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कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) मोहित अग्रवाल ने बताया कि विकास दुबे और उसके सहयोगियों को पकड़ने के लिये पुलिस की 25 टीमें लगायी गयी हैं जो प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा कुछ दूसरे प्रदेशों में भी छापेमारी कर रही हैं।

लखनऊ। कानपुर के चौबेपुर में बृहस्पतिवार देर रात दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले कुख्यात अपराधी विकास को पकड़ने के लिये पुलिस की 25 से अधिक टीम उत्तर प्रदेश और अन्य प्रदेशों में लगातार छापेमारी कर रही हैं लेकिन घटना के करीब 36 घंटे बाद भी वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक कुछ पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह जाना जा सके कि दुबे को उसके घर पर पुलिस की छापेमारी के बारे में पहले से खबर कैसे लगी जिससे उसने पूरी तैयारी के साथ पुलिस दल पर हमला किया।

कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) मोहित अग्रवाल ने बताया कि विकास दुबे और उसके सहयोगियों को पकड़ने के लिये पुलिस की 25 टीमें लगायी गयी हैं जो प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा कुछ दूसरे प्रदेशों में भी छापेमारी कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह नहीं बताया जा सकता कि पुलिस की टीमें किन-किन जनपदों में और किन प्रदेशों में तलाशी अभियान चला रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सर्विलांस टीम लगभग 500 मोबाइल फोन की छानबीन कर रही है और उससे विकास दुबे के बारे में सुराग लगाने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा उप्र एसटीएफ की टीमें भी अपने काम में लगी हैं।

 आईजी ने विकास दुबे के बारे में सही जानकारी देने वाले को पचास हजार रुपये का इनाम भी देने की घोषणा की है और जानकारी देने वाले की पहचान गुप्त रखने की बात कही है। पुलिस के अनुसार मुठभेड. में घायल सात पुलिसकर्मियों का कानपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। जहां सभी की हालत स्थिर बतायी जा रही है। लखनऊ पुलिस ने शुक्रवार शाम को विकास दुबे के कृष्णानगर स्थित मकान पर भी छापा मारा था लेकिन वहां दुबे नही मिला। गौरतलब है कि बृहस्पतिवार देर रात कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के गांव बिकरू निवासी कुख्यात अपराधी विकास दुबे को उसके गांव पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया था जिसमें एक क्षेत्राधिकारी, एक थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए। मुठभेड़ में पांच पुलिसकर्मी, एक होमगार्ड और एक आम नागरिक घायल है।

पहली मुठभेड़ में अपराधी पुलिसकर्मियों के हथियार भी छीन ले गये, जिनमें एके-47 रायफल, एक इंसास रायफल, एक ग्लाक पिस्टल तथा दो नाइन एमएम पिस्टल शामिल हैं। इस मुठभेड़ के कुछ घंटे बाद हुई दूसरी पुलिस मुठभेड़ में पुलिस ने दो अपराधियों को मार गिराया था और उनके पास से लूटी गयी एक पिस्टल भी बरामद की थी। घटना के बाद शुक्रवार शाम कानपुर पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौबेपुर थानाक्षेत्र में अपराधियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और घटना के लिए जिम्मेदार किसी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। योगी ने शहीदों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी एलान किया था।

सर्वे के जरिए पता चला है कि देश का सबसे युवा राज्य बिहार है। यहां पर 25 साल से कम उम्र की आबादी 57.2 फीसदी है। वहीं 52.7 फीसदी आबादी के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर जबकि 51.9 फीसदी आबादी के साथ झारखंड तीसरे स्थान पर है।

नयी दिल्ली। हिन्दुस्तान एक युवा देश है। ऐसा एक सर्वे के जरिए पता चला है। सर्वे के मुताबिक भारत की आधी से अधिक आबादी या तो 25 साल की है या फिर उससे अधिक उम्र की है। वहीं, बची हुई 46.9 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की है। भारत के महा पंजीयक एवं जनगणना आयुक्त की तरफ से तैयार नमूना पंजीकरण तंत्र 2018 में कहा गया है कि देश में 25 साल से कम्र उम्र की आबादी में पुरुषों की संख्या 47.4 फीसदी है जबकि महिलाओं की संख्या 46.3 फीसदी है।

