राजनीति

राजनीति (3053)

गढ़ाकोटा। गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल किसान और पिछड़ा वर्ग आंदोलन के तहत गढ़ाकोटा पहुंचे। हार्दिक पटैल ने कहा हम किसी को हराने नहीं आए हम खुद को जिताने आए हैं। युवाओं, किसानों, महिलाओं के मुद्दे पर आए हैं। आज देश में बेरोजगार कौन है? क्या अदाणी का बेटा बेरोजगार है? क्या शिवराज सिंह चौहान का बेटा बेरोजगार है? क्या गोपाल भार्गव का बेटा बेरोजगार है? नहीं, सिर्फ किसान का ही बेटा बेरोजगार है। किसान का ही बेटा मजदूर बन रहा है।
हार्दिक पटेल ने कहा हम चाहते हैं घर- घर में जनजागरण हो, चेतना हो, ताकि जनविरोधी लोगों से लड़ सकें। गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहोगे तब तक अपने विचार और अधिकारों तक नहीं पहुंच पाओगे। हार्दिक ने एक बार फिर मंत्री गोपाल भार्गव को ठन- ठन गोपाल कहा।
हम सत्ता विरोधी: काॅलेज की छात्राओं के साथ हुई घटना पर हार्दिक ने कहा कि पिछड़े समाज की दो छात्राओं के साथ छेड़खानी फिर मारपीट हुई, जिससे उनकी पढ़ाई छूट गई। पिछड़ों की यही लड़ाई लेकर निकले हैं। आजाद हिंदुस्तान में जो लोग जीना चाहते हैं उन्हें मजबूत बनाएं, जागरूक किया जाए। भावांतर में किसानों से लूट हुई है। हार्दिक ने कहा हम कांग्रेस के साथ नहीं हैं, हम तो सत्ता के खिलाफ हैं। अब मप्र में दो ही पार्टियां हैं तो हम क्या करें।
भार्गव और हार्दिक समर्थक आमने- सामने: केंकरा से पथरिया जाते समय हार्दिक का काफिला बस स्टैंड पर रुका। जहां हार्दिक, जीवन , कमलेश साहू ने शहीदों की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया। हार्दिक के समर्थक रोड शो नगर में अंदर कराना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने रोक दिया। जिस पर हार्दिक समर्थकों ने नारेबाजी की। इस दौरान वहां मंत्री गोपाल भार्गव के समर्थक भी आ गए जिन्होंने भी नारे लगाए। एक दूसरे के खिलाफ करीब 15 मिनिट नारेबाजी हुई। जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। बाद में हार्दिक का काफिला नगर भ्रमण के बजाए पथरिया की ओर चला गया।
मैं भाजपा विरोधी हूं
पथरिया में हार्दिक ने कहा कि मैं बीजेपी का विरोधी हूं और उसके खिलाफ ही लड़ता हूं। क्योंकि भाजपा में किस तरह लोगों को डराया धमकाया जाता है, गलत नीतियों से गरीब मजदूर वर्ग का शोषण किया जाता है, जिसका सीधा साधा उदाहरण भी आप लोगों के सामने है। प्रदेश के मंत्री की पत्नी शिक्षा माफिया है, जिसका नाम हर कोई अच्छे से जानता है। क्या किसी गरीब का बच्चा उनके स्कूल में पढ़ सकता है। मैं किसी को गलत नहीं ठहराता और न ही में किसी को दोषी मानता हूं, हम सब इसके जिम्मेदार हैं। यह बात सोमवार को हाईस्कूल परिसर में किसान आमसभा में गुजरात के पाटीदार समाज के नेता हार्दिक पटेल ने कहा किसानों काे संबाेधित करते हुए कही।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव की तारीखों की घोषणा हो गई है। इसी के साथ इन राज्यों में चुनावी गहमागहमी का दौर तेज हो गया है। चुनाव तारीखों के एलान के बाद इन राज्यों में बड़े नेताओं के दौरे और रैलियों की संख्या बढ़ गई है। हम आपको बता रहे हैं इन राज्यों में चुनाव से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबरों का अपडेट। 

 

-मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी चयन को लेकर अंतिम दौर की बैठकें शुरू। दिल्ली में आज स्क्रीनिंग कमेटी की तीसरे दौर की बैठक होगी। इसमें बाकी बची हुई 159 सीटों पर मंथन होगा।

- छत्तीसगढ़ : कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी एक दिवसीय दौरे पर आज रायपुर आ रहे हैं। राहुल साइंस कॉलेज में जनसभा को संबोधित करेंगे। साथ ही सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा भी करेंगे। 

