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पीडब्ल्यूडी सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने सड़कों, पुलों और भवनों का किया निरीक्षण, अधिकारियों और ठेकेदारों को समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश

निर्माण कार्यों की होगी कड़ी मॉनिटरिंग, फील्ड पर प्रगति जांचने होंगे औचक निरीक्षण

रायपुर. 11 अक्टूबर 2026. बरसात के बाद सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों के निर्माण को रफ्तार देने की पूरी तैयारी है। लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। काम की प्रगति अब केवल दफ्तरों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर निर्माण की वास्तविक स्थिति परखेंगे। कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ औचक निरीक्षण से भी गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रखी जाएगी। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने गरियाबंद जिले का दौरा कर सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर निर्माणाधीन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने फिंगेश्वर विकासखंड में कोपरा-पोखरा मार्ग के 26.20 किलोमीटर लंबे मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस परियोजना में पुल-पुलियों के निर्माण कार्य भी शामिल हैं। उन्होंने राजिम में नवीन मेला स्थल चौबेबांधा से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण की प्रगति भी देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली और निर्माण में गुणवत्ता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

सड़क परियोजनाओं के साथ सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद में निर्माणाधीन शासकीय भवनों का भी जायजा लिया। उन्होंने व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे दो डी-टाइप आवासगृहों, जिला परिवहन कार्यालय भवन तथा 40 जीएडी आवासगृहों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इन परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सचिव श्री बंसल गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में भी पहुंचे। उन्होंने कसाबाय-पतोरा दादर मार्ग के आरडी 135 में चचंगी नाला पर निर्मित पुल एवं पहुंच मार्ग का निरीक्षण किया। यह कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कसाबाय-सातधार मार्ग में हलफली नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित इन परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।

मैदानी निरीक्षण के बाद सचिव श्री बंसल ने गरियाबंद सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक ली। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए काम में आ रही समस्याओं और बाधाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों को गति देने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। बरसात के बाद निर्माण कार्यों में तेजी लाने विभागीय अमले को सक्रियता से काम करना होगा। कार्यों की सतत निगरानी और वरिष्ठ अधिकारियों के मैदानी निरीक्षण से निर्माण की वास्तविक प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

सचिव श्री बंसल ने लोक निर्माण विभाग के संभागीय कार्यालय और कार्यालय परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय में स्वच्छता और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री व्ही. के. भतपहरी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी एवं उप अभियंतागण उपस्थित थे।


माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला एनपीओपी प्रमाणपत्र

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत वनोपज के लिए एनपीओपी प्रमाणन प्राप्त करने वाली प्रदेश की पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बनी

जैविक प्रमाणन से बस्तर के वनोपज को मिलेगा वैश्विक बाजार, महिलाओं और युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

1080 महिला शेयरधारकों और 60 उत्पादक समूहों से जुड़ी कंपनी का कारोबार एक करोड़ रुपए के पार

‘दण्डक ब्रांड’ से स्थानीय जैविक उत्पादों को मिलेगी विशिष्ट पहचान, दंतेवाड़ा में विशेष बिक्री केंद्र का शुभारंभ

रायपुर, 11 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण, जैविक उत्पादों के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में दंतेवाड़ा जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड को वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के अंतर्गत जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ है। यह प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित पहली किसान उत्पादक कंपनी है, जिसे वनोपज के लिए यह प्रमाणन मिला है। इस उपलब्धि से बस्तर के प्राकृतिक वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की नई राह खुली है।

उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी से जुड़ी सभी महिलाओं और बिहान मिशन की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के समग्र विकास के लिए स्थानीय संसाधनों, स्थानीय प्रतिभा और स्थानीय भागीदारी पर आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ा रही है। इस मॉडल में महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग प्रमुख आधार हैं। माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को मिला एनपीओपी प्रमाणपत्र इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर की धरती प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है और यहां की महिलाएं पीढ़ियों से वनोपज के संग्रहण एवं संरक्षण का कार्य करती आ रही हैं। एनपीओपी प्रमाणन मिलने से उनके परिश्रम और पारंपरिक ज्ञान को औपचारिक पहचान मिलेगी। अब दंतेवाड़ा के प्रमाणित जैविक वनोपज को देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। इससे संग्राहकों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होने की उम्मीद है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक प्रमाणन केवल उत्पादों की गुणवत्ता की पहचान नहीं है, बल्कि यह बस्तर की महिलाओं की मेहनत और सामूहिक उद्यमशीलता को नई पहचान दिलाने का माध्यम भी है। वनोपज के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही काम के अवसर मिलेंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

