ईश्वर दुबे
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मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायत पर 3 जेसीबी और 3 ट्रैक्टर वाहन जप्त,
खनिज संपदा की लूट नहीं होगी बर्दाश्त, अवैध उत्खनन करने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई
रायपुर 27 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के निर्देश पर जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 जेसीबी मशीन तथा 3 ट्रैक्टर वाहनों को जप्त किया है। यह कार्रवाई राज्य सरकार की शून्य सहिष्णुता की नीति को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू किए जाने का प्रमाण है।
जिले के देवराजपारा-सधवानी तथा बंधी-बचरवार क्षेत्र में खनिज मुरूम एवं मिट्टी के अवैध उत्खनन की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल जांच कराई गई। वहीं सिलपहरी क्षेत्र में खनिज रेत के अवैध परिवहन की सूचना पर भी खनिज विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहनों को जप्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान देवराजपारा-सधवानी क्षेत्र से दो जेसीबी, बंधी-बचरवार क्षेत्र से एक जेसीबी तथा सिलपहरी क्षेत्र से रेत परिवहन में लगे तीन ट्रैक्टर वाहनों को जब्त कर सुरक्षित रूप से पुलिस लाइन अमरपुर में रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि सधवानी के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1076 तथा कलेक्टर के समक्ष अवैध उत्खनन की शिकायत दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री की जनहितकारी शिकायत निवारण व्यवस्था के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए खनिज विभाग को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला प्रशासन की सक्रियता और खनिज विभाग की तत्परता से शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई, जिससे आमजन का शासन-प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने स्पष्ट किया है कि जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन अथवा भंडारण जैसी किसी भी गतिविधि को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी, सतत निरीक्षण तथा शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जिले की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण हो सके और शासन को राजस्व की क्षति न पहुंचे।
खनिज विभाग के अनुसार जप्त किए गए सभी वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। नियमानुसार अर्थदंड एवं समझौता राशि निर्धारित खनिज मद में जमा कराने के बाद ही संबंधित वाहनों को मुक्त किया जाएगा।
इस कार्रवाई में सहायक खनिज अधिकारी आदित्य मानकर, खनिज निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक सतीश साहू सहित जिला खनिज उड़नदस्ता दल के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार अवैध खनन के विरुद्ध कठोर रुख अपनाते हुए जनशिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।
शहीद की माताजी से की आत्मीय भेंट, अंत्योदय कार्ड जारी करने के दिए निर्देश
रायपुर , महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सुकमा जिले के जगरगुंडा स्थित शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र की रक्षा एवं जनसेवा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने शहीद की माताजी से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान प्रदेश और देश की अमूल्य धरोहर है तथा उनके परिवारों का सम्मान और संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने संबंधित अधिकारियों को शहीद परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए शहीद की माताजी के लिए अंत्योदय राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तत्काल पूर्ण करने को कहा, ताकि उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सके।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास, विश्वास और शांति के नए युग की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में प्रदेश के वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को सदैव स्मरण रखना हम सभी का दायित्व है। शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।
कभी नक्सल प्रभाव का प्रतीक रहे इलाकों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारत
रायपुर, 27 जून 2026/
बस्तर अब भय और हिंसा की पहचान से आगे बढ़कर विकास, विश्वास और जनसहभागिता के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। कभी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे सुदूर अंचलों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और आजीविका के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। इसी परिवर्तनशील बस्तर की तस्वीर को और सशक्त करने महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूर्वर्ती और सिलगेर पहुंचीं।
विशेष महत्व की बात यह रही कि श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनीं। वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में उनका आगमन विकास और शासन की संवेदनशील उपस्थिति का प्रतीक बनकर उभरा।
दौरे के दौरान मंत्री ने पूर्वर्ती एवं सिलगेर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया तथा अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीय समय बिताया, ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और हिंसा के कारण चर्चा में रहते थे, वहीं आज महिला स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास के केंद्र बन रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और नई संभावनाओं का सृजन कर रही हैं।
प्रवास के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जगरगुंडा स्थित कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
ग्रामीण महिलाओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि पहली बार कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे जगरगुंडा पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और संवाद करने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत करने वाली है तथा यह अनुभव कराती है कि विकास की मुख्यधारा अब वास्तव में उनके गांव तक पहुंच चुकी है।
