छत्तीसगढ़

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उप मुख्यमंत्री ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी से सफल बनाने के दिए निर्देश

अभियान की आगामी गतिविधियों की तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर.  सितम्बर 2026. उप मुख्यमंत्री तथा कोरबा जिले के मंत्री श्री अरुण साव ने आज कोरबा जिला मुख्यालय में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत संचालित गतिविधियों एवं आगामी कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित गतिविधियों की रूपरेखा, तिथि और आयोजन स्थलों को अंतिम रूप देते हुए सभी कार्यक्रमों को व्यापक जनभागीदारी के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक माह तक चलने वाले इस अभियान को सार्थक, प्रभावी और जनोन्मुखी स्वरूप देने के लिए शासन, प्रशासन तथा आमजन के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्यक्रमों का सुचारु एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन और विधायक श्री प्रेमचंद पटेल भी बैठक में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 17 सितम्बर को आयोजित ‘आशीर्वाद के दिया’ कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर जनभागीदारी का जो उत्साह देखने को मिला, वह अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं ने चित्रकला और भाषण के माध्यम से देश के प्रति अपने विचार और कल्पनाओं को अभिव्यक्त किया। उन्होंने आगामी गतिविधियों में भी इसी उत्साह और सहभागिता को बनाए रखते हुए सभी कार्यक्रमों को उत्सव के रूप में आयोजित करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के शेष कार्यक्रमों के लिए तिथिवार कार्ययोजना तैयार करने, कार्यक्रमों की रूपरेखा निर्धारित करने तथा आयोजन स्थलों का चिन्हांकन समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रमों की तिथि, स्वरूप एवं आयोजन स्थल की पूर्व जानकारी उपलब्ध कराने तथा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार सभी गतिविधियों का समय पर आयोजन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए अभियान की गतिविधियों को सफल बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक आयोजन में उत्साहपूर्ण वातावरण निर्मित हो और लोगों को सक्रिय रूप से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाए। अभियान के तहत गांवों और शहरों में स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए नदी-घाटों की साफ-सफाई, वृहद स्तर पर पौधरोपण, रक्तदान, अंगदान सहित विभिन्न जनसेवा गतिविधियों का आयोजन किया जाए। इन कार्यक्रमों में अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए उन्हें सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और मानवता के प्रति संकल्प दिलाया जाए।

श्री साव ने कहा कि अभियान के दौरान केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव को ‘सेवा की कहानी’ के रूप में संकलित कर लोगों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं से लोगों के जीवन में आए वास्तविक परिवर्तन की प्रेरक कहानियां अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएंगी।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ सरकार की योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यों को आमजन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से लोगों को शासन की योजनाओं की जानकारी मिले और वे उनके लाभ से जुड़ सकें, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी गांवों और शहरों तक पहुंचाने के लिए मुनादी, बैनर, पोस्टर एवं अन्य प्रचार माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने अभियान की प्रत्येक गतिविधि में जनसेवा एवं जनभागीदारी की भावना को सशक्त बनाने तथा अधिकाधिक लोगों को इससे जोड़कर अभियान को सफल एवं सार्थक बनाने के निर्देश दिए।

मॉडिफाइड उड़ान योजना के नए चरण के लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के बीच महत्वपूर्ण समझौता

बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू के प्रति मुख्यमंत्री ने जताया आभार

