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कवर्धा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा वन मंडल कबीरधाम के सहयोग से करिया आमा जंगल सफारी स्थल में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं प्रकृति के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देते हुए विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन पटेल, जिला अध्यक्ष श्याम टंडन, वरिष्ठ पत्रकार डी.एन. योगी, ग्राम पंचायत चौरा की सरपंच श्रीमती दुर्गा लांझी, भोरमदेव अभ्यारण्य के सहायक परिक्षेत्र अधिकारी जय बंजारे सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में पत्रकार एवं नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पौधारोपण के साथ हुआ। उपस्थित अतिथियों ने जंगल सफारी परिसर में विभिन्न छायादार एवं फलदार पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस दौरान वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता, बढ़ते प्रदूषण की चुनौतियों तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार करने पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का संबंध अत्यंत गहरा है। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो मानव सभ्यता का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि धरती को बचाने का एक सशक्त माध्यम है। श्री पटेल ने लोगों से अपील की कि वे केवल पौधे लगाकर ही न रुकें, बल्कि उनकी देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित भी रखें। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज को जागरूक करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं और सामाजिक सरोकारों से जुड़े ऐसे अभियानों में पत्रकारों की भागीदारी समाज के लिए प्रेरणादायी है।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के जिला अध्यक्ष श्याम टंडन ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि जंगल, जल और जमीन हमारे जीवन के आधार हैं तथा इनके संरक्षण के बिना सतत विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से घटते वन क्षेत्र और बढ़ते प्रदूषण के कारण पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में पौधारोपण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
वरिष्ठ पत्रकार डी.एन. योगी ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का विषय है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति को पूजनीय माना और पेड़-पौधों को जीवनदाता का दर्जा दिया। भारतीय संस्कृति में वृक्षों का विशेष महत्व रहा है, लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। श्री योगी ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी माध्यम है। उन्होंने छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्राम पंचायत चौरा की सरपंच श्रीमती दुर्गा लांझी ने कहा कि ग्रामीण जीवन और प्रकृति का संबंध सदैव से अटूट रहा है। गांवों में आज भी लोग पेड़-पौधों और जल स्रोतों के महत्व को समझते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से अपने घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थलों पर अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की। उन्होंने इस आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन एवं वन विभाग को बधाई देते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
भोरमदेव अभ्यारण्य के सहायक परिक्षेत्र अधिकारी जय बंजारे ने वनों और जैव विविधता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वन केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे जल संरक्षण, वर्षा चक्र, जलवायु संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि एक विकसित और स्वस्थ समाज के लिए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। श्री बंजारे ने लोगों को पौधारोपण के वैज्ञानिक लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि प्रतिवर्ष एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया और पौधों की सुरक्षा एवं संवर्धन का वचन दिया। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पौधारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी साझा की।
करिया आमा जंगल सफारी की प्राकृतिक सुंदरता के बीच आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने यह संदेश दिया कि प्रकृति का संरक्षण केवल एक दिवस का विषय नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। लगाए गए पौधे भविष्य में न केवल हरियाली बढ़ाएंगे, बल्कि स्वच्छ वातावरण और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह आयोजन छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन की सामाजिक प्रतिबद्धता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी सकारात्मक सोच का प्रतीक रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि समाज, प्रशासन और जागरूक नागरिक मिलकर प्रयास करें तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है।

पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री

9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधि

रायपुर, 05 जून 2026/राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनती जा रही है। यह केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस‘ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्राप्त होती है।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन में उक्त बातें कही। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित अन्य संकायों में 7545 स्नातक और 1645 स्नातकोत्तर एवं 5 सुपर स्पेशयलिटी उपाधि प्रदान की गई तथा विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियांे को विभिन्न स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

राज्यपाल ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे राज्यपाल होने के नाते प्रदेश की जनता के हित के बारे में सोचते हैं, उसी प्रकार आपका दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप सभी ने मानवता की सेवा के उद्देश्य से इस क्षेत्र का चयन किया है। कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त यह डिग्री आपके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। जहां भी कार्य करें, मरीज के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और ऐसा कार्य करें जो देश, प्रदेश और समाज में मिसाल बने।

श्री डेका ने कहा कि वर्तमान समय में नेबरहुड डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन की परंपरा थी, जो मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को भलीभांति समझते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी मरीज के लिए गोल्डन ऑवर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता मरीज का जीवन बचा सकती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं। विज्ञान निरंतर आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशु, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रगति और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। श्री साय ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ अधोसंरचना विस्तार, साथ ही बस्तर में नक्सल उन्मूलन के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्याे का भी उल्लेख किया।

