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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान छत्तीसगढ़ के आरएसएस का नागपुर और नक्सलियों का आन्ध्र से संचालन होता है, यहां पर केवल बंधुआ मजदूर है। कांग्रेस ने समर्थन किया है पर प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री ने संघ की हकीकत को सामने रखा है। कवर्धा तनाव के बाद आरएसएस की जो गतिविधियां एक बार फिर से सामने आई है उससे साफ हो गया कि छत्तीसगढ़ के आरएसएस के कार्यकर्ता नागपुर के हाथों की कठपुतली है। यदि आरएसएस का संचालन छत्तीसगढ़ के लोग कर रहे होते उनमें जरा भी छत्तीसगढ़ के प्रति लगाव होता अपने ही प्रदेश के दंगा भड़काने की साजिश नहीं रची जाति। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सही कहा है, नक्सली और संघ दोनों समाज के लिए घातक होते हैं। 

नई दिल्ली| आयुर्वेद में त्रीदोष सिद्धांत का जिक्र है। ये स्वास्थ्य के लिए काफी जरूरी है। वात, कफ और पित्त पर शरीर टिका हुआ है। हम जानेंगे कि पित्त क्या है, कौन से रोग ऐसे हैं जो पित्त की श्रेणी में आते हैं।
पित्त दोष के कारण आने वाली बीमारी
1. सिर दर्द की बीमारी
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सिर में किसी भी प्रकार का दर्द, चाहे वो गर्मी की वजह से भी क्यों न हो रहा हो उसका कारण पित्त दोष हो सकता है। इससे बचाव के लिए आप डॉक्टरी सलाह ले सकते हैं।
2. गर्दन से जुड़ी बीमारी
एक्सपर्ट बताते हैं किगर्दन से जुड़ी बीमारी जैसे गर्दन में जलन, खट्टी ढकारें, किसी भी प्रकार का अल्सर पित्त दोष के कारण होता है। इन स्थितियों में भी बीमारी का लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह लेना चाहिए।
3. पीलिया की बीमारी भी है पित्त दोष का कारण
एक्सपर्ट बताते हैं कि पित्त दोष होने के कारण लिवर से संबंधित पीलिया की बीमारी हो सकती है। ये रोग भी इसी श्रेणी में आता है, शरीर में यदि आपको इस प्रकार की समस्या हो तो डॉक्टरी सलाह लें।
4. स्किन में दाने व चक्कते और सफेद दाग
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि स्किन संबंधी बीमारी में आने वाले रोग जैसे स्किन में दाने और चकत्तों का आना या फिर सदेफ दाग की समस्या पित्त दोष के कारण होने वाली बीमारी है। शरीर में यदि इस प्रकार की बीमारी है तो आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
5. मधुमेह और पैनक्रियाज से जुड़ी बीमारी
एक्सपर्ट बताते हैं कि पैनक्रियाज में इंसुलिन की कमी भी पित्त दोष के कारण होने वाली बीमारी में आती है। मधुमेह के कारण कोई भी गुप्त रोग पित्त दोष के कारण होते हैं। यदि आप भी इन बीमारी से ग्रसित हैं तो डॉक्टरी सलाह लेकर इलाज करवाएं।
6. नाभि के आसपास मरोड़े आना
एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि आपको पेट दर्द, ब्लॉटिंग आदि की समस्याएं हो या फिर नाभि के आसपास मरोड़े आए तो तमाम बीमारी पित्त दोष की श्रेणी में आने वाली बीमारी होती है। ऐसे में आपको डॉक्टरी सलाह लेने की आवश्यकता है।
7. पुरुषों में स्वप्न दोष की समस्या
एक्सपर्ट बताते हैं कि नाभि से नीचे की समस्या भी पित्त दोष की श्रेणी में आती है। पुरुषों की बात करें तो शीघ्रपतन, स्वप्नदोष आदि समस्याएं जो युवा अवस्था में होती है वो इसी के कारण होती है। यदि आप भी इन बीमारियों से ग्रसित हैं तो डॉक्टरी सलाह लें।
8. महिलाओं की बीमारी
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि महिलाओं में पीरियड्स में अनियमितता, ल्यूकोरिया की समस्या, ओवेरी में छाले आदि की समस्या का कारण पित्त दोष में गड़बड़ी का होना है। शरीर में इस प्रकार की बीमारी होने पर डॉक्टरी सलाह लेकर उचित इलाज करवाना चाहिए।

