राजनीति

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नई दिल्ली । जंबो कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और सात जिलाध्यक्षों को हटाए जाने का मसला दिल्ली कांग्रेस के गले की फांस बनता नजर आ रहा है। भीतर ही भीतर सुलग रही बगावत की ¨चगारी अब धधकने लगी है। शायद यही वजह है कि गुस्से से भरे अनदेखी के शिकार नेताओं के सब्र का बांध टूटने लगा है। ऐसे ही कुछ नेताओं ने बृहस्पतिवार को पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी को पत्र भेजकर दिल्ली कांग्रेस का हाल बयां कर ही दिया। पत्र की प्रति एआइसीसी की अनुशासन समिति की सदस्य अंबिका सोनी को भी भेजी गई है। शीला दीक्षित सरकार के एक पूर्व मंत्री तो शुक्रवार को सोनिया से मिलकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, इस पत्र में सोनिया गांधी को दिल्ली कांग्रेस की वास्तविक स्थिति से अवगत कराने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली में हाशिए पर खड़ी कांग्रेस की इस हालत के लिए इन नेताओं ने प्रदेश प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। पत्र लिखने वालों में पूर्व विधायक से लेकर पूर्व निगम पार्षद तक शामिल हैं। इन सभी ने आलाकमान को एमसीडी चुनाव के प्रति आगाह करते हुए यह भी कहा है कि राजनीतिक माफियाओं ने दिल्ली में कांग्रेस का विनाश कर दिया है। अब ये राजनीतिक माफिया कौन है, पत्र में स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन इशारा जरूर किया गया है। इसमें कहा गया है कि कार्यकर्ता काम करने के लिए तैयार है लेकिन पार्टी के भीतर आत्म-सम्मान नहीं मिल रहा है। उनके वजूद को पार्टी नकार रही है। पत्र में शिकायत की गई है कि दिल्ली में कांग्रेस का संगठन बुरी तरह से तहस-नहस हो चुका है। प्रदेश नेतृत्व पार्टी में नए खून को आकर्षित करने और उत्साहित करने में बुरी तरह विफल रहा है। पुराने मेहनती कैडर को या तो बेवजह हटा दिया गया है या पार्टी छोड़ कर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पत्र में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस पर निरंकुश होने का आरोप भी लगाया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस पत्र के अलावा कई नेताओं ने आलाकमान से व्यक्तिगत तौर पर मिलने का समय मांगा है। अब देखना है कि सोनिया गांधी या राहुल गांधी इस मसले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं इस बीच कांग्रेस की एक और मौजूदा पार्षद पूनम बागड़ी व उनके पति अशवनी बागड़ी ने बृहस्पतिवार को सोनिया गांधी के नाम पार्टी के सभी पदों से अपना इस्तीफा भेज दिया है। इस इस्तीफे की वजह बताते हुए उन्होंले लिखा है कि प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी के चलते कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। आपसी गुटबाजी के कारण कांग्रेस का दिल्ली प्रदेश नेतृत्व जमीनी मुद्दों पर संघर्ष नहीं करता। बागड़ी ने प्रदेश नेतृत्व पर सहयोग नहीं करने का आरोप भी लगाया है।