सबसे युवा राज्य बिहार

सर्वे के जरिए पता चला है कि देश का सबसे युवा राज्य बिहार है। यहां पर 25 साल से कम उम्र की आबादी 57.2 फीसदी है। वहीं 52.7 फीसदी आबादी के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर जबकि 51.9 फीसदी आबादी के साथ झारखंड तीसरे स्थान पर है।
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इन राज्यों के अलावा भी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पर 50 फीसदी से ज्यादा 25 साल से कम उम्र की आबादी अपना जीवन व्यतीत कर रही है। ऐसे राज्यों में उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं।

केरल में सबसे कम युवा

केरल देश का ऐसा राज्य है जहां पर 25 साल के कम उम्र के लोगों की संख्या सबसे कम है। इतना ही नहीं ग्रामीण इलाकों की तुलना में यहां पर 25 साल से कम उम्र के लोगों की संख्या भी कम है।

25 साल से कम आबादी वाले राज्यों की बात करें तो केरल में 37.4 प्रतिशत, तमिलनाडु में 37.8 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 38.8 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में 39.8 प्रतिशत हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया कि अपने मुल्क में जैसे-जैसे प्रजनन की दर गिरती जा रही है ठीक उसी प्रकार युवा आबादी का अनुपात भी गिरता जा रहा है। हालांकि देश में 50 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या 25 साल से ऊपर से की है जिसका मतलब है कि भारत का भविष्य युवाओं के कंधों पर टिका हुआ है।

सर्वे में एक बात और सामने आई कि ग्रामीण पुरुषों में भी 25 साल से कम उम्र के लोगों के अनुपात में गिरावट देखी गई है। साल 2017 में 50.2 फीसदी से घटकर 49.9 फीसदी हो गई।

मृत्युदर के मामले छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर

दिल्ली में जहां मृत्युदर सबसे कम है तो वहीं छत्तीसगढ़ को सूची में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में मृत्युदर सबसे ज्यादा 8 फीसदी है और दिल्ली में 3.3 फीसदी है। अगर हम साल 1971 की बात करें तो देश में मृत्यु दर 14.9 फीसदी के आसपास थी जो 2018 में घटकर 6.2 फीसदी हो गई है।

रायपुर, 03 जुलाई 2020 इंसान की काबिलियत उसकी मेहनत पर निर्भर करती है और यदि कम मेहनत और कम संसाधन में ज्यादा फायदा मिले तो उसे एक अलग ही पहचान मिलती है। ऐसी ही पहचान टिपनी की जय महामाया महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने गोबर से गमले का निर्माण कर बनायी है। अभी तक गोबर का उपयोग खाद के रूप में होता था।

    मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता से अब गोबर का उपयोग व्यवसायिक रूप में होने जा रहा है। अब गोबर से कंडे ही नही बल्कि दीये, गमले एवं अन्य वस्तुएं भी बनने लगे हैं। राज्य सरकार द्वारा गांव की समृद्धि और किसानों की खुशहाली के लिए गोबर खरीदने की कार्य योजना तैयार की जा रही है। गोबर के गमले से बेमेतरा जिले के ग्राम पंचायत टिपनी की जय महामाया महिला स्व सहायता समूह ने कमाई शुरू भी कर दिया है। महिलाओं ने अभी तक 1200 गमले बेचकर 18 हजार रूपए की कमाई कर चुकी हैं। एक गमला बनाने में 7 रूपए की लागत आती है और वह बिकता 15 रूपए में है। इस तरह से 9600 रूपए की शुद्ध कमाई। महिलाओं ने अभी तक 1500 गमलों का निर्माण कर चुकी हैं।
    गोबर गमला निर्माण में कच्चा माल के रूप में गोबर, पीली मिट्टी, चूना, भूसा इत्यादि का उपयोग किया जाता है। जिला प्रशासन द्वारा जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविकास मिशन (बिहान) के तहत प्रेरित किया जा रहा है। गोबर से गमला बनाने का मुख्य लाभ यह है कि यह टिकाऊ होने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल है तथा प्लास्टिक-पॉलीथिन के गमले के स्थान पर इनका उपयोग किया जाता है। अगर गमला क्षतिग्रस्त हो गया तो इसका खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। गोबर के गमले का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग वृक्षारोपण या पौधे की नर्सरी तैयार करने में हैं जिसमें गोबर के गमले में लगें पौधंे को सीधा भूमि पर रोपित कर सकते है।
    गोबर खाद के रूप में अधिकांश खनिजों के कारण मिट्टी को उपजाऊ बनाता है। पौधें की मुख्य आवश्यकता नाईट्रोजन, फॉसफोरस तथा पोटेशियम की होती है। ये खनिज गोबर में क्रमशः 0.3-0.4, 0.1-0.15 तथा 0.15-0.2 प्रतिशत तक विद्यमान रहते है। मिट्टी के सम्पर्क में आने से गोबर के विभिन्न तत्व मिट्टी के कणों को आपस में बांधते है। यह पौधों की जड़ो को मिट्टी में अत्यधिक फैलाता हैं एवं मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाती है। इस तरह समूह की महिलाओं ने गोबर से गमला बनाकर आजीविका के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