श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसमर्थन और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण निर्मित हुआ है। जगरगुंडा, पूर्वर्ती और सिलगेर जैसे क्षेत्रों में आज बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएं बदलते बस्तर की सशक्त पहचान बन चुकी हैं।
रायपुर , 27 जून 2026/ महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बस्तर संभाग के सुकमा जिले के प्रवास के दौरान सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र, लस्केपारा (छिंदगढ़) की पोषण वाटिका में नन्हें बच्चों के साथ मुनगा एवं पपीता के पौधों का पौधरोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘‘हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण’’ का संदेश देते हुए पौष्टिक आहार, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान किया।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों को मुनगा और पपीता के पोषण संबंधी महत्व, इनके स्वास्थ्य लाभ तथा संतुलित आहार में उनकी उपयोगिता के बारे में सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के हाथों से भी पौधे लगवाए और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि मुनगा को "सुपोषण वृक्ष" के रूप में पहचान मिल चुकी है, क्योंकि इसकी पत्तियां, फलियां और फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं तथा कुपोषण की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पपीता भी विटामिन एवं खनिज तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत है, जो बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों के अभिभावकों से अपने घरों एवं आंगनों में मुनगा के पौधे लगाने की अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने आसपास पौष्टिक वृक्ष लगाए, तो घर के समीप ही पोषक आहार उपलब्ध होगा और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ बचपन, सुपोषित परिवार और हरित भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य देने का संकल्प भी है।
राज्य सरकार द्वारा संचालित सुपोषण अभियान के अंतर्गत पोषण वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और माताओं को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। बस्तर अंचल से शुरू हुआ यह संदेश प्रदेश में पोषण, स्वास्थ्य और हरियाली के प्रति जनजागरूकता का प्रभावी अभियान बनकर उभर रहा है
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन की प्राथमिकता— बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण व्यवस्थाओं से कोई समझौता नहीं
औचक निरीक्षण में मिली अव्यवस्थाओं पर जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, कई अधिकारियों के प्रभार भी बदले गए
रायपुर,मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के संकल्प के अनुरूप सुकमा जिले में छात्रावासों एवं आश्रमों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 प्रारंभ होने से पहले कलेक्टर के नेतृत्व में छात्रावासों का औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें लापरवाही और अव्यवस्था पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
निरीक्षण में सामने आईं गंभीर खामियां
25 जून को कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में कई छात्रावासों एवं आश्रमों में साफ-सफाई की कमी, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अनुपस्थिति तथा संचालन में लापरवाही जैसी गंभीर कमियां पाई गईं। पूर्व में समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के बावजूद सुधार नहीं होने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
लापरवाह कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं के आधार पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन तथा प्रभार से पृथक करने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दायरे में कन्या आश्रम दुब्बाटोटा की अधीक्षिका श्रीमती सुशीला कवासी, प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास दुब्बाटोटा के अधीक्षक श्री पुनेम हिरमा, पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास की अधीक्षिका श्रीमती सविता यादव तथा प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के श्री भोजराज ठाकुर शामिल हैं।
छात्रावासों का संचालन प्रभावित न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक अधिकारियों को जिम्मेदारी भी सौंप दी है।
बच्चों के हितों से कोई समझौता नहीं
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों और आश्रमों में अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाओं के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासन की मंशा के अनुरूप सभी संस्थाओं में गुणवत्तापूर्ण व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सुशासन और जवाबदेही की मजबूत पहल
जिला प्रशासन की यह कार्रवाई शासकीय छात्रावासों और आश्रमों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे व्यवस्थाओं में सुधार आएगा, अनुशासन मजबूत होगा और विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सुशासन की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय एकात्मता का अनूठा अभियान हुआ सफल
प्रदेश के विशिष्टजनों ने किया प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन
रायपुर, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाली छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ’’सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा’’ आज सफलता के साथ संपन्न हुई। पांच दिवसीय इस ऐतिहासिक यात्रा के बाद प्रदेश के सभी जिलों से शामिल 1040 विशिष्टजन सकुशल रायपुर लौटे, जहां रायपुर रेलवे स्टेशन पर उनका आत्मीय, गरिमामय एवं भव्य स्वागत किया गया। यात्रियों के चेहरों पर संतोष, श्रद्धा और आत्मिक आनंद की झलक इस अभिनव यात्रा की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बनी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक यात्रा ने केवल श्रद्धालुओं को भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का भी जीवंत अनुभव कराया। यात्रा ने यह संदेश भी दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव को भी समान प्राथमिकता दे रही है।
इस यात्रा में प्रदेश के पद्मश्री सम्मान प्राप्त विभूतियों, राष्ट्रीय एवं राज्य सम्मान से सम्मानित कलाकारों, साहित्यकारों, संस्कृति कर्मियों, समाजसेवियों तथा अन्य विशिष्टजनों ने सहभागिता की। इससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।
संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ के सुव्यवस्थित प्रबंधन में आयोजित इस यात्रा की देशभर में सराहना हुई। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग, गुजरात राज्य सरकार के समन्वय तथा सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के आत्मीय सहयोग से यात्रा का प्रत्येक चरण अत्यंत सुव्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। प्रतिभागियों ने भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक सोमनाथ धाम के महत्व को निकट से अनुभव किया। अनेक प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों की पावन मिट्टी और नदियों का जल भगवान सोमनाथ को अर्पित कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एकता के सूत्र से जोड़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास पर आधारित आकर्षक लाइट एंड साउंड शो का भी अवलोकन किया, जिसने मंदिर के पुनर्निर्माण, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरक गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
पूरी यात्रा के दौरान आवागमन, आवास, भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा तथा अन्य सभी व्यवस्थाएं उच्च स्तर पर सुनिश्चित की गईं। संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे स्वयं विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पूरी यात्रा में उपस्थित रहे और प्रत्येक यात्री की सुविधा का विशेष ध्यान रखा। यात्रियों ने व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि शासन ने उन्हें परिवार जैसा स्नेह और सम्मान प्रदान किया।
यात्रा से लौटे प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए कहा कि वर्षों से संजोई गई सोमनाथ दर्शन की उनकी इच्छा शासन की इस निःशुल्क और सुव्यवस्थित पहल से पूरी हो सकी। उन्होंने कहा कि भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन, वहां का आध्यात्मिक वातावरण, ऐतिहासिक लाइट एंड साउंड शो तथा उत्कृष्ट यात्रा प्रबंधन ने उन्हें आत्मिक शांति के साथ भारतीय संस्कृति के प्रति नया गर्व प्रदान किया।
रायपुर रेलवे स्टेशन पर लौटे श्रद्धालुओं का पारंपरिक रीति-रिवाज, पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और आत्मीय अभिनंदन के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्वागत समारोह के दौरान यात्रियों ने छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का प्रेरक अभियान रही।
एम.टेक. (डाटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) में प्रवेश का सुनहरा अवसर
प्रतिमाह ₹50 हजार की फेलोशिप, ट्यूशन फीस का पूरा खर्च वहन करेगी राज्य सरकार
रायपुर,तकनीकी शिक्षा को सुशासन और नवाचार से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित मुख्यमंत्री आईटी फेलोशिप 2026 के अंतर्गत एम.टेक. (डाटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कार्यक्रम में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 7 जुलाई 2026 कर दी गई है। पूर्व में आवेदन की अंतिम तिथि 1 जुलाई निर्धारित थी।
यह कार्यक्रम नवा रायपुर स्थित IIIT-NR में संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को प्रतिमाह ₹50,000 की फेलोशिप प्रदान की जाएगी। साथ ही उनकी ट्यूशन फीस का संपूर्ण व्यय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वहन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री आईटी फेलोशिप कार्यक्रम की विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ राज्य शासन के विभिन्न विभागों में वास्तविक परियोजनाओं (Projects) पर कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे प्रतिभाशाली युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डाटा साइंस के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा तथा शासन की डिजिटल सेवाओं और नवाचार आधारित पहलों में योगदान देने का अवसर भी मिलेगा।
इच्छुक अभ्यर्थी, जिनका मूल निवास छत्तीसगढ़ का हो, 7 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी एवं आवेदन प्रक्रिया के लिए IIIT-NR की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण का अवलोकन किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए कार्यालयीन समय में दूरभाष क्रमांक 0771-2474048 एवं 0771-2474182 पर संपर्क किया जा सकता है।
Raipur: Chhattisgarh is seeking to write a new industrial story beyond mining and traditional manufacturing. Under the leadership of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, the state is pursuing an ambitious strategy to diversify its industrial base by promoting textile and garment manufacturing. With a world-class Textile Park taking shape in Nava Raipur and the first garment manufacturing unit now under development, the initiative aims to attract investment, expand exports and create large-scale employment within the state.
A major milestone has already been achieved as Tamil Nadu-based Swift Textiles Private Limited has begun work on the Textile Park's first garment manufacturing unit following a Bhoomipoojan ceremony held on June 25 by Commerce and Industries Minister Shri Lakhan Lal Dewangan and Housing and Environment Minister Shri OP Choudhary.
The company will invest ₹ 235 crore in the facility, which is expected to generate employment for more than 4,600 people. It will manufacture kidswear and knit garments, with the latter focused on exports to the European and American markets.
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai has consistently emphasized that industrial growth must translate into employment opportunities for local people, particularly women and youth. The Textile Park reflects this vision by creating an ecosystem where manufacturing investments are supported with modern infrastructure and policy incentives. The state government is working to provide investors with all essential facilities required to establish and expand their operations.