नई दिल्ली । संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से कुछ ही दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं में मर्यादित एवं गरिमापूर्ण आचरण करें तथा देश एवं राष्ट्र हित में सामूहिकता के साथ काम करें ताकि आम लोगों के जीवन में सार्थक बदलाव आ सके। नाराज स्पीकर ने कहा कि मैं व्यथित हूं क्योंकि विपक्षी दलों को आकर मुझसे बात करते तो मैं कुछ समाधान निकलता। उन्होंने कहा कि ये पीएम या पार्टी का नहीं, संसद का कार्यक्रम था। ये अच्छी परंपरा नहीं है। मंच पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बैठने की भी व्यवस्था की गई थी। ओम बिरला ने कहा कि मेरी शिकायत ये है कि प्रेस में जाने से पहले मुझे बात करते तो अच्छा रहता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो भी मुद्दा उठाना चाहती है, नियम के तहत उठा सकती है। संविधान दिवस पर संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा संसद में हम देश की 135 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं और संसद के अन्दर होने वाली चर्चा से जो अमृत निकलेगा, उससे ही आमजन के जीवन में सार्थक बदलाव संभव है। उन्होंने कहा, जनप्रतिनिधि होने के नाते यह हमारा दायित्व है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में मर्यादित और गरिमापूर्ण आचरण करें। संसद की मर्यादाओं और उच्च गरिमापूर्ण परम्पराओं को कायम रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।’’ बिरला ने कहा कि हमें अच्छी परम्पराओं और परिपाटियों को और सशक्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी का ‘अमृत महोत्सव’ मनाते हुए हम अपने कर्तव्यों और दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लें। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि 72 वर्ष पहले आज के ही दिन हमारे देश का संविधान अंगीकार हुआ था और हमारे देश ने शांति, प्रगति और समानता के संकल्प के साथ विकास यात्रा शुरू की थी। उन्होंने कहा कि संविधान हमारे सांस्कृतिक विकास, हमारी महान सांस्कृतिक विरासत और आदर्शों का पवित्र ग्रंथ है। बिरला ने कहा कि यह हमारे अधिकारों का स्रोत है, जो हमें दायित्वों का भी बोध कराता है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संविधान एक भावना है जो हमें जोड़ने की ताकत देती है तथा जनता की आशाओं, अपेक्षाओं और उम्मीदों को पूर्ण करने का मार्ग दिखाता है।उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ सामाजिक आर्थिक परिवर्तन का दस्तावेज है और ऐसे अद्भुत संविधान का निर्माण करने वाले हमारे संविधान मनीषियों को नमन करते हैं। बिरला ने कहा कि हमारा संविधान आधुनिक गीता की तरह है, जो कर्म करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में हम सामूहिकता के साथ ही हम एक भारत,श्रेष्ठ भारत को साकार कर सकते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हमारे प्रगतिशील संविधान को विदेशों में भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि संविधान में नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता और समानता के मौलिक अधिकारों की व्यवस्था है, ऐसे में संविधान दिवस के दिन देश के लिए अपने कर्तव्यों पर विचार मंथन करें। संविधान दिवस पर संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सांसद एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। संसद में आयोजित कार्यक्रम का कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, सीपीआई, सीपीएम, डीएमके, अकाली, शिवसेना, एनसीपी, टीएमसी, आरजेडी, आरएसपी, केरल एम. आईयूएमएल और एआईएमआईएम है

ई दिल्ली देश आज 71वां संविधान दिवस मना रहा है। इस मौके पर संसद के सेंट्रल हॉल में मुख्य कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने परिवारवाद पर निशाना साधते हुए कांग्रेस को 'पार्टी फॉर द फैमिली, पार्टी बाय द फैमिली' कहा। मोदी ने यह भी कहा कि संविधान बनाने वालों ने देशहित को सबसे ऊपर रखा, लेकिन समय के साथ नेशन फर्स्ट पर राजनीति का इतना असर हुआ कि देशहित पीछे छूट गया।

जिस कांग्रेस पर प्रधानमंत्री ने निशाना साधा, उसके साथ देश की 14 विपक्षी पार्टियों ने संविधान दिवस के कार्यक्रम का बहिष्कार किया है। इनमें शिव सेना, NCP, समाजवादी पार्टी, राजद, IUML और DMK शामिल हैं। दरअसल, कांग्रेस और तृणमूल ने पहले ही कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस की अपील पर बाकी पार्टियों ने भी कार्यक्रम में न पहुंचने का ऐलान कर दिया।

