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राजनांदगांव, 30 नवंबर । जिले के सोमनी इलाके से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। खबर है कि सोमनी के पास पार्वती लुब्रिकेंट फैक्ट्री के आयल टैंक में धमाका हो गया। जिसके चपेट में आने से एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल मजदूर को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत गंभीर बनी हुई है। फैक्ट्री में ब्लास्ट की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेट और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद फैक्ट्री में लगी आग पर काबू पाया गया है।

रायगढ़, 30 नवंबर । थाना प्रभारी चक्रधरनगर निरीक्षक युवराज तिवारी के नेतृत्व में हमराह स्टाफ द्वारा दिनांक 28.11.2018 के शाम करीब 07.30 बजे मुखबिर सूचना पर इंदिरा विहार के पास ट्रक क्रमांक डब्लयूबी 23 डी 3256 को रोककर चेक किया गया, जिसमें करीब 19 टन कबाड समान (लोहा, टिन के टुकडे) को अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था, मौके पर ट्रक चालक से पूछताछ कर ट्रक को मय कबाड सहित जप्त कर ट्रक के चालक के विरूद्ध इस्तगासा क्रमांक 07/18 धारा 41(1+4)सीआरपीसी/379 आईपीसी की कार्यवाही की गई है ।

दंतेवाड़ा, 30 नवंबर । छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में आज सुबह नक्सलियों द्वारा बिछाए गए प्रेशर बम विस्फोट में एक सहायक आरक्षक रैनू भास्कर गंभीर रूप से जख्मी हो गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार अरनपुर थाने से आज सुबह पुलिस का संयुक्त बल गश्त सर्चिंग के लिए रवाना किया गया था। ग्राम ककाड़ी के समीप जंगल में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए पे्रशर बम में पैर पडऩे पर विस्फोट हो गया। धमाके में जिला बल का सहायक आरक्षक रैनू भास्कर गंभीर रूप से जख्मी हो गया है। रैनू को प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर किया जा रहा है।

बिलासपुर, 30 नवंबर । हाईकोर्ट ने किसी भी शासकीय कर्मचारी के निधन पर मृतक के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति व अन्य सहायता दिलाए जाने का दायित्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की है। अधिकारी को आश्रितों को नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए। कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ता के आवेदन को स्वीकार कर नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता डिगेश्वर प्रसाद के पिता विशेलाल बालोद में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 1999 में उनका निधन हो गया। पिता के निधन के समय याचिकाकर्ता की उम्र नौ साल थी। मृतक सहायक शिक्षक के आश्रितों को विभाग की ओर से अनुकंपा नियुक्ति के नियम के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता डिगेश्वर बालिग होने पर शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने आवेदन पेश किया। विभाग ने शासकीय कर्मचारी के निधन होने के बाद तीन वर्ष के अंदर ही अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का नियम होने का हवाला देते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया।
याचिकाकर्ता ने शिक्षा सचिव को भी आवेदन दिया। शिक्षा सचिव द्वारा भी आवेदन निरस्त किए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें कहा गया कि पिता का निधन होने के समय वह नाबालिग था। अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं थी। इसके अलावा विभाग की ओर से भी उसकी मां को कुछ नहीं बताया गया। बालिग होने पर आवेदन दिया गया है।
याचिका में जस्टिस पी सेम कोशी के कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी का निधन होता है तो विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का यह दायित्व है कि तीन माह के अंदर मृतक के आश्रित या उत्तराधिकारी को यह बताए कि अनुकंपा नियुक्ति कैसे मिलेगी। इसके अलावा मिलने वाले अन्य लाभ की भी जानकारी दी जानी चाहिए। याचिकाकर्ता के पिता का जब निधन हुआ तो वह अबोध बालक था। विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई। याचिकाकर्ता अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने का हकदार है। कोर्ट ने शासन को याचिकाकर्ता के आवेदन पर नियमानुसार निर्णय लेते हुए अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

