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अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव की आहट के बीच एक बार फिर अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का शोर सुनाई पड़ने लगा है। अबकी बार की खासियत यह है कि बीजेपी की मोदी−योगी सरकारें तो नहीं, लेकिन उनकी विचारधारा वाले साधू−संत और हिन्दूवादी संगठन मंदिर निर्माण की तारीख भी बता रहे हैं। संतों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सरकार से कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने की मांग के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत जब कहें, 'बेवजह समाज के धैर्य की परीक्षा लेना किसी के हित में नहीं है। राम मंदिर निर्माण के लिये कानून लाए सरकार।' तो, समझा जा सकता है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर कहीं न कहीं खिचड़ी पक जरूर रही है। साधू−संत तो बाकायदा यहां तक कह रहे हैं कि 06 दिसंबर 2018 से अयोध्या में मंदिर निर्माण शुरू हो जायेगा। खास बात यह है कि कई मुस्लिम संगठन भी अब मंदिर निर्माण के पक्ष में बोलने लगे हैं। खुद को बाबर का वंशज बताने वाले भी कह रहे हैं कि अगर मंदिर निर्माण हुआ तो वह सोने की ईंट देंगे।
 
दरअसल, उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार के गठन के बाद से ही मोदी सरकार के ऊपर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने का चौतरफा दबाव बन रहा है। बीजेपी के भीतर से भी समय−समय पर मंदिर निर्माण की आवाज उठती रहती है। मंदिर से लेकर तमाम सियासी सरगर्मियों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 24 अक्टूबर को लखनऊ में एक बैठक भी करने जा रहा है, जो इस दिशा में 'मील का पत्थर' साबित हो सकती है। तय कार्यक्रम के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और दोनों उप मुख्यमंत्री, योगी सरकार के तमाम मंत्रियों, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल भी इसमें हिस्सा लेंगे। हाल ही में नागपुर में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के राम मंदिर पर ताजा बयान के बाद इस बैठक का महत्व और बढ़ गया है। मोहन भागवत के अलावा संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल सहित कई अन्य प्रमुख लोग इस बैठक में शामिल होंगे। बैठक में योगी सरकार के कामकाज, मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में कई चेहरों के भविष्य पर भी मुहर लगेगी। इसके अलावा लोकसभा चुनाव का रोडमैप बनाने के साथ कई अन्य मुद्दों पर भी बातचीत होगी।
 
बहरहाल, लाख टके का सवाल यही है कि क्या आम चुनाव से पूर्व मंदिर निर्माण हो पायेगा ? या यह एक बार फिर चुनावी शिगूफा साबित होगा। भारतीय जनता पार्टी पर हमेशा से राम मंदिर के नाम पर सियासत का आरोप लगता रहा है। खासकर, जब से केन्द्र में मोदी और यूपी में योगी का राज आया है तब से यह हमला और भी तेज हो गया है। बीजेपी जब भी किसी मंच पर मंदिर निर्माण की वकालत करती तो विपक्ष बीजेपी पर तंज कसने लगता है, 'मंदिर वहीं बनायेंगे, पर तारीख नहीं बतायेंगे।' मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण विपक्ष के हमले से बीजेपी तिलमिला कर रह जाती है। यह सिलसिला कई वर्षों से अनवरत जारी था। मंदिर निर्माण ऐसा मुददा था, जिसकी मुखालफत करके मुलायम और लालू यादव जैसे नेता सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने में कामयाब रहे तो कांग्रेस सहित तमाम दलों ने बीजेपी की राम मंदिर निर्माण की सियासत के खिलाफ लामबंदी करके मुस्लिम वोटों की खूब लामबंदी की। बीजेपी को साम्प्रदायिक पार्टी करार दे दिया गया। मुसलामनों को डराया गया कि अगर बीजेपी सत्ता में आ जायेगी तो उनके लिये देश में रहना मुश्किल हो जायेगा। मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते ही पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यहां तक कह दिया कि प्राकतिक सम्पदा पर पहला हक मुसलमानों का है। मुस्लिम तुष्टिकरण का यह सिलसिला कई दशकों तक चलता रहा। ऊंच−नीच के नाम पर हिन्दुओं को आपस में लड़ाया गया। यह सिलसिला 2014 में तब कमजोर पड़ा जब मोदी ने विरोधियों की तुष्टिकरण की सियासत के खिलाफ हिन्दुत्व को धार देकर शानदार जीत हासिल की और कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। शर्मनाक हार के लिये के बाद कांग्रेस ने हार के कारणों का पता लगाने के लिये एंटोनी कमेटी का गठन किया, जिसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कांग्रेस को हिन्दू विरोधी छवि के कारण नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को एंटोनी कमेटी की बात समझ में नहीं आई।
 
