ईश्वर दुबे
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राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार
चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम - श्री राजेश अग्रवाल
रायपुर, 22 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित “श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स” परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति CSMC ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा।
81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए आसान हुआ बेटे के नाम जमीन का हस्तांतरण
पारिवारिक दानपत्र पर पंजीयन शुल्क अब केवल 500 रुपये, परिवार को मिली 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत
सरल प्रक्रिया और डिजिटल सुविधाओं से बुजुर्गों को मिली सहूलियत, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में साझा किया अनुभव
रायपुर, 22 सितम्बर 2026/ उम्र के इस पड़ाव में जब कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाना और लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना बुजुर्गों के लिए कठिन हो सकता है, तब सरल और सुविधाजनक पंजीयन व्यवस्था उन्हें बड़ी राहत देती है। महासमुंद जिले के ग्राम बम्हनी निवासी 81 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर के लिए अपने पुत्र श्री रवि राम पाल के नाम जमीन का दानपत्र कराना ऐसा ही अनुभव रहा। पारिवारिक संपत्ति के दानपत्र पर पंजीयन शुल्क केवल 500 रुपये होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष आर्थिक बचत हुई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद के दौरान उन्होंने पंजीयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों को कम समय में सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराना और संपत्ति से जुड़े कार्यों में अनावश्यक दौड़भाग को कम करना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर यह भी जान रहा है कि इन सुविधाओं का उनके जीवन में किस तरह प्रभाव पड़ रहा है।
मां के लिए कम हुई दौड़भाग, बेटे के नाम आसानी से हुआ संपत्ति हस्तांतरण
श्रीमती सोनकुंवर ने बताया कि उम्रदराज लोगों के लिए संपत्ति से जुड़े कार्यों को पूरा करने में बार-बार कार्यालय जाना परेशानी का कारण बन सकता है। अपने पुत्र के नाम जमीन का दानपत्र कराने के दौरान उन्हें पंजीयन प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान लगी। प्रक्रिया सरल होने और शुल्क कम होने से उनके परिवार को आर्थिक राहत के साथ-साथ अनावश्यक दौड़भाग से भी सहूलियत मिली।
उनके लिए यह सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण किसी परिवार के लिए केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि संपत्ति और परिवार के भविष्य से जुड़ा निर्णय भी होता है। सरल पंजीयन व्यवस्था ने इस प्रक्रिया को उनके लिए अधिक सहज बनाया।
शुल्क 0.8 प्रतिशत से घटकर अब केवल 500 रुपये
राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र एवं बंटवारे के पंजीयन शुल्क में महत्वपूर्ण राहत दी गई है। इन दस्तावेजों पर पहले संपत्ति मूल्य के आधार पर 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे घटाकर अब केवल 500 रुपये निर्धारित किया गया है।
श्रीमती सोनकुंवर के मामले में भी इसी शुल्क सुधार का लाभ मिला। पंजीयन शुल्क कम होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की बचत हुई। कम खर्च में पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण पूरा होना उनके लिए सीधे तौर पर आर्थिक राहत का कारण बना।
तकनीक से आसान हो रही पंजीयन के बाद की प्रक्रिया
पंजीयन विभाग द्वारा प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ तकनीक आधारित सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है। ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करने, ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार सत्यापन और डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी सुविधाओं से नागरिकों की सुविधा बढ़ी है।
पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होती है। इस तरह पंजीयन से जुड़ी सेवाओं को एक सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जा रहा है।
शुल्क में राहत और सरल व्यवस्था ने बनाया अनुभव आसान
श्रीमती सोनकुंवर और उनके पुत्र श्री रवि राम पाल ने पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण पर शुल्क में मिली राहत तथा पंजीयन प्रक्रिया में मिली सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ शासन और पंजीयन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
81 वर्षीय सोनकुंवर की यह कहानी बताती है कि जब शासन की नीति में कम शुल्क और सरल प्रक्रिया दोनों का समावेश होता है, तो उसका सीधा लाभ नागरिकों तक पहुंचता है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई यह कहानी इसी बदलाव की एक झलक है, जहां पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया कम खर्चीली, सुविधाजनक और बुजुर्ग नागरिकों के लिए अधिक सहज बनी।