राहुल गांधी दोपहर बाद करीब ढाई बजे नियमित विमान से रायपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे।एसपीजी की रिपोर्ट के बाद राहुल गांधी के तय कार्यक्रमों में थोड़ा बदलाव किया गया है।

सुरक्षा कारणों की वजह से वह महामाया मंदिर नहीं जा पाएंगे। पहले राहुल गांधी का महामाया मंदिर जाने और वहां दर्शन-पूजन का कार्यक्रम था। 

नयी दिल्ली। मोदी सरकार पर इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास करने के कांग्रेस के आरोप पर पलटवार करते हुए भाजपा ने सोमवार को कहा कि नेताजी, सरदार पटेल, बाबा साहब आंबेडकर जैसे महापुरूषों के सम्मान पर विपक्षी दल को ऐतराज क्यों हो रहा है? भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने यहां कहा, ‘‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल, बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरूषों का सम्मान किये जाने का तो कांग्रेस को स्वागत करना चाहिए। लेकिन उसे इस पर ऐतराज है, क्यों?’’

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास नहीं कर रही है, बल्कि इन महापुरुषों के साथ जो नाइंसाफी हुई, जिस प्रकार इन्हें कांग्रेस ने भुलाने का काम किया, उसे दूर करते हुए उन्हें सम्मान देने का प्रयास किया जा रहा है। हुसैन ने कहा कि 75 साल में पहली बार, अखंड भारत की पहली सरकार को सम्मानपूर्वक, समारोह में याद किया गया। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि नेताजी की तरह ही सरदार पटेल और बाबा साहब आंबेडकर का योगदान भुलाने की कोशिश की गई। 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की याद में ‘‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’’ का अनावरण किया जा रहा है।
 
आरएसएस का योगदान 
स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस के योगदान पर कांग्रेस द्वारा सवाल उठाने के विषय पर हुसैन ने कहा कि कांग्रेस के लिये एक ही परिवार का योगदान मायने रखता है जबकि आजादी की लड़ाई में नागरिक होने के नाते अनेकानेक लोगों ने योगदान दिया और देश से मोहब्बत रखने वाला संगठन होने के नाते संघ ने भी योगदान दिया। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की धरोहर हथियाने के लिए 'षडयंत्रपूर्ण प्रयास' करने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा था कि भाजपा इतिहास फिर से लिखने के लिए व्याकुल है।

कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि 'व्याकुल भाजपा इतिहास फिर से लिखने की कोशिश कर रही है और सरदार पटेल एवं जवाहरलाल नेहरू के बीच तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं नेहरू के बीच एक काल्पनिक प्रतिद्वंद्विता पैदा कर रही है। इसने शुभ अवसरों का इस्तेमाल ओछे राजनीतिक हथकंडों के लिए किया है।’
 

  • पाटन और महासमुंद से रायपुर के एकात्म परिसर पहुंचे कार्यकर्ता, बाहर धरने पर बैठे
  • बाहरी प्रत्याशी को हटाने की मांग, सामूहिक इस्तीफे की दी धमकी, पुलिस फोर्स तैनात

 भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होते ही विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। एक ओर जहां कई विधायकों के टिकट कटने से उनके समर्थकों में नाराजगी है, वहीं हारे हुए नेताओं को फिर टिकट देने पर गुस्सा भी है। ऐसे में बाहरी व्यक्तियों को टिकट देने के पार्टी के फैसले के खिलाफ भड़के पाटन क्षेत्र के तमाम कार्यकर्ताओं ने रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंच जमकर हंगामा कर रहे है।

कार्यकर्ताओं ने मोती लाल वापस जाओ के लगाए नारे

  1.  

    पाटन से तमाम कार्यकर्ता रविवार शाम राजधानी स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय एकात्म परिसर पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे सैंकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता मोतीलाल वापस जाओ का नारा लगा रहे हैं। उनके इस प्रदर्शन में महासमुंद से आए कार्यकर्ता भी शामिल हो गए और बाहर धरना पर बैठ गए हैं। 

     

  2.  

    दरअसल, पाटन से भाजपा ने मोतीलाल साहू को टिकट दिया है। मोतीलाल को टिकट देने से नाराज स्थानीय भाजपा नेताओं ने उनका विरोध शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी भूपेश बघेल के खिलाफ स्थानीय उम्मीदवार उतारने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमें बाहरी प्रत्याशी नहीं चाहिए। 

     

  3.  