उधर, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, बिहार में लालू यादव का राष्ट्रीय जनता दल और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी जैसे नेताओं का मुस्लिम वोटों की सियासत से मोहभंग नहीं हो पाया था, लेकिन उनकी गलतफहमी दूर होने में ज्यादा समय नहीं लगा, क्योंकि बीजेपी हिन्दुत्व के सहारे एक के बाद एक राज्य में सत्तारूढ़ होती जा रही थी।
  
वैसे, हकीकत यह भी है कि राम मंदिर विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट से इतनी जल्दी फैसला आने की उम्मीद किसी को नहीं है। अगर मोदी सरकार कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दे तो बीजेपी को अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव के साथ−साथ इसी वर्ष के अंत में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी इसका फायदा मिल सकता है। योगी सरकार मंदिर निर्माण के लिये प्रस्ताव केन्द्र को भेज सकती है, जिसको आधार बनाकर मोदी सरकार इसे लोकसभा में आसानी से पारित करा लेगी, तो राज्यसभा में भी शायद ही कोई खास अड़चन आए। राजनैतिक नुकसान के डर से कांग्रेस शायद मंदिर निर्माण के लिये सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान्य होगा, जैसा राग नहीं अलाप सकेगी। इसके अलावा विपक्ष के कुछ हिन्दू सांसद भी मंदिर निर्माण के पक्ष में आ सकते हैं। यह बात इस लिये पुख्ता तौर पर कही जा सकती है क्योंकि अब गैर बीजेपी दल ऐसे किसी मुद्दे को हवा नहीं देते हैं जिससे हिन्दू समाज नाराज हो जाये। इसीलिये तो जब इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया तो कहीं भी विरोध के स्वर नहीं फूटे। इससे पहले मदरसों की मनमानी पर योगी सरकार ने डंडा चलाया। मदरसों में राष्ट्रीय गान को गाना अनिवार्य किया। बूचड़खानों पर सख्ती की, लेकिन किसी भी दल ने इन फैसलों के खिलाफ योगी सरकार को घेरने की कोशिश नहीं की। क्योंकि मुस्लिम तुष्टिकरण की सियासत करने वालों को डर सता रहा था कि कहीं हिन्दू वोटर नाराज न हो जायें।
 
लब्बोलुआब यह है कि मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष जिस तरह से लामबंदी कर रहा है। सरकार के हर फैसले पर उंगली उठाई जा रही है। जनआक्रोश को भड़काया जा रहा है। मॉब लिंचिंग की घटनाओं को हवा−पानी देकर मोदी सरकार को पूरी तरफ असफल करार दिया जा रहा है। भगोड़े उद्योगपतियों- विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी की आड़ लेकर केन्द्र सरकार पर कीचड़ उछाला जा रहा है। लड़ाकू विमान राफेल की डील में 'खेल' की बात प्रचारित की जा रही है। उसके चलते मोदी की राह आसान नहीं लगती है। ऐसे में हिन्दुत्व का उभार बीजेपी की नैया पार लगाने के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
 