नई दिल्ली |स्वास्थ्य संबंधी तमाम तरह के लाभ प्राप्त करने के लिए दुनियाभर में ऑलिव ऑयल को व्यापक रूप से प्रयोग में लाया जाता है। एंटीऑक्सीडेंट और मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड से भरपूर इस तेल का सेवन करने से कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक खाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले कई अन्य प्रकार के तेलों के मुकाबले ऑलिव ऑयल का सेवन सेहत के लिए तमाम तरह के स्वास्थ्य लाभ से भरपूर हो सकता है। ऑलिव ऑयल में पाया जाने वाला एंटीऑक्सिडेंट, शरीर को सेलुलर डैमेज से बचाता है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। अध्ययनों में एक्सट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के उपयोग को ज्यादा फायदेमंद बताया गया है।

हृदय रोगियों के लिए फायदेमंद है ऑलिव ऑयल
अध्ययनों से पता चलता है कि ऑलिव ऑयल का सेवन करने वाले लोगों की जीवन प्रत्याशा अधिक होती है। अन्य लोगों की तुलना में ऐसे लोगों में हृदय रोगों का खतरा भी कम होता है। कुछ अध्ययनों में इसे हृदय रोग निवारक दवा के रूप में भी वर्णित किया गया है। हृदय संबंधी जोखिम को कम करने के लिए प्रतिदिन लगभग 20 ग्राम या दो बड़े चम्मच एक्सट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के सेवन की सलाह देता है।

कैंसर से मिल सकती है सुरक्षा
कुछ अध्ययनों में पाया गया कि जैतून के तेल में कई ऐसे यौगिक होते हैं जो स्तन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं, हालांकि सभी निष्कर्ष इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।जैतून के तेल में मौजूद यौगिकों में कोलोरेक्टल कैंसर को रोकने का क्षमता होती है। लैब परीक्षणों में भी इस बात के प्रमाण मिले हैं कि जैतून के तेल में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट शरीर को सूजन, ऑक्सीडेटिव डैमेज और एपिजेनेटिक परिवर्तनों से बचाने में मदद कर सकते हैं।

लिवर को स्वस्थ रखने में सहायक
एक्सट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के यौगिक लिवर डैमेज के खतरे को कम करने के साथ लिवर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं। तेल में पाए जाने वाले ओलिक एसिड सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, इंसुलिन प्रतिरोध और अन्य परिवर्तनों को रोकने में मदद करते हैं।

नई दिल्ली |भारत सबसे फेमस देशों में से एक है, जो तरह-तरह की भाषाओं, अलग-अलग सिनेमाघरों, खाना और पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल प्रथाओं के पॉजिटिव प्रभावों के लिए जाना जाता है। जब स्वास्थ्य की बात आती है, तो कुछ ऐसी भारतीय प्रथाएं हैं जो आसानी से फॉलो की जा सकती हैं और आपके शरीर को फिट और ठीक रहने में मदद करती हैं। तो चलिए जानते हैं पूराने समय की आदतों के बारे में।
जमीन पर बैठ कर खाना
कई भारतीय परिवार ऐसे हैं जो आज भी जमीन पर बैठकर खाना खाते हैं। वास्तव में, यदि आप किसी गुरुद्वारा या मंदिर में जाते हैं, तो वहां भी जमीन पर बैठा कर खाना खिलाया जाता है। जमीन पर बैठकर खाना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह आपके पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है। खाना लेने के लिए आगे की ओर झुकना और पीछे की ओर जाना आपके पैंक्रियाज की धीरे से मालिश करता है और पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है। साथ ही ऐसा करने से आपका ध्यान पूरी तरह से खाने पर रहेगा और आप कितना खा रहे हैं इस बात का भी ध्यान रहेगा।
हाथ से खाना
हम में से ज्यादातर लोग आज भी अपनी रोटी और चावल हाथों से खाते हैं। ऐसा माना जाता है कि हाथों से खाना खाने से व्यक्ति अपनी सभी इंद्रियों के माध्यम से खाना खाता है। आप सूंघ सकते हैं, छू सकते हैं, चख सकते हैं, आवाज कर सकते हैं और देख सकते हैं कि आप क्या खा रहे हैं। यह खाने के स्वाद को बढ़ाता है और इसलिए आप हाथ से खाने के बाद हमेशा संतुष्ट महसूस करेंगे। हालांकि हाथ से खाने से पहले ये सुनिश्चित करें की आपके हाथ अच्छी तरह से धुले हों।

