Print this page

संसद का संयुक्त सत्र, पीएम मोदी बोले- देशवासियों ने संविधान पर आंच नहीं आने दी Featured

By November 26, 2019 244

देश में आज संविधान दिवस मनाया जा रहा है. इस मौके पर संसद के सेंट्रल हाल में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधन करेंगे. हालांकि, कांग्रेस, शिवसेना, लेफ्ट और डीएमके के सांसदों ने संविधान दिवस समारोह के बहिष्कार का फैसला किया. विपक्षी दलों का आरोप है कि बीजेपी ने महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या की है. विपक्षी दल संसद परिसर में आंबेडकर प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन भी करेंगे. महाराष्ट्र में चल रही सियासी उठापटक के कारण आज भी संसद के दोनों सदनों में हंगामे के आसार हैं. कल दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी.
देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडु कर रहे हैं संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित.
हमारा संविधान हम भारत के लोग से शुरू होता है. हम ही इसकी ताकत है, हम ही इसकी प्रेरणा है और हम ही इसका उद्देश्य हैं. मैं जो कुछ भी हूं समाज के लिए हूं. देश के लिए हूं यही कर्तव्य भाव हमारी प्रेरणा का स्त्रोत है. आइए अपने गणतंत्र को हम कर्तव्यों से ओतप्रोत नई संस्कृति की तरफ लेकर जाएं. नेक नागरिक बनें. मैं कामना करता हूं कि यह संविधान दिवस हमारे संविधान के आदर्शों को कायम रखे. हमारे संविधान निर्माताओं ने जो सपना देखा तो उसे पूरा करने की शक्ति दे.
रोड पर किसी को तकलीफ हुई आपने मदद की अच्छी बात है लेकिन अगर मैंने ट्रैफिक नियमों का पालन किया और किसी को तकलीफ नहीं हुई तो वह मेरा कर्तव्य है. आप जो कुछ भी कर रहे हो उसके साथ अगर हम एक सवाल जोड़ कर देखें कि क्या इससे मेरा देश मजबूत हो रहा है. नागरिक के नाते हम वो करें जिससे हमारा राष्ट्र सशक्त हो.
अधिकारों और कर्तव्यों के बीच एक अटूट रिश्ता है. इस रिश्ते को महात्मा गांधी ने बखूबी समझाया था. वो कहते थे राइट इज ड्यटी वेल परफॉर्म्ड. उन्होंने लिखा है कि मैंने अपनी अनपढ़ लेकिन समझदार मां से सीखा है कि सभी अधिकार आपके द्वारा सच्ची निष्ठा से निभाए गए अपने कर्तव्यों से ही आते हैं.
हमारा संविधान हमारे लिए सबसे बड़ा और पवित्र ग्रंथ है. संविधान को अगर दो सरल शब्दों और भाषा में कहना है तो कहूंगा डिग्निटी और इंडियन और यूनिटी और इंडिया. इन्हीं दो मंत्रों को हमारे संविधान ने साकार किया है. नागरिक की डिग्निटी को सर्वोच्च रखा है और संपूर्ण भारत की एकता को अच्छुण्ण रखा है.
कुछ दिन और कुछ अवसर ऐसे होते हैं जो हमें अतीक के साथ बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं. यह ऐतिहासिक अवसर है. 70 साल पहले हमने विधिवत रूप से संविधान को अंगीकार किया था. 26 नवंबर साथ-साथ दर्द भी पहुंचाता है जब भारत की महान उच्च परंपराएं, संस्कृति विरासत को मुंबई में आतंकवादियों ने छन्न करने का प्रयास किया. मैं आज उन सभी हुतात्माओं को नमन करता हूं. 7 दशक पहले संविधान पर इसी हॉल में चर्चा हुई. सपनों पर चर्चा हुई, आशाओं पर चर्चा हुई.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि आज ही के दिन इतिहास रचा गया था. उन्होंने आगे कहा कि संविधान ने अगर हमें मौलिक अधिकार दिए हैं तो मौलिक कर्तव्य देकर हमें अनुशासित करने की भी कोशिश की है. देश की संप्रभुता को बनाए रखने का दर्शन दिया है. कर्तव्यों की बात ना कर सिर्फ अधिकार की बात करने से असंतुलन पैदा होता है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि आज ही के दिन इतिहास रचा गया था. उन्होंने आगे कहा कि संविधान ने अगर हमें मौलिक अधिकार दिए हैं तो मौलिक कर्तव्य देकर हमें अनुशासित करने की भी कोशिश की है. देश की संप्रभुता को बनाए रखने का दर्शन दिया है. कर्तव्यों की बात ना कर सिर्फ अधिकार की बात करने से असंतुलन पैदा होता है.
प्रह्लाद जोशी ने जब किया पीएम मोदी का स्वागत तो जम कर बजी तालियां. जोशी ने कहा कि इस शुभ अवसर पर हमारे विश्वप्रसिद्ध नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्वागत करता हूं.

Rate this item
(0 votes)
newscreation

Latest from newscreation