इस बीच खबर यह भी आ रही है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए सपा−बसपा के गठबंधन में कांग्रेस व रालोद के शामिल होने पर भी सहमति बन गई है। महागठबंधन सभी सीटों पर भाजपा के खिलाफ साझा प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। जानकारों की मानें तो सीटों पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है। बसपा लगभग 40 सीटों पर दावा कर रही है। ऐसे में सपा को अपने खाते से सीटें कांग्रेस व रालोद को बांटनी पड़ सकती हैं। सपा अगर 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारती है तो उसे 10 सीटें कांग्रेस व रालोद को देनी पड़ सकती हैं। देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस व रालोद बसपा−सपा की शर्तों पर गठबंधन में शामिल होने को तैयार होते हैं या कोई अलग राह चुनते हैं। सवाल यह भी है कि शिवपाल यादव का सेक्युलर मोर्चा, डॉ. अयूब की पीस पार्टी, कौमी एकता दल जैसे छोटे दलों जिनकी कुछ विशेष इलाके में अच्छी खासी पैठ है, वह किस करवट बैठेंगे।

 भिलाई के वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर दुबे ने जिला दुर्ग पुलिस अधीक्षक एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने आवेदन में उल्लेख किया है कि सोशल मीडिया और अखबार में एक भाजपा नेता की सच्चाई को उजागर करने के कारण उन्हें धमकी मिल रही है तथा उन्हें जानमाल का खतरा बना हुआ है अतः उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। ज्ञात हो कि भिलाई के अलावा बालोद जिले के एक भाजपा प्रत्याशी के असली चेहरे को उजागर करने के बाद से कई पत्रकारों को धमकी देने का क्रम शुरू हो गया है। जिसकी पत्रकारों ने तीव्र निंदा की है।

 
 
 
 

छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान के लिए कुल 421 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है। राज्य में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बुधवार को यहां बताया कि मंगलवार 23 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन तक कुल 421 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस महीने की 16 तारीख से प्रथम चरण की 18 विधानसभा सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। मंगलवार को अंतिम दिन सबसे अधिक 323 नामांकन दाखिल किए गए।

जबकि 16 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक कुल 98 नामांकन दाखिल किए गए थे। उन्होंने बताया कि आज नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी तथा 26 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन मंगलवार को राजनांदगांव विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री रमन सिंह तथा कांग्रेस की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करूणा शुक्ला ने भी अपना नामांकन दाखिल किया।

उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में राज्य के दो मंत्री केदार कश्यप, नारायणपुर विधानसभा सीट से और महेश गागड़ा, बीजापुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।

वहीं पूर्व मंत्री लता उसेंडी, कोंडागांव विधानसभा सीट से तथा लोकसभा सांसद विक्रम उसेंडी, अंतागढ़ विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: प्रथम चरण में इन सीटों पर होगा मतदान

सुकमा जिले के कोंटा विधानसभा सीट, बीजापुर जिले के बीजापुर, दंतेवाड़ा जिले के दंतेवाड़ा, बस्तर जिले के चित्रकोट,बस्तर और जगदलपुर, नारायणपुर जिले के नारायणपुर, कोण्डागांव जिले के केशकाल और कोण्डागांव, कांकेर जिले के अंतागढ़, भानुप्रतापुर और कांकेर तथा राजनांदगांव जिले के खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी और मोहला-मानपुर विधानसभा सीटों के लिए मतदान होगा।

2013 में भाजपा को मिली जीत 

पहले चरण में जिन 18 सीटों पर मतदान होगा उनमें से 12 सीट अनसूचित जनजाति के लिए तथा एक सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। राज्य में वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में बस्तर क्षेत्र की कुल 12 विधानसभा सीटों में से आठ सीटों पर कांग्रेस को तथा चार सीटों पर भाजपा को विजय मिली थी।

राजनांदगांव और मुख्यमंत्री रमन सिंह

वहीं राजनांदगांव की छह सीटों में से चार सीटों पर कांग्रेस तथा दो सीटों पर भाजपा जीती थी। इस तरह पहले चरण में जिन 18 सीटों के लिए मतदान होना है, उनमें से कांग्रेस के पास 12 तथा भाजपा के पास छह सीटें है। इन सीटों में से राजनांदगांव सीट से मुख्यमंत्री रमन सिंह विधायक हैं। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में निर्वाचन कार्य संपन्न होगा।

12 नवंबर 2018 को होगा पहले चरण का मतदान

प्रथम चरण में 12 नवंबर को 18 विधानसभा क्षेत्रों में तथा दूसरे चरण में 20 नवंबर को शेष 72 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। राज्य में वर्ष 2013 में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 90 सीटों में से 49 सीटों पर तथा कांग्रेस को 39 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं एक एक सीटों पर बसपा और निर्दलीय विधायक हैं।

