैं।

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