पात्र हितग्राहियों को डेढ़ लाख तक अनुदान राशि

रायपुर 5 जून 2026/छत्तीसगढ़ शासन, श्रम विभाग के अंतर्गत भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल में निर्माण कार्य से जुडे 60 प्रकार के प्रवर्गो में पंजीकृत कर उनके लिये जन्म से मृत्यु तक लगभग 28 प्रकर की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों के जीवनयापन के स्तर को उंचा उठाने एवं आय में वृध्दि तथा रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से मंडल में 3 वर्ष पूर्व पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों के लिये दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना संचालित की जा रही हैं जिसके अंतर्गत 1,50,000 रूपये की अनुदान राशि मण्डल द्वारा प्रदाय किया जाना प्रावधानित है। इस योजना के लिये पात्र निर्माण महिला श्रमिक अपने पसंद के ई रिक्शा कंपनी का चयन कर बैंक से ऋण प्राप्त करने के पश्चात् विभाग की वेबसाईटshramevjayate.cg.gov.in, Shramev Jayate Mobile App, नजदीकी श्रम संसाधन केन्द्र, च्वाईस सेंटर अथवा जिला श्रम कार्यालय बलौदा बाजार के कक्ष क्रमांक 117 में आकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न

रायपुर, 05 जून 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आगामी 21 जून को नीट (यू जी) 2026 की पुनः परीक्षा के सुचारु संचालन हेतु बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। उन्होंने परीक्षा के दौरान केन्द्र सरकार एवं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा जारी दिशा- निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने कहा है।

नीट पुनः परीक्षा 21 जून को

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को परीक्षा के पहले ही परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण करने और परीक्षा के लिए की गई तमाम तैयारियों के बारे जानकारी लेने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस है इसे ध्यान में रखते हुये परीक्षा संचालन में कहीं पर कोई दिक्कत नहीं हो यह सुनिश्चित कर लिया जाये। परीक्षा केन्द्रों पर आने जाने के लिए समुचित व्यवस्था हो। उन्होंने योगा दिवस से संबंधित गतिविधियों के कारण किसी भी परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा संचालन प्रभावित नहीं हो यह सुनिश्चित करने कहा है।

मुख्य सचिव ने कहा कि परीक्षा देने जा रहे बच्चें घबराये नही- परीक्षा अच्छे से दें। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की संयुक्त टीम बच्चों की काउंसलिंग करें कि उन्हें किसी भी तरह परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं है। मुख्य सचिव ने परीक्षा के एक दिन पहले 20 जून को परीक्षा संचालन के लिए तमाम व्यवस्थाओं के लिए माकड्रिल एक्सरसाइज करने के निर्देश दिए है। उन्होंने माकड्रिल की तैयारी पहले से करने कहा है। परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कहा गया है। परीक्षा के प्रश्न-पत्र एवं ओएमआर शीट एयर फोर्स के माध्यम से मूव होंगे। इन्हें सुरक्षा के साथ रखने कलेक्टर, एसपी को पहले से ही पर्याप्त तैयारी करने कहा गया है। प्रत्येक जिले में नियंत्रण कक्ष की स्थापना करने एवं परीक्षा दिवस पर सक्रिय रखने कहा गया है, जिससे परीक्षा संचालन का प्रभावी निगरानी की जा सकें।

नीट पुनः परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बैठक में शामिल हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक श्री अभिषेक सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में नीट पुनः परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में होगी। परीक्षा के लिए कुल 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए है। श्री सिंह ने सभी जिला र्प्रशासन के अधिकारियों से परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां करने एवं सहयोग और समन्वय करने का अनुरोध किया।

बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस. सहित राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा नामित छत्तीसगढ़ राज्य नोडल अधिकारी श्री पीयुष शुक्ला सहित छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा संचालनालय, पुलिस विभाग तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारी सहित सरगुजा, बालोद, बीजापुर, बिलासपुर, दुर्ग, दंतेवाड़ा, धमतरी, बस्तर, जांजगीर-चापा, कांकेर, कोण्डागांव, कोरबा, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, नारायणपुर, रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव एवं सुकमा के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