बॉलीवुड डेस्क. मीटू मूवमेंट थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर दिन कोई न कोई नई कहानी सामने आ रही है। अब एक्ट्रेस प्रियंका बोस ने अपनी मीटू स्टोरी शेयर करते हुए साजिद खान पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगाया है। इससे पहले असिस्टेंट डायरेक्टर सलोनी चोपड़ा, रचेल व्हाइट और करिश्मा उपाध्याय भी साजिद पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप लगा चुकी हैं जिसकी वजह से साजिद को अपकमिंग फिल्म हाउसफुल 4 के डायरेक्शन से हटना पड़ा था।

प्रियंका की मीटू स्टोरी

  1.  

    प्रियंका ने वेबसाइट MissMalini.com से बातचीत में कहा-एक बार मुझे साजिद खान के असिस्टेंट ने फिल्म के ऑडिशन के लिए मुझे मैसेज किया-'आपको बिकिनी में कम्फ़र्टेबल होना होगा'।मैं प्रोफेशनल कमिटमेंट के चलते ऑडिशन में बिकिनी लेकर गई।तब साजिद ऑडिशन लेने आए और सोफे पर बैठ गए।उन्होंने मुझे बिकिनी में देखकर कहा कि अगर मैं तुम्हें देखकर एक्साइट नहीं हो पा रहा तो ऑडियंस कैसे होगी।मैं वहां से निकली और रोते हुए घर पहुंची।

     

  2.  

    प्रियंका ने अनुराग कश्यप और सौमिक सेन से भी अपनी मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सौमिक एक फिल्म की मेकिंग के दौरान उनसे एक्स्ट्राफ्रेंडली होने की कोशिश करते रहे और यहां तक कहा कि वो मेरे साथ एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर करना चाहते हैं।इसके अलावा अनुराग कश्यप ने भी शराब के नशे में उनपर भद्दे कमेंट्स पास किए थे। प्रियंका ने जॉनी गद्दार, लव सेक्स और धोखा, गुजारिश जैसी फिल्मों में काम किया है।

भोपाल। विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की प्रतिक्षा कर रहे लोगों को अभी करीब सात दिन और इंतजार करना होगा। कांग्रेस की सूची प्रदेश में 29-30 को राहुल गांधी के दौरे के बाद घोषित होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं प्रत्याशियों के चयन के लिए भोपाल में 29 अक्टूबर को भाजपा की अंतिम बैठक होगी। 30 को प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सूची लेकर दिल्ली जाएंगे। इसी दिन केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में नामों का फैसला हो जाएगा। 
 

 

कांग्रेस: प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। कांग्रेस के 110 नाम तय हो गए हैं। लेकिन बाकी के 120 नामों को लेकर पार्टी मुश्किल में यहां तीन से चार नाम का पैनल है। केंद्रीय नेतृत्व को इन्हीं 120 नामों को अंतिम रूप देने में सबसे ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी है। स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा तय किए गए 110 सिंगल नामों में 46 मौजूदा विधायकों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा 2013 के विधानसभा चुनाव में 3 हजार से कम वोटों से हारने वाले उम्मीदवारों को दोबारा मौका देने के लिए उनके नामों पर सहमति बनी है। दिल्ली में तीन चली स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में सीटों के लिए तैयार किए गए पैनल में नाम तय करने का काम पूरा कर लिया गया है। जिन सीटों पर पैनल में पांच नाम थे, उनमें से तीन नाम हटा दिए गए हैं और अब सिर्फ दो ही नाम रह गए हैं। जबकि जहां दो से तीन नाम थे वहां पर एक नाम पर सहमित बन गई है। 