मुंबई। अभिनेत्री आलिया भट्ट पर हिन्दू धर्म की परंपराओं का मजाक उड़ाने के आरोप में एफआईआर दर्ज किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार बीते दिनों एक्ट्रेस का विज्ञापन कन्यादान में परम्पराओं पर सवाल उठाए हैं। अपने इस टीवी एड की वजह से आलिया भट्ट की समस्या और मुश्किलों में इजाफा होता जा रहा है। दरअसल इस विज्ञापन के सामने आते ही आलिया पर हिन्दू धर्म की परंपराओं का मजाक उड़ाने का आरोप लगने लगा। रिपोर्ट्स के अनुसार अब इस विज्ञापन को लेकर आलिया भट्ट के खिलाफ मुंबई के सांताक्रूज थाने में शिकायत दर्ज कराई गई हैं। खबरों के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आलिया भट्ट ने हिन्दू भावनाओं को आहत‍ किया है और कन्यादान को प्रतिगामी तरीके से दिखाया है। इस मामले में मान्यवार कंपनी और आलिया भट्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। इस विज्ञापन में आलिया भट्ट को दुल्हन के रूप में दिखाया गया है। वह शादी के मंडप में बैठी हैं और सवाल करती हैं कि मैं क्या कोई दान की चीज हूं?

नई दिल्ली। रागी पोषक तत्वों से भरपूर ऐसा अनाज है जिसमें कैल्शियम, विटामिन्स, फाइबर और कार्बोहाइड्रेड मौजूद होता है जो अच्छी सेहत के लिए जरूरी है। फाइबर से भरपूर यह अनाज ना सिर्फ आपका वज़न कंट्रोल करता है, बल्कि पाचन को भी दुरुस्त रखता है। रागी का इस्तेमाल इडली बनाने में और आंटे के साथ मिलाकर रोटी बनाने में भी किया जाता है। सुबह नाश्ते में इसका सेवन किया जाए तो आप पूरा दिन एनर्जेटिक महसूस करते हैं। इतने उपयोगी अनाज के बॉडी को कौन-कौन से फायदे हो सकते हैं आइए जानते हैं।
रागी के फायदे
कैल्शियम की कमी पूरा करता रागी का आटा:
किसी भी अनाज की तुलना में रागी के आटे में कैल्शियम सबसे ज्यादा पाया जाता है, जो हड्डियों और दांतों को मज़बूत करता है। इसके अलावा ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम में भी यह बहुत ही उपयोगी है।
शुगर कंट्रोल करता है:
अगर आप शुगर के पेशेंट है और आपकी शुगर कंट्रोल नहीं रहती तो आप रागी के आटे का सेवन करें। रागी में हाई पॉलीफेनोल और डायटरी फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जिससे बॉडी में शुगर के स्तर को कंट्रोल किया जा सकता है। इसका सेवन नाश्ते से लेकर डिनर तक में करना फायदेमंद है।
तनाव कम करता है यह अनाज:
रागी में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सिडेंट मौजूद होता है जो तनाव को कम करने में मददगार है। एंग्ज़ायटी, डिप्रेशन और अनिद्रा का बेहतरीन उपचार करती है रागी।
वज़न कंट्रोल करती है रागी:
रागी में मौजूद फाइबर जल्दी डाइजेस्ट नहीं होते और घंटों तक आपका पेट भरा रहता है और आप ओवर इटिंग से बच जाते हैं। इसके सेवन से आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगती और आपका वेट कंट्रोल में रहता है।
पोषक तत्वों का खज़ाना है:
रागी में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो एनीमिया का उपचार करता है। बॉडी में हीमोग्लोबिन कम है तो रागी का सेवन करें। रागी को अंकुरित करके खा लिया जाए तो इससे विटामिन C का लेवल बढ़ जाता है। इसमें मौजूद आयरन बॉडी में आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है और ब्लड में आसानी से घुलने लगता है।

अगर आप ने भी इस महामारी के दौर में घर से काम किया है, तो इस खबर को पढ़ना ना भूलें. आपके दिल के लिए बहुत जरूरी है.

नई दिल्ली | कोविड-19 महामारी की शुरुआत से ही दुनियाभर में अधिकतर लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. हालांकि, यह कदम महामारी के विस्तार को रोकने के लिए काफी जरूरी है, लेकिन फिर भी इसके नकारात्मक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, काफी देर तक काम करने के कारण लोगों में हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के कारण होने वाली मौतों में इजाफा हुआ है. डब्ल्यूएचओ और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा Environmental International में प्रकाशित अनुमान के अनुसार, काम करने के ज्यादा घंटों के कारण स्ट्रोक और ischemic heart disease से 2016 में करीब 7,45,000 मौतें हुई हैं. जो कि साल 2000 से 29 प्रतिशत ज्यादा है.

वर्क फ्रॉम होम के कारण बढ़ा इन दिल की बीमारियों का खतरा:
नोएडा स्थित Jaypee Hospital के Department of Interventional Cardiology (Adult) के डायरेक्टर डॉ. बी. एल. अग्रवाल का कहना है कि महामारी में घर से काम करना भी एक समस्या बन रही है. क्योंकि घर से काम करने के कारण लोगों को पहले से ज्यादा देर तक कंप्यूटर स्क्रीन के आगे काम करना पड़ रहा है. इन दिनों ना सिर्फ काम करने के घंटे बढ़ गए हैं, बल्कि तनाव भी बहुत ज्यादा बढ़ा है. घर से काम करने के वर्किंग टाइमिंग भी अक्सर अस्वस्थ होती हैं. क्योंकि, लोगों को अपने टाइम जोन से विपरीत अपने काम के घंटे बढ़ाने पड़ रहे हैं. इन सभी वजहों के साथ अस्वस्थ डाइट, शारीरिक गतिविधि में कमी, धूम्रपान और अपर्याप्त नींद के कारण शरीर में तनाव बढ़ रहा है.

एक्सपर्ट के मुताबिक, पहले से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (खासतौर से हार्ट फेलियर) और डायबिटीज व मोटापे जैसे कोरोनरी डिजीज का खतरा बढ़ाने वाले कारकों से पीड़ित लोगों में कोविड-19 के कारण होने वाली मौतों का खतरा काफी बढ़ा है. लेकिन इसी के साथ cardiomyopathy/myocarditis/Acute Coronary Syndromes जैसी कुछ दूसरी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का विकास भी उन लोगों में बढ़ा है, जो पहले इससे ग्रसित नहीं थे.

वर्क फ्रॉम होम करने वाले युवाओं को अपनाने चाहिए ये टिप्स:
डॉ. बी. एल. अग्रवाल के मुताबिक, वर्किंग प्रोफेशनल इस समय दो महामारी का सामना कर रहे हैं, पहली कोरोनावायरस और दूसरी एंग्जायटी. आइए विश्व हृदय दिवस पर हम दिल को स्वस्थ रखने वाले कुछ टिप्स के बारे में जानते हैं.

रोजाना ताजे फल और हरी सब्जियां खाना ना भूलें.
रोजाना पर्याप्त मात्रा में नींद लें. सोने से पहले अपना स्क्रीन टाइम घटा लें और रात में भारी खाना खाने से बचें.
अपने काम के घंटों को निश्चित करें. इसके साथ ही फैमिली और घर के कामों के लिए भी समय निकालें और इस अनुशासन पर टिके रहने की कोशिश करें.
रोजाना नियमित रूप से 30-45 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें.
दिमाग को रिलैक्स करने के लिए गेम खेलें, किताब पढ़ें, गाने सुनें, योगा करें.
नियमित रूप से हेल्थ चेकअप करवाना ना भूलें.

नई दिल्ली| इन दिनों छोटी सी उम्र में लोगों को दिल संबंधी परेशानी के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आज यानी 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ड डे है। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे योग आसन बताने वाले हैं, जिन्हें आप रोजाना कर सकते हैं। ये आसन दिल स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। आइए जानते हैं।
1) ताड़ासन
दिल की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाकर तनाव कम करता है। ताड़ासन को करने के कई फायदे हैं जैसे ये रीढ़ संबंधी समस्याओं से निजात दिलाने में कारगर है। इसे नियमित तौर पर करने से ये शरीर की पॉजिशन ठीक रखता है। इसके अलावा जांघ, घुटने और एड़ियां मजबूत बनती हैं। कई बुजुर्गों और इन दिनों युवाओं में पैरों में लड़खड़ाहट की समस्या देखी गई है। ऐसे में रोजाना इस आसन को करने से ये दिक्कत दूर होती है। हालांकि अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, चक्कर, पैरों की नसों में सूजन की शिकायत हो तो इस आसन को न करें।
2) मंडुकासन
ये आसन छाती की मांसपेशियों को खोलता है, जिससे ब्लड फ्लो में धमनियों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और ब्लड प्रेशर कम होता है। ये आसन इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ावा देकर ब्लड शुगर को सामान्य रखता है। इसके अलावा ये मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाकर तनाव का स्तर भी घटाता है। लेकिन अगर आपको घुटनों और कमर में दर्द की शिकायत हो या पेट की सर्जरी हुई हो तो मंडुकासन डॉक्टर की सलाह पर करें।
3) कटिचक्रासन
दिल संबंधी परेशानी से दूर रखता है ये आसन। इसे करने से रक्त प्रवाह स्मूद बनाता है। साथ ही ये आसन कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी लाकर हार्ट अटैक से बचा कर रखता है। अगर आप कमर और उसके आसपास के हिस्सों में जमी चर्बी घटाने का सोच रहे हैं तो ये आसन काफी असरदार है। रोजाना इसकी प्रेक्टिस करने से रीढ़ को लचीला बनाए रखने में मदद मिलती है और कब्ज की समस्या दूर होती है। ये आसन ब्लड शुगर को भी नियंत्रित रखता है। अगर आपके पेट का ऑपरेशन हुआ है या आपको स्लिप डिस्क की शिकायत है तो इस आसन को न करें।
4) वज्रासन
ये आसन स्ट्रेस हार्मोन 'कॉर्टिसोल' के फ्लो को घटाकर ब्लड फ्लो को स्मूद बनाता है। ये दिल की गति को भी नियंत्रित रखता है। इसे करने से जांघों और पिंडलियों की नसें-मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसे करने से पाचन तंत्र अच्छा रहता है और पीठ-पैर दर्द में आराम मिलता है। रीढ़ की हड्डी सीधी रखने में मदद करता है। अगर आपके घुटनों में दर्द है या टखने में चोट लगी हो तो वज्रासन न करें। साथ ही बवासीर के मरीज भी इस आसन को करने से बचें।

नई दिल्ली| देश में इस समय मौसमी बुखार (इन्फ्लूएंजा) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौसम बदलने के साथ होने वाले फ्लू की चपेट में अक्सर लोग आ ही जाते हैं। इन्फ्लूएंजा वायरस अत्यधिक संक्रामक होता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह और अक्टूबर में हर साल देश में फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इस समय देश में कोविड-19 का भी दौर चल रहा है, ऐसे में लोगों को और भी सतर्क हो जाने की आवश्यकता है। कुछ आसान से उपायों को प्रयोग में लाकर फ्लू के हर बार होने वाले संक्रमण से बचाव किया जा सकता है। फ्लू एक श्वसन संक्रमण है, यह संक्रमण किसी को भी हो सकता है। कुछ लोगों में यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकता है। सामान्यतौर पर फ्लू के संक्रमण की स्थिति में लोगों को बुखार, शरीर में दर्द, नाक बहने, खांसी आने, गले में खराश के साथ थकान की समस्या हो सकती है। आइए उन उपायों के बारे में जानते हैं जिनको प्रयोग में लाकर फ्लू के संक्रमण से खुद को सुरक्षित किया जा सकता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएं
कोरोना संक्रमण की तरह ही फ्लू से बचाव के लिए भी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखना सबसे आवश्यक माना जाता है। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली आपके शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। वहीं यदि आप बीमार भी हो जाते हैं तो यह लक्षणों की गंभीरता को कम करने में सहायक होती है। अपनी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए रात में कम से कम 7 से 9 घंटे की नींद जरूर लें। इसके अलावा, नियमित व्यायाम के साथ पौष्टिक आहार का सेवन जरूर करें।

साफ-सफाई का ध्यान रखना आवश्यक
उचित स्वच्छता की आदतें फ्लू से बचाव कर सकती हैं। फ्लू वायरस बेहद संक्रामक है, यह खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली ड्रॉपलेट के माध्यम से 6 फीट के भीतर खड़े किसी व्यक्ति में फैल सकता है। इससे बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना आवश्यक है। संक्रमण के मौसम में लोगों से पर्याप्त दूरी बनाकर रखें, नाक और मुंह को ढक कर रखें। इसके अलावा जिस जगह पर आप बैठते हैं उसकी साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें, जिससे सतह के माध्यम से संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।
फ्लू का टीकाकरण जरूर कराएं
हर साल फ्लू का टीका लगवाएं, टीकाकरण कराने से बीमारी की गंभीरता और अवधि को कम किया जा सकता है। 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को इसकी जटिलताओं का उच्च जोखिम होता है, ऐसे में फ्लू वैक्सीनेशन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक
कोरोना संक्रमण की ही तरह फ्लू संक्रमण से भी बचाव के लिए आपको हाथों की स्वच्छता बनाकर रखनी चाहिए। चूंकि फ्लू का वायरस सतह पर रह सकता है, इसलिए नियमित रूप से अपने हाथ धोने की आदत डालें। खाना बनाने और खाने से पहले यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। फ्लू और कोरोना दोनों से बचाव के लिए हैंड सेनिटाइजर का प्रयोग करते रहें या साबुन और पानी से अपने हाथों को समय-समय पर धोते रहें।

मुंबई| चाउमीन, मनचूरियन में अक्सर आपने हरी प्याज को देखा होगा। इसका स्वाद बेहद ही स्वादिष्ट लगता है। आप भी घर में अक्सर हरी प्याज की सब्जी बनाती होंगी या फिर किसी चायनीज डिश को गार्निश करने के लिए इस्तेमाल करती होंगी। रोजाना में खाई जाने वाली प्याज की तुलना में इसका स्वाद थोड़ा हल्का होता है। हालांकि, ये न केवल स्वाद में अच्छी होती हैं बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होती हैं। हरी प्याज को आप अपनी रोजाना की डाइट में शामिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं रोजाना की डाइट में हरी प्याज को शामिल करने के फायदे।
आंखों के लिए अच्छा होता है
हरी प्याज में ल्यूटिन और जेक्सैन्थिन जैसे कैरोटेनॉयड्स होते हैं जो हमारी आंखों की सुरक्षा करते हैं। यह आंखों के लिए भी एक अच्छा विकल्प है क्योंकि इसमें विटामिन ए होता है जो आपकी आंखों को स्वस्थ रखने और सामान्य रोशनी बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
वेट लॉस के लिए अच्छा होता है
हरी प्याज पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। साथ ही इसमें कैलोरी और फैट का स्तर बहुत कम होता है। यह निश्चित रूप से वजन घटाने में आपकी मदद कर सकता है। इसके अलावा इसमें फाइबर होता है जो वास्तव में आपके शरीर के लिए स्वस्थ होता है और वजन घटाने को बढ़ावा देता है।

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