कबीरधाम(कवर्धा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के गृह जिले कबीरधाम(कवर्धा ) के तहत दो विधानसभा सीट आती हैं पंडरिया और कवर्धा । कवर्धा में अभी भाजपा का ही कब्जा है, कवर्धा से अशोक साहू और पंडरिया से मोतीराम चंद्रवंशी भाजपा विधायक हैं। कवर्धा और पंडरिया विधानसभा पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, सांसद अभिषेक सिंह और परिवार के सदस्यों का सीधा दखल रहता है। यही नहीं, भाजपा उम्मीदवार को चुनाव जिताने के लिए मुख्यमंत्री का कुनबा खुद डेरा डालता है और वोटरों से सीधा संपर्क करता है। चुनाव में हर बार कवर्धा और पंडरिया से विधायक होने के बावजूद भाजपा नए उम्मीदवार पर दांव लगाती है। कवर्धा और पंडरिया से कांग्रेस भी कड़ी टक्कर देने के लिए मजबूत दावेदार मैदान में उतारती रही है। पंडरिया से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अकबर ने वर्ष 2008 के चुनाव में जीत दर्ज की थी। लेकिन उनके बाद से दोनों सीटों पर कांग्रेस को जीत नहीं मिल पाई। इस बार भाजपा हैट्रिक लगाने की तैयारी में है।

पंडरिया विधानसभा
छत्तीसगढ़ की पंडरिया विधानसभा सीट 2008 के परसीमन के बाद वजूद में आई है। एक बार कांग्रेस और एक बार बीजेपी इस सीट पर जीत चुकी है। मौजूदा समय में बीजेपी का कब्जा है। जबकि कांग्रेस दोबारा से वापसी के लिए बेताब है। पंडरिया विधानसभा के वनांचल का इलाका आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है और यहां पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा समस्या प्रमुख है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों ने यहां से जीत हासिल की है, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई है।2013 के विधानसभा चुनाव में पंडरिया सीट पर 15 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। बीजेपी के मोतीराम चन्द्रवंशी ने कांग्रेस के लालजी चन्द्रवासी को मात देकर कब्जा किया था।बीजेपी उम्मीदवार को 81685 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 74412 वोट मिले थे। इसके अलावा जीजीपी के निर्मल सलूजा को 7377 और सीएसएम के रामकृष्ण साहू को 5502 वोट मिले थे।2008 के नतीजे में कांग्रेस उम्मीदवार अकबर को 72397 वोट मिले थे। बीजेपी के लालजी चंद्रवासी को 70536 वोट मिले थे
कवर्धा विधानसभा
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह जिले कवर्धा की विधानसभा सीट वीआईपी सीट है। यहां पर पिछले दो चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। यानी इस बार नज़र हैट्रिक पर होगी।रमन सिंह का गृह जिला होने की वजह से इस सीट पर सभी की नज़रें टिकी होती हैं और सीएम की साख भी इससे जुड़ जाती है।हालांकि, बीजेपी के लिए चिंता का विषय ये है कि पिछला चुनाव यहां से विधायक अशोक साहू ने मात्र 2000 वोटों के अंतर से ही जीता था। ऐसे में रमन सिंह पर अपने ही घर में बीजेपी को जीत दिलाना ही चुनौती बन सकता है।2013 विधानसभा चुनाव में अशोक साहू, बीजेपी को 93645 वोट मिले अकबर भाई, कांग्रेस, को 91087 वोट मिले थे। 2008 विधानसभा चुनाव में सियाराम साहू, बीजेपी को 78817 वोट मिले और योगेश्वराज सिंह, कांग्रेस को 68409 वोट मिले थे। 2003 विधानसभा चुनाव में योगेश्वराज सिंह, कांग्रेस को 51092 वोट मिले थे जबकि सियाराम साहू, बीजेपी ने 46904 वोट पाए थे। इस सीट की चर्चा करना इसलिए भी लाजिमी है क्योंकि इस विधानसभा सीट पर जीत-हार के अंतर से नोटा को मिले वोटों की संख्या तीन गुना से भी ज्यादा थी। इस सीट पर बीजेपी के प्रत्याशी अशोक साहू ने 93,645 से वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। वहीं, कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार रहे अकबर भाई को 91,087 वोट मिले थे। इस सीट पर जीत-हार का अंतर 2,558 मत का रहा था। वहीं इस सीट पर नोटा को मिले वोटों की संख्या 9,229 थी।