 भाजपा: भारतीय जनता पार्टी की चुनाव सूची में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। करीब 80 के करीब नए उम्मीदवार पार्टी मैदान में उतार सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रत्याशी चयन में मुख्यमंत्री को फ्री हैंड दिया गया है। ऐसे में करीब 11 मंत्री और 50 विधायकों के टिकट कट सकते हैं। भाजपा सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता बरकरार है और प्रदेश में शीर्ष पद के लिए मतदाताओं की वह पहली पसंद हैं। ऐसे में सरकार का मुख्य चेहरा जब लोकप्रिय है, तो कुछ अलोकप्रिय विधायकों को दोबारा मैदान में नहीं उतारने से पार्टी को लाभ होगा। 

 प्रत्याशी की छवि मुख्य आधार: भाजपा ने टिकट के लिए जो गाइडलाइन बनाई गई है उसमें दागदार, आपराधिक पृष्ठभूमि या बाहुबली दावेदारों को टिकट नहीं दिया जाएगा। मौजूदा विधायकों में भी सिर्फ उन्हीं विधायकों को टिकट मिलने की उम्मीद है जिनकी छवि अच्छी होगी। भाजपा ने जो सर्वे कराए हैं उनमें टिकट के संभावित दावेदारों की छवि को लेकर बारीकी से जांच कराई गई है। 

कम अंतर से जीते विधायकों से किनारा करेगी पार्टी : विधानसभा क्षेत्र में जिस जाति विशेष के अधिक वोट होंगे। उस जाति के प्रत्याशी को टिकट में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही पिछले विधानसभा चुनाव में जिन विधायकों की जीत का अंतर एक हजार या उससे भी बहुत कम रहा है ऐसे प्रत्याशियों को दोबारा चुनाव मैदान में उतारने से पार्टी परहेज करेगी। जिन सीट पर पार्टी 20 हजार या उससे अधिक वोटों से जीती है उन प्रत्याशियों को दोबारा टिकट दी जा सकती है।

 सख्त होगा अनुशासन: भाजपा सूत्रों का कहना है कि किसी प्रत्याशी की टिकट काटे जाने की स्थिति में उसके द्वारा बगावत करने या पार्टी का माहौल खराब करने की कोशिश की गई अथवा निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया गया तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। 

बदायूं (उ.प्र.)। अपने बयानों के लिये अक्सर सुर्खियों में रहने वाले समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां ने बुधवार को कहा कि वह भाजपा की राजनीतिक ‘आइटम गर्ल’ हैं। उनके नाम पर उत्तर प्रदेश का पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा गया था और अब उनके नाम पर ही आगामी लोकसभा चुनाव भी लड़ा जाएगा। मश्वराती काउंसिल (सलाहकार परिषद) की विशेष बैठक में शामिल होने आये खां ने संवाददाताओं से बातचीत में खुद को भाजपा की ‘आइटम गर्ल’ बताया और कहा ‘‘सारे चुनाव भाजपा मेरे नाम पर ही लड़ती रही है। पिछला विधानसभा चुनाव मेरे नाम पर लड़ा। 

 
अब लोकसभा चुनाव भी मेरे ही नाम पर लड़ेगी। मेरा तो यह हाल कर दिया है कि मुझे खुद नहीं पता कि मेरे ऊपर कितने मुकदमे दर्ज कर दिए गए हैं। मेरे नाम से कितने सम्मन और वारंट जारी कर दिए गए हैं, मैं तो बस उन्ही मुकदमों की पैरवी करता घूमता रहता हूँ।’’उन्होंने कहा कि उनके पास कोई सम्पत्ति नहीं है। उनका सिर्फ एक बैंक खाता है जो विधान भवन में स्थित एसबीआई की शाखा में है। इसके सिवा अगर देश के किसी भी बैंक में उनका कोई खाता मिल जाये तो उनको कुतुबमीनार पर फांसी दे दी जाए।
 
खां ने बताया कि मश्वराती काउंसिल ने निर्णय लिया है कि फिरकापरस्त ताकतों को हराने के लिये दलितों, पिछड़ों और कमजोरों को एकजुट करना होगा, तभी इंकलाब आएगा। इसके लिए उन सभी मुद्दों से हटना होगा जिनको लेकर भाजपा देश मे आग लगाना चाहती है। राम मंदिर मामले पर खां ने कहा कि उच्चतम न्यायालय देश की सर्वोच्च संस्था है। उसका आदेश सबसे ऊपर होना चाहिए।

