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ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्रों में महिला स्वसहायता समूह को सहकार भारती से जोड़ें, सहयोग करें : सुश्री उइके Featured

By February 01, 2020 135

राज्यपाल सहकार भारती के राष्ट्रीय महिला अधिवेशन में हुईं शामिल
 

रायपुर, 01 फरवरी 2020 ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों जैसे बस्तर में भी कई महिलाओं के स्वसहायता समूह सक्रियता से कार्य कर रही हैं। लेकिन मार्केटिंग की पूरी व्यवस्था नहीं है। ऐसे समूहों को वित्तीय सहायता तथा अन्य आवश्यकता भी है। उन्हें सहकार भारती सहयोग करे, उन्हें अपने से जोड़ें। साथ ही कुछ समूह शराबबंदी तथा अन्य कुरीतियों को रोकने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन समूहों को कानूनी सहायता प्रदान करने की पहल करनी चाहिए, जिससे उन्हें संबल मिले। यह बात राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने कही। वे आज नागपुर में सहकार भारती के राष्ट्रीय महिला अधिवेशन को संबोधित कर रही थी।
सुश्री उइके कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि सहकारिता के क्षेत्र में महिलाएं सक्रियता से काम कर रही हैं। आप हौसला बनाएं रखें, निश्चित ही आप सफल होंगें और महिलाएं सशक्त होकर तेजी से आगे बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि सहकारिता भारतीय संस्कृति की मूल भावना है। यह भारत वर्ष की जीवनशैली का अभिन्न अंग है। हम सहकार भारती संस्था की बात करते हैं तो श्री लक्ष्मणराव जी ईनामदार का नाम सबसे पहले आता है, जिनके नेतृत्व में इस संस्था ने एक मूर्त रूप लिया। उन्होंने ‘‘बिना सहकार नहीं उद्धार’’ के मूलमंत्र को लेकर कार्य शुरू किया, जो बाद में ‘‘बिना संस्कार नहीं सहकार-बिना सहकार नहीं उद्धार’’ के जयघोष के साथ सहकारिता जगत में मान्य हुआ। श्री ईनामदार जी की स्पष्ट मान्यता थी कि सहकारिता विकेन्द्रित और प्रजातांत्रिक आर्थिक रचना की श्रेष्ठ प्रक्रिया है। इससे सामान्य जनता के आर्थिक विकास को सही दिशा और संतुलित गति मिलती है।
राज्यपाल ने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में महिलाओं को कार्य करना आज की समय की आवश्यकता है। आज के्रडिट को-आपरेटिव ग्रुप कार्य कर रहे हैं। इससे महिलाओं को वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिलती है। उन्हें स्वरोजगार शुरू करने में भी मदद मिलती है। ऐसे समूह की संख्या और सक्रियता बढ़ाए जाने की जरूरत है। महिलाएं हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने को तैयार हैं, बस उन्हें हौसला देने की जरूरत है। इसके लिए अधिक से अधिक संख्या में ज्वाइंट लाइबिलिटी ग्रुप इत्यादि बनाए जाना चाहिए, जो उन्हें जागरूक करे और उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताए।
इस अवसर पर सुश्री शांता आक्का, प्रमुख संचालिका राष्ट्रसेविका समिति, सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश जी वैद्य, सहकार भारती की राष्ट्रीय महिला प्रमुख श्रीमती शताब्दी सुबोध पाण्डेय, डाॅ. शशिताई वंजारी, कुलपति, एस.एन.डी.टी. विश्वविद्यालय मुंबई, श्रीमती कंचन गडकरी डाॅ. उदय जोशी, मुंबई की विधायक श्रीमती गीता जैन, श्रीमती नीलिमा बावणे सहित 25 राज्यों के दो हजार महिला प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
 

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