रायपुर 1 जुलाई 2020 धान की कतार बोनी विधि में कम लागत आती है साथ ही कम वर्षा में भी उपज पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। इस विधि से खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है और उन्हें कतार बोनी विधि से खेती करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

      कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर द्वारा कम समय में फसल उगाई, कम लागत और कम मजदूर के माध्यम से भी उन्नत कृषि हो इसका प्रशिक्षण किसानों को दिया जा रहा है। किसानों को बीज उर्वरक बुवाई यंत्र द्वारा धान की कतार बोनी विधि के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस विधि में कम वर्षा की स्थिति में भी उपज में विशेष प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि प्रारंभ में ही वर्षा जल का सीधे लाभ मिल जाता है। जिससे किसान वर्षा जल पर पूर्णतः निर्भर न रहते हुए भी अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं।
      कांकेर जिले में उपलब्ध कुल धान के रकबे में लगभग 65 प्रतिशत क्षेत्र में किसान छिटकवां विधि से धान की बुवाई करते है और बुवाई के एक माह बाद बियासी करके धान की निंदाई एवं गुड़ाई करते हैं। इस प्रक्रिया में सही समय पर यदि बारिश नहीं होती तो किसान बियासी प्रक्रिया में पिछड़ जाते है। इन परिस्थितियों की वजह से कई किसान खेतों में घास की अधिकता के कारण आधार खाद का उपयोग भी नहीं कर पाते, जिसकी वजह से धान की उपज में काफी कमी आ जाती है। वैज्ञानिको ने बताया कि बीज उर्वरक बुवाई यंत्र द्वारा बुवाई के तुरंत पश्चात नींदानाशक का उपयोग कर खरपतवारों को रोका जा सकता है। इस विधि द्वारा उत्पन्न धान की उपज रोपाई वाले धान के बराबर आती है। कतार बोनी में निंदाई, रोपाई की जरूरत नहीं पड़ती है। छिटकवा विधि की तुलना में फसल 10-15 दिन जल्दी पकती है। जिससे मिट्टी में उपलब्ध नमी का उपयोग कर किसान दूसरी फसल भी ले सकते हैं।