रायपुर,  सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मॉडिफाइड उड़ान योजना के नए चरण के अंतर्गत भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के बीच हुए समझौते को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश की भौगोलिक दूरियां घटेंगी और विकास की रफ्तार बढ़ेगी। नई दिल्ली में हुए इस समझौते पर छत्तीसगढ़ शासन की ओर से विमानन सचिव श्री मुकेश बंसल ने हस्ताक्षर किए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा प्रयास है कि बेहतर हवाई संपर्क का लाभ बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों और दूरस्थ अंचलों तक भी पहुंचे। इस समझौते से प्रदेश में नए हवाई संपर्क, हवाई पट्टियों के विकास और दूरस्थ क्षेत्रों में हेली-कनेक्टिविटी के विस्तार की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क से नागरिकों का आवागमन सुगम होगा और पर्यटन, व्यापार, निवेश तथा रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। प्रदेश के प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। दूरस्थ क्षेत्रों में हेली-कनेक्टिविटी का विस्तार आपातकालीन चिकित्सा सहायता, आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में भी उपयोगी होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री राम मोहन नायडू के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ देश के विस्तारित होते विमानन नेटवर्क से और मजबूती से जुड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि मॉडिफाइड उड़ान योजना के अंतर्गत देश में मौजूदा अनुपयोगी हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डे तथा दूरस्थ क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

उद्योगों से लेकर रेलवे तक में उपयोग की होगी पड़ताल, 15 दिनों में निकाय देंगे जानकारी

6 शहरों में बन रहे कुल 338 एमएलडी के एसटीपी

सूडा ने निकायों को परिपत्र जारी कर संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और आवश्यक कार्यवाही के दिए निर्देश

रायपुर. सितम्बर 2026. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी के सदुपयोग के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग गंभीरता से पहल कर रही है। विभाग ने उपचारित जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने नगरीय निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और उनकी जल आवश्यकता के आकलन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से समन्वय करने को कहा गया है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राज्य के जिन 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन है, वहां के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इन निकायों को एसटीपी के उपचारित जल के संभावित उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने को कहा गया है। साथ ही संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में उपचारित जल की आवश्यकता होगी, इसका भी आकलन करने को कहा गया है।

50 किमी के दायरे में तलाशेंगे उपयोगकर्ता

उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए एसटीपी के आसपास के क्षेत्र को केंद्र में रखा गया है। निकायों को 50 किलोमीटर की परिधि में स्थित थर्मल पावर प्लांट, उद्योगों, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी जल आवश्यकता की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। इससे एसटीपी से उपचारित जल उपलब्ध होने के बाद उसके उपयोग के लिए संभावित उपभोक्ताओं की पहचान पहले से की जा सकेगी।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है।

केंद्र सरकार और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप राज्य शासन की पहल

सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरोदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगाव के निगम आयुक्तों को परिपत्र जारी कर बताया है कि भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी एसटीपी के उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए निर्देशित किया है। सूडा ने संबंधित निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता के संबंध में जानकारी 15 दिनों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

 

अब तक किसानों को 13.04 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण

रायपुर,  सितंबर 2026/ प्रदेश में खेतों में बोनी का कार्य लगभग अंतिम चरण पर है। 22 सितंबर की स्थिति में राज्य के 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 99 प्रतिशत बोनी पूर्ण हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश किसानों को सुगमता से मिले खाद-बीज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।


किसानों को 13.14 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.58 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 13.14 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.58 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। खेती का प्रारंभिक कार्य लगभग अंतिम चरण में है। राज्य में अब तक 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 99 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।

प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 17.64 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। जो चालू खरीफ सीजन के लिए निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। उक्त भंडारण के विरूद्ध राज्य के किसानों को 13.14 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 74 प्रतिशत है।

इसी प्रकार खरीफ सीजन 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.80 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.58 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 93 प्रतिशत है।

प्रदेश में अब तक 1008.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मि.मी.

अधिकारियों ने बताया कि 22 सितंबर सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 1008.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। गौरतलब है कि औसत दर्ज वर्षा जिलों की आज तक की औसत वर्षा पिछले 10 वर्षाे के आधार पर 1061.6 मि.मी. से 53.5 मिली मीटर कम है। गत वर्ष इसी अवधि में 881.4 मिली मी. वर्षा दर्ज की गई थी।

जरूरतमंद किसानों को 8125.51 करोड़ रूपये का निःशुल्क अल्पकालीन कृषि ऋण

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियत हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 21 सितंबर की स्थिति में 8125.51 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 6740.75 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समावेशी विकास के विजन से जनजातीय परिवारों को मिल रहा सुरक्षित आवास और सम्मानजनक जीवन का आधार