श्री शर्मा ने कहा कि शासन की मंशा है कि बस्तर के ऐसे गांवों, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों और रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है, वहां के कृषि उत्पादों और वनोपज को निर्धारित मानकों के अनुरूप जैविक प्रमाणीकरण से जोड़ा जाए। इससे बस्तर की प्राकृतिक और पारंपरिक उत्पादन प्रणाली को विशिष्ट पहचान मिलेगी। साथ ही स्थानीय समुदायों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य, बेहतर बाजार और स्थायी आजीविका प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘दण्डक ब्रांड’ बस्तर की मेहनतकश महिलाओं, समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय उत्पादों को एक साझा पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

 

कोरबा जिले की ग्राम पंचायत नोनबिर्री और दादरकला में बने आकर्षक बालिका शौचालय, ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान को मिल रही नई पहचान

बेटियों के सम्मान और आत्मविश्वास का प्रतीक बने गुलाबी रंग से सजे शौचालय, बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक दिया स्वच्छता का संदेश

रायपुर, 11 अक्टूबर 2026/ शारदीय नवरात्र में जहां एक ओर पूरे प्रदेश में मातृशक्ति की आराधना की जा रही है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वच्छता के संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। नवरात्र के प्रथम दिन कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए निर्मित शौचालय बेटियों के सम्मान की एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन–ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत कोरबा जिले के पाली विकासखंड की ग्राम पंचायत नोनबिर्री और करतला विकासखंड की ग्राम पंचायत दादरकला में बालिका शौचालयों का निर्माण पूर्ण किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण विद्यालयों में बालिकाओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। कोरबा जिले में पूर्ण हुए ये निर्माण कार्य इसी संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।

‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ के संदेश से सजे बालिका शौचालय
ग्राम पंचायत नोनबिर्री एवं दादरकला में निर्मित बालिका शौचालय को आकर्षक गुलाबी रंग और सुंदर चित्रकारी से सजाया गया है। भवन की दीवार पर बड़े अक्षरों में ‘मेरी बेटी–मेरा स्वाभिमान’ का संदेश अंकित है। इसके साथ ही ‘स्वच्छ रहें, सुरक्षित रहें’ का संदेश भी दिया गया है। शौचालय के सामने खड़ी स्कूली बालिकाओं ने वीबी-जी रामजी के अक्षरों और स्वच्छता के प्रतीकों के माध्यम से योजना के प्रति अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। बालिकाओं की यह सहभागिता दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और बेटियों के आत्मसम्मान के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार हो रहा है।

नवरात्र में मातृशक्ति के सम्मान का साकार रूप
नवरात्र का पर्व नारी शक्ति के सम्मान और आराधना का प्रतीक है। ऐसे अवसर पर बालिकाओं के लिए शौचालयों का निर्माण पूर्ण होना विशेष महत्व रखता है। विद्यालयों में अलग बालिका शौचालय की उपलब्धता छात्राओं की निजता, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेष रूप से किशोरावस्था में बालिकाओं के लिए ऐसी सुविधाएं उनकी गरिमा और आत्मविश्वास को बनाए रखने में सहायक होती हैं। इससे विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

प्रदेश में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 6 अगस्त 2026 को वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का शुभारंभ किया था। यह विशेष अभियान 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के ग्रामीण शासकीय विद्यालयों में लगभग 286.85 करोड़ रुपए की लागत से 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस अभियान का उद्देश्य केवल शौचालयों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को ऐसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे वे बिना किसी असुविधा के शिक्षा प्राप्त कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