वाशिंगटन। बीते दस साल में सूर्य में काफी बदलाव हुआ है। नासा ने इसको लेकर करीब एक दशक से अध्ययन किया है। इस दौरान करीब सूरज की 42.5 करोड़ तस्वीरें ली गईं। साथ ही दो करोड़ जीगाबाइट के करीब डाटा भी इकट्ठा किया गया। इन तमाम जानकारियों पर नासा ने रिसर्च किया, जिससे यह बात सामने निकल कर आई है कि बीते दस साल में सूरज काफी बदल गया है।
नासा के Solar Dynamics Observatory ने बीते दस वर्षों में हर 0.75 सेकेंट पर सूर्य की तस्वीर ली है। Atmospheric Imaging Assembly (AIA) ने दस विभिन्न प्रकाश की तरंग दैर्ध्य पर प्रत्येक 12 सेकेंड में एक तस्वीर ली है। हर घंटे एक तस्वीर को संकलित करते हुए, 61 मिनट का वीडियो तैयार किया गया है।
नासा ने कहा कि सूरज बहुत बदल गया है। यह भी दर्शाने की कोशिश की गई है कि यह सौर मंडल को कैसे प्रभावित करता है। नासा के अनुसार, सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र हर 10 साल बाद पूरी तरह से बदल जाता है।
सूर्य के 11 साल के सौर चक्र के हिस्से के रूप में होने वाली गतिविधियों में वृद्धि और गिरावट को दर्शाता है, जो ग्रहों और विस्फोटों को पार करने जैसे उल्लेखनीय घटनाओं को दर्शाता है। "सोलर ऑब्जर्वर" शीर्षक वाला कस्टम संगीत संगीतकार लार्स लियोनहार्ड ने बनाया था।
एसडीओ ने सूर्य पर लगातार नजर बनाए रखा, कम ही ऐसे पल आए होंगे जहां चूक हुई हो। वीडियो में काले फ्रेम पृथ्वी या चंद्रमा के ग्रहण एसडीओ के कारण होते हैं क्योंकि वे अंतरिक्ष यान और सूर्य के बीच से गुजरते हैं। 2016 में लंबे समय तक ब्लैकआउट एआईए उपकरण के साथ एक अस्थायी मुद्दे के कारण हुआ था जिसे एक सप्ताह के बाद सफलतापूर्वक हल किया गया था। जब एसडीओ अपने उपकरणों को कैलिब्रेट कर रहे थे, तब सूर्य जहां ऑफ-सेंटर हैं, वहां की छवियां देखी गईं।
 

डीएचएलआई के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में कुछ नर्सों ने तो अस्पताल को कोविड-19 इकाई बनाने से पहले ही नौकरी छोड़ दी थी जबकि 15 प्रतिशत नेअस्पताल को कोविड-19 देखभाल इकाई बनाये जाने के बाद नौकरी छोड़ दी।

नयी दिल्ली। ऐसे में जब राजधानी दिल्ली में निजी अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों के लिए बेड की संख्या बढ़ायी जा रही है, कोरोना वायरस मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सकों, नर्सों और अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की कमी की शिकायतें आ रही हैं। निजी अस्पतालों का कहना है कि यह कमी इसलिए है क्योंकि कोरोना वायरस संबंधी जटिलताओं के इलाज के लिए विशेषज्ञों का अभाव है और इसलिए भी क्योंकि बड़ी संख्या में स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों को पृथकवास में जाना पड़ा है। कई मेडिकल पेशेवरों ने संक्रमण के भय से या परिवार के दबाव के चलते नौकरियां छोड़ दीं जबकि अन्य ने अधिक पैसे और बीमा की मांग की है। हतोत्साहित कर्मचारी, सरकारी सहयोग नहीं मिलने, स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण, परिवारों की अपने परिजन को कोविड-19 वार्ड में काम करने देने को लेकर अनिच्छा, मरीजों द्वारा सरकारी अस्पतालोंकी तुलना में निजी अस्पतालों को अधिक तरजीह देना ऐसे कुछ कारणों में शामिल हैं जिससे राष्ट्रीय राजधानी में निजी अस्पताल कर्मचारियों की कमीका सामना कर रहे हैं।
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कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि और सरकार द्वारा बैंक्वेट हॉल और होटलों को कोविड-19 इकाइयों में परिवर्तित करना और उन्हें अस्पतालों से सम्बद्ध करने के बीच इन अस्पतालों के प्रबंधन आंतरिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। दिल्ली हर्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट (डीएचएलआई) के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में कुछ नर्सों ने तो अस्पताल को कोविड-19 इकाई बनाने से पहले ही नौकरी छोड़ दी थी जबकि 15 प्रतिशत नेअस्पताल को कोविड-19 देखभाल इकाई बनाये जाने के बाद नौकरी छोड़ दी। इन नर्सों ने इसके लिए जो कारण बताये उनमें अभिभावकों का दबाव, निजी भय शामिल था।