मुंबई हमले में मारे गए लोगों को याद किया

कार्यक्रम की शुरुआत में मोदी ने कहा, 'आज का दिन अंबेडकर, राजेंद्र प्रसाद जैसे दूरंदेशी महानुभावों को नमन करने का है। आज का दिन इस सदन को प्रणाम करने का है। आज 26/11 का भी दिन है। वो दुखद दिन, जब देश के दुश्मनों ने देश के भीतर आकर मुंबई में ऐसी आतंकवादी घटना को अंजाम दिया। भारत के संविधान में सूचित देश के सामान्य आदमी की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत अनेक हमारे वीर जवानों ने उन आतंकवादियों से लोहा लेते-लेते अपने आपको समर्पित कर सर्वोच्च बलिदान किया। मैं आज उन सभी बलिदानियों को नमन करता हूं।'

राजनीति के चलते देशहित पीछे छूटा

मोदी ने कहा, 'कभी हम सोचें कि हमें संविधान बनाने की जरूरत होती तो क्या होता। आजादी की लड़ाई, विभाजन की विभीषिका का बावजूद देशहित सबसे बड़ा है, हर एक के हृदय में यही मंत्र था संविधान बनाते वक्त। विविधिताओं से भरा देश, अनेक बोलियां, पंथ और राजे-रजवाड़े, इन सबके बावजूद संविधान के माध्यम से देश को एक बंधन में बांधकर देश को आगे बढ़ाना। आज के संदर्भ में देखें तो संविधान का एक पेज भी शायद हम पूरा कर पाते। क्योंकि, समय ने नेशन फर्स्ट पर राजनीति ने इतना प्रभाव पैदा कर दिया है कि देशहित पीछे छूट जाता है।'

अपना मूल्यांकन करने की जरूरत

PM ने कहा, 'साथियों, हमारा संविधान सिर्फ अनेक धाराओं का संग्रह नहीं है। संविधान सहस्त्रों सालों की भारत की महान परंपरा, अखंड धारा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। हमारे लिए लेटर एंड स्प्रिट में संविधान के प्रति समर्पण है। जब हम संवैधानिक व्यवस्था से जनप्रतिनिधि के रूप में ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक दायित्व निभाते हैं, तो इसी भावना को याद रखना होगा। ऐसा करते वक्त संविधान की भावनाओं को कहां चोट पहुंच रही है, इसे भी नजरंदाज नहीं कर सकते हैं। इस संविधान दिवस को इसलिए भी मनाना चाहिए कि जो कुछ भी कर रहे हैं, वो संविधान के लिहाज से सही है या गलत। रास्ता सही है या गलत। हमें अपना मूल्यांकन करना चाहिए।

26 नंवबर को ही मनाना चाहिए था संविधान दिवस

प्रधानमंत्री ने कहा, 'अच्छा होता देश आजाद होने के बाद 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की परंपरा शुरू करनी चाहिए थी। इसकी वजह से हमारी पीढ़ियां जानती कि संविधान बना कैसे, किसने बनाया, क्यों बनाया, ये कहां ले जाता है, कैसे ले जाता इसी चर्चा होती हर साल। इसे हमने समाजिक दस्तावेज और जीवंत इकाई माना है। विविधता भरे देश में ये ताकत के रूप में अवसर के रूप में काम आता। कुछ लोग इससे चूक गए। अंबेडकर की 125वीं जयंती पर हमें लगा कि इससे बड़ा पवित्र अवसर क्या हो सकता है कि अंबेडकर ने जो पवित्र नजराना दिया है, उसे हम याद करते रहें।'

संसद में 26 नवंबर का जिक्र करने पर विरोध हुआ

मोदी ने कहा, '2015 में जब इसी सदन में मैं बोल रहा था, उस दिन भी विरोध हुआ था कि 26 नवंबर कहां से लाए, क्यों कर रहे हो, क्या जरूरत थी। भारत संवैधानिक लोकतांत्रिक परंपरा है। राजनीतिक दलों का अपना अहम महत्व है। राजनीतिक दल भी हमारी संविधान की भावनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम हैं। संविधान की भावना को भी चोट पहुंची है। संविधान की एक-एक धारा को भी चोट पहुंची है।'

