ईश्वर दुबे
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Bhilai
मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवाओं से मुख्यमंत्री ने किया आत्मीय संवाद
मुख्यमंत्री ने साझा किए अपने संघर्ष, जनसेवा और सार्वजनिक जीवन के अनुभव, युवाओं को दिया निष्ठा और संवेदनशीलता से कार्य करने का मंत्र
आईआईएम रायपुर में प्रशिक्षण और जिलों में मैदानी अनुभव से शासन की कार्यप्रणाली समझेंगे युवा फेलो
शिक्षा, कौशल, आधुनिक तकनीक और रोजगार के अवसरों से युवाओं को सशक्त बना रही राज्य सरकार
निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर सृजित करना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री श्री साय
जो भी दायित्व मिले, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएं, जनकल्याण को बनाएं अपने कार्य का उद्देश्य : मुख्यमंत्री श्री साय
रायपुर, अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के प्रतिभागियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने छात्र जीवन, संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों से लेकर जनसेवा और सार्वजनिक जीवन की यात्रा के अनुभव उनके साथ साझा किए। उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे इस अवसर का उपयोग केवल शासन की कार्यप्रणाली को समझने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और नवीन विचारों के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं के पास शिक्षा, ऊर्जा, प्रतिभा और नए विचारों की शक्ति है। जब यही शक्ति जनकल्याण और समाज की बेहतरी से जुड़ती है तो बड़े परिवर्तन का आधार बनती है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर परिश्रम और प्रत्येक दायित्व का निष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन सफलता के साथ आत्मसंतुष्टि भी प्रदान करता है।
संवाद के दौरान युवा प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री श्री साय से फेलोशिप को लेकर उनकी अपेक्षाओं, सुशासन, शिक्षा, रोजगार, निवेश, आधुनिक तकनीक, प्रदेश के विकास में युवाओं की भूमिका और उनके व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक जीवन की यात्रा से जुड़े अनेक प्रश्न किए। मुख्यमंत्री ने सभी प्रश्नों का सहजता और आत्मीयता से जवाब दिया।
विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित प्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत आज विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से प्रगति करते हुए विश्व में अपनी सशक्त भूमिका स्थापित कर रहा है। इस यात्रा को और गति देने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है।
उन्होंने युवा फेलो से कहा कि वे अपनी क्षमताओं को निरंतर निखारें, नए विचारों के साथ आगे आएं और शासन-प्रशासन के साथ कार्य करते हुए जनहित से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करें। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए युवाओं के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप सीखने, अनुभव प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा को प्रदेश के विकास में उपयोग करने का महत्वपूर्ण मंच है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिलों में कार्य के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझना सबसे महत्वपूर्ण होगा। संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए आंकड़ों, प्रमाणों और मैदानी अनुभव के आधार पर ऐसे सुझाव दिए जाएं, जिनसे योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
शिक्षा ने तय की लंबी यात्रा, आज प्रदेश में उपलब्ध हैं प्रतिष्ठित संस्थान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा विकास का मूल मंत्र है। युवा जहां भी अध्ययन करें, वहां से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग अपने समाज और प्रदेश की उन्नति में करें।
अपने छात्र जीवन को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाएं बहुत सीमित थीं। उन्हें अपने गांव बगिया से लगभग छह किलोमीटर दूर दूसरे गांव के विद्यालय में पांचवीं की बोर्ड परीक्षा देने जाना पड़ा था। स्कूलों के भवन कच्चे होते थे और बच्चों को बैठने के लिए अपने घर से चटाई अथवा जूट का बोरा लेकर जाना पड़ता था।
राज्य में निगरानी एवं मूल्यांकन का सशक्त और स्थायी तंत्र विकसित करने में हरसंभव सहयोग का दिया आश्वासन
राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक, स्टेट सपोर्ट मिशन के कार्यों की हुई समीक्षा
अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए डेटा आधारित नीति निर्माण, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामोन्मुखी योजनाओं पर विशेष जोर
रायपुर, अक्टूबर 2026/ नीति आयोग, भारत सरकार के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) की महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग द्वारा नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने कम समय में मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने राज्य में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और उनके वास्तविक परिणामों के आकलन के लिए एक सशक्त एवं स्थायी निगरानी तथा मूल्यांकन तंत्र विकसित करने पर जोर देते हुए इस दिशा में DMEO, नीति आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ में आज स्टेट सपोर्ट मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों एवं प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने की। इस अवसर पर सचिव, योजना श्री भुवनेश यादव सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्य नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका : श्री गणेश शंकर मिश्रा
