दमोह में आज एक रोचक नज़ारा देखने मिला. एक युवक साइकल पर मोटर साइकिल लादे चला जा रहा था. बात ही कुछ ऐसी थी कि जिसकी भी नज़र पड़ी उसने एक बार रुककर ज़रूर देखा.
दमोह.दुनिया में अजब-गजब लोगों के किस्से हम और आप हमेशा ही सुनते रहते हैं और देखते भी हैं और ऐसा ही एक अजीबोगरीब मामला दमोह जिला मुख्यालय में सागर नाका चौकी के पास देखने मिला. दमोह.दुनिया में अजब-गजब लोगों के किस्से हम और आप हमेशा ही सुनते रहते हैं और देखते भी हैं और ऐसा ही एक अजीबोगरीब मामला दमोह जिला मुख्यालय में सागर नाका चौकी के पास देखने मिला.
दमोह.दुनिया में अजब-गजब लोगों के किस्से हम और आप हमेशा ही सुनते रहते हैं और देखते भी हैं और ऐसा ही एक अजीबोगरीब मामला दमोह जिला मुख्यालय में सागर नाका चौकी के पास देखने मिला. यहां एक युवक अपनी साइकिल पर मोटर साइकिल लादकर चला जा रहा था. रास्ते में जो भी उसे देख रहा था वो एक बारगी ठिठक जाता था और फिर देर तक देखता रहा. यहां एक युवक अपनी साइकिल पर मोटर साइकिल लादकर चला जा रहा था. रास्ते में जो भी उसे देख रहा था वो एक बारगी ठिठक जाता था और फिर देर तक देखता रहा. यहां एक युवक अपनी साइकिल पर मोटर साइकिल लादकर चला जा रहा था. रास्ते में जो भी उसे देख रहा था वो एक बारगी ठिठक जाता था और फिर देर तक देखता रहा.ये कोई सर्कस या करतब की प्रैक्टिस नहीं थी. युवक इसी तरह साइकिल पर मोटरसाइकिल लादकर 7 किलोमीटर तक चलता रहा. हैरत में पड़े लोग उसका वीडियो बनाते रहे. किसी ने उसकी तस्वीरें खींचीं. ये कोई सर्कस या करतब की प्रैक्टिस नहीं थी. युवक इसी तरह साइकिल पर मोटरसाइकिल लादकर 7 किलोमीटर तक चलता रहा. हैरत में पड़े लोग उसका वीडियो बनाते रहे. किसी ने उसकी तस्वीरें खींचीं.
ये कोई सर्कस या करतब की प्रैक्टिस नहीं थी. युवक इसी तरह साइकिल पर मोटरसाइकिल लादकर 7 किलोमीटर तक चलता रहा. हैरत में पड़े लोग उसका वीडियो बनाते रहे. किसी ने उसकी तस्वीरें खींचीं.ये युवक गोविंद था. वो कबाड़ खरीदने-बेचने का काम करता है. उसने कुंवरपुर खेसरा में एक पुरानी बाइक 25 सौ रुपए में खरीदी थी. वो ये बाइक पुराना बाजार नंबर 2 तक ऑटो से लाना चाहता था. लेकिन ऑटो वाले कुछ ज़्यादा ही किराया मांग रहे थे. ये युवक गोविंद था. वो कबाड़ खरीदने-बेचने का काम करता है. उसने कुंवरपुर खेसरा में एक पुरानी बाइक 25 सौ रुपए में खरीदी थी. वो ये बाइक पुराना बाजार नंबर 2 तक ऑटो से लाना चाहता था. लेकिन ऑटो वाले कुछ ज़्यादा ही किराया मांग रहे थे.ये युवक गोविंद था. वो कबाड़ खरीदने-बेचने का काम करता है. उसने कुंवरपुर खेसरा में एक पुरानी बाइक 25 सौ रुपए में खरीदी थी. वो ये बाइक पुराना बाजार नंबर 2 तक ऑटो से लाना चाहता था. लेकिन ऑटो वाले कुछ ज़्यादा ही किराया मांग रहे थे.गोविंद सिंह को ये मंज़ूर नहीं था. उसने मोटरसाइकिल को खुद ही पुराना बाज़ार तक लाने की ठान ली.गोविंद कुंवरपुरा खेसरा तक अपनी साइकिल से गया था. दिक्कत ये थी कि बाइक चल नहीं रही थी. इसलिए बाइक पर साइकिल नहीं रखी जा सकती थी. सो उसने उल्टा कर दिया. साइकिल पर बाइक लाद ली और चल पड़ा मंज़िल की ओर. गोविंद सिंह को ये मंज़ूर नहीं था. उसने मोटरसाइकिल को खुद ही पुराना बाज़ार तक लाने की ठान ली.गोविंद कुंवरपुरा खेसरा तक अपनी साइकिल से गया था. दिक्कत ये थी कि बाइक चल नहीं रही थी. इसलिए बाइक पर साइकिल नहीं रखी जा सकती थी. सो उसने उल्टा कर दिया. साइकिल पर बाइक लाद ली और चल पड़ा मंज़िल की ओर. गोविंद सिंह को ये मंज़ूर नहीं था. उसने मोटरसाइकिल को खुद ही पुराना बाज़ार तक लाने की ठान ली.गोविंद कुंवरपुरा खेसरा तक अपनी साइकिल से गया था. दिक्कत ये थी कि बाइक चल नहीं रही थी. इसलिए बाइक पर साइकिल नहीं रखी जा सकती थी. सो उसने उल्टा कर दिया. साइकिल पर बाइक लाद ली और चल पड़ा मंज़िल की ओर.