ब्रिज स्थल के पास धूल ने किया बेहाल, सात साल से परेशानी झेल रहे लोग
जांजगीर-चांपा। क्षेत्रवासियों ने बिर्रा फाटक पर ओवरब्रिज का सपना देखा था, लेकिन इसे पूरा होने में कितना समय लगेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सात सालों से खासकर निर्माणाधीन ब्रिज के पास रहने वाले बेहद परेशान हैं। यहां व्यवसाय करने वालों का तो धंधा ही चौपट हो गया है। इसके बावजूद इनकी समस्या का अब तक समाधान नहीं हो सका है।
करीब सात साल पहले चांपा के बिर्रा फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण प्रांरभ हुआ था। कोरबा रोड, बिर्रा रोड और जांजगीर की ओर बनने वाले वाय आकार के ब्रिज निर्माण में लापरवाही की सारी हदें पार हो गई है। शुरूआती दौर में निर्माण प्रारंभ होते ही रेलवे ने बगैर अनुमति उसकी भूमि में निर्माण कराने को लेकर अंड़ंगा लगाया। इस फेर में करीब छह माह तक काम बंद था। इसके बाद निर्माण की परीधि में आने वाले पेड़, विद्युत खंभे और अतिक्रमण हटाने को लेकर काम को विलंब किया गया। इसके बाद तकनीकी समस्या बताकर काम को लंबित किया जा रहा है। इधर, समय पर ब्रिज का काम पूरा नहीं होने के कारण आम लोग तो परेशान हैं ही, उन लोग ज्यादा परेशान हैं, जिनकी यहां सालों से दुकानदारी चल रही है। बिर्रा फाटक के उस पार होटल, फल, हार्डवेयर, सब्जी सहित कई तरह की दुकानें है। इसी तरह कोरबा रोड के दोनों ओर कपड़े, मेडिकल सहित अनेक प्रकार की दुकानें हैं। जब वाहन यहां से गुजरता है तो यहां धूल का गुबार छा जाता है। इससे जहां व्यवसायियों का सामान खराब होता है तो वहीं उनका धंधा भी प्रभावित होता है। यहां के कुछ लोगों ने बताया कि पहले की अपेक्षा अब ग्राहकी आधी रह गई है। इसकी सबसे प्रमुख वजह समय पर ब्रिज का निर्माण न होना है। उनका कहना है यहां हर मौसम में परेशानी हो रही है। ठंड और गर्मी में जहां धूल से लोग त्रस्त हैं तो वहीं बारिश में यहां कीचड़ से परेशानी हो जाती है। इसी तरह अग्रसेन चौक के पास पानी तालाब की तरह भर जाता है। इस समस्या से लोग सालों से जुझ रहे हैं, लेकिन इस ओर ठोस कदम उठाने वाला कोई नहीं है।
ठेकेदार पर नहीं नियंत्रण
ओवरब्रिज का निर्माण समय पर न होने को लेकर कुछ साल पहले शहर के कुछ लोगों ने नाराजगी व्यक्त की। ऐसे में तहसील कार्यालय में एसडीएम, तहसीलदार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी। बैठक में सेतु निगम के एसडीओ आरके वर्मा, ठेकेदार का कर्मचारी भी मौजूद था। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर बात हुई थी। इस दौरान काम में गति लाने का हवाला दिया गया था, लेकिन बैठक के बाद सबकुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगा है।