भोपाल। प्रदेश अब कोरोना महामारी की आपदा से उभर रहा है। आपदा संकट के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार के कामकाज का आंकलन करना शुरू कर दिया है। बेलगाम नौकरशाही की कार्यप्रणाली ने मुख्यमंत्री की छटपटाहट को बढ़ाया है। राज्य की हवाओं में अजीब सा डर है। जनता राजनेता और सरकार इस रूहानी डर को महसूस कर रहे हैं। जनता कोरोना और सरकार प्रदेश में एससी-एसटी महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, अपराध, ढीली नौकरशाही, योजनाओं की लचर रफ्तार से डरी है।
यूं तो वह देश के कई राज्यों में भाजपा शासित सरकारें हैं लेकिन मध्य प्रदेश इकलौता राज्य हैं जहां प्रधानमंत्री का जन्मदिन पखवाड़े भर मनाया जा रहा है। यह कौनसे डर का एहसास है। यह उत्सव किस डर को छिपाने का है। प्रदेश के पड़ोसी राज्य मैं नेतृत्व बदलाव से राजनेताओं में भी डर व्याप्त है। प्रदेश में उपचुनाव होना है जिसको लेकर सत्ता और सरकार में वोटरों की बेरुखी का डर है। सूबे में पूर्व मुख्यमंत्री फायरब्रांड नेता उमा भारती की सक्रियता ने इस डर के माहौल को और भयावह बना दिया है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अब कोरोना संकट के बाद सरकारी कामकाज और योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने जनता के बीच जाने के लिए जनदर्शन समस्याओं के निराकरण के लिए जनसुनवाई एक दिनी गुड गवर्नेंस के लिए समाधान ऑनलाइन और निवास पर आयोजित होने वाली पंचायतों का सिलसिला फिर से शुरू किया है।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कामकाज की गति को लेकर मुख्यमंत्री की छटपटाहट कितनी बढ़ी है। प्रदेश सरकार का जुमला था कि सत्ता संगठन साथ है लेकिन 2018 चुनाव में हारने के साथ ही संगठन का मानना था कि सरकार हमारे भरोसे ना रहे मुख्यमंत्री का कान्फ्रेंस के माध्यम से यह संदेश देना कि हमें एक बार फिर फुल फार्म में आना है इस बात का संकेत है कि सरकारी अमला अभी आउट ऑफ फार्म है। गड़बड़ी करने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया है, जबकि अच्छे काम करने वाले अफसरों को पुरस्कार का प्रलोभन भी है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर कमिश्नर कानफें्रंस से रूबरू होते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब मुझे क्या लेने देने का भाव छोड़ कर अफसरों को शासन को आवश्यक सहयोग और समर्थन देना होगा।