रायपुर,  सितंबर 2026/ कभी बारिश की बूंदों के बीच कच्चे घर में रात गुजारने को मजबूर गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले के ग्राम पंचायत धनौली के खर्रीपारा निवासी श्रीमती नंदबाई बैगा के जीवन में अब खुशियों की नई शुरुआत हुई है। पीएम जनमन योजना के तहत पक्का आवास मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और मजबूत छत मिली है। वर्षों से कच्चे मकान में रहने के दौरान बारिश, सीलन और पानी टपकने जैसी परेशानियों का सामना करने वाली नंदबाई बैगा अब अपने पक्के घर में परिवार के साथ सुकून और सुरक्षा के साथ जीवन बिता रही हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विशेष रूप से कमजोर एवं जनजातीय परिवारों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पीएम जनमन योजना इसी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को आवास सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। नंदबाई बैगा का परिवार इस प्रयास से आए सकारात्मक बदलाव का एक उदाहरण है।

कच्चे घर में हर मौसम रहती थी चिंता

नंदबाई बैगा बताती हैं कि पहले उनका घर कच्चा था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और घर में सीलन बनी रहती थी। बरसात के दौरान परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। घर की खराब स्थिति के कारण हर मौसम में परिवार के मन में चिंता बनी रहती थी। सुरक्षित और मजबूत घर का अभाव उनके दैनिक जीवन की परेशानियों को और बढ़ा देता था।

पक्के आवास से मिली सुरक्षा और सुकून

पीएम जनमन योजना के तहत पक्का आवास मिलने के बाद नंदबाई बैगा के परिवार की परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आया है। अब परिवार सुरक्षित और मजबूत घर में रह रहा है। बारिश के दिनों में न तो छत से पानी टपकने की चिंता है और न ही सीलन की परेशानी। पक्का आवास उनके लिए केवल एक भवन नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन गया है।

सरकार की योजनाओं से जीवन में आया व्यापक बदलाव

नंदबाई बैगा को शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन मिलने से खाना पकाने में सुविधा हुई है। इस तरह विभिन्न योजनाओं का लाभ एक साथ मिलने से उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन से जनजातीय परिवारों तक पहुंच रही सुविधाएं

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के जीवन में बुनियादी सुविधाओं और बेहतर अवसरों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पक्का आवास, स्वच्छ ईंधन और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं का लाभ मिलने से नंदबाई बैगा जैसे परिवारों के जीवन में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके लिए पक्का घर बदलती परिस्थितियों और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद का आधार बना है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण एवं जनजातीय परिवारों को आवास, आर्थिक सहायता, रसोई गैस सहित विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। नंदबाई बैगा का परिवार भी इन योजनाओं के समन्वित लाभ से बेहतर और सुरक्षित जीवन की ओर आगे बढ़ रहा है।

राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय

महतारी वंदन योजना से 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर माह मिल रहा आर्थिक संबल

प्रदेश की 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम

650 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रही फिल्म सिटी, छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेंगे नए अवसर

लोक कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान

रायपुर  सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। पारंपरिक उल्लास और आत्मीय वातावरण में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों से भेंट कर उन्हें तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है। माताओं-बहनों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तीज का पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना का अवसर है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी माताओं-बहनों और उनके परिवारों के सुखी, समृद्ध और स्वस्थ जीवन की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज का पर्व भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन आज इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों के बीच तीज मिलन का अवसर अत्यंत सुखद और आत्मीय है। मुख्यमंत्री निवास में भी तीज के अवसर पर प्रदेशभर से आई बहनों के साथ पर्व का उल्लास साझा करने का अवसर मिला था। हमारी परंपराओं की यही खूबसूरती है कि वे हमें परिवार और समाज से जोड़ती हैं तथा आपसी प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करती हैं।