इसी तरह से रोहिणी में सरोज सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि 40 से 50 प्रतिशत नर्सो ने अवागमन के साधनों की कमी और परिवार द्वारा उन्हें कोविड-19 ड्यूटी करने की इजाजत देने से इनकार जैसे कारण बताकर नौकरी छोड़ दी। डीएचएलआई के अध्यक्ष डा. के के सेठी ने कहा, ‘‘चिकित्सकों की कमी है। हमारे अस्पताल में एक हृदय चिकित्सा रोग इकाई है और हमारे चिकित्सक ऐसे मामलों के लिए प्रशिक्षित हैं। लेकिन इस तरह की बीमारी के लिए आपको कई तरह के विशेषज्ञों की जरुरत होती है जैसे इंटरनल मेडिसिन, रेस्पीरेटरी मेडिसिन विशेषज्ञ आदि। वे उपलब्ध नहीं हैं।’’
 उन्होंने कहा, ‘‘रेजीडेंट चिकित्सक जो आपात इकाइयों को संभालते हैं वे काम करने से इनकार कर रहे हैं। कोई भी अस्पताल में नौकरी शुरू करने के लिए तैयार नहीं होता जब आप उन्हें यह कहते हैं उन्हें कोविड-19 वार्ड में काम करना होगा। जो काम करने के लिए तैयार भी हैं वे लगभग तीन से चार गुना अधिक वेतन मांग रहे हैं।’’ दिल्ली सरकार राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों से निपटने के लिए बेड की क्षमता बढ़ा रही है, कोविड-19 के कुल मामले दिल्ली में अगले महीने के अंत तक बढ़कर 5.5 लाख होने की आशंका है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा मानवीय कारकों को ध्यान में रखे बिना किया जा रहा है।

इसरो प्रमुख ने कहा, ‘‘लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से सभी चीजें बाधित हो गईं। कोविड-19 संकटसे निपटने के बाद हमें एक आकलन करना होगा।’’ सिवन ने कहा, ‘‘ लॉकडाउन की वजह से गंगनयान प्रभावित होगा…सभी उद्योगों ने काम करना अभी शुरू नहीं किया है।’’

नयी दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख के सिवन ने बुधवार को कहा कि लॉकडाउन की वजह से अंतरिक्ष में मानव को भेजने और चंद्रयान-3 अभियान में देर होने के अलावा ऐसे 10 अंतरिक्ष अभियान ‘बाधित’ हुए हैं, जिनके इस साल होने की योजना थी। उन्होंने कहा कि इसरो अपने अंतरिक्ष अभियानों पर लॉकडाउन के प्रभाव का आकलन करेगा। इसरो प्रमुख ने बताया कि अंतरिक्ष एजेंसी ने इस साल 10 प्रक्षेपण की योजना बनाई थी। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से सभी चीजें बाधित हो गईं। कोविड-19 संकटसे निपटने के बाद हमें एक आकलन करना होगा।’’ सिवन ने कहा, ‘‘ लॉकडाउन की वजह से गंगनयान प्रभावित होगा…सभी उद्योगों ने काम करना अभी शुरू नहीं किया है।’’

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीने में अभियान का कार्य प्रभावित हो गया। इसरो प्रक्षेपण से जुड़े उपकरणों के उत्पादन के लिए निजी क्षेत्र पर निर्भर है। इसरो को उपकरण उपलब्ध कराने वालों में शामिल सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमईएस) भी लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए है। उन्होंने बताया, ‘ ‘ चंद्रयान-तीन समेत सभी अभियान प्रभावित हुए हैं।’’ सिवन ने कहा, ‘‘ हमें गगनयान पर लॉकडाउन के प्रभावों का आकलन करना होगा।’’ पिछले साल चंद्रयान-2 के चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग होने के बाद इसरो ने चंद्रयान-3 प्रक्षेपित करने की योजना बनाई थी, जिसे इसी साल चांद पर भेजा जाना था। गगनयान मिशन के तहत 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजा जाना है। इसके लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन भी हो चुका है और वे रूस में प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं लेकिन यह भी लॉकडाउन की वजह से प्रभावित हुआ है।

मेरठ जम्मू-कश्मीर में सेना लगातार आतंकियों के खिलाफ अभियान चला रही है। इस साल अब तक 100 से ज्यादा आतंकी ढेर किए जा चुके हैं। जम्मू-कश्मीर के अलावा अब आतंकी अन्य राज्यों को अपना निशाना बनाने में जुटे हैं। खुफिया सूत्रों से पता चला है कि दिल्ली में आतंकी हमला हो सकता है। आंतकियों के वेस्ट यूपी में छिपे होने की सूचना मिली है। ऐसे में पुलिस ने देर रात वेस्ट यूपी के जिलों में चेकिंग अभियान चलाया। यूपी दिल्ली बॉर्डर पर सख्त चेकिंग चल रही है।
बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियों ने कश्मीर के आंतकियों का दिल्ली में आने की आशंका जताई है। इस पर वेस्ट यूपी में अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली में अलर्ट जारी किया गया है। यूपी बॉर्डर समेत कई जिलों में पूरी रात चेकिंग अभियान चलाया गया।