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हो रहा आयोजन

संसदीय मामलों के मंत्रालय की तरफ से जारी की गई रिलीज के मुताबिक, केंद्र सरकार संविधान दिवस को आजादी के अमृत महोत्सव के हिस्से के तौर पर मना रही है। संसद की तरफ से आयोजित किए गए कार्यक्रम को उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी संबोधित कर रहे हैं।

उनके संबोधन के बाद राष्ट्रपति उनके साथ मिलकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति कोविंद संविधान सभा की चर्चाओं की डिजिटल कॉपी, भारतीय संविधान की लिखित कॉपी का डिजिटल वर्जन और भारतीय संविधान की नई अपडेटेड कॉपी शामिल होगी, जिसमें अभी तक के सभी संशोधन शामिल किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान का जनजातीय संगठनों ने माना आभार

ख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कृत-संकल्पित है। जनजातीय भाई-बहन देश के पुनर्निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। जनजातीय भाई-बहनों की मांगों और आकांक्षाओं पर गंभीरता से विचार कर सकारात्मक रूप से कदम उठाए जाएँगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान निवास पर जनजातीय संगठनों के प्रतिनिधियों से भेंट कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान का जनजातीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम परिवर्तित कर जननायक टंट्या भील रेलवे स्टेशन करने की अनुशंसा करने के लिए आभार माना। इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर और इंदौर में खंडवा रोड के भंवरकुआं चौराहे का नामकरण जननायक टंट्या मामा भील पर करने और पातालपानी स्थित जननायक टंट्या भील की समाधि स्थल के मंदिर का जीर्णोद्धार करने की घोषणा तथा इंदौर में निर्माणाधीन आईएसबीटी बस स्टैंड का नामकरण जननायक टंट्या भील बस स्टैंड करने के लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान का आभार माना।

मुख्यमंत्री श्री चौहान से जनजातीय संगठनों ने महू में जनजाति गौरव केंद्र की स्थापना करने का अनुरोध किया। इसमें टंट्या मामा भील का जीवन परिचय, चित्रकला, ऑडियो- वीडियो माध्यमों से प्रदर्शित करने और जनजाति समाज के सभी महापुरुष, क्रांतिकारी, राष्ट्रीय नायकों की चित्र प्रदर्शनी तथा जनजाति समाज की परंपराओं, रीति-रिवाज, वेशभूषा, संस्कृति, कलाकृति, वाद्य यंत्र, शस्त्र-अस्त्र प्रदर्शित करने का अनुरोध भी किया। जनजातीय संगठनों ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में जनजातीय शोध पीठ की स्थापना तथा मालवा के जनजातीय क्षेत्र के लिए जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान आरंभ करने का निवेदन भी किया। यह संस्थान वन संवर्धन, वनोपज और उसके वैल्यू एडिशन, मार्केटिंग इत्यादि विषयों पर शोध और प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराएगा। संगठनों ने निवेदन किया कि इन गतिविधियों से जनजातियों के सामाजिक सशक्तिकरण के साथ-साथ आर्थिक उन्नयन का मार्ग प्रशस्त होगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान से निवास पर भीमा नायक वनांचल सेवा समिति के श्री रमेश गामोड़, श्री खेम सिंह जमरा, श्री राजेश डावर, श्री राकेश कटारा, श्री जय ओमकार, भिलाला समाज के श्री संतोष बघेल, जनजाति विकास मालवा के श्री पूजा लाल निनामा, श्री गोविंद भूरिया, टंट्या मामा ग्रुप के श्री राधेश्याम जामले, श्री भाया राम भास्कर, रानी दुर्गावती गोंडवाना परिषद के श्री विक्रम मस्कुला, भील जनजाग्रति मंच के श्री श्यामा जी ताहेड़ तथा महाराणा भील सेवा समिति के श्री शंकर लाल कटारा ने भेंट की। मुख्यमंत्री श्री चौहान को प्रतिनिधि मंडल द्वारा जननायक टंट्या मामा का चित्र भेंट किया गया।

