ईश्वर दुबे
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नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रखा विकसित छत्तीसगढ़ का विजन
बस्तर में आमदनी दोगुनी करने का बड़ा संकल्प: तीन साल में हर परिवार की आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंचाने का लक्ष्य
नई दिल्ली, 11 जून 2026- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से मुक्त बस्तर की नई तस्वीर देश के सामने रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा की मार झेलने वाला बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का मॉडल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध क्रांति लाने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने तथा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। वहां दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में “डेयरी मॉडल” को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य गांवों में स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से खेती बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल तथा अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तथा डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा।
उन्होंने बताया कि बस्तर में बने लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर कार्य जारी है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है। पर्यटकों के आने से होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प, दुकानदारों और स्थानीय उद्यमियों को रोजगार मिलता है। बस्तर को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
बासीन ग्राम में मनरेगा का असर: 99% पौधे जीवित, किसानों के लिए नई उम्मीद
रायपुर, 11 जून 2026/ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नारायणपुर जिले के ओरछा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में किसानों की आय बढ़ाने और हरित विकास को बढ़ावा देने की एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है। यहां किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार वृक्षों में लगभग 99 प्रतिशत पौधे जीवित एवं स्वस्थ पाए गए हैं, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
किसानों के दीर्घकालिक लाभ, पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाए फलदार वृक्ष
मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत नर्सरी में उद्यान विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे तैयार किए गए और वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित किसानों के खेतों में उनका रोपण कराया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का विस्तार करना है।
पौधों के संरक्षण-संवर्धन के लिए रखरखाव व्यवस्था की गई सुनिश्चित
योजना के तहत केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वर्ष तक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। साथ ही उद्यान विभाग द्वारा किसानों को सामूहिक फेंसिंग (बाड़बंदी) का लाभ दिया गया, जिससे पौधों को नुकसान से बचाया जा सका। किसानों ने भी सिंचाई और देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाई।
किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय से हुई 99 प्रतिशत जीवितता दर
हाल ही में किए गए क्षेत्रीय निरीक्षण में लगाए गए पौधों की 99 प्रतिशत जीवितता दर दर्ज की गई, जो किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम माना जा रहा है। इस पहल से आने वाले वर्षों में किसानों को आम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, वहीं क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। ग्राम बासीन का यह मॉडल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
“रोजगार के साथ हरियाली और आय वृद्धि” की अवधारणा को साकार करती यह पहल ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है।
राज्य सभा सांसद एवं वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष सुश्