Spread across 81 acres in Nava Raipur, the Textile Park is being developed as an integrated industrial ecosystem for textiles, garments, technical textiles and allied industries. The Commerce and Industries Department is creating the infrastructure required for large-scale manufacturing, including paved internal roads, drainage and stormwater systems, power substations, water supply, street lighting, an administrative building, a commercial complex, an Effluent Treatment Plant (ETP), a solid waste management area and a Common Facility Centre.
The park is already drawing investor interest. Besides Swift Textiles, land has been allotted to Puneet Creations and Drishti Designs LLP. Together, the three companies are expected to invest nearly ₹ 445 crore, with the potential to generate more than 11,000 employment opportunities.
The Textile Park complements the Chhattisgarh Industrial Development Policy 2024-30, introduced under the leadership of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, which identifies textiles and ready-made garments as one of the state's thrust sectors. To encourage employment generation, the policy provides employment assistance for a period of five years, offering ₹ 6,000 per month for every woman employee and ₹ 5,000 per month for every male employee. The policy has contributed to growing investor confidence in the state with Chhattisgarh having received investment proposals worth more than ₹ 8 lakh crore during the past 18 months, with the potential to create over 1.6 lakh employment opportunities.
Alongside textiles and garments, the state has attracted investments in data centres, information technology, pharmaceuticals, semiconductors, and electrical and electronics manufacturing. This broader investment momentum reflects the government's efforts to position Chhattisgarh as an emerging manufacturing destination with a diversified industrial ecosystem.
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ
शिविरों के माध्यम से समाज कल्याण विभाग ने 169 को दिए सहायक उपकरण, 248 को दी नई पेंशन की सौगात
रायपुर,26 जून 2026/ राज्य शासन की मंशानुसार जब प्रशासनिक तंत्र संवेदनशीलता के साथ जनता के द्वार पर पहुँचता है, तो सुशासन की परिभाषा ज़मीनी हकीकत में बदल जाती है। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व नज़ारा छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ में देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विजन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ ने जिले के सैकड़ों दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और निराश्रितों के जीवन में उम्मीद का एक नया सवेरा लाया है।
मई से 10 जून तक जिले के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों में सजे विभागों के स्टॉल सिर्फ शिकायतें दर्ज करने के केंद्र नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित और मौके पर समाधान का माध्यम बने।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: 169 को मिले सहायक उपकरण
शिविरों के दौरान समाज कल्याण विभाग ने सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। विभाग द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी कर अत्यंत कम समय में 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए।इनमें प्रमुख रूप से 11 वृद्धजनों को सहारा देने वाली वॉकिंग स्टिक (छड़ी),04 दिव्यांगजनों को नई व्हीलचेयर,03 दिव्यांगजनों को गति देने वाली ट्राइसाइकिल,02 हितग्राहियों को बैशाखी,01 हितग्राही को दुनिया की आवाज़ सुनने के लिए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड) शामिल हैं।
इन उपकरणों की मदद से अब बुजुर्ग और दिव्यांगजन बिना किसी दूसरे पर निर्भर रहे अपने दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान शासन के प्रयासों की सफलता को बयां कर रही है।
आर्थिक सुरक्षा का कवच: 248 नवीन पेंशनों को तत्काल स्वीकृति
सुशासन तिहार का सबसे बड़ा असर सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर दिखा। शिविरों में आए आवेदनों का ऑन-द-स्पॉट परीक्षण कर 248 पात्र हितग्राहियों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन की स्वीकृति जारी की गई। अब इन वृद्ध, बेसहारा और दिव्यांग नागरिकों को हर महीने नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।
सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित इन विशेष शिविरों में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के आपसी समन्वय से उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है। मई महीने से शुरू होकर 10 जून 2026 तक चले इस अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर बड़े फैसले लिए गए। इसके तहत जहाँ एक ओर 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए गए, वहीं दूसरी ओर 248 पात्र नागरिकों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन को भी तत्काल स्वीकृति दी गई, जिससे अब उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल सकेगा।
"योजनाएं अब कागजों पर नहीं, हमारे हाथों में हैं"
प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर लाभांवित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह 'सुशासन तिहार' उनके लिए राहत और अटूट विश्वास का केंद्र बनकर उभरा है। साय सरकार का सुशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सुगम और गरिमामय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।
धमतरी की लोमेश्वरी साहू की जुबानी, डिजिटल सशक्तिकरण और भरोसे की अनकही कहानी
रायपुर,26 जून 2026/ आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।
इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे ‘सेवा सेतु’ ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है।
चक्कर काटने के दौर से ‘क्लिक’ के सफर तक
अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।
पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।
घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा
लोमेश्वरी के लिए ‘सेवा सेतु’ पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (Status) को ट्रैक करती रहीं। नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी।
डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास'
सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।
लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर
धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज ‘सेवा सेतु’ पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर “जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।