 

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव ने ममता बनर्जी की अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को शानदार जीत मिली थी। प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनी। इससे पहले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी बंगाल में शानदार प्रदर्शन किया था। 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) या सीपीआई (एम) और उसके वामपंथी सहयोगियों को नई विधानसभा में एक भी विधायक नहीं मिला है। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ममता निश्चिंत से नहीं बैठीं। वह लगातार पार्टी के विस्तार में जुटी हैं। टीएमसी पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेताओं और विधायकों तो अन्य भारतीय राज्यों में कांग्रेस के नेताओं और विधायकों का लगातार शिकार कर रही है। ताजा मामला मेघालय का है, जहां कांग्रेस के 12 विधायकों ने टीएमसी का दामन थाम लिया। इससे अब पूर्वोत्तर राज्य में टीएमसी अब मुख्य विपक्षी दल बन जाएगी। अगर टीएमसी के विस्तार को राष्ट्रीय फलक पर देखें तो इन दिनों सियासी गलियारों में एक सवाल गूंज रहा है, क्या टीएमसी भारत में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस की जगह ले सकती है? हालांकि न तो टीएमसी और न ही ममता बनर्जी ने इस आशय का कोई स्पष्ट दावा किया है, लेकिन उनकी विस्तारवादी नीति उनकी इस महत्वाकांक्षा को प्रदर्शित करते हैं।

लोकसभा सीटों के मामले में टीएमसी के लिए कांग्रेस को पछाड़ना संभव
चुनावी नतीजों की भविष्यवाणी करना हमेशा खतरनाक होता है। 2024 के चुनाव अभी बहुत दूर हैं। इस चेतावनी के साथ, टीएमसी को कांग्रेस से अधिक लोकसभा सीटें मिलने का तार्किक मामला बनाया जा सकता है। लोकसभा चुनावों में टीएमसी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2014 में था, जब उसने पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 34 सीटों पर 39.8% वोट शेयर के साथ जीत हासिल की थी। 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था। संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार 2021 विधानसभा क्षेत्र के परिणामों के आकलन पर राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 32 सीटों पर टीएमसी को बढ़त मिली थी। आज की जो स्थिति है उसके मुताबिक, भाजपा पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले की तुलना में एक कमजोर हुई है। इसका मतलब यह है कि टीएमसी 2024 पश्चिम बंगाल से लोकसभा की अपनी संख्या 2019 से काफी ऊपर ले जाने की उम्मीद कर रही होगी। कांग्रेस की बात करें ते 2019 के आम चुनावों में 52 लोकसभा सीटें जीतने में सफल रही थी। इनमें से 31 सिर्फ तीन राज्यों: केरल (15) और पंजाब (8) और तमिलनाडु (8) से आए थे। 2021 के केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा। तमिलनाडु में कांग्रेस की किस्मत द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर निर्भर करेगी। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाहर होने से पार्टी को विभाजन का सामना करना पड़ा है। असम में कांग्रेस को 2019 में तीन लोकसभा सीटें हासिल हुईं थी। हालांकि, अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (एआईयूडीएफ) के साथ कांग्रेस का गठबंधन 2021 के विधानसभा चुनावों में बुरी तरह विफल रहा।