​अबुझमाड़ के बीहड़ों तक पहुंची विकास की धारा: नयापारा में शुरू हुआ नलकूप खनन

रायपुर,11 अक्टूबर 2026/​छत्तीसगढ़ सरकार के 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत राज्य के अंतिम छोर पर बसे वनांचल और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाओं का विस्तार अब ज़मीनी हक़ीकत बनता जा रहा है। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र ग्राम परपा (कुतुल) के नयापारा में नलकूप खनन का कार्य तेज़ी से प्रारंभ कर दिया गया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित आवागमन के बावजूद शुरू की गई इस पहल से स्थानीय ग्रामीणों को जल्द ही घर के समीप शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल की सौगात मिलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र में विकास की एक नई किरण जगी है।
​वनांचल के दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना केवल एक बुनियादी सुविधा का विस्तार नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को सीधे तौर पर बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कुतुल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में जहाँ भौगोलिक विसंगतियाँ और आवागमन की दुश्वारियाँ विकास कार्यों के क्रियान्वयन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना देती हैं, वहाँ प्रशासन की यह पहल स्थानीय लोगों के जीवन को सुगम बनाने का सशक्त माध्यम बन रही है। पारंपरिक स्रोतों से पानी ढोने की मजबूरी झेल रहे परिवारों के लिए यह नलकूप खनन किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा।
​इस महत्वपूर्ण पहल के धरातल पर उतरने से ग्रामीण महिलाओं और परिवारों को अपनी दैनिक ज़रूरतों के लिए पानी जुटाने की लंबी और श्रमसाध्य मशक्कत से राहत मिलेगी। घर के नज़दीक ही स्वच्छ जल उपलब्ध होने से न केवल उनका बहुमूल्य समय बचेगा, बल्कि वे अपनी ऊर्जा का उपयोग अन्य रचनात्मक व आजीविका संबंधी कार्यों में कर सकेंगे। इसके साथ ही, सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से जलजनित बीमारियों के खतरे को कम करने तथा ग्रामीण आंचल में बेहतर स्वास्थ्य संबंधी आदतों को बढ़ावा देने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
​नारायणपुर जिले के इन दूरस्थ अंचलों में जल स्रोतों का विकास और उनका सुचारू रखरखाव इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य शासन हर नागरिक तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। नलकूप खनन का कार्य पूरा होने के बाद पानी की गुणवत्ता की विशेष रूप से जाँच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ग्रामीणों को पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित पेयजल प्राप्त हो। यह सकारात्मक पहल न केवल नयापारा के निवासियों के जीवन को आसान बना रही है, बल्कि यह विश्वास भी दिलाती है कि विकास की धारा अब राज्य के हर कोने तक पहुँच रही है।

 

धमतरी के तेजराम को दो घंटे में मिला कृत्रिम हाथ, लौटी जिंदगी की रंगत

रायपुर, 11अक्टूबर 2026/​"यह सिर्फ कृत्रिम हाथ नहीं, मेरी संपूर्णता और स्वाभिमान का अहसास है!"—यह शब्द हैं धमतरी जिले के ग्राम गोजी निवासी तेजराम साहू के, जिनके जीवन में वर्षों के संघर्ष के बाद आखिरकार आत्मविश्वास और मुस्कान वापस लौट आई है। छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित ‘निदान-03’ शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में किस तरह बदलाव की नई इबारत लिख रहा है, इसकी एक जीती-जागती मिसाल तेजराम की यह कहानी है।
​जीवन की राह में कभी-कभी एक पल का हादसा इंसान के सामने अनगिनत चुनौतियां खड़ी कर देता है। तेजराम साहू की जिंदगी में भी ऐसा ही मोड़ तब आया जब महज 18 वर्ष की उम्र में एक भीषण ट्रेन दुर्घटना में उनका दायां हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गंभीर चोटों के चलते डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें अपना हाथ गंवाना पड़ा। इतनी कम उम्र में आए इस संकट ने उनके सामने न केवल रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्यों को करने का गंभीर संकट खड़ा किया, बल्कि आजीविका के लिए संघर्ष को भी और कठिन बना दिया। हाथ का अभाव केवल एक शारीरिक कमी नहीं था, बल्कि हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की विवशता भी थी। हालांकि, इन विकट परिस्थितियों के बावजूद तेजराम ने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार संघर्ष करते हुए अपनी जिंदगी की गाड़ी को आगे बढ़ाते रहे।
​उनके इसी संघर्ष को आसान बनाने और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाने का काम किया जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘निदान-03’ शिविर ने। सेवा संकल्प अभियान के तहत लगाए गए इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि जनकल्याणकारी सेवाओं और उपकरणों का लाभ बिना किसी देरी के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे। जब तेजराम इस शिविर में पहुंचे, तो वहां मौजूद भगवान महावीर सेवा संस्थान के इंजीनियरों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तुरंत उनके हाथ का माप लिया और आवश्यक प्रक्रिया शुरू की। हैरान करने वाली बात यह रही कि महज डेढ़ से दो घंटे की रिकॉर्ड समयसीमा के भीतर उन्हें कृत्रिम हाथ तैयार कर सौंप दिया गया।
​इतनी जल्दी और सहजता से मिली इस सहायता ने तेजराम के लिए वर्षों की कठिनाइयों के बीच संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए। कृत्रिम हाथ मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं और चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि व खुशी साफ झलकने लगी। उन्होंने भावुक होकर जिला प्रशासन और समिति के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अब उनके जीवन की राह बहुत आसान हो जाएगी और वे अपने दैनिक काम खुद कर पाएंगे।
​तेजराम साहू की यह कहानी महज एक उपकरण मिलने की नहीं, बल्कि सेवा संकल्प अभियान के उस मानवीय पक्ष की है जो किसी जरूरतमंद को सिर्फ सुविधा नहीं देता, बल्कि उसे सहायता से आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है। शिविर में तेजराम के चेहरे पर खिली यह मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित सेवा का समन्वय होता है, तो वह किसी के भी जीवन में नई ऊर्जा और रंगत भरने की ताकत रखता है।