    प्रदर्शन कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाटन कांग्रेस का गढ़ रहा है। ऐसे में यहां किसी मजबूत उम्मीदवार को टिकट दिया जाना चाहिए था। बाहरी व्यक्ति होने से उसे पूरा सहयोग नहीं मिलेगा। स्थानीय को टिकट मिले, जिससे हमें जीत मिल सके। 

     

  4.  

    कार्यकर्ताओं ने मोतीलाल की जगह स्थानीय प्रत्याशी को टिकट ने मिलने पर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी पार्टी को दी है। इससे पहले कार्यकर्ता कुशाभाऊ ठाकरे परिसर भी पहुंचे और वहां मौजूद नेता नंद कुमार साय से बात करने का भी प्रयास किया। जब साय कार से जाने लगे तो कार्यकर्ताओं ने वहां भी उनका घेराव कर दिया। वहीं हंगामे के बाद भाजपा कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। 

     

 
19 महिला पत्रकारों के यौन शोषण का आरोप आखिरकार केन्द्र की मोदी सरकार पर भारी पड़ गया। आरोपों की शुरुआत में जो भारतीय जनता पार्टी 10 दिन से गुड़ खाए बैठी थी वो आखिर आरोप लगाने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या से तनाव में आती चली गई। आखिर अकबर का वतन लौटकर मानहानि का दावा ठोंकने और इसे राजनैतिक षड़यंत्र बताने का दावा फुस्स पटाखा साबित हो गया और दो दिन में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने अकबर से अपना पीछा छुड़ा लिया। आनन फानन में केन्द्रीय मंत्रीमंडल में विदेश राज्य मंत्री के पद से एमजे अकबर को इस्तीफा देना पड़ा।

 
मोदी मंत्रिमंडल से अकबर का इस्तीफा होने के फौरन बाद ही बताना शुरु हो गया है कि पीएम नरेन्द्र मोदी महिला वोटरों को नाराज नहीं करना चाहते थे और मीटू कैम्पेन के जरिए सामने आ रहीं महिलाओं को न्याय दिलाने का समर्थन करते हैं। इस सरकारी और सत्ताधारी दल के राग के बावजूद इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी सरकार ने इस लेटलतीफी में काफी हद तक फजीती करा ली है। मीटू कैम्पेन के जरिए जब भारत में यौन शोषण के खुलासे होने शुरु हुए तो दो चार फिल्मी हस्तियों के बाद मोदी सरकार भी इससे बच नहीं सकी थी। सरकार के विदेश राज्य मंत्री और देश के नामी संपादकों में शुमार रहे एमजे अकबर पर उनकी पुरानी अधीनस्थ पत्रकार प्रिया रमानी, गजाला बहाव, मजली डै आदि ने यौन शोषण के आरोप लगा दिए।
 
महिला पत्रकारों ने अकबर पर जिस तरह के आरोप लगाए थे वो बहुत ही गंभीर किस्म के थे, साथ ही कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ किन तरीकों से शोषण हो रहे हैं, इस बात को उजागर करते थे। मोदी सरकार ने इन गंभीर आरोपों के बावजूद भी शुरुआत में मंत्री एमजे अकबर के प्रति उतना कड़ा रवैया नहीं दिखाया जिसका आरोप लगाने वाली महिलाएं और उनसे सहानुभूति रखने वाला जनसमुदाय उम्मीद कर रहा था। 

 
अकबर के विदेश दौरे पर होने की बात कहकर मामले में अकबर को तलब करने को लटकाया गया। अकबर गंभीर यौन शोषण के अनेक आरोप लगे होने के बावजूद विदेश में भारतीय लोकतंत्र के प्रतिनिधि बने रहे और भारत सरकार की हैसीयत से सम्मान पाते रहे। यौन शोषण से जुड़े इस अहम मसले पर बीजेपी का लेटलतीफ रवैया कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। अकबर पर बीजेपी की कई दिनों तक चुप्पी सवाल खड़े करती है साथ ही इससे महिलाओं के साथ खड़े आम जनमानस में सरकार की पिछले कुछ दिनों में कुछ हद तक विपरीत छवि बनी भी है।
 
बेशक ये केवल अभी आरोप ही हैं और आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों ने न तो एफआईआर दर्ज करवाई हैं और अकबर के खिलाफ किसी तरह के सबूतों पर भी अब तक खुलासा नहीं हुआ है मगर फिर भी इन आरोपों को हलके में नहीं लिया जा सकता। अगर ऐसा संभव होता तो मोदी कैबीनेट से अमित शाह के करीबी और हाईप्रोफाइल मंत्री एमजे अकबर को आखिरकार इस्तीफा नहीं देना पड़ता।
 