कांग्रेस से अधिक लोकसभा सीटें टीएमसी को राष्ट्रीय विकल्प नहीं बनाएगी
भले ही टीएमसी लोकसभा सीटों के मामले में कांग्रेस को पछाड़ने में कामयाब हो जाए, लेकिन प्राथमिक विपक्षी दल के रूप में पहचाने जाने के उसके दावे की विश्वसनीयता नहीं होगी। इसका सीधा सा कारण यह है कि संकट की घड़ी में भी कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर टीएमसी से कहीं अधिक बड़ा स्थान है। यह वोट शेयर के मामले में सबसे अच्छा देखा जाता है। 2019 के आम चुनावों में, कांग्रेस का अखिल भारतीय वोट शेयर 19.5% था। टीएमसी ने जब 2014 के आम चुनावों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हासिल किया था, तब भी उसका राष्ट्रीय वोट शेयर सिर्फ 4.1% था।

नई दिल्ली. शीतकालीन सत्र से पहले आज यानी गुरुवार को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक होगी। यह बैठक कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर होगी। इस बैठक में 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में कौन कौन से मुद्दे उठाए जाएंगे, इसको लेकर चर्चा होगी। इससे पहले सोमवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा था कि हम संसद के शीतकालीन सत्र में महंगाई का मुद्दा उठाएंगे। इसके अलावा कोरोना से मरने वालों के परिजनों को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने को लेकर भी चर्चा की जाएगी। 
उन्होंने कहा कि कांग्रेस न सिर्फ संसद के शीतकालीन सत्र में बल्कि सार्वजनिक मंचों पर भी 'कोरोना प्रबंधन' का मुद्दा उठाने की योजना बना रही है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कोरोना पीड़ितों को मुआवजे देने की मांग कर रहे हैं। हर राज्य के कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता भी राज्य में अपने-अपने मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेंगे जहां कांग्रेस सत्ता में नहीं है।
बीते बुधवार को महाराष्ट्र सीएलपी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा। पत्र के माध्यम से सीएलपी ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के मानदंडों के अनुसार कोरोना पीड़ितों के परिवारों के लिए एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का आग्रह किया। इसके अलावा कोरोना से मरने वालों के परिजनों के लिए तीन लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का आग्रह किया। सीएलपी नेता ने कहा कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के मानदंडों के अनुसार, केंद्र द्वारा चार लाख का 75 प्रतिशत भुगतान किया जाना है जबकि शेष 25 प्रतिशत राज्य की जिम्मेदारी है।

चार लाख देना होगा- राहुल गांधी
उधर, बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था, 'पार्टी की दो मांग हैं। पहला, कोरोना मृतकों के सही आंकड़े बताए जाएं। और दूसरा अपने प्रियजनों को कोरोना में खो चुके परिवारों को चार लाख हरजाना दिया जाए। सरकार हो तो जनता का दुख दूर करना होगा, हरजाना मिलना चाहिए।'

नई दिल्ली । पंजाब के मुख्‍यमंत्री चरणजीत स‍िंह चन्‍नी ने कहा कि उन्होंने कैप्‍टन अमरिंदर स‍िंह को हटाए जाने की मांग उठाई थी क्योंकि वह बीजेपी के साथ थे और अकालियों की तरह काम कर रहे थे। उन्होंने एक समाचार चैनल से कहा "लेकिन मैं मुख्यमंत्री पद का उम्‍मीदवार नहीं था, यह राहुल गांधी का निर्णय था, राहुल गांधी ने मुझे मुझे मुख्‍यमंत्री के रूप में चुना। उन्‍होंने मुझे फोन किया और कहा कि हम आपको सीएम बना रह हैं। मैं रोने लगा, ये आप क्‍या कर रहे हैं, मैं इस योग्‍य नहीं हूं।'' उन्‍होंने कहा, अब फैसला हो चुका है।
चन्‍नी ने कहा, ''मुझे सीएम के रूप में 4 महीने मिले हैं लेकिन मैं चार साल का काम करूंगा। ना तो मैं सोउंगा और ना ही अपने अधि‍कारियों को सोने दूंगा। अब सिस्‍टम बदल गया है।
अरविंद केजरीवाल द्वारा 'नकली केजरीवाल' कहे जाने पर सीएम चन्‍नी ने कहा, ''उन्‍हें कैसे पता दिल्‍ली का आम आदमी कौन है? जब उन्‍हें एहसास हुआ कि मुझे 'नकली आम आदमी' कह कर उन्‍होंने गलती कर दी है तो अब वो मुझे 'नकली केजरीवाल' कह रहे हैं। सभी वादे पहले ही पूरे किए जा चुके हैं।''
उन्होंने कहा, ''मैं मुख्‍यमंत्री पद की दौड़ में नहीं था। मैं जिस पृष्‍ठभूमि से आया हूं, मेरे बाप-दादा राजनीति में नहीं थे। एक आम आदमी के लिए इस सिस्‍टम में आना बहुत कठिन है। सबसे पहले मैंने निर्दलीय के रूप में चुनाव जीता था, मुझे नेता प्रतिपक्ष बनाया गया, मैंने कभी मांग नहीं की थी।''