वेस्ट यूपी के जरिए दिल्ली को बना सकते हैं निशाना
सूत्रों की मानें तो जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिज्बुल मुजाहिद्दीन और इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे आतंकवादी संगठनों ने पश्चिम उत्तर प्रदेश में पैठ जमाई है। दिल्ली में हमले के लिए आंतकी संगठन इन जिलों में छिपे उनके स्लीपर सेलों का प्रयोग कर सकते हैं।

स्लीपर सेलों की ले सकते हैं मदद
कहा जा रहा है कि ट्रक में बैठकर कश्मीर से दिल्ली में जाने की फिराक में आतंकी वेस्ट यूपी में शरण ले सकते हैं। मेरठ में देश की दूसरी सबसे बड़ी छावनी है। इसके अलावा बागपत, सहारमपुर, हापुड़, गाजियाबाद दिल्ली से सटे होने के कारण वे यहां मौजूद उनके स्लीपर सेलों की मदद ले सकते हैं।

हो रही सख्त चेकिंग
आईजी प्रवीर कुमार ने कहा कि यूपी के दिल्ली बॉर्डर पर सख्त चेकिंग चल रही है। रात में गश्त भी बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि जिले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। ट्रक ही नहीं किसी भी वाहन को बिना चेकिंग के आगे नहीं जाने दिया जा रहा है।

मुंबई. लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) में 20 सैनिकों की शहादत के बाद चीन (China) के खिलाफ देशभर के लोगों में जबरदस्त गुस्सा दिख रहा है. जगह-जगह लोग चीन के सामान की बहिष्कार की बात कर रहे हैं. इस बीच महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra) ने चीन को बड़ा झटका दिया है. राज्य सरकार ने केंद्र से बातचीत के बाद चीन की तीन कंपनियों के प्रोजेक्ट पर फिलहाल रोक लगा दी है. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 5 हजार करोड़ रुपये की है. अब केंद्र सरकार की गाइडलाइन आने के बाद इस पर कोई फैसला लिया जाएगा.

बड़े प्रोजेक्ट पर खतरा
>>जिन प्रोजेक्ट पर रोक लगाई गई है, उसमें पुणे से सटे तालेगांव में इलेक्ट्रिक व्हीकल की बड़ी फैक्ट्री भी है. कहा जा रहा है कि ये करीब 3500 हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है. ये कंपनी 1000 करोड़ का निवेश करने वाली थी जिसमे 1500 लोगों को रोजगार मिलना था.
>>हेंगली इंजीनियरिंग- इस कंपनी के साथ भी पुणे के तालेगांव में 250 करोड़ का निवेश करने का करार हुआ था जिससे 150 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी.
>> ग्रेट वॉल मोटर्स ऑटोमोबाइल- इस कंपनी ने सबसे ज्यादा निवेश करने का करार किया था. करीब  3770 करोड़ रुपये का निवेश होना था जिससे 2042 लोगों के लिए रोजगार मिलने की संभावना थी.


12 कपंनियों से हुआ था करार
बता दें कि ये सभी करार 15 जून को हुए थे. महाराष्ट्र सरकार ने पिछले दिनों 12 एमओयू (Memorandum Of Understanding) पर साइन किए थे. सभी 3 चाइनीज कंपनियों के प्रोजेक्ट होल्ड पर डाल दिए गए हैं, जबकि 9 प्रोजेक्ट के काम फिलहाल जारी रहेंगे. इसमें दूसरे देशों की कंपनियां शामिल हैं. बता दें केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से चीन के प्रोजेक्ट और आयात पर जानकारी मांगी थी.