ब्यूनस आयर्स । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से मुलाकात की। दोनों ने वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की भूमिका पर चर्चा की। पीएमओ सूत्रों ने बताया बैठक इस बात का प्रतीक है कि दोनों नेता जलवायु परिवर्तन के मुद्दे को काफी महत्व देते हैं। दोनों के बीच यह बैठक पोलैंड के कैटोविस में कोप 24 की होने वाली बैठक से एक सप्ताह पहले हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने अपने ट्वीट में कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने ब्यूनस आयर्स में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की एकजुट करने वाली भूमिका और पोलैंड के कैटोविस में कोप 24 की आगामी बैठक के विशेष संदर्भ में चर्चा की। पीएमओ सूत्रों ने बताया संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने पिछले दो महीने में दूसरी बार प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की है।
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर सऊदी अरब के वली अहद (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। दोनों ने आर्थिक, सांस्कृतिक और ऊर्जा संबंधों को बढ़ावा देने पर चर्चा की। बता दें कि दो दिन तक चलने वाले 13 वें जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे त्रिपक्षीय बैठक करने वाले हैं।
यह बैठक सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के अपने प्रभाव का विस्तार करने के बीच होने वाली है। त्रिपक्षीय बैठक ट्रंप और आबे के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक का विस्तार होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति 30 नवंबर और एक दिसंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर कई और देशों के नेताओं के साथ बैठक करेंगे।

-योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को बताया दलित
जयपुर । पीठाधीश्वर शारदा द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि भाजपा ने पहले इंसान को बांटा अब भगवान को बांट रही हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव में जाति-धर्म को लेकर खूब राजनीति हो रही है। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान बजरंगबली को दलित और वंचित करार दिया। उन्होंने अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, 'बजरंगबली एक ऐसे लोग देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं।' इस दौरान योगी आदित्यनाथ कांग्रेस पर जमकर बरसे। योगी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। यही नहीं पीठाधीश्वर शारदा द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने पाप किया है। उन्होंने कहा, बजरंगबली कैसे दलित थे यह मुख्यमंत्री बताएं। योगी ने यह कहकर पाप किया है। शंकराचार्य ने कहा, भगवान को दलित कहना यह स्वयं अपराध और पाप है, क्योंकि हमारे यहां दलित नाम का कोई शब्द नहीं था। दलित का अर्थ होता है कि जिसके साथ अत्याचार हुआ हो, जो अत्याचार से पीड़ित हो।
वहीं राजस्थान के एक संगठन सर्व ब्राह्मण समाज ने तो इस पर योगी को नोटिस भेजकर माफी मांगने को कहा है। समाज का कहना है कि बजरंग बली न तो दलित हैं, न वंचित और न ही लोकदेवता। राजस्थान चुनाव: पीएम मोदी बोले, सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो किसान बहुत सुखी होता समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने अपने वकील के जरिए भेजे नोटिस में योगी आदित्यनाथ से इस मामले में माफी मांगने को कहा है और तीन दिन में ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। ब्राह्मण समाज ने नोटिस में कहा है कि हनुमान भगवान हैं। उन्हें वंचित और लोकदेवता बताना न केवल उनका बल्कि लाखों हनुमान भक्तों का अपमान है। कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने भी योगी के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा, भाजपा अभी तक इंसान को बांटने का काम कर रही थी, लेकिन अब यह भगवान को भी जाति में बांट रहे हैं।

राजस्थान में मतदान का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, चुनावी समीकरण ज्वारभाटे की तरह बदल रहे हैं। प्रारंभिक परिदृश्यों में कांग्रेस भाजपा पर भारी साबित होती दिख रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ताजा चुनावी सभाएं भाजपा की हारी बाजी को जीत में बदलती दिख रही है। कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी से भी यह जमीन तैयार हो रही है, एक तरह से जीत की ओर बढ़ती कांग्रेस को नुकसान होने की पूरी-पूरी आशंका है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक एवं चुनाव पूर्व के अनुमान अभी भी कांग्रेस के ही पक्ष में हैं और माना जा रहा है कि इस बार सत्ता परिवर्तन होगा और स्पष्ट बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बनेगी। सट्टा बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस 125 सीटों के साथ सरकार बना रही है वहीं भाजपा 50 से 55 सीटों पर सिमट जाएगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
 
जिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं उनमें राजस्थान ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा की सत्ता में वापसी सर्वाधिक मुश्किल मानी जा रही है। राजस्थान में पिछले तीन दशक से अदल-बदलकर सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है। पिछली बार भाजपा सत्तारूढ़ हुई थी। इस परंपरागत रुझान के मुताबिक इस बार मौका कांग्रेस को है। इसी वर्ष हुए उपचुनावों में मिली पराजय से भाजपा को करारा झटका भी लगा है और कांग्रेस आशान्वित हुई। अलवर और अजमेर लोकसभा तथा मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर मिली जीत से कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ी हैं। इस बार भाजपा फिर एक बार वसुंधरा राजे सिंधिया पर अपना दांव लगा रही है, जबकि कांग्रेस ने किसी को भी अपना मुख्यमंत्री प्रत्याशी नहीं बनाया है। सत्ता विरोधी लहर से चिंतित मुख्यमंत्री राजे पिछले छह माह से संघर्षरत हैं। उन्होंने 4 अगस्त को मेवाड़ से ‘राजस्थान गौरव यात्रा’ के जरिए अपना चुनावी अभियान शुरू किया। यात्रा की शुरुआत में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मौजूद थे। 58 दिनों की इस यात्रा में वह राज्य के लोगों से मिलती रही हैं और आगामी चुनाव के लिए जनादेश मांगती रही हैं। यह यात्रा राज्य की 200 में से 165 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी।
 
 
भाजपा ने 180 सीटों पर विजय का लक्ष्य रखते हुए अपने चुनाव अभियान को ‘मिशन 180’ नाम दिया है। इस मिशन के तहत भाजपा ने ए ग्रेड की 65 विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है। ये वे सीटें हैं, जिन पर भाजपा लगातार दो या इससे अधिक बार जीत रही है। अब भाजपा यह रणनीति बना रही है कि कम से कम 65 सीटों से गिनती प्रारंभ हो और फिर मिशन 180 तक पहुंचा जाए। राजनैतिक दलों के लिहाज से राजस्थान हमेशा दो विकल्पों से घिरा रहा है, कांग्रेस और भाजपा। भाजपा ने 2013 के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त कामयाबी हासिल की थी। कुल 200 में से 163 सीटें जीतकर तीन चौथाई बहुमत के साथ भाजपा सत्तारूढ़ हुई थी, जबकि कांग्रेस 21 और बसपा 3 सीटों पर ही सिमट गईं थीं। इस चुनाव में भाजपा को 45.50 फीसदी, कांग्रेस को 33.31 और बीएसपी को 3.48 फीसदी वोट मिले थे। बाद में 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 25 सीटों पर भाजपा का परचम लहराया था।
 
उधर भाजपा से सत्ता छीनने की हरसंभव कोशिशों में कांग्रेस जुटी है। सत्ता वापसी के लिए कोशिश कर रही कांग्रेस किसी एक नाम पर अभी सहमत नहीं हो पाई है। इसीलिए पार्टी ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा जाएगा, ना अशोक गहलोत चेहरा होंगे और ना ही सचिन पायलट। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जयपुर में 13 किमी का रोड शो कर कांग्रेस के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत की थी। एक तरफ कांग्रेस वसुंधरा सरकार को घेरने में लगी है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस बूथ स्तर पर अपने संगठन को मजबूत करने में लगी है। बूथ स्तर पर कांग्रेस ने अपनी मजबूती को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में ‘मेरा बूथ, मेरा गौरव’ नाम से एक अभियान भी चलाया है। चुनाव की रणनीति के अन्तर्गत कांग्रेस जातीय समीकरणों का हवाला देते हुए हवा अपने पक्ष में होने का दावा कर रही है। कांग्रेस ने ब्राह्मण, राजपूत और दलितों की नाराजगी को हवा देकर राजनीतिक समीकरण बनाये हैं।
 