 

लखनऊ । रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस से विधायक चुनी गईं अदिति सिंह बीजेपी में शामिल हो गई हैं।अदिति पिछले काफी समय से बीजेपी के करीब रही हैं।बुधवार को वह औपचारिक तौर पर बीजेपी की सदस्य बन गईं।अदिति सिंह के अलावा आजमगढ़ के सगडी से बीएसपी विधायक वंदना सिंह भी बीजेपी में शामिल हो गईं।इस दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष स्‍वतंत्र देव सिंह भी मौजूद रहे।
अदिति रायबरेली सदर से कांग्रेस की सीट पर 2017 में पहली बार विधायक बनी थी।लेकिन आदिति सिंह की सबसे बड़ी पहचान है कि वह बाहुबली अखिलेश सिंह की बेटी हैं, अखिलेश सिंह पांच बार के विधायक रहे कुछ वक्त पहले उनका निधन हुआ है और निधन के बाद से ही बीजेपी के ज्यादा करीब रही हैं।
पिछले कुछ समय में सदन में जब-जब वोटिंग के मौके आए अदिति सिंह ने बीजेपी के पक्ष में वोट डाला है, कांग्रेस पार्टी उनकी सदस्यता खत्म करने को लेकर पहले ही विधानसभा अध्यक्ष को लिख चुकी थी।
बात दें कि रायबरेली बीजेपी के लिए सबसे कमजोर इलाकों में एक रहा है और रायबरेली की सदर सीट बीजेपी कभी जीत नहीं पाई।अदिति सिंह के तौर पर बीजेपी को एक बड़ा चेहरा जरूर हाथ लगा है।यूपी चुनाव से पहले ये बीजेपी के लिए अहम फैसला हो सकता है।
हाल में अदिति ने कृषि कानूनों पर दिए बयान को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधकर कहा था कि प्रियंका गांधी के पास मुद्दे नहीं हैं।अदिति सिंह ने कहा था कि कृषि कानून वापस ले लिए गए हैं, तब भी उन्हें (प्रियंका) परेशानी है।वे आखिर चाहती क्या हैं? उन्होंने साफ साफ कहना चाहिए।वे सिर्फ मामले पर राजनीति कर रही है. यानि साफ है वह हालिया समय में कांग्रेस के खिलाफ मुखर रही हैं।

