पांचों राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव परिणाम लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी हलचल साबित करने वाले होंगे। भाजपा तो अभी से इन्हें लोकसभा चुनावों के रास्ते के एक पड़ाव के रूप में देख रही है। अगर दिल्ली में लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से बात की जाये तो आम आदमी पार्टी अपने दोनों प्रतिद्वंदियों से काफी आगे है। पार्टी ने अभी से न सिर्फ लोकसभा चुनाव क्षेत्र के प्रभारी तय कर दिए हैं, बल्कि कमोबेश उम्मीदवारों के नाम भी तय हो गए हैं।
आतिशी की आतिशी पारी
आम आदमी पार्टी ने पूर्वी दिल्ली से आतिशी को लोकसभा प्रभारी बनाया है। माना जा रहा है कि वही लोकसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ेंगी। उनका मुकाबला महेश गिरी से होने वाला है जो पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से इस समय भाजपा सांसद हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का साथ छोड़ राजनीति में आये महेश गिरी को क्षेत्र में अभी भी राजनेता कम और आध्यात्मिक गुरु के रूप में ज्यादा जाना जाता है। वे पार्टी के केंद्रीय नेताओं और प्रदेश के शीर्ष नेताओं से सम्बंध बनाने के लिए ज्यादा जाने जाते हैं जबकि जमीनी स्तर पर उनके कामकाज को लेकर अभी भी जनता अनभिज्ञ बनी हुई है।
वहीं आम आदमी पार्टी की आतिशी रोजाना चार से पांच कार्यकर्ताओं, जिन्हें आम आदमी पार्टी की भाषा में वालंटियर कहा जाता है, उनके घर पर मिल रही हैं। अपने रोजाना के इस दिनचर्या में वे जिस भी कार्यकर्ता के घर पहुंचती हैं, दस से बीस लोगों के छोटे समूहों में लोगों से मिल रही हैं। इससे लोग न सिर्फ उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर समझ रहे हैं, बल्कि उन्हें ये भरोसा भी पैदा हो रहा है कि वे उनके पिछले नेता से कहीं बेहतर साबित होंगी जिनका चेहरा उन्होंने लम्बे समय से नहीं देखा है।
आतिशी के चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी देख रहे अक्षय मराठे अमर उजाला से बात करते हुए कहते हैं, हम एक भी भाजपा नेता की कमी जनता से 'डिस्कस' नहीं करते। हम सिर्फ उनसे ये पूछते हैं कि आपके आसपास वह कौन सा काम है जो आपके सांसद ने करवाया है जिसका फायदा आपको या आपके बच्चों को मिल रहा है। अक्षय के मुताबिक अक्सर लोगों के पास उनके इस सवाल का कोई जवाब नहीं होता। ऐसे में उनका काम तब आसान हो जाता है जब वे लोगों को यह बताते हैं कि उनके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ रहे हैं, उनमें दिल्ली सरकार की वजह से क्या परिवर्तन आया है। मोहल्ला क्लिनिक में उनके तत्काल मुफ्त इलाज ने जनता के मन में आप के लिए एक भरोसा पैदा किया है। और यह भरोसा ही हमारी पूंजी है। अक्षय के मुताबिक अब तक वे पूर्वी दिल्ली के सात हजार घरों के लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर मिल चुके हैं।
बात सिर्फ पूर्वी दिल्ली तक सीमित नहीं है। उत्तर पूर्वी दिल्ली से दिलीप पांडेय को प्रभारी बनाया गया है। यहां से भाजपा के मनोज तिवारी सांसद हैं। वे अपनी स्टार छवि के कारण लोकप्रिय तो बहुत हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर अभी भी कम सक्रिय हैं जबकि दिलीप पांडेय पार्टी की रणनीति के मुताबिक रोजाना बैठकें कर रहे हैं। सुबह से शुरू होने वाली बैठकों का सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। आम आदमी पार्टी के पंकज गुप्ता व्यापारियों के छोटे-छोटे समूह में बैठकें ले रहे हैं। उनकी कोशिश दिल्ली के चांदनी चौक और नई दिल्ली के व्यापारी समुदाय में घुसपैठ करना है। उनके हाथ में नोटबन्दी और जीएसटी का हथियार है जिससे वे व्यापारियों को अपने पक्ष में करने में जुटे हैं।
कांग्रेस खेमा सबसे पीछे
दिल्ली की लड़ाई में कांग्रेस अब तक सक्रिय नहीं है। अजय माकन अभी भी पार्टी के दिग्गजों को एक साथ एक मंच पर लाकर अपनी मजबूती दिखाने में असफल रहे हैं। प्रदेश स्तर के शीर्ष नेताओं से साथ न मिलने के कारण उनका प्रयास भी बहुत सफल नहीं रहा है। अरविंदर सिंह लवली, जयप्रकाश अग्रवाल, महाबल मिश्रा और संदीप दीक्षित जैसे उसके बड़े चहरे अभी भी सक्रिय नहीं हैं। एमसीडी चुनाव ने भी पार्टी को अपनी बड़ी जीत के लिए आश्वस्त नहीं किया है। अगर पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को समय रहते गम्भीरता से नहीं लेता तो लोकसभा चुनाव में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच सीधी टक्कर होना तय है जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।