 


नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि दुनिया अब हिन्दुस्तान को इंतजार करते हुए नहीं देखना चाहती बल्कि अपेक्षा करती है कि वह दुनिया का नेतृत्व करे और देश को दुनिया की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा । प्रधानमंत्री ने ‘सेल्फ4सोसाइटी’ मंच के जरिये आईटी पेशेवरों एवं विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को टाउनहॉल संबोधन में कहा कि रामायण में इस बात का उल्लेख है कि किस प्रकार एक गिलहरी ने रामसेतु के निर्माण में योगदान दिया था । इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि भगवान को भी एक गिलहरी के योगदान की जरूरत पड़ी ।
उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसे में हम कितनी ही पहल करे, कितनी ही योजनाएं बनाए, बजट दे लेकिन किसी भी पहल की सफलता लोगों की भागीदारी में निहित है । ’’ मोदी ने कहा, ‘‘ दुनिया भी अब हिन्दुस्तान को इंतजार करते हुए नहीं देखना चाहती, हिन्दुस्तान दुनिया को लीड करे इस अपेक्षा के साथ देख रही है । हमें दुनिया की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है।’’ स्वच्छ भारत अभियान के संदर्भ में एक पेशेवर के सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि स्वच्छ भारत अभियान के प्रतीक से जुड़ा चश्मा भी महात्मा गांधी का है और इसकी दृष्टि भी गांधी की ही है ।

उन्होंने कहा कि वह तो एक तरह से प्रायश्चित कर रहे हैं, स्वच्छता का जो कार्य चल रहा है, वह सेवा से ज्यादा प्रायश्चित है । मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी ने वर्षो तक अपने आप को देश की आजादी के लिये खपा दिया । उन्होंने अपने नेतृत्व से देश के लिये स्वतंत्रता तो प्राप्त की लेकिन स्वच्छता हासिल नहीं हो पाई । उन्होंने कहा कि हम सभी इसके लिये जिम्मेदार हैं । ऐसे में वह एक बार फिर जोर देना चाहते हैं कि स्वच्छता गांधी की सोच है ।

उन्होंने कहा कि गांव में महिलाओं को जब खुले में शौच के लिये जाना पड़ता है तो उन्हें बहुत पीड़ा होती है । मोदी ने कहा कि कुछ काम सरकार नहीं कर सकती और जो काम सरकार नहीं कर सकती, वह संस्कार कर सकती है । स्वच्छता का विषय संस्कार से जुड़ा है । ऐसे में सरकार एवं संस्कार मिल जाए तो चमत्कार हो सकता है । उन्होंने कहा कि वे सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्ति हैं लेकिन जो सूचना परोसी जाती है, वे उसका शिकार नहीं होते हैं ।

जो सूचना उन्हें चाहिए वे उसे ढूंढकर प्राप्त करते हैं । उन्होंने कहा कि आज 25 से 40 वर्ष के बीच की जो पीढ़ी है, उसमें सहज भाव से काम करने की प्रेरणा है । इसमें सामुहिकता का भाव जुड़ जाए तो ताकत बनकर उभरती है। इसे एक मिशन से जोड़ लें तो परिवर्तन आना शुरू हो जाता है । प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की तकदीर तकनीक में है और जो प्रौद्योगिकी युवाओं के पास है, वह भारत की तकदीर से जुड़ा है ।

उन्होंने ‘मैं नहीं हम’ पोर्टल के संदर्भ में कहा कि इसका अर्थ यह नहीं है कि ‘मैं’ को खत्म कर रहे हैं बल्कि ‘मैं’ का विस्तार है । इसका आशय स्व से समष्टि की ओर बढना है क्योंकि आखिर वृहद परिवार में आनंद का अनुभव होता है । मोदी ने कहा कि वह देखते हैं कि भारत युवा प्रौद्योगिकी का शानदार ढंग से उपयोग कर रहा है और वह इसका न केवल अपने लिये कर रहे हैं बल्कि दूसरों के लिये भी कर रहे हैं ।