हरियर छत्तीसगढ़ हमारी पहचान, पर्यावरण संरक्षण हमारी जिम्मेदारी- वन मंत्री केदार कश्यप

समय सीमा में देनी होगी जानकारी

रायपुर, 5 जून 2026/ छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 की धारा 3, 4, 5 एवं 7 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग करते हुए तथा श्रम विभाग द्वारा कार्यालय का नाम, विभाग द्वारा उपलब्ध करायी जाने वाली सेवा, ऐसी सेवा प्रदान करने के लिए निश्चित की गई समय-सीमा के साथ, सेवा प्रदान करने वाले पदाभिहित अधिकारी (पद), सक्षम अधिकारी एवं अपीलीय प्राधिकारी का पदनाम, अधिसूचित किया है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2011 के तहत सेवा जो प्रदाय की जानी है, श्रम विभाग द्वारा सेवा प्रदाय करने की समय-सीमा (कार्य दिवस) निर्धारित की गई है। इसी प्रकार सेवा प्रदाय करने वाला लोक प्राधिकारी (पद), सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी नियुक्त किया गया है।

शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिला संबल, हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में बेटियों ने लहराया परचम

सांसद महेश कश्यप ने सुशासन तिहार में सौंपे 15-15 हजार रुपये के चेक, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं

रायपुर, 05 जून 2026/ आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों को मात देकर बस्तर जिले की दो बेटियों ने सफलता की एक नई इबारत लिखी है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से ताल्लुक रखने वाली रुद्राणी कश्यप और डालेश्वरी बघेल ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने माता-पिता, गांव और पूरे बस्तर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

सीमित संसाधनों में गढ़ी सफलता की कहानी

बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार की निवासी रुद्राणी कश्यप ने सेजेस (स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय) करपावंड से और डालेश्वरी बघेल ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उलनार से पढ़ाई करते हुए यह शानदार उपलब्धि हासिल की है। दोनों छात्राओं ने साबित कर दिया है कि यदि लगन और अनुशासन हो, तो प्रतिभा किसी भी अभाव की मोहताज नहीं होती।

शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिली नई उड़ान

तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए संचालित श्शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत दोनों छात्राओं को 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। हाल ही में ग्राम उलनार में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने दोनों होनहार बेटियों को प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए। इस मौके पर सांसद ने दोनों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए स्मृति स्वरूप पौधे भी भेंट किए।

माता-पिता ने जताया आभार, बेटियों के सपनों को मिले पंख रुद्राणी कश्यप की माता श्रीमती कुंती कश्यप ने बताया कि बेटी की रुचि जीव विज्ञान (बायोलॉजी) में है और पूरा परिवार उसकी आगे की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग करेगा। वहीं, डालेश्वरी बघेल के पिता श्री लम्बोदर बघेल ने इस सफलता का पूरा श्रेय बेटी की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन को दिया।

श्रमसाध्य जीवन जीने वाले परिवारों की इन बेटियों की यह कामयाबी आज ग्रामीण अंचल के हज़ारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। सरकार की इस योजना ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया है, बल्कि उनके सपनों को एक नई और मजबूत दिशा भी दी है।

वन मंत्री ने किया राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

विशेषज्ञ देंगे वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रशिक्षण

रायपुर, 05 जून 2026/ छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ आज वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अपने निवास कार्यालय में वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय भी साथ में थे। इस कार्यशाला में देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक और वन अधिकारी शामिल हुए।

संरक्षण प्रयासों से बढ़ी हाथियों की संख्या

वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2022 में प्रदेश में लगभग 240 हाथी थे, जिनकी संख्या बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 हो गई है। यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।

मानव-हाथी संघर्ष कम करना सरकार की प्राथमिकता

श्री कश्यप ने बताया कि वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। राज्य सरकार जनभागीदारी, सतत निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर जोर

वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हाथियों के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक रणनीति पर कार्य कर रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षित मानव संसाधन की मदद से वन्यजीव प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा रहा है। इस तरह की कार्यशालाएं अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीनतम जानकारी और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं।

विशेषज्ञ देंगे स्वास्थ्य प्रबंधन और संरक्षण का प्रशिक्षण

कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों का संरक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

वन्यजीव संरक्षण में छत्तीसगढ़ बन रहा मॉडल राज्य

वन मंत्री श्री कश्यप ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव हाथियों के संरक्षण, सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रहा है।

विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का किया आभार व्यक्त

वन मंत्री ने सभी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए जैव विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए निरंतर बेहतर कार्य करने का आह्वान किया।