बैठक में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने महानिदेशक सुश्री निधि छिब्बर का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य नीति आयोग एक परामर्शदात्री एवं ज्ञान आधारित संस्था (थिंक टैंक) के रूप में प्रदेश के समग्र विकास को नई दिशा देने के लिए कार्य कर रहा है। आयोग द्वारा नीति निर्माण, योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और विभागीय समन्वय के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं।
श्री मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य नीति आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तथा उनके प्रभाव और परिणामों का आकलन ठोस आँकड़ों एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयोग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए डेटा आधारित नीति निर्माण और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति को प्रोत्साहित कर रहा है।
योजनाओं के मूल्यांकन में IIM रायपुर और IIT भिलाई की विशेषज्ञता का मिलेगा लाभ
सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, श्री भुवनेश यादव ने कहा कि राज्य शासन योजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रहा है। इस दिशा में भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का सहयोग लिया जा रहा है। इससे योजनाओं के मूल्यांकन में आधुनिक तकनीक, शोध आधारित अध्ययन और शैक्षणिक विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन, अंजोर विजन पोर्टल पर भी कार्य जारी
बैठक में राज्य नीति आयोग की मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन इकाई तथा परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शासकीय योजनाओं के पायलट मूल्यांकन के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। ये अध्ययन नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) द्वारा निर्धारित मूल्यांकन ढाँचे पर आधारित हैं।
राज्य में DMEO के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (OOMF) तथा डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स (DGQI) को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया गया है। इसके अतिरिक्त नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन किए जा रहे हैं। अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी एवं समीक्षा के लिए अंजोर विजन पोर्टल विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) को धरातल पर उतारने छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी पहल
विश्वविद्यालयों में बनेंगे 'NEP सेल', संभाग व जिला स्तर पर होंगी कार्यशालाएं
रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सुचारू, सुदृढ़ और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शासन स्तर पर प्रशासनिक एवं अकादमिक कसरत तेज हो गई है। राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में NEP-2020 को बिना किसी व्यावहारिक बाधा के लागू करने और पिछले दो वर्षों के अनुभवों के आधार पर आई चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समीक्षा सह ट्रांसफॉर्म समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, श्रीमती रीता यादव, प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा समिति के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के स्तर को उन्नत करने, विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने तथा नई शिक्षा नीति को राज्य में पूरी सुदृढ़ता के साथ धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री श्री वर्मा ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लाभ तभी संभव है जब यह केवल कागजी निर्देशों, बैठकों और प्रशासनिक फाइलों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' और मुख्यमंत्री के 'विकसित छत्तीसगढ़' के संकल्प को साकार करने में इस नई शिक्षा नीति की अत्यंत निर्णायक भूमिका होगी।
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि NEP-2020 का मूल ध्येय केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को सीधे रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने उद्योगपतियों, औद्योगिक घरानों और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से विद्यार्थियों को सीधे जोड़ने और उद्योग- अकादमिक समन्वय को मजबूत करने का निर्देश दिया।
व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान: संभाग और जिला स्तर पर प्रशिक्षण
पिछले दो वर्षों में NEP-2020 के क्रियान्वयन के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामने आई व्यावहारिक चुनौतियों, क्रेडिट सिस्टम एवं विषय चयन से जुड़े भ्रम पर गहराई से मंथन किया गया। इस भ्रम और कठिनाइयों को दूर करने के लिए मंत्री श्री वर्मा ने व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