सनातन संस्कृति में मातृशक्ति को मिला है सर्वोच्च सम्मान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। हमारे वेदों, पुराणों और सामाजिक परंपराओं में नारी के सम्मान और उसकी गरिमा का संदेश निहित है। हमारी संस्कृति कहती है - “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”, अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां परिवार की पहली शिक्षक और संस्कारों की आधारशिला होती है। माताओं-बहनों के परिश्रम, त्याग और आशीर्वाद से ही परिवार मजबूत होता है और मजबूत परिवार से सशक्त समाज तथा समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है। इसलिए राज्य सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का हितग्राही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बराबर का सहभागी मानकर कार्य कर रही है।

महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि इस योजना से माताओं-बहनों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव उन्हें विशेष संतोष देता है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के साथ बच्चों की पढ़ाई, बचत और छोटे-छोटे स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं। कोई बहन सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर बेटी का भविष्य संवार रही है तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर अपने हुनर को आजीविका में बदल रही है। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला को आगे बढ़ने के लिए अवसर, संसाधन और आवश्यक सहयोग मिले। जब हमारी माताएं-बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो परिवार मजबूत होगा और पूरे प्रदेश की प्रगति को नई गति मिलेगी।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल से जशपुर में महुआ को मिल रहा नया स्वरूप, जशप्योर और जय जंगल के प्रयासों से जनजातीय परिवारों एवं महिला स्वसहायता समूहों के लिए आजीविका की नई संभावनाएं

रायपुर,  सितंबर 2026/ कभी जंगलों में सहज रूप से मिलने वाली वन उपज और पारंपरिक उपयोग तक सीमित महुआ आज नए रूप, नई पहचान और नई संभावनाओं के साथ बाजार तक पहुंच रहा है। जशपुर में महुआ को केवल वन उपज के रूप में नहीं, बल्कि खाद्य नवाचार, मूल्य संवर्धन, अनुसंधान और जनजातीय आजीविका के अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने महुआ की पहचान को नई ऊंचाई दी है।

इसी बदलाव की झलक रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देखने को मिली, जहां जशप्योर और जय जंगल के स्टॉल पर जशपुर के महुआ आधारित उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने महुआ से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों को देखा, उनके बारे में जानकारी ली और उनकी गुणवत्ता, स्वाद तथा आधुनिक पैकेजिंग की सराहना की।

महुआ की बदली तस्वीर, पारंपरिक वन उपज से आधुनिक फूड प्रोडक्ट तक

महुआ का नाम सुनते ही लंबे समय तक लोगों के मन में इसकी पारंपरिक उपयोगिता की ही तस्वीर उभरती रही। जशपुर में इसी धारणा को बदलते हुए महुआ को आधुनिक खाद्य उत्पादों के रूप में विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। अब महुआ केवल जंगल से संग्रहित होने वाली वन उपज नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने वाला उत्पाद बन रहा है।

इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के हॉल नंबर-3 के स्टॉल नंबर 4 एवं 5 पर महुआ नेक्टर, महुआ नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी, महुआ आधारित कुकीज़, रागी-महुआ उत्पाद, महुआ लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल सहित अनेक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। उत्पादों की विविधता के साथ उनकी आकर्षक पैकेजिंग और आधुनिक प्रस्तुति ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि जंगलों से मिलने वाला पारंपरिक महुआ आधुनिक खाद्य बाजार में इतने नए रूपों में भी अपनी जगह बना सकता है।

कई आगंतुकों ने पहली बार महुआ को इतने विविध खाद्य स्वरूपों में देखा। उत्पादों की प्रस्तुति और स्वाद ने यह संदेश दिया कि यदि स्थानीय संसाधनों को उचित तकनीक, गुणवत्ता और बाजार की समझ के साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की पारंपरिक उपज भी व्यापक बाजार तक पहुंच सकती है।

जशप्योर बना स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन का माध्यम

जशपुर की पहचान केवल अपने जंगलों और प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों से भी जुड़ी है। इसी स्थानीय ताकत को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में जशप्योर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।