सरकार ने इस्तीफा लेकर या अकबर ने इस्तीफा देकर देश भर में चर्चा में छाए इस मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल की कोशिश जरूर की है मगर आरोपों से इस्तीफे के बीच जितने दिन गुजरे हैं उनसे महिलाओं के साथ वाली मोदी सरकार की छवि को धक्का जरूर लगा है। 
 
मौके पर अकबर के बहाने कांग्रेस ने मोदी सरकार और पूरी भाजपा को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। इस मामले में देश के विभिन्न बुद्धिजीवियों ने भी पीड़ित महिलाओं के पक्ष में बयान दिए हैं तो नामी संपादकों और अखबारों ने एमजे अकबर पर लगे आरोपों को समर्थन देतीं कई विस्तृत घटनाओं को सोशल मीडिया पर उजागर किया है। नामी पत्रकारों और संपादकों के इन कई खुलासों को देश के लोग कैसे नकार सकते हैं।
 
इस मामले में सरकार पिछले कुछ दिनों में हर मोर्चे पर घिरी है। मोदी मंत्रिमंडल की महिला मंत्रियों को मीडिया के सवालों से बचकर निकलने वाले दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे तो भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा तक को भी उपलब्धियों पर बोलने के बीच अकबर पर सवाल किए जाने पर मौन रहकर निकलना पड़ा। सरकार को चौतरफा फंसते देख केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने जरूर मीटू कैम्पेन का समर्थन किया था मगर स्मृति ईरानी सरीखीं मोदी की करीबी मंत्री अकबर को लेकर सरकार को हमलों से बचाने में लगभग नाकामयाब ही रहीं थीं।
 
इस बीच भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया राहटकर ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती कार्यक्रम के दौरान पीड़ित महिलाओं पर ही सवालिया निशान लगा दिया था। आखिरकार महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर पैबंद से लग रहे मंत्री एमजे अकबर से इस्तीफा लेने में ही पार्टी ने भलाई और अगले चुनाव में सुरक्षित भविष्य समझा।
 
-विवेक कुमार पाठक

जयपुर । आम आदमी पार्टी का राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर घोषणा पत्र आगामी 28 अक्टूबर को जारी होगा, और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यह घोषणा पत्र जारी करेंगे। प्रदेश घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष रामपाल जाट ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि आगामी 23 अक्टूबर से जयपुर में आम आदमी पार्टी क तरफ से किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर अनशन भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अनशनस्थल पर ही घोषणा पत्र को लेकर सुझाव और खुली बहस की जाएगी। साथ ही 27 अक्टूबर तक घोषणा पत्र पर सुझाव लिए जाएंगे और फाइलन किया जाएगा । उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की जनसभा में यह घोषणा पत्र जारी होगा।
उन्होंने बताया कि किसानों के लिए प्रदेश के 4500 गांवों में 247 खरीद केंद्र बनाएं जो ऊंट के मुंह में जीरा जैसे है। सरकार की इन नीतियों की वजह से किसानों को अपना माल बिचौलियों को औने—पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। मूंगफली की फसल कट चुकी है लेकिन, ज्यादातर केंद्रों पर खरीद अभी तक शुरू नहीं की गई।

इसी तरह राजस्थान का किसान एक और बड़ी समस्या से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल किसानों का प्रीमियम उनके खातों से आॅनलाइन काट लिया गया। इस योजना में जिन किसानों की फसल खराब हुई हैं उनके क्लेम आज तक पास नहीं किए गए। ये किसान बीमा कंपनियों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं।

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा है कि भाजपा के कथा-कथित परिवार कहां गया था। इनकी स्वतंत्रता आन्दोलन में क्या भूमिका रही है। यह बयान उस परिप्रेक्ष्य में आया है जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से कहा था कि एक परिवार को याद रखने में अम्बेडकर, नेताजी, पटेल को भुलाया गया । सिंघवी ने बताया कि सुभाष चन्द बोस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नजदीकी संगठन हिन्दू महासभा को साम्प्रदायिक कहा था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का एक मात्र कार्य है कि इतिहास को मिटाना।

  • जोगी के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद बदला प्रोग्राम
  • 4 नवंबर को प्रदेश दौरे पर आएंगी बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष
  • बसपा में प्रत्याशियों की तीसरी सूची 26 अक्टूबर से पहले 