विशेष कार्यशालाओं का आयोजन
नई शिक्षा नीति की बारीकियों और प्रावधानों से प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों को पूरी तरह अवगत कराने के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र के हर सेमेस्टर की शुरुआत में विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश मंत्री श्री वर्मा ने दिए।
संभाग एवं जिला स्तरीय प्रशिक्षण
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री श्री वर्मा ने प्राध्यापकों और छात्रों के बीच समझ का दायरा बेहतर करने के लिए संभाग और जिला स्तर पर भी बड़े पैमाने पर कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करने के निर्देश दिए। विश्वविद्यालयों से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों, नोडल अधिकारियों और ब्रांड एंबेसडरों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
निगरानी व्यवस्था मजबूत करने नोडल अधिकारी और ब्रांड एंबेसडर होंगे नियुक्त
प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण, जमीनी निगरानी और त्वरित सूचना प्रसार को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक नया ढांचा तैयार करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित नोडल अधिकारी तथा दो विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किए जाएंगे। ये अधिकारी और एंबेसडर शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के बीच समन्वय स्थापित कर जागरूकता फैलाने और मॉनिटरिंग का काम करेंगे। विद्यार्थियों को नीति से संबंधित आ रही शंकाओं, विषय चयन की समस्याओं और अन्य प्रशासनिक प्रश्नों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित 'NEP सेल' का गठन करने के निर्देश भी दिए।
फसल की वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और सर्वे का क्रॉस वेरिफिकेशन करने के निर्देश
नक्शों की त्रुटियों के निराकरण और भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने पर जोर
रायपुर, 9 अक्टूबर 2026/मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में डिजिटल क्रॉप सर्वे के संबंध में बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वे की प्रगति, भूमि अभिलेखों की पूर्णता और शत-प्रतिशत गिरदावरी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में फसलें बोई गई है, वहां उसकी वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए। संबंधित खसरों का सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि भूमि पर फसल लगी है या नहीं। फसल वाले क्षेत्रों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पॉलीगॉन बनाकर जानकारी दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेतों में बोई गई फसल का सटीक और विश्वसनीय विवरण तैयार किया जाना चाहिए।
डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस वेरिफिकेशन करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि सर्वे की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर टीम गठित कर विभिन्न जिलों में फील्ड वेरिफिकेशन करें। उन्होंने निर्देश दिए कि सर्वे में दर्ज जानकारी का मौके पर सत्यापन किया जाए तथा कितने खसरों का सत्यापन हुआ है, कितने रिकॉर्ड सही पाए गए है, कहां त्रुटियां मिलीं है इसकी रिपोर्ट तैयार की जाए। त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड को सुधारने के साथ ही सर्वे की आंतरिक जांच भी सुनिश्चित की जाए।उन्होंने डिजिटल क्रॉप सर्वे के आंकड़ों का धान की खेती, किसान पंजीयन और धान उपार्जन से संबंधित आंकड़ों के साथ तुलनात्मक परीक्षण करने के निर्देश दिए है। उन्होंने अधिकारियों से विभिन्न अभिलेखों में उपलब्ध जानकारी का मिलान कर आवश्यक सुधार करने कहा है।
नक्शों की त्रुटियों के निराकरण के लिए तकनीकी समाधान तलाशें
बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान सामने आई प्रमुख बाधाओं की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि नक्शों की अनुपलब्धता और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण कार्य अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए। राजस्व विभाग इन समस्याओं के निराकरण के लिए उपयुक्त तकनीकी समाधान तलाशे। मुख्य सचिव ने कहा कि आवश्यकतानुसार नक्शों को अद्यतन करने की कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन मामलों में भौतिक सत्यापन और पॉलीगॉन सत्यापन आवश्यक है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा कर लिया जाए।
कलेक्टरों के साथ बैठक कर कार्यों की समीक्षा करें
मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति और सत्यापन कार्यों की समीक्षा के लिए कलेक्टरों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के संबंधित अधिकारी गांवों और खेतों के रिकॉर्ड का सत्यापन करें तथा कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करें। सर्वे की नियमित निगरानी के साथ विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा किया जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव सुश्री रीना बाबा साहब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक उद्योग श्री प्रभात मलिक, संचालक भू-अभिलेख श्री विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य फरिया आलम सिद्दीकी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन में आए वरिष्ठ अधिकारियों ने युवाओं से किया संवाद, आजीविका से जुड़ी पहल को सराहा
रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/ बस्तर में हिंसा का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौटे युवाओं द्वारा संचालित ‘कैफे पण्डुम’ पुनर्वास और स्वावलंबन की मिसाल बन रहा है। जगदलपुर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी सहित केंद्र और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को कैफे का भ्रमण किया। उन्होंने युवाओं से संवाद कर उनके प्रयासों की सराहना की और इसे आजीविका एवं सामाजिक बदलाव की महत्वपूर्ण पहल बताया।
भ्रमण के दौरान बस्तर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने अधिकारियों को कैफे की अवधारणा, संचालन और इससे जुड़े परिवारों की आजीविका बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल हिंसा से प्रभावित और मुख्यधारा में लौटे लोगों को सम्मानजनक जीवन तथा आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कैफे की व्यवस्थाओं, स्थानीय व्यंजनों, प्राकृतिक रंगों से सजे परिसर और आत्मीय आतिथ्य की सराहना की। उन्होंने कैफे को सादगी और स्थानीय परिवेश के साथ विकसित एक जीवंत केंद्र बताया। अधिकारियों ने कैफे का संचालन कर रहे युवाओं का उत्साहवर्धन भी किया।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने लोगों के साथ किया श्रमदान, मारकंडी नदी घाट और प्राकृतिक जल कुंड की सफाई
रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/ बस्तर जिले के ग्राम पंचायत चपका स्थित रामपुर आश्रम में जनभागीदारी से सेवा संकल्प अभियान के तहत स्वच्छता अभियान चलाया गया। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ झाड़ू लगाकर श्रमदान किया। इस दौरान ऐतिहासिक मंदिर परिसर, मारकंडी नदी घाट और प्राकृतिक जल कुंड की साफ-सफाई कर स्वच्छता एवं जलस्रोतों के संरक्षण का संदेश दिया गया।
स्वच्छता अभियान में स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। सभी ने मिलकर नदी घाट, प्राकृतिक जल कुंड और मंदिर परिसर के आसपास फैले कचरे, प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट की सफाई की। वन मंत्री श्री कश्यप ने स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने तथा धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों के साथ प्राकृतिक जलस्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने जलस्रोतों को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने का सामूहिक संकल्प भी लिया। अभियान में जिला पंचायत बस्तर की अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री दिनेश कश्यप सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों, स्वच्छ भारत मिशन की टीम और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने श्रमदान किया।
वन्यजीव सप्ताह का समापन, कला और रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों ने दिखाई पर्यावरण के प्रति जागरूकता
रायपुर, 10 अक्टूबर 2026/ वन्यजीव संरक्षण का संदेश देने वाली युवा प्रतिभाओं को गुरुवार को नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन के दंडकारण्य सभागार में पुरस्कृत किया गया। वन्यजीव सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित समारोह में कला और ज्ञान आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा रायपुर वनमंडल द्वारा कलिंगा विश्वविद्यालय के हरित समूह एवं प्राणीशास्त्र विभाग के सहयोग से 2 से 8 अक्टूबर तक वन्यजीव सप्ताह मनाया गया। ‘जुड़ते प्राकृतिक आवास, फलते-फूलते वन्यजीव’ की थीम पर आयोजित इस सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों के जरिए प्रकृति और जैव विविधता संरक्षण का महत्व समझा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय उपस्थित रहे।
सप्ताहभर चले आयोजन में कागज की आकृतियां और घोंसलों के प्रतिरूप बनाने, बीजगोलक (सीड बॉल) निर्माण, वन्यजीव छायाचित्रण तथा प्रकृति भ्रमण जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से उन्हें वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
शॉर्ट फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता में कलिंगा विश्वविद्यालय के देवेश मिंज, सिद्धांत नागपुरे और वर्षा साहू क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय रहे। निबंध प्रतियोगिता में केंद्रीय विद्यालय की श्रेया साहू, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उपरवारा की शैल्या साहू और पीएम श्री स्वामी आत्मानंद विद्यालय माना कैंप के आकाश दास ने क्रमशः प्रथम तीन स्थान प्राप्त किए। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय माना कैंप की हेमा और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गनोद की दीपिका साहू को सांत्वना पुरस्कार मिला। वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं और प्रकृति आधारित गतिविधियों ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने तथा जैव विविधता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर दिया।
कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग की बड़ी पहल, चार संस्थाओं के साथ एमओयू
टीसीएस, अडानी समूह और नांदी फाउंडेशन के सहयोग से युवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीक एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण
आईटीआई और पॉलिटेक्निक में शुरू होंगे नए पाठ्यक्रम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर विशेष जोर
पॉलिटेक्निक संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से कराया गया थर्ड पार्टी मूल्यांकन
रायपुर, 09 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल शैक्षणिक योग्यता तक सीमित न रखते हुए उन्हें आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुखी कौशल से सशक्त बनाना है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में एवं कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा प्रतिष्ठित औद्योगिक एवं प्रशिक्षण संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू), तकनीकी शिक्षा में नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत तथा प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।
चार संस्थाओं के साथ एमओयू से युवाओं को मिलेगा बेहतर प्रशिक्षण
दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला 2026 के समापन अवसर पर कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से चार संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) की पहल की गई। इन समझौतों के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त करने में सुविधा होगी।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के सहयोग से इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और उद्योगों में उपयोग होने वाले व्यावहारिक कौशल की जानकारी प्राप्त होगी।
इसी प्रकार अडानी समूह के सहयोग से आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस पहल से विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता विकसित करने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और रोजगार क्षमता में वृद्धि के लिए नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सॉफ्ट स्किल, अंग्रेजी संवाद कौशल, साक्षात्कार की तैयारी एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पिछले वर्ष इस संस्था के माध्यम से छह हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया गया था। इस वर्ष भी आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं कौशल विकास से जुड़े विद्यार्थियों को लगभग 48 से 50 घंटे का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त जंगल सफारी में विभिन्न ट्रेडों से संबंधित कौशल प्रशिक्षण के लिए भी संस्थाओं के साथ एमओयू की पहल की जा रही है। इससे युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे।
पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने विशेष पहल
प्रदेश के पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के माध्यम से थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया गया है। इस मूल्यांकन में संस्थानों के शैक्षणिक स्तर, प्रशिक्षण व्यवस्था, उपलब्ध अधोसंरचना और अन्य आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया है। मूल्यांकन की रिपोर्ट का रोजगार मेला के समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय, मंत्री तकनीकी शिक्षा श्री साहेब, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने विमोचन किया। इसमें संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने तथा प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों के आधार पर पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के विकास और आधुनिकीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध हो सकेगा।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव की पहल पर 38.23 करोड़ मंजूर
रायपुर. अक्टूबर 2026. उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव की पहल पर बिलासपुर नगर निगम के लिए मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत विभिन्न कार्यों के लिए 38 करोड़ 23 लाख 82 हजार रुपए की स्वीकृति मिली है। राज्य शासन द्वारा मंत्रालय से आज इसकी प्रशासकीय स्वीकृति के आदेश जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के अंतर्गत बिलासपुर में सिरगिट्टी बन्नाक चौक के पास 12 करोड़ 21 लाख 76 हजार रुपए की लागत से खेल कॉम्पलेक्स और व्यावसायिक कॉम्पलेक्स बनाया जाएगा। योजना के तहत जोन क्रमांक-2 में नर्मदा कोल्ड ड्रिंक से गोकने नाला तक 3 करोड़ 15 लाख रुपए की लागत से नाला निर्माण तथा जोन क्रमांक-7 के खमतराई में 4 करोड़ 58 लाख 39 हजार रुपए की लागत से सड़क और नाली के कार्य होंगे। जोन क्रमांक-8 में इंदिरा विहार के पास 3 करोड़ 90 लाख रुपए से सड़क और व्यावसायिक परिसर भी बनाए जाएंगे।
बिलासपुर नगर निगम के जोन क्रमांक-7 में बहतराई चौक के पास भक्त माता कर्मा चौक से मोपका बायपास तक 9 करोड़ 38 लाख 44 हजार रुपए की लागत से सड़क, नाली और विद्युतीकरण के कार्य किए जाएंगे। जोन क्रमांक-7 में ही 4 करोड़ 99 लाख 25 हजार रुपए की लागत से शॉपिंग कांप्लेक्स बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से इन अधोसंरचनाओं के निर्माण से शहर में खेल गतिविधियों के लिए एक बेहतर प्लेटफॉर्म मिलेगा। साथ ही यातायात और ड्रेनेज की समस्या से मुक्ति भी मिलेगी। नए व्यावसायिक परिसरों के निर्माण से व्यावसायिक गतिविधियों को रफ्तार मिलने के साथ ही निगम के राजस्व में वृद्धि भी होगी।
सेवा संकल्प अभियान
236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली से किसानों को मिल रही सिंचाई सुविधा, अल्प वर्षा के दौरान भी खेती के लिए उपलब्ध हुआ पानी
23.81 करोड़ रुपये की लागत से पुरानी नहरों का जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य पूर्ण, जल वितरण व्यवस्था हुई बेहतर
खेतों की सिंचाई के साथ अम्बिकापुर शहर की भी बुझा रही प्यास, अमृत योजना के तहत प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर जल की आपूर्ति
रायपुर, अक्टूबर 2026/ खेतों में लहलहाती फसलों के लिए पानी सबसे बड़ी जरूरत है। जब बारिश कम होती है और खेतों में नमी घटने लगती है, तब सिंचाई के भरोसेमंद साधन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होते। सरगुजा जिले की श्याम घुनघुट्टा परियोजना वर्षों से किसानों की इसी जरूरत को पूरा कर रही है। जिले की जीवनदायिनी कही जाने वाली इस परियोजना की 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली के माध्यम से 63 गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच रहा है। लगभग 35 वर्ष पुरानी नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग कार्य से जल वितरण व्यवस्था को मजबूती मिली है। विशेष रूप से अल्प वर्षा के दौरान परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हुई है।
श्याम घुनघुट्टा परियोजना की उपयोगिता केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं है। यह अम्बिकापुर शहर की पेयजल आपूर्ति का भी प्रमुख आधार है। एक ओर परियोजना की नहरें ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी को सहारा दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर इससे नगर निगम अम्बिकापुर को अमृत योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 8.93 मिलियन घनमीटर जल उपलब्ध कराया जा रहा है।
35 वर्ष पुरानी नहरों को मिला नया जीवन, 23.81 करोड़ रुपये से हुआ जीर्णोद्धार
जल संसाधन संभाग क्रमांक-01, अम्बिकापुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्याम घुनघुट्टा परियोजना लगभग 35 वर्ष पुरानी है। लंबे समय से संचालित इस परियोजना की नहरों में समय के साथ कई स्थानों पर दरारें पड़ गई थीं। इसके अलावा जलीय जीव-जंतुओं द्वारा बिल बनाए जाने से भी नहरों के क्षतिग्रस्त होने की समस्या सामने आती थी।
नहरों के क्षतिग्रस्त होने से जल प्रवाह प्रभावित होता था। कई स्थानों पर पानी के रिसाव और नहरों की खराब स्थिति के कारण सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने में कठिनाइयां होती थीं। इससे किसानों को आवश्यकतानुसार सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी प्रभावित होती थी।
इन समस्याओं के समाधान के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा नहरों के जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य की योजना तैयार की गई। इसके अंतर्गत 08 मार्च 2019 को 2381.84 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
स्वीकृत राशि से नहरों का जीर्णोद्धार एवं लाइनिंग कार्य पूर्ण कराया गया है। इससे पुरानी नहरों की स्थिति में सुधार हुआ है और सिंचाई के लिए जल प्रवाह एवं वितरण व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है।
जब बारिश ने छोड़ा साथ, तब नहरों के पानी ने किसानों को दी राहत
सरगुजा जिले में वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 के दौरान अल्प वर्षा की स्थिति बनी थी। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के सामने फसलों की सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई थी। खेतों में पानी की कमी से कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी।
ऐसे समय में श्याम घुनघुट्टा परियोजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी। परियोजना की नहर प्रणाली के माध्यम से जिले के 63 गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया। इससे किसानों को वर्षा की कमी के बावजूद कृषि कार्य जारी रखने में सहायता मिली।
जिन किसानों की खेती वर्षा पर निर्भर रहती है, उनके लिए जरूरत के समय सिंचाई का पानी उपलब्ध होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्याम घुनघुट्टा परियोजना ने अल्प वर्षा की स्थिति में भी खेतों तक पानी पहुंचाकर कृषि गतिविधियों को सहारा देने में अपनी उपयोगिता साबित की है।
236 किलोमीटर की नहर प्रणाली, 63 गांवों की खेती को मिल रहा संबल
श्याम घुनघुट्टा परियोजना के अंतर्गत लगभग 236 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली विकसित है। इस विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से जिले के 63 गांवों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जा रहा है।
नहरों के जीर्णोद्धार और लाइनिंग कार्य से जल प्रवाह की व्यवस्था में सुधार हुआ है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत होने से पानी के वितरण को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिली है।