BSNL ने पहले दिया था झटका
इससे पहले टेलीकॉम ​डिपार्टमेंट भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) से 4G अपग्रेडेशन सुविधा में चीनी इक्विमेंट्स का इस्तेमाल नहीं करने नहीं करने का फैसला किया था. टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने BSNL से इस संबंध में अपने टेंडर पर फिर से काम करने को कहा है. टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) इस बात पर भी विचार कर रहा है कि देश की प्राइवेट मोबाइल सर्विस ऑपरेटर्स  भी चीनी कंपनियों के उत्पाद पर अपनी निर्भरता कम करें.

 

रेलवे ने भी चीन से समझौते रद्द किए
उधर भारतीय रेलवे ने भी चीन में बनी चीजें इस्‍तेमाल करने से इनकार कर दिया है. वहीं, चीन की कुछ कंपनियों के साथ कई समझौते भी रद्द कर दिए गए हैं. इस बीच, भारत सरकार घरेलू उत्‍पादों का निर्यात बढ़ाने की कोशिशों में जुट गई है. इसी के तहत वाणिज्य मंत्रालय ने अलग-अलग देशों में घरेलू कंपनियों के लिए निर्यात के मौके तलाशने के लिए भारतीय मिशनों के साथ 1,500 प्रोडक्‍ट्स की सूची साझा की है.

नेपाल के आर्मी चीफ पूर्ण चंद्र थापा ने विवादित कालापानी का दौरान किया। इस दौरान आर्मी चीफ के साथ भारत सीमा पर तैनात नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के महानिरीक्षक शैलेंद्र खनाल भी थे। दोनों अधिकारियों ने भारत सीमा पर ताजा हालात का जायजा लिया।

 

हिन्दुस्तान की जमीन पर गलत नीयत बनाए हुए चीन और जिसे भारत ने अब तैयारियां तेज कर दी हैं। जहां ड्रैगन की हर साजिश का करारा जवाब दिया जाएगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीन को साफ शब्दों में कह दिया कि सीमा पर किसी भी तरह की गुस्ताखी माफ नहीं की जाएगी। सीमा पर चीन की साजिश अब उसे महंगी पड़ने वाली है। गलवान घाटी में तनाव को लेकर बैठकों का दौर जारी है। चीन से तनाव तो जारी है ही लेकिन भारत के दो पड़ोसी देशों में भी हलचलें तेज हो गई। एक तरफ जहां लगातार भारत को आंखे दिखा रहा नेपाल विवादित नक्शे को कानूनी जामा पहनाने के बाद कालापानी क्षेत्र के करीब का दौरा करते नजर आए तो दूसरी तरफ कश्मीर में अपनी नापाक आतंकी साजिशों को अंजाम देने वाला पाकिस्तान आईएसआईएस के साथ बैठकें कर रहा है।

नेपाल आर्मी चीफ का कालापानी के करीब का दौरा 

नेपाल के आर्मी चीफ पूर्ण चंद्र थापा ने विवादित कालापानी का दौरान किया। इस दौरान आर्मी चीफ के साथ भारत सीमा पर तैनात नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के महानिरीक्षक शैलेंद्र खनाल भी थे। दोनों अधिकारियों ने भारत सीमा पर ताजा हालात का जायजा लिया। खबरों के अनुसार नेपाल आर्मी चीफ ने उस सड़क का भी इंस्पेक्शन किया जो हाल ही में बनाई गई है। यह सड़क नेपाल के दार्चूला जिले को ब्यास गांव से जोड़ती है जो तिंकर दर्रे के पास है। नेपाल आर्मी चीफ का दौरा उनकी संसद द्वारा विवादित नक्शा पास किए जाने के ठीक बाद हुआ है। कालापानी शुरू से ही भारत और नेपाल के बीच विवाद का केंद्र रहा है।

पाकिस्तान सेना प्रमुख की ISI संग सिक्रेट मीटिंग

भारत-चीन की झड़प के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुख्‍यालय में करीब दो सा‍ल बाद तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने एक ख़ुफ़िया मीटिंग की है। रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक, आईएसआई हेडक्वॉर्टर में अहम मीटिंग हुई। इसमें बाजवा के अलावा ज्वॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ नदीम रजा, नेवी चीफ एडमिरल जफर महमूद अब्बासी और एयरफोर्स चीफ मुजाहिद अनवर खान भी मौजूद थे।  

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