 

सहायक उपकरणों और सुविधाओं का मिल रहा संबल

रायपुर,11 अक्टूबर 2026/
सेवा संकल्प अभियान के तहत धमतरी जिले में आयोजित तीन दिवसीय ‘निदान-03’ विशेष शिविर दिव्यांगजनों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और भगवान महावीर दिव्यांग सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी दैनिक गतिविधियों को सुगम करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। नगरी और धमतरी में आयोजित इन शिविरों के शुरुआती दो दिनों में कुल 632 दिव्यांगजनों ने हिस्सा लिया, जिन्हें एक ही छत के नीचे कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और शासकीय योजनाओं का पूरा संबल प्रदान किया गया।

एक ही छत के नीचे मिलीं तमाम शासकीय सुविधाएं

​शिविर के पहले दिन 8 अक्टूबर को नगरी विकासखंड के श्रृंगी ऋषि हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में 172 दिव्यांगजन शामिल हुए। यहाँ पात्र हितग्राहियों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, बैसाखी, वॉकिंग स्टिक और वॉकर वितरित किए गए। साथ ही, नौ दिव्यांगजनों के कृत्रिम हाथ-पैर तैयार करने के लिए आवश्यक माप और प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि 18 दिव्यांगता प्रमाण पत्र और 44 यूडीआईडी कार्ड भी प्रदान किए गए।
​शृंखला के दूसरे दिन 10 अक्टूबर को धमतरी के इंडोर स्टेडियम में भव्य शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ 460 दिव्यांगजन पहुँचे और इनमें से 359 हितग्राहियों को विभिन्न उपकरणों व सुविधाओं से लाभान्वित किया गया।
छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया और महापौर रामू रोहरा की उपस्थिति में संपन्न इस कार्यक्रम में कृत्रिम पैर, कृत्रिम हाथ, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, स्मार्ट केन और वॉकर जैसी आधुनिक सामग्रियां बड़े पैमाने पर बांटी गईं। इसके अलावा, शिविर में दिव्यांगजनों के बस पास, दिव्यांगता प्रमाण पत्र और एम. आधार कार्ड जैसी आवश्यक सुविधाएँ भी तुरंत उपलब्ध कराई गईं, जिससे उन्हें अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़े।

जनसंपर्क प्रदर्शनी और जनमन पत्रिका का आकर्षण

​इस आयोजन की एक और खास बात यह रही कि यहाँ विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। जनसंपर्क विभाग की ओर से विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई और मासिक पत्रिका 'छत्तीसगढ़ जनमन' का निःशुल्क वितरण किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने बेहद सराहा। धमतरी कलेक्टर ने इस दौरान सभी स्टॉलों का अवलोकन किया और कहा कि दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण व शासकीय योजनाओं का लाभ देकर उन्हें सशक्त और स्वावलंबी बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
​इस तीन दिवसीय विशेष अभियान के अंतिम दिन आज भी पंजीयन, परीक्षण और कृत्रिम अंगों के मापन की सुविधा जारी रहेगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद इस कल्याणकारी पहल से वंचित न रह जाए।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज  सिविल लाइन स्थित निवास कार्यालय में केबिनेट की बैठक प्रारम्भ

​25 नए युवा मतदाताओं ने तुरंत भरा ऑनलाइन फॉर्म; निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान की ली जानकारी