पर्यावरणीय मानकों से समझौता नहीं, 94 उद्योगों को नोटिस, 3.03 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति अधिरोपित



​रायपुर,05 जून 2026/

कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, घने जंगलों से घिरा दुर्गम रास्ता और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से मीलों की दूरी—यह पहचान रही है छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बसे अबूझमाड़ क्षेत्र की। लेकिन आज इसी अबूझमाड़ की एक पंचायत विकास की नई इबारत लिख रही है। महाराष्ट्र सीमा से सटी जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत पदमकोट में 'जल जीवन मिशन' ने न केवल हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और आजीविका की तस्वीर भी बदल कर रख दी है।
​कभी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने वाला यह दूरस्थ वनांचल गांव आज सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति व्यवस्था के जरिए ग्रामीण विकास और समावेशी प्रगति का एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

​सौर ऊर्जा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अनूठा संगम

​अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। बिजली की अनिश्चितता और कठिन रास्तों के बीच जल जीवन मिशन के अंतर्गत एक ऐसी कार्ययोजना तैयार की गई जो आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल हो।

​गांव में निर्बाध पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी और बुनियादी ढांचे का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। गांव के हर कोने और हर घर को जोड़ने के लिए करीब चार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। बिजली पर निर्भरता खत्म करने के लिए 10-10 हजार लीटर क्षमता की चार सोलर पानी टंकियों का निर्माण किया गया है। इस पूरी व्यवस्था के माध्यम से पंचायत के शत-प्रतिशत परिवारों को उनके घर पर ही नियमित और स्वच्छ पेयजल मिल रहा है।

​महिलाओं के श्रम को मिला सम्मान, बच्चों को मिला शिक्षा का अवसर

​इस सफलता की कहानी का सबसे खूबसूरत पहलू ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आया बदलाव है। पहले इस गांव की महिलाओं और बच्चों का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पीने का पानी सहेजने में बीत जाता था। उन्हें मीलों पैदल चलकर जलस्रोतों तक जाना पड़ता था। अब घर के आंगन में ही शुद्ध जल उपलब्ध होने से महिलाओं का समय और श्रम दोनों बच रहा है। इस समय का उपयोग वे स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़कर आजीविका गतिविधियों और सामाजिक कार्यों में कर रही हैं। वहीं, पानी भरने के काम से मुक्त होकर बच्चे अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं और रचनात्मक गतिविधियों में समय बिता रहे हैं।

​स्वास्थ्य, स्वच्छता और 'किचन गार्डन' से पोषण क्रांति

​पदमकोट में शुद्ध पेयजल सिर्फ प्यास बुझाने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि इसने गांव के समग्र स्वास्थ्य और पोषण के स्तर को ऊपर उठाया है। स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिलने से गांव में डायरिया, पीलिया और पेट से जुड़ी अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में भारी कमी आई है। पर्याप्त पानी की उपलब्धता से ग्रामीणों में व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता के प्रति रुचि बढ़ी है, जिससे घरों का वातावरण स्वच्छ रहने लगा है। नियमित जलापूर्ति का सबसे अनोखा लाभ पोषण के रूप में दिख रहा है। ग्रामीणों ने अपने घरों के पीछे 'किचन गार्डन' (बाड़ी) विकसित कर लिए हैं। नल के पानी का उपयोग कर वे मौसमी और पौष्टिक सब्जियां उगा रहे हैं। इससे परिवारों को ताजी सब्जियां मिल रही हैं, बाजार पर निर्भरता कम हुई है और उनके भोजन में विविधता आई है।

प्रशासनिक प्रतिबद्धता और आत्मनिर्भरता का नया मॉडल

​ग्राम पंचायत पदमकोट की यह सफलता साबित करती है कि अगर प्रशासनिक प्रतिबद्धता, सटीक योजना और सतत निगरानी हो, तो देश के सबसे पिछड़े और सुदूर अंचलों तक भी विकास की धारा पहुंचाई जा सकती है।
​पदमकोट के ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन ने उन्हें केवल पानी नहीं दिया, बल्कि उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा की है। आज महाराष्ट्र की सीमा पर बसा अबूझमाड़ का यह आखिरी गांव छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए इस बात का जीवंत उदाहरण है कि स्वच्छ पेयजल किस तरह एक बेहतर जीवन, सुदृढ़ स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार बन सकता है।

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