चुनावों का दौर कुछ समय के लिए ख़त्म हुआ है, इस बीच सरकार नें अपने प्रमुख नेताओं को लाल बत्ती कारों की सौगात देगी. सरकार का कहना है, कि इन नेताओं नें अपनें कार्यों के दम पर खुद को साबित किया है, जिन्हें राज्य शासन की ओर से उत्कृष्ट कार्य करनें के कारण ये दिए जाएगा. वाही विरोधी पार्टियां सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा कर रहे है.
खबर है कि निगम मंडल अध्यक्ष पद हासिल नेताओं को अब लाल बत्ती दी जाएगी.
खबरों की मानें तो सरकार नें इस सम्बन्ध में एक बैठक की है, जिनमें सरकार की ओर से कुछ नामों पर सहमति बनीं है. और उन्हें जल्द ही लाल बत्ती लगानें की अनुमति दे दी जाएगी.
अभी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की माता के देहांत के कारन इन नियुक्तियों को रोक दिया गया है, शोक के पश्चात् जल्द ही नियुक्तियां की जा सकती हैं.

विमल सुराना (वरिष्ट कांग्रेसी)

मनोज मांडवी (विधायक)

जतिन जायसवाल (महापौर जगदलपुर)
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पिछली बार नेताओं और सांसदों की व्ही.आई.पी. कल्चर के विरुद्ध केंद्र सरकार नें एक फैसला किया था, जिसमें सरकार नें लाल बत्ती और नीली बत्ती लगानें पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद कुछ नेताओं नें अपनी शक्ति को कम होता देख अपनीं गाड़ियों में हूटर और सायरन लगाना शुरू कर दिया. जिसनें लोकसभा और विधानसभा में बहुत बवाल मचाया था.
उस समय महाराष्ट्र के गृहराज्य मंत्री दीपक केसरकर नें तत्कालीन डी.जी.पी. को पत्र लिखकर जानकारी मांगीं थीं कि वे जल्द से जल्द ऐसे विकल्प बताएं जिसमें लाल बत्ती के विकल्प के रूप में उपयोग करके नेताओं की सुरक्षा के लिहाज से कोई कोताही न हों.
सायरन और हूटर लगवानें का नियम
सेन्ट्रल मोटर विहिकल एक्ट के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी गाडी में सायरन और हूटर का प्रयोग नहीं कर सकता, नियम के अनुसार फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और निर्माणाधीन मकान के लिए औजार ले जा रही गाड़ियों में ही हूटर लगानें का प्रावधान है.
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