​रायपुर, अक्टूबर 2026/ वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय महाविद्यालय मरवाही में आज मतदाता जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष एवं प्रभावी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) एवं स्वीप (SVEEP) के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं को लोकतंत्र में मतदान के महत्त्व से अवगत कराना और युवाओं को मतदाता सूची में पंजीकृत करना था।

​स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन की दी गई जानकारी

​कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं को भारतीय निर्वाचन प्रणाली, मतदान के अधिकार तथा "स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन" की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि एक सशक्त और समृद्ध लोकतंत्र की नींव युवाओं के जागरूक हाथों में होती है। इसलिए प्रत्येक योग्य नागरिक को बिना किसी प्रलोभन या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

​18 वर्ष पूर्ण कर चुके 25 छात्र-छात्राओं का कराया गया ऑन-द-स्पॉट ऑनलाइन पंजीयन

​कार्यक्रम की सबसे मुख्य विशेषता नवीन मतदाताओं का त्वरित पंजीयन रहा। ऐसे छात्र-छात्राएं जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है, उन्हें 'वोटर हेल्पलाइन ऐप' तथा 'एनवीएसपी' पोर्टल के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की संपूर्ण ऑनलाइन प्रक्रिया प्रयोगात्मक रूप से समझाई गई।
​जागरूकता के इस अभियान का तात्कालिक असर देखने को मिला, जहाँ कार्यक्रम के दौरान ही 25 पात्र छात्र-छात्राओं के मतदाता सूची में नाम जोड़ने हेतु ऑनलाइन आवेदन सफलता पूर्वक दर्ज कराए गए।
नोडल अधिकारी (स्वीप) एवं जिला संगठक, राष्ट्रीय सेवा योजना ने कहा कि युवा वर्ग लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्रत्येक विद्यार्थी को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराकर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में अपनी भागीदारी निभानी चाहिए।

​युवाओं में दिखा भारी उत्साह

​कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एनएसएस स्वयंसेवकों एवं भारी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। युवाओं ने न केवल स्वयं पंजीयन कराने का संकल्प लिया, बल्कि अपने-अपने गांवों और आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करने का जिम्मा उठाने की बात कही।

मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से उपचार के लिए तत्काल 12 लाख रुपए स्वीकृत

आर्थिक तंगी के कारण बेटे के इलाज को लेकर चिंतित किसान पिता को मिली बड़ी राहत

रिमोन को गोद में उठाकर मुख्यमंत्री ने दुलारा, कहा - यह केवल आपका नहीं, हमारा भी बेटा है, इसके स्वास्थ्य की चिंता करना हमारी भी जिम्मेदारी

नन्हे रिमोन ने गीत सुनाकर मुख्यमंत्री का जताया आभार

रायपुर,  अक्टूबर 2026/ सक्ती जिले के ग्राम धुरकोट निवासी 10 वर्षीय रिमोन टंडन के परिवार के लिए आज का दिन नई उम्मीद और राहत लेकर आया। दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे रिमोन के महंगे उपचार की चिंता से परेशान परिवार को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत तत्काल 12 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री ने रिमोन के समुचित उपचार के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा भी परिवार को दिलाया।

मुख्यमंत्री श्री साय से आज मुलाकात के दौरान रिमोन अपने माता-पिता के साथ पहुंचा था। मुख्यमंत्री ने बच्चे को स्नेहपूर्वक अपनी गोद में उठाया, दुलारा और उसके स्वास्थ्य तथा उपचार के संबंध में परिजनों से विस्तार से जानकारी ली। परिवार की आर्थिक स्थिति और उपचार पर आने वाले खर्च की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने तत्काल 12 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने रिमोन के माता-पिता को ढांढस बंधाते हुए कहा कि यह केवल आपका नहीं, हमारा भी बेटा है। इसके स्वास्थ्य की चिंता करना हमारी भी जिम्मेदारी है। रिमोन के उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। रिमोन के इलाज की पूरी जिम्मेदारी अब हमारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता के समय बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और सरकार का संबल मिले, यह राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है।

दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है 10 वर्षीय रिमोन

सक्ती जिले के डभरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम धुरकोट निवासी रिमोन टंडन ‘आइसोलेटेड ग्रोथ हार्मोन की कमी (टाइप ए-1)’ जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। चिकित्सकों ने उसके उपचार के लिए विशेष चिकित्सा की आवश्यकता बताई है, जिस पर लगभग 12 लाख रुपए का व्यय संभावित है। इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था करना किसान परिवार के लिए संभव नहीं था। उपचार की चिंता के बीच मुख्यमंत्री से मिली सहायता ने परिवार को नया संबल दिया है।