 
विडम्बनापूर्ण स्थिति तो यह है कि दोनों ही राजनीतिक दल चुनावी मुद्दे के तौर पर कोई ठोस प्रस्तुति नहीं दे पाये हैं। एक तरह से ये चुनाव मुद्दे विहीन चुनाव ही हैं। हालांकि दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल विकास को अपना मुख्य मुद्दा बता रहे हैं, लेकिन जमीनी तौर पर आरक्षण, किसान और गाय ही प्रमुख मुद्दे बनते नजर आए हैं। गूजर और जाटों के आरक्षण आंदोलन में झुलस चुके राजस्थान में अत्याचार अधिनियम के मुद्दे पर राजपूत और ब्राह्मण भी लामबंद होने की कोशिश में हैं। भाजपा के बागी नेता घनश्याम तिवाड़ी ने तो इस मुद्दे पर तीसरा मोर्चा बनाने का ऐलान किया है। भाजपा को इस बार गाय वोटों की कामधेनु नजर आ रही है। वह गौ-तस्करी को लगातार मुद्दा बनाती रही है तो कांग्रेस गौ तस्करी के शक में पीट पीटकर लोगों को मारने की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरती रही है। उधर फसल के सही दाम नहीं मिलने और कर्ज के कारण किसानों की आत्महत्याओं के मामलों को लेकर भी विपक्षी दल भाजपा सरकार को घेरने में जुटे हैं।
 
कांग्रेस ने वसुंधरा सरकार की कार्यप्रणाली के प्रति उपजे असंतोष को भी चुनावी मुद्दा बनाया है। वसुंधरा सरकार के कई मंत्री सार्वजनिक तौर पर मुख्यमंत्री की तानाशाही प्रवृत्ति के प्रति असंतोष जाहिर कर चुके हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने पार्टी से बगावत का ऐलान किया। दोनों ही दलों में बागी स्वर बुलन्द हैं। जिससे इन चुनावों में दोनों को ही भारी नुकसान होने की संभावनाएं हैं। कांग्रेस भी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी के गुटों में बंटी है। जिन लोगों को टिकट नहीं मिला, वे बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे दोनों ही दलों की जीत प्रभावित होगी।
 
राजस्थान में चुनावी प्रचार चरम पर है। इसमें जमीनी मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत छींटाकशी, जाति, धर्म, सम्प्रदाय और क्षेत्रवाद हावी है। इसमें कोई भी दल दूसरे से पीछे नहीं रहना चाहता। एक−दूसरे की जाति को लेकर निजी हमले किए जा रहे हैं। राजनीतिक दलों के नेता सत्ता हथियाने के लिए कैसे समाज में जहर घोल कर देश को कमजोर करने का काम करते हैं, इसे राजस्थान में चले रहे विधानसभा चुनावों में देखा−समझा जा सकता है। परवान पर पहुंच चुके चुनाव प्रचार में कांग्रेस और भाजपा ने मानो नैतिकता, देश की एकता−अखण्डता और सौहार्द को गिरवी रख दिया है। चुनावों में दोनों ही प्रमुख दलों के नेता एक−दूसरे के खिलाफ विषवमन करने में पूरी ताकत से जुटे हैं। विकास और तरक्की के वायदे हवा हो गए हैं। राज्य में करोड़ों मतदाताओं की आशा−अपेक्षा अब धूल−धूसरित हो रही है। प्रदेश में आम मतदाताओं की दुख−तकलीफों से लगता है कि किसी दल का वास्ता ही नहीं रह गया। वास्तविक मुद्दों की बजाए मतदाताओं को बांटने की पूरी कोशिश की जा रही है।
 
यह अलग बात है कि मतदाताओं ने बेतुकी और विकास को भटकाने वाली बातें करने वाले नेताओं को पहले भी कई बार आईना दिखाया है। इसका भाजपा और कांग्रेस ने अपने राजनीतिक इतिहास से सबक नहीं लिया। गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाने से पहले देश को सिर्फ बेहतर विकास और भविष्य का ख्वाब दिखाया गया था। कांग्रेस के काले कारनामों से परेशान हो चुके देश के मतदाताओं ने मोदी पर पूरा भरोसा जताते हुए देश की कमान सौंप दी थी। अब देखना है कि राजस्थान में मोदी का जादू कैसे कांग्रेस की जीती पारी को हार में बदलने में सक्षम होता है ? देखना यह भी है कि मतदाता के दिलों पर उनका कैसा असर कायम है ?
  