‘‘ मैं इसे शानदार संकेत के रूप में देखता हूं । ’’उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रयास छोटा हो या बड़ा हो, उसे महत्व दिया जाना चाहिए । प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वयंसेवी प्रयासों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में बहुत कुछ किया जा सकता है, युवाओं को हमारे उद्यम और किसानों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए । उन्होंने यह भी कहा कि आज अधिक लोग कर चुका रहे हैं क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनके पैसे का उपयोग ठीक से और लोगों के कल्याण के लिए किया जा रहा है ।

इंदौर. 15 साल के वनवास को दूर करने के इरादे से विस चुनाव में उतरने वाली कांग्रेस पार्टी अपने ही नेताओं की बदजुबानी से परेशान है। लगातार बड़े नेताओं की फिसलती जुबान पार्टी के लिए मुसीबत बनती जा रही है। पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह फिर विधायक कल्पना परूलेकर और अब राऊ से कांग्रेस विधायक और कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो वायरल हो गया है। पटवारी जनसंपर्क के दौरान यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि अाप मेरा ध्यान रखना, आपको मेरी इज्जत रखनी है, पार्टी जाए तेल लेने। पटवारी का वीडियो सामने आने के बाद राजनीति गरमा गई है।

  • भारतीय मानक ब्यूराे की टीम ने राजधानी की जरोदा गांव स्थित फैक्ट्री पर मारा छापा
  • भारी मात्रा में एक लीटर का बोतल बंद पानी जब्त, कंपनी मालिक के खिलाफ मामला दर्ज

रायपुर. राजधानी में अवैध रूप से आईएसआई मार्क लगाकर निर्मल ब्रांड के नाम से बोतल बंद पानी बेचने का खुलासा हुआ है। भारतीय मानक ब्यूरो की टीम ने मंगलवार शाम जरोदा गांव में छापा मारकर भारी मात्रा में बोतल बंद पानी बरामद किया। ब्यूरो की ओर से आईएसअाई मार्क के दुरुपयोग में कंपनी मालिक दीपक वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 

 दरअसल, भारतीय मानक ब्यूरो की रायपुर शाखा कार्यालय को सूचना मिली कि तर्रा के ग्राम जरोदा स्थित जेडी प्रोडक्ट में बिना बीएमआई वैध लाइसेंस के निर्मल जल ब्रांड का उपयोग कर अवैध रूप से पैक्ड बोतल पेयजल बनाया जा रहा है। जिसकी सप्लाई अलग-अलग जगह होती है। साथ ही आईएसआई मार्क का भी दुरुपयोग किया जा रहा है। 

 इस पर रायपुर ब्यूरो के प्रमुख और वैज्ञानिक वी. गोपीनाथ की ओर से एक टीम गठित कर वैज्ञानिक कौशलेंद्र कुमार की अगुवाई में वैज्ञानिक अनंत सरावगी और क्लर्क स्मिथ कुमार को छापेमारी की कार्रवाई के लिए जरोदा गांव भेजा गया। विधानसभा थाना पुलिस के साथ की गई इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में एक लीटर की बोतल बंद पानी बरामद हुआ, जिसे जब्त कर लिया गया। 

 फैक्ट्री में पानी को बोतल में भरने के लिए पूरा प्लांट लगा रखा गया था। जिसका संचालन अवैध तरीके से किया जा रहा था। ब्यूरो की ओर से बताया गया कि कंपनी के मालिक दीपक वर्मा के खिलाफ भारतीय मानक ब्यूरो के अधिनियम 2016 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

 वैज्ञानिक वी. गोपीनाथ ने बताया कि दोष साबित होने पर कम से कम 2 लाख से लेकर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना या एक साल की जेल या दोनों हो सकती है। वहीं जब्त किए गए माल का 10 गुना जुर्माना अर्थदंड के रूप में दिया जा सकता है।

रायगढ़. घर में सो रहे युवक पर अज्ञात लोग एसिड फेंककर फरार हो गए। इधर संजीवनी 108 के टोल फ्री नंबर पर कॉल रिसीव नहीं होने पर परिजन पीड़ित को इलाज के लिए मेकाहारा लेकर आए। बर्न वार्ड में इमरजेंसी डॉक्टर के नहीं होने से मरीज को सुबह 11 बजे तक तड़पना पड़ा। 10 घंटे बाद सोमवार को सुबह डॉक्टर के राउंड पर आने के बाद एसिड पीड़ित का इलाज शुरू हुआ। 