जिला प्रशासन, स्थानीय समुदाय, महिला समूहों, उत्पादक संस्थाओं और तकनीकी संस्थानों के साझा प्रयासों से महुआ सहित स्थानीय वन उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को स्थानीय स्तर पर ही अधिक मूल्यवान बनाना और उनसे जुड़े परिवारों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर तैयार करना है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय एवं जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जशपुर में महुआ को लेकर हो रहे प्रयास इसी सोच को जमीन पर साकार करते हुए दिखाई देते हैं।

पेड़ से बाजार तक तैयार हो रही पूरी वैल्यू चेन

महुआ की कहानी केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पेड़ से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने का प्रयास है। स्वच्छ और फूड-ग्रेड संग्रहण से लेकर डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण, अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, उत्पाद विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक प्रत्येक चरण को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

जिला प्रशासन जशपुर के सहयोग से संचालित Mahua Centre of Excellence और ‘Mahua Kosh’ में महुआ के खाद्य उपयोग, नए उत्पादों, फूड-ग्रेड कलेक्शन, डिहाइड्रेशन और प्रसंस्करण तकनीक सहित विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान एवं प्रयोग किए जा रहे हैं।

 

आयुष्मान कार्ड बना परिवार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल, पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा

पहले इलाज का खर्च बिगाड़ देता था घरेलू बजट, अब बीमारी के समय आर्थिक बोझ की चिंता हुई कम

रायपुर, सितम्बर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से आम नागरिकों के जीवन में आ रहे बदलाव की कहानियां सामने आ रही हैं। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत घोघरा निवासी श्रीमती शिशु खलखो के लिए आयुष्मान कार्ड स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आर्थिक राहत का भी माध्यम बना है। पहले परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने पर उपचार के खर्च की चिंता उनके घरेलू बजट पर असर डालती थी। अब आयुष्मान कार्ड बनने से पात्रता एवं योजना के प्रावधानों के अनुसार पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

श्रीमती शिशु खलखो ने बताया कि सुशासन तिहार के दौरान उनकी समस्या का समाधान हुआ और उनका आयुष्मान कार्ड बनाया गया। कार्ड मिलने के बाद बीमारी की स्थिति में उपचार पर होने वाले बड़े खर्च को लेकर उनकी चिंता पहले की तुलना में कम हुई है। सीमित आय वाले परिवार के लिए स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक खर्च कई बार घरेलू जरूरतों और बजट को प्रभावित करता था, लेकिन आयुष्मान कार्ड ने उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा दिया है।

इलाज के खर्च से मिली राहत, परिवार को मिला भरोसा

शिशु खलखो बताती हैं कि पहले परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर इलाज के लिए बड़ी राशि जुटानी पड़ती थी। इससे घर के दूसरे जरूरी खर्च प्रभावित होते थे और आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। अब आयुष्मान कार्ड उनके परिवार के लिए उपचार के समय आर्थिक सहारा बन गया है।

आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजना के प्रावधानों के अनुसार उपचार की सुविधा मिलने से गंभीर बीमारी या आकस्मिक स्वास्थ्य जरूरत के समय परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिलती है। शिशु खलखो के लिए यह कार्ड बीमारी के समय इलाज की सुविधा के साथ आर्थिक सुरक्षा का भरोसा भी लेकर आया है।

जनकल्याणकारी योजनाओं से मजबूत हो रहा सामाजिक सुरक्षा का आधार

सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से शासन की योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की कहानियां जन-जन तक पहुंचाई जा रही हैं। शिशु खलखो की कहानी बताती है कि जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक पहुंचता है, तो स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकता के समय उन्हें उपचार के साथ आर्थिक सुरक्षा का भी संबल मिलता है।

 

नियमित आर्थिक सहायता से मिली बचत की राह, छोटी-छोटी बचत से बढ़ाया अपना काम

सिलाई बनी परिवार की आय का मजबूत आधार, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों में भी मिल रहा सहयोग

आर्थिक संबल से बढ़ा आत्मविश्वास, यशोदा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार

रायपुर,  सितम्बर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उनके हुनर और स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में सहायक बन रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सकालो की श्रीमती यशोदा प्रजापति की कहानी इसका उदाहरण है। सिलाई के हुनर को अपनी आजीविका का आधार बनाने वाली यशोदा ने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता का उपयोग घरेलू जरूरतों के साथ बचत के लिए किया। छोटी-छोटी बचत से उन्होंने अपनी सिलाई की दुकान को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में अपनी भागीदारी मजबूत की।

महतारी वंदन की राशि से मिली बचत और कारोबार को संबल

यशोदा लंबे समय से सिलाई का काम कर रही हैं। सिलाई से होने वाली आय से वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में पति का सहयोग करती हैं। महतारी वंदन योजना से नियमित आर्थिक सहायता मिलने के बाद उनके लिए अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ कुछ राशि बचा पाना भी आसान हुआ। इसी बचत का उपयोग उन्होंने अपनी सिलाई की दुकान को आगे बढ़ाने में किया।

यशोदा बताती हैं, “महतारी वंदन का पैसा मिलता है तो उससे मुझे बहुत मदद हो जाती है। पैसे इकट्ठा करके धीरे-धीरे अपनी दुकान को आगे बढ़ाया है।”

सिलाई से आय, बच्चों की पढ़ाई में भी सहयोग

यशोदा के पति वैन चलाते हैं और उनके दो बच्चे हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच यशोदा सिलाई का काम संभाल रही हैं। उनकी सिलाई से होने वाली आमदनी घर के खर्च में सहयोग देती है। वहीं महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में भी सहायक बन रही है।

यशोदा का कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक संबल मिलता है। इससे वे अपनी जरूरत के अनुसार राशि का उपयोग करने के साथ भविष्य के लिए बचत भी कर सकती हैं।

हुनर और आर्थिक संबल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

यशोदा के लिए महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता केवल मासिक सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके हुनर को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनी। सिलाई के काम से होने वाली आय और योजना से मिली आर्थिक सहायता का समझदारी से उपयोग कर वे परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं।

यशोदा ने महतारी वंदन योजना से मिल रहे आर्थिक संबल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता जब महिलाओं की मेहनत, हुनर और बचत से जुड़ती है, तो यह परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा दे सकती है।

 

जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने लिया सामूहिक संकल्प, जनभागीदारी से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

रायपुर, सितंबर 2026/ कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण, स्वच्छता एवं जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज जोगी डोंगरी जलाशय के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान एवं जल स्रोत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं पंचायत विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

अभियान के दौरान जोगी डोंगरी जलाशय परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इसमें जलाशय के आसपास बिखरे कचरे एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों की साफ-सफाई की गई। स्वच्छता अभियान के माध्यम से जल स्रोतों को प्रदूषण से मुक्त रखने और उनके संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, जल के अपव्यय को रोकने तथा उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के संबंध में जागरूक किया गया। जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों से अपने गांव के तालाबों, जलाशयों, कुओं एवं अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई और देखरेख में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की गई।

जल स्रोतों की स्वच्छता सभी की सामूहिक जिम्मेदारी

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों की स्वच्छता एवं संरक्षण केवल विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों को प्रेरित किया गया कि वे अपने आसपास के जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के साथ ही जल के संरक्षण और सदुपयोग के लिए निरंतर प्रयास करें।

ग्रामीणों ने लिया जल संरक्षण का संकल्प

अभियान में ग्रामीणजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाते हुए जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, पानी की बर्बादी रोकने तथा जल संरक्षण के लिए अपने स्तर पर निरंतर प्रयास करने का सामूहिक संकल्प लिया। ग्रामीणों की सहभागिता ने जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया।

कार्यक्रम के माध्यम से “जल है तो कल है” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाते हुए जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता और जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया गया। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जल संरक्षण को जनभागीदारी से जनआंदोलन का स्वरूप देने का संदेश दिया गया।

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