रिमोन के पिता श्री अजय कुमार टंडन खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय के बीच बेटे की बीमारी और महंगे उपचार की आवश्यकता ने परिवार की चिंता बढ़ा दी थी। एक ओर बेटे को जल्द से जल्द आवश्यक उपचार दिलाने की जरूरत थी, वहीं दूसरी ओर उपचार पर आने वाला लाखों रुपए का खर्च परिवार की आर्थिक क्षमता से बाहर था।

ऐसे कठिन समय में मुख्यमंत्री श्री साय की पहल से स्वीकृत 12 लाख रुपए की सहायता ने परिवार की सबसे बड़ी चिंता दूर कर दी है। अब रिमोन को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने का रास्ता आसान हो गया है।

किसान पिता ने कहा - कठिन समय में सरकार ने दिया बड़ा सहारा

रिमोन के पिता श्री अजय कुमार टंडन ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बेटे के इलाज के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना उनके परिवार के लिए संभव नहीं था। वे लंबे समय से रिमोन के स्वास्थ्य और उसके उपचार को लेकर चिंतित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने उनकी परेशानी को समझा और तत्काल सहायता स्वीकृत कर परिवार को बहुत बड़ा सहारा दिया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने हमारे बेटे के इलाज की चिंता को अपनी चिंता समझा। उनके सहयोग से अब हमें विश्वास है कि हमारे बेटे को आवश्यक उपचार मिल सकेगा। इस कठिन समय में हमारे परिवार के साथ खड़े होने के लिए हम मुख्यमंत्री जी और राज्य सरकार के हृदय से आभारी हैं।

नन्हे रिमोन ने गीत सुनाकर मुख्यमंत्री का किया धन्यवाद

मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान एक आत्मीय दृश्य भी देखने को मिला। सहायता मिलने से खुश नन्हे रिमोन ने मुख्यमंत्री श्री साय को गीत गाकर सुनाया। मुख्यमंत्री ने बड़े स्नेह से उसका गीत सुना और उसका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने रिमोन को खूब पढ़ने, आगे बढ़ने और स्वस्थ होकर अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव की मौजूदगी में चार नगर निगमों और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच होगा करार

बिलासपुर और भिलाई में 1 नवम्बर तक 20-20 बसें शुरू करने का लक्ष्य

रायपुर.  अक्टूबर 2026. छत्तीसगढ़ के चार बड़े शहरों में 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए 11 अक्टूबर को कंसेशन एग्रीमेंट किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव की मौजूदगी में रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और कोरबा नगर निगम का चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के साथ कंसेशन एग्रीमेंट होगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत होने वाले इस समझौते से चारों शहरों में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने का रास्ता साफ होगा।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आयोजित कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में प्रदेश के आठ नगरीय निकायों के महापौर और आयुक्त शामिल होंगे। इनमें रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर श्रीमती पूजा विधानी, कोरबा की महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर श्रीमती अलका बाघमार, रिसाली की महापौर श्रीमती शशि सिन्हा, भिलाई के महापौर श्री नीरज पाल, बीरगांव के महापौर श्री नंदलाल देवांगन तथा भिलाई-चरोदा के महापौर श्री निर्मल कोसरे शामिल हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, संचालक श्री नीलेश क्षीरसागर और सूडा के सीईओ श्री सुमीत अग्रवाल भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है। इनमें सबसे अधिक 100 बसें रायपुर में चलेंगी। दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर को 50-50 तथा कोरबा को 40 बसें मिलेंगी। बसों के संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बिलासपुर और भिलाई में 1 नवम्बर 2026 तक प्रतीकात्मक रूप से 20-20 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि ई-बसों में यात्रियों की सुविधा के साथ सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। बसें आधुनिक और हाईटेक सुविधाओं से लैस होंगी। यात्रियों को मोबाइल स्कैनर के माध्यम से किराए का भुगतान करने और ऑनलाइन टिकट लेने की सुविधा मिलेगी। सुरक्षा के लिए प्रत्येक बस में छह कैमरे लगाए जाएंगे। यात्री मोबाइल एप से बसों के रूट की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

श्री बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य शहरी सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। इससे नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ शहरों की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।

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