रायपुर. मायावती अब सीएम के राजनांदगांव से नहीं, बल्कि सरगुजा के सामरी से पार्टी के चुनाव प्रचार का आगाज करेंगी। वह 4 नवंबर को प्रदेश दौरे पर आएंगी। सामरी में सुबह दस बजे और 12 बजे भिलाई नगर में जनसभा को संबोधित करेंगी। पहले बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष की डोंगरगढ़ में इसी दिन रैली होने वाली थी। लेकिन, शुक्रवार को अजीत जोगी के चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान के बाद इस तरह का बदलाव हुआ है।

बसपा ने इस बार मायावती के धुआंधार प्रचार की योजना बनाई है। जिसके तहत उनकी प्रदेश में 6 रैलियां होंगी। इसमें से दो रैलियां पहले चरण की वोटिंग से पहले और बाकी चार रैलियां दूसरे चरण की वोटिंग से पहले होना तय किया गया है। इससे पहले चुनाव आचार संहिता लगने के बाद मायावती ने बिलासपुर में रैली की थी। लखनऊ में जोगी कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद हुई इस रैली के बाद ही उनके व्यापक प्रचार कार्यक्रम की योजना बनाई गई है।

 बसपा में अब दूसरे चरण के प्रत्याशियों की तीसरी लिस्ट को अंतिम रूप देने की कवायद भी तेज हो गई है। जल्द ही पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी हो सकती है। पार्टी ने शुक्रवार को 12 और उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही कुछ और बड़े नाम पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

 गठबंधन में सीपीआई के खाते में 2 सीटें जाने के बाद पार्टी के दूसरे चरण के लिए अब 27 प्रत्याशियों का चयन करना है। पहली सूची में पार्टी ने अपने हिस्से की पहले दौर की सभी 6 और दूसरे दौर की 12 सीटों पर नाम तय किए हैं। अब पार्टी को केवल 15 और नामों की घोषणा करनी है। दरअसल, 26 अक्टूबर से दूसरे दौर के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। लिहाजा पार्टी अब इस काम को जल्द अंजाम देना चाहती है।

  • दो बाइकों पर सवार तीन लोग कुछ दिनों से कर रहे परेशान
  • पुलिस को बाइकों के नंबर भी दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
  • एसपी से फोन पर शिकायत कर सुरक्षा दिलाने की मांग

बालोद. गुंडरदेही से आम आदमी पार्टी की घोषित प्रत्याशी नम्रता सोनी ने सियादेही मंदिर में दर्शन के दौरान छेड़खानी का आरोप लगाया है। सोनी ने बताया कि दो बाइक पर छह आरोपी थे। पुलिस को उन्होंने बाइक के नंबर भी दे दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई जांच नहीं हुई। उन्होंने शुक्रवार को एसपी आईके एलिसेला से फोन पर चर्चा कर सुरक्षा दिलाने की मांग की।

नम्रता का कहना है कि कहीं न कहीं ये उन्हें विपक्ष के लोगों की चाल लग रही है, जो उन्हें डराने की कोशिश कर रहे हैं। लगभग एक हफ्ते से वह नोटिस कर रहीं हैं कि कुछ लोग उनकी कार का पीछा करते हैं। सियादेही दर्शन करने के लिए परिवार सहित सात सदस्य गए थे। वहां भी 3 किमी तक अज्ञात बाइक सवार उनका पीछा करते रहे।

 मंदिर में भी जब दर्शन करके निकले, तो बाइक सवार युवक अश्लील टिप्पणियां करते रहे। जब वहां से घर के लिए रवाना हुए तो एक बाइक सवार कभी आगे तो कभी पीछे जाकर उनकी कार रोकने की कोशिश भी करता रहा।

 

जब तक नामांकन नहीं होता, तब तक हम उन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकते। - आईके एलिसेला, एसपी

रायपुर. अजीत जोगी 2013 की तरह इस बार भी कहीं से भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, उन्होंने मुख्यमंत्री रमन के खिलाफ राजनांदगांव से लड़ने का ऐलान किया था। वहीं, भाजपा 20 से ज्यादा व कांग्रेस 2 और विधायकों के टिकट काटने जा रही है। जानिए इन 3 बड़े राजनीतिक दांव के बारे में... 

ऋचा अकलतरा से और अमित मनेंद्रगढ़ से लड़ेंगे

  1.  