 

मामला जांजगीर-चांपा जिले में चंद्रपुर थाना क्षेत्र चंदेली गांव का है। ग्रामीण महेश राणा (32) रविवार की रात सोया हुआ था। लगभग 12 बजे अज्ञात हमलावर उसके घर में घुस गया। महेश राणा के चेहरे पर उसने एसिड फेंक दिया। महेश ने बताया कि चेहरे में एसिड गिरने के बाद उसे गरम पानी डाले जाने का एहसास हुआ। उसने शोर मचाया, आरोपी वहां से भाग चुका था।

 

हादसे के बाद घर के दूसरे सदस्यों के अलावा मोहल्ले के लोग भी उसके घर में जुट गए। चेहरे में एसिड पड़ने की आशंका होने पर महेश के मोबाइल से पत्नी कुमुदनी राणा ने संजीवनी वाहन के लिए टोल फ्री नंबर 108 पर फोन किया। कॉल सेंटर में किसी ने फोन कॉल रिसीव नहीं किया। परिजन उसे पुलिस के 112 वाहन में रात डेढ़ बजे अस्पताल लेकर पहुंच गए। बर्न वार्ड में डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थे। नर्सों ने मामूली मरहम पट्टी कर दी। सुबह 11 बजे जब डॉक्टर राउंड पर आए तो उपचार शुरू किया गया। 


पेट्रोल पंप में काम करता है युवक: ग्रामीण युवक चंद्रपुर के एचपी पेट्रोल पंप में काम करता है। मरीज के अन्य परिजन आशंका जता रहे हैं कि पेट्रोल पंप में ही किसी के साथ महेश का विवाद हुआ होगा। जिसके चलते उस पर एसिड अटैक हुआ है। महेश ने कहा कि उसका किसी से कोई विवाद नहीं हुआ था। चंद्रपुर पुलिस ने इस मामले में छानबीन शुरू कर दी है। 


गेट खुला था, डॉक्टरों की नींद नहीं खुली: हादसे के बाद सबसे पहले मरीज को लेकर परिजन चंद्रपुर के सरकारी अस्पताल में पहुंचे। मरीज की पत्नी कुमुदनी ने बताया उस समय अस्पताल का गेट खुला हुआ था। भीतर जाकर देखे तो अस्पताल के सभी कर्मचारी सोए हुए थे। अंत में चंद्रपुर की पुलिस टीम ने भी आवाज लगाई, इसके बाद भी अस्पताल के कर्मचारी व डॉक्टरों की नींद नहीं खुली। 


इमरजेंसी में डॉ. नवीन कर रहे थे ड्यूटी: रविवार के दिन मेकाहारा के अधिकांश डॉक्टर छुट्टी पर रहते हैं। इमरजेंसी में कुछ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। रविवार को डॉ. नवीन अग्रवाल बर्न वार्ड में ड्यूटी पर थे। इमरजेंसी ड्यूटी होने के बाद भी वे वार्ड में नहीं गए। ऐसे में एसिड से झुलसे मरीज को 10 घंटे तक डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। 


सीधी बात : डॉ. हबेल सिंह उरांव, सहायक अधीक्षक, मेकाहारा 
सवाल: रविवार की रात एसिड पीड़ित आया था, उसके इलाज में देर क्यों हुई? 
जवाब: मुझे मरीज के बारे में जानकारी नहीं है। 
सवाल: रविवार के दिन अस्पताल के सभी डॉक्टर छुट्टी में रहते हैं क्या? 
जवाब: ऐसा नहीं है, इमरजेंसी डॉक्टर मरीजों की देखभाल करते हैं। 
सवाल: उस रात बर्न वार्ड में ड्यूटी पर कौन था, क्या उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे? 
जवाब: डॉ. नवीन अग्रवाल की ड्यूटी थी, यदि उन्होंने इलाज में लापरवाही की है तो कार्रवाई तो करेंगे ही।

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