नई दिल्ली । दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक बड़ी रैली आयोजित करेगी, जिसमें कांग्रेस आलाकमान से लेकर कांग्रेस की सत्ता वाले सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्रियों समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल होंगे। इस रैली का उद्देश्य आगामी चुनाव को लेकर भाजपा समेत तमाम दूसरी पार्टियों की सच्चाई जनता के सामने रखना और मुद्दों पर उनको घेरना शामिल है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा दिल्ली में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें निर्णय लिया गया कि दिसंबर के पहले हफ्ते में रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली की जाए। वहीं जनता के सामने असल मुद्दों को उठाए जाना चाहिए। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के अलावा दिल्ली में मौजूद कांग्रेस वरिष्ठ नेता और सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री व अन्य कांग्रेस नेता रैली में शामिल होंगे। इसके अलावा पूरे देश से पार्टी कार्यकर्ता भी इस रैली में हिस्सा लेंगे। हालांकि, दिल्ली में दो जगहों पर इस रैली को आयोजित किया जा सकता है, इसमें पहला राम लीला ग्राउंड शामिल है। यदि वहां रैली करना मुमकिन नहीं हो सका तो द्वारका स्थित एक बड़े मैदान में इस रैली का आयोजन किया जाएगा।
इसके अलावा, कांग्रेस दिल्ली से देश भर में होने वाले आगामी चुनाव को लेकर जनता को संदेश देगी और विपक्ष पार्टियों के झूठ को उजागर करने की कोशिश करेगी। फिलहाल रैली को लेकर तैयारियां शुरू की जाने लगी है और इसपर विचार विमर्श भी किया जा रहा है। इस रैली में लाखों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बुलाना तय हुआ है।
उल्लेखनीय है कि देश के 5 राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं दिल्ली में भी नगर निगम चुनाव होंने हैं। ऐसे में कांग्रेस इस रैली के माध्यम से कहीं न कहीं अपना शक्ति प्रदर्शन भी करना चाहती है। इस रैली को लेकर हुई दिल्ली की बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू भी शामिल हुए थे। इसके साथ ही कांग्रेस महासचिव एवं राजस्थान प्रभारी अजय माकन, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, हरियाणा की प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष कुमारी शैलजा, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार और कई अन्य नेता बैठक में शामिल रहे।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहीं पंजाब में कांग्रेस की सरकार है। निर्वाचन आयोग के एक जनवरी, 2021 के आंकड़ों के अनुसार देश में सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में लगभग 14.66 करोड़ मतदाता हैं। वहीं, पंजाब में दो करोड़ से अधिक मतदाता हैं। उत्तराखंड में 78.15 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। मणिपुर में 19.58 लाख और गोवा में 11.45 लाख मतदाता हैं। पांचों राज्यों में कुल लगभग 17.84 करोड़ मतदाता हैं। कांग्रेस अपनी दिल्ली में होने वाली बड़ी रैली से इन सभी मतदाताओं के दिलों तक पहुंचने की कवायद करेगी।

लखनऊ । उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस लगातार अपनी रणनीतियों पर काम करना शुरू कर चुकी है। इसी बीच पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा 26 नवंबर से 'संविधान दिवस के मौके पर कांग्रेस का सदस्यता अभियान शुरू करने वाली हैं।इसके माध्यम से प्रियंका यूपी में पार्टी को मजबूत करने की कोशिशें करेंगी।बताया जा रहा हैं कि सदस्यता अभियान के माध्यम से कांग्रेस एक करोड़ लोगों को जोड़ेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस एक पखवाड़े में एक करोड़ सदस्य जोड़ने का लक्ष्य लेकर चलेगी। इसका सीधा उद्देश्य जनता के बीच पार्टी की पैठ को मजबूत बनाना है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव से ही प्रियंका ने मोर्चा संभाल लिया था और उनका लक्ष्य 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनाना था। हालांकि यूपी में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है और कांग्रेस अभी भी अपनी जमीन तलाश रही है।
इस माह की शुरुआत में उत्तरप्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिले में सदस्यता अभियान शुरू किया गया था लेकिन अब बड़े स्तर पर प्रियंका इसकी शुरुआत करने वाली हैं। इसके साथ ही एक करोड़ सदस्य बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में टीमों का गठन होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता बताया कि कांग्रेस का जनाधार बढ़ा है और लोग लगातार भरोसा भी जता रहे हैं।

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