मूल्यांकन-चिन्हांकन से लेकर UDID, मेडिकल प्रमाण पत्र, पेंशन और सहायक उपकरण तक एक ही स्थान पर मिली सेवाएं
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों को आवश्यक सेवाएं, सुविधाएं और शासकीय योजनाओं का लाभ सहज एवं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में दुर्ग और उत्तर बस्तर कांकेर जिले में आयोजित मूल्यांकन एवं चिन्हांकन शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं से जोड़ा गया।
दुर्ग जिले के जनपद पंचायत धमधा स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित शिविर में दिव्यांगजनों का आवश्यक मूल्यांकन एवं चिन्हांकन किया गया। पात्र हितग्राहियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं एवं सहायक उपकरणों से लाभान्वित करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। साथ ही विभागीय योजनाओं की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।
इसी तरह उत्तर बस्तर कांकेर जिले में कोयलीबेड़ा, पखांजूर और बांदे जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से पहुंचे दिव्यांगजनों को एक ही स्थान पर अनेक आवश्यक सेवाओं का लाभ मिला। शिविर में दिव्यांगजनों के तत्काल मेडिकल प्रमाण पत्र एवं यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनाने की कार्यवाही की गई। राशन कार्ड और बस पास से संबंधित जानकारी एवं मार्गदर्शन देने के साथ पेंशन योजनाओं के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की गई।
शिविर में 6 दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल एवं बैटरी संचालित ट्राइसाइकिल वितरित किए गए। आवश्यक सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संबल मिला। सुविधाएं प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया।
सेवा की कहानी
इन शिविरों की खासियत यह रही कि दिव्यांगजनों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही स्थान पर मूल्यांकन, चिन्हांकन, प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, पेंशन संबंधी कार्यवाही और सहायक उपकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। यह पहल दिव्यांगजनों तक योजनाओं की पहुंच आसान बनाने और उन्हें सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
69.58 लाख रुपए से पक्के फड़ एवं समतलीकरण कार्य को मिली स्वीकृति, किसानों को मिलेगी बेहतर उपार्जन सुविधा
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ किसानों को धान उपार्जन के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भटगांव विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भटगांव विधायक एवं कैबिनेट मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र के 7 धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण कार्य के लिए 69.58 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इससे इन केंद्रों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को धान बेचने के दौरान अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण मिलेगा।
स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां एवं कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र में 9.94 लाख रुपए की लागत से पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य किया जाएगा।
धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ और समतलीकरण होने से उपार्जन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे धान की आवक, खरीदी और रख-रखाव के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में यह कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को गति देने के क्रम में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा भटगांव विधानसभा क्षेत्र में किसानों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह एक और परिणाम है। इससे धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था मजबूत होने के साथ किसानों को सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
सेवा संकल्प अभियान के तहत महतारी वंदन और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राहियों से जानी योजनाओं की उपयोगिता
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले रहीं महिलाओं से सीधे संवाद की पहल को आगे बढ़ाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ग्राम कुंजनगर पहुंचीं। उन्होंने महिलाओं और अन्य हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर योजनाओं से मिल रहे लाभ, उनके अनुभवों और परिवार के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने विशेष रूप से महतारी वंदन योजना एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राही महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने जाना कि योजनाओं से प्राप्त आर्थिक सहायता महिलाओं की दैनिक आवश्यकताओं, परिवार के खर्च और मातृत्व से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में किस प्रकार सहयोगी बन रही है। महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शासकीय योजनाओं से उन्हें आर्थिक संबल और आत्मविश्वास मिला है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाएं महिलाओं को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ मातृत्व और परिवार के बेहतर पोषण में भी सहयोग प्रदान कर रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से इन योजनाओं के वास्तविक लाभ और हितग्राहियों के अनुभवों को सामने लाने के साथ शासन और जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत किया जा रहा है।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने ग्रामीण महिलाओं की बातों को गंभीरता से सुना और योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े उनके अनुभव जाने। ग्राम कुंजनगर में महिलाओं से हुआ यह संवाद महिला सशक्तिकरण, जनभागीदारी और सेवा की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