    अजीत जोगी के चुनाव न लड़ने का फैसला शुक्रवार को गठबंधन बैठक में हुआ। मायावती बार-बार छत्तीसगढ़ नहीं आ सकतीं इसलिए जोगी स्टार प्रचारक के रूप में काम करेंगे। बैठक के बाद बसपा ने दूसरे चरण के 12 उम्मीदवारों की दूसरी सूची भी जारी कर दी। इसमें ऋचा अकलतरा से लड़ने की जानकारी है। वहीं, अमित जोगी मनेंद्रगढ़ से लड़ सकते हैं। रेणु कोटा से कांग्रेस के टिकट का इंतजार करने के मूड में हैं।  

     

  2.  

    उइके की तरह समझौता तो नहीं हो गया? बहू, बेटा अलग-अलग पार्टियों से लड़ रहे हैं, जोगी कांग्रेस औचित्यहीन हो गई। -भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ 

    डाॅ. रमन सिंह के खिलाफ लड़ना बच्चों खेल नहीं। जोगी ने यही सोचकर फैसला किया होगा - श्रीचंद सुंदरानी, भाजपा प्रवक्ता 

     

  3. रमन ने शाह को सौंपी सूची, बस्तर की सीटों पर सिंगल नाम

     

    कांग्रेस के पहले चरण के नामों की घोषणा के बाद भाजपा ने रणनीति बदल दी है। मुख्यमंत्री रमन सिंह, सौदान सिंह, सरोज पांडे के साथ पवन साय की बैठक कर पैनल में आए नामों को एक बार फिर रिफाइन किया। उसके बाद शाम को रमन ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिले और प्रत्याशियों के नाम पर रायशुमारी की। इस दौरान राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री सौदान सिंह और पांडेय भी मौजूद थीं। संकेत हैं कि भाजपा 20 से अधिक मौजूदा विधायकों का टिकट काट सकती है। अब शनिवार को चुनाव समिति बैठक में प्रत्याशियों के नामों को रख सिर्फ औपचारिकता पूरी होगी। बस्तर की सभी 12 सीटों पर पैनल में अब सिंगल नाम हैं। मंत्री महेश गागड़ा और केदार कश्यप को टिकट मिलना तय माना जा रहा है। शुक्रवार की बैठक में 60 से ज्यादा नामों पर चर्चा हुई। विधायकों के नाम के साथ भी 2 से 3 नामों का पैनल है। इस बार 20-22 नए उम्मीदवारों में युवा-महिलाएं होंगी। शनिवार को आने वाली पहली सूची में करीब 50 नामों का ऐलान हो सकता है।

     

  4. कांग्रेस ने बदली रणनीति, राजनांदगांव में 4 एमएलए में से 2 को ही मिलेगा मौका

     

    राजनांदगांव के लिए कांग्रेस ने रणनीति में बदली है। यहां 4 सिटिंग एमएलए में से 2 को ही मौका मिलेगा। पार्टी डोंगरगांव सीट से दलेश्वर साहू और खैरागढ़ से सीटिंग एमएलए गिरिवर जंघेल को रिपीट कर सकती है। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए एनएसयूआई राष्ट्रीय महासचिव निखिल द्विवेदी को टिकट मिल सकता है। भोलाराम साहू के विरोध के कारण खुज्जी से कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य छन्नी साहू लड़ सकती हैं। यदि खुज्जी से महिला प्रत्याशी उतरीं तो मोहला-मानपुर सीट पर सेवानिवृत्त अफसर इंदर सिंह मंडावी काे टिकट मिलना तय माना जा रहा है। लेकिन मोहला-मानपुर में महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं मिला तो यहां से निशु शाह को पार्टी मैदान में उतार सकती है। डोंगरगढ़ सीट से पार्टी भुनेश्वर बघेल और धनेशा पटिला में से किसी एक को टिकट दे सकती है। हालांकि, पटिला इस सीट से पहले तीन बार चुनाव हार चुके हैं। ऐसे में भुनेश्वर की संभावना प्रबल है।

     

कांग्रेस को फिर गठबंधन का झटका

  1. एक हुए गोंगपा-सपा

     

    इधर गंठबंधन के मामले में कांग्रेस को एक और झटका लगा है। करीब महीने भर के इंतजार के बाद गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने छत्तीसगढ़ में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया है। गोंडवाना और सपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे। इन दोनों पार्टियों को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा ने भी समर्थन देने का ऐलान किया है। इस समझौते के  मुताबिक 70 सीटों पर गोंगपा चुनाव लड़ेगी, जबकि सपा 20 पर चुनाव लड़ेगी।

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