लेकिन यह तय है कि चुनाव का समय मतदाता को ही लोकतन्त्र का मालिक घोषित करता है। हमने आजादी के बाद से हर चुनाव में मतदाताओं की वह बुद्धिमानी देखी है जो राजनीतिज्ञों को मूर्ख साबित करती रही है। इसकी असली वजह यह होती है कि मतदाता हर चुनाव में उस राजनैतिक एजेंडे को ही गले लगाते हैं जो उनके दिल के करीब होता है। मगर राजनीतिज्ञों को मतदान के दिन तक यह गलतफहमी रहती है कि वे उनकी गढ़ी हुई राजनैतिक शब्दावली के धोखे में आ जायेंगे। अतः जो लोग सोच रहे हैं कि राजस्थान के चुनाव में असंगत बातों को उछाल कर बाजी जीती जा सकती हैं या मतदाता को ठगा या गुमराह किया जा सकता है, उन्हें अंत में निराश ही होना पड़ेगा। अब हार-जीत का निष्कर्ष जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दे पर टिका है, क्योंकि एक दिन की बादशाह जनता ही होती है जो किसी भी दल या नेता को ‘फर्श’ से उठा कर ‘अर्श’ पर पहुंचा देती है या ‘अर्श’ से ‘फर्श’ पर पटक देती है।
 
-ललित गर्ग

नई दिल्ली। भारत ने अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के सरकारी चैनल पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। बता दें कि भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय ने पीटीवी पाकिस्तान (PTV Pakistan ) के प्रसारण पर भारत में प्रतिबंध लगाया हुआ है। सरकार द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध के बावजूद सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन ने पाकिस्तान में हुए करतापुर कोरिडोर शिलान्यास समारोह के लाइव दृश्य पीटीवी के जरिए दिखाए।

ऐसा करके दूरदर्शन ने भारत सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की धज्जियां उड़ा दीं।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले पर प्रसार भारती ने कोई भी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। दूरदर्शन के सूत्रों का कहना है कि हमनें एएनआई से लाइव फीड उठाकर चैनल पर चलाए थे। 

बता दें कि भारत सरकार ने पाकिस्तान के 20 चैनलों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, क्योंकि ये सभी चैनल भारत विरोधी सामग्री का प्रदर्शन करते हैं। वहीं, इस चैनल के दृश्यों को दिसंबर 2015 में उस वक्त दिखाया गया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक से पाकिस्तान में नवाज शरीफ से मिलने पहुंच गए थे। 

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कथित तौर पर रामदेव के जीवन पर आधारित किताब के प्रकाशन और बिक्री पर रोक लगाने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ प्रकाशक की याचिका पर योग गुरु को नोटिस जारी किया। रामदेव ने दावा किया था किताब में मानहानिकारक सामग्री है जिसके बाद उच्च न्यायालय ने 29 सितंबर को रोक का आदेश दिया था।

मामले पर आगे की सुनवाई अगले वर्ष फरवरी माह के पहले हफ्ते में होगी। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘हम वादी संख्या एक (रामदेव) को नोटिस जारी करेंगे।’’ उच्च न्यायालय के फैसले को प्रकाशक जगरनट बुक्स ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।
 
इससे पहले, रामदेव ने ‘‘ गॉडमैन टू टायकून ’’ नाम की किताब के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें कहा था कि किताब कथित तौर पर उनके जीवन पर आधारित है और उसमें मानहानिकारक सामग्री है जिससे उनकी प्रतिष्ठा और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

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