लोक अदालत के अवसर पर दिव्यांग हितग्राहियों को वितरित किए गए सहायक उपकरण
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ सेवा संकल्प के तहत जरूरतमंदों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में समाज कल्याण विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में लोक अदालत के अवसर पर समाज कल्याण विभाग, जिला रायपुर द्वारा संविलित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत दिव्यांग हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इन उपकरणों के माध्यम से दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन को सुगम बनाने के साथ उनकी गतिशीलता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में कुल 10 सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिनमें 06 श्रवण यंत्र, 02 ट्राइसाइकिल और 02 छड़ियां शामिल हैं। सहायक उपकरण मिलने से हितग्राहियों को अपनी दैनिक गतिविधियों में सुविधा के साथ आवागमन और सामाजिक सहभागिता में भी सहूलियत मिलेगी।
जिला न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा ने हितग्राहियों को सहायक उपकरण प्रदान किए। उन्होंने दिव्यांगजनों तक शासन की कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र दिव्यांग हितग्राही को उसकी आवश्यकता के अनुरूप सहायता और योजनाओं का लाभ समय पर मिले। सहायक उपकरणों का वितरण इसी सेवा भावना की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो दिव्यांगजनों को सुविधा के साथ सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।
पोषण माह 2026 में बच्चों के विकास की निगरानी और देखभाल पर विशेष जोर
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में पोषण माह 2026 के तहत बच्चों के समुचित विकास, पोषण और स्वास्थ्य को लेकर परिवारों को जागरूक किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत भी बच्चों के विकास की समय पर पहचान, उचित परामर्श और जरूरतमंद बच्चों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने की दिशा में सेवाभाव के साथ प्रयास किए जा रहे हैं।
अभियान के माध्यम से अभिभावकों को बताया जा रहा है कि वे बच्चे की उम्र के अनुसार उसके सीखने, खेलने, प्रतिक्रिया देने और व्यवहार पर ध्यान दें। विकास में किसी प्रकार की देरी या चिंता दिखाई देने पर इंतजार न करें, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बात करें और स्वास्थ्यकर्मी से आवश्यक सलाह लें। जरूरत पड़ने पर बच्चे को विशेषज्ञ सेवा के लिए रेफर कराया जा सकता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के विकास और पोषण की नियमित निगरानी की जा रही है। ‘हर बच्चे के विकास में ध्यान देना जरूरी’ संदेश के साथ परिवारों को यह समझाया जा रहा है कि समय पर पहचान और उचित मार्गदर्शन बच्चों के बेहतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ पोषण माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और परिवार मिलकर बच्चों के स्वस्थ विकास की दिशा में काम कर रहे हैं। यही निरंतर देखभाल और समय पर सहयोग ‘सेवा की कहानी’ को मजबूत करते हुए बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार कर रहा है।
शीला कर्मा को मिली सहायता से बेहतर हुई जच्चा-बच्चा की देखभाल
रायपुर, 22 सितम्बर 2026/ प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से लाभान्वित सुकमा की श्रीमती शीला कर्मा को गर्भावस्था के संवेदनशील समय में मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें न केवल पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें पूरी करने में मदद की, बल्कि भविष्य के प्रति नया आत्मविश्वास भी दिया।
नगर पालिका परिषद सुकमा के देवी चौक निवासी श्रीमती शीला कर्मा को योजना के तहत उनके बैंक खाते में सीधे 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि का उपयोग पौष्टिक आहार, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए किया। समय पर मिली सहायता से गर्भावस्था के दौरान उनकी देखभाल बेहतर हुई और शिशु के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी परिवार को सहारा मिला।
श्रीमती कर्मा बताती हैं कि आर्थिक आवश्यकता के समय मिली यह सहायता उनके परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई। आवश्यक खर्च के बाद बची राशि उन्होंने अपने नवजात शिशु के सुरक्षित भविष्य के लिए बैंक खाते में सहेजकर रखी है। उन्होंने कहा कि योजना ने मातृत्व के कठिन समय में परिवार के सदस्य की तरह उनका साथ दिया।श्रीमती कर्मा ने कहा कि दूरस्थ अंचलों तक योजना का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचना शासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती एवं धात्री माताओं को डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य माताओं के पोषण स्तर में सुधार के साथ गर्भावस्था और प्रसव के बाद होने वाले आर्थिक खर्च की आंशिक भरपाई करना है।
चार जिले रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में आश्रम छात्रावासों का स्थलीय निरीक्षण
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदायों से जुड़े विभिन्न प्रकरणों की जमीनी स्थिति जानने के लिए चार जिलों के दौरे पर है। 20 से 25 सितंबर तक चलने वाले इस दौरे में रायपुर, सक्ती, जशपुर और कांकेर में जनजातीय आवासीय छात्रावासों का आकस्मिक निरीक्षण, ग्राम भ्रमण और समुदाय के लोगों से सीधे संवाद किया जा रहा है।
आयोग की टीम विशेष रूप से नागवंशी, संसारी उरांव, पहाड़ी कोरवा और दिहाड़ी कोरवा समुदायों से जुड़े क्षेत्रों में पहुंचकर उनकी समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित अभ्यावेदन प्राप्त करेगी। जशपुर में 22 और 23 सितंबर को विशेष रूप से जनजातीय ग्रामों का भ्रमण निर्धारित है।
कांकेर में 24 सितंबर को जनजाति महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तिकरण को लेकर संवाद कार्यक्रम होगा। इसमें पंचायत एवं जिला स्तर की महिला जनप्रतिनिधियां शामिल होंगी। 25 सितंबर को रायपुर में आयोग में लंबित प्रकरणों को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं प्राधिकारियों के साथ बैठक होगी। आयोग की ओर से संबंधित अधिकारियों को जांच दल को आवश्यक सहयोग, दस्तावेज उपलब्ध कराने और मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक
रायपुर, 22 सितंबर 2026/ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटक है। भूमि संबंधी मामलों की जटिलताओं को समाप्त करने, प्रशासनिक तंत्र को अधिक पारदर्शी बनाने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग द्वारा हाल ही में कई बड़े और दूरगामी नीतिगत निर्णय लिए गए हैं। ये सुधार न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम और सरल बना रहे हैं, बल्कि वर्षों से लंबित पड़ी समस्याओं का समयबद्ध व निष्पक्ष निराकरण भी सुनिश्चित कर रहे हैं।
डिजिटल प्रणाली से सुगम हुआ रिकॉर्ड प्रेषण
02 अप्रैल 2025 को जारी विशेष आदेश के तहत अब सभी भौतिक दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में प्राप्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। भारसाधक अधिकारी को सत्यापनकर्ता का दायित्व सौंपते हुए अब समस्त राजस्व रिकॉर्ड ई-प्रणाली के माध्यम से मंगाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल से रिकॉर्ड के त्वरित संप्रेषण की सुविधा मिली है, जिससे कागजी औपचारिकताओं में होने वाला अनावश्यक विलंब पूरी तरह समाप्त हो गया है और प्रकरणों के निराकरण में अप्रत्याशित गति आई है।
कृषि भूमि की अदला-बदली हुई आसान
कृषकों और भू-स्वामियों को अपनी सुविधा अनुसार कृषि भूमि की परस्पर अदला-बदली करने का विधिक अधिकार संहित के तहत प्राप्त है। इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम और स्पष्ट बनाने के लिए 21 अक्टूबर 2025 को नए मार्गदर्शी निर्देश जारी किए गए हैं। इससे किसानों को अपनी ज़मीन के बेहतर प्रबंधन में काफी सहूलियत मिल रही है।
त्रुटि सुधार प्रक्रिया का सरलीकरण
अक्सर राजस्व अभिलेखों में लिपिकीय या मामूली त्रुटियों जैसे नाम, जाति, पता या फसल प्रविष्टि के कारण भू-स्वामियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। 19 जुलाई 2024 की अधिसूचना के माध्यम से इन त्रुटियों के त्वरित सुधार हेतु सीधे तहसीलदार को सशक्त बनाया गया है। इस फैसले ने आम जनता के अदालती चक्करों और समय की बर्बादी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
अवैध प्लाटिंग पर कड़ी नकेल
जनवरी 2026 में राजस्व विभाग ने अवैध प्लाटिंग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी किए। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित विशेष समिति अब अवैध प्लाटिंग के खिलाफ समुचित व त्वरित कानूनी कार्यवाही कर रही है, जिससे आम खरीदारों के हितों की रक्षा हो रही है।
पुराने परिपत्रों का निरस्तीकरण
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रासंगिक और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 23 जुलाई 2024 के आदेश द्वारा नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि एवं अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन तथा आवंटन से संबंधित 2019, 2020 और 2022 के पूर्व परिपत्रों एवं निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है।
डिजिटल ई-प्रणाली, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और त्वरित निवारण की इस समावेशी नीति ने राज्य के राजस्व प्रशासन को एक नई दिशा दी है। यह कदम सुशासन की दिशा में एक सशक्त और जन-हितैषी प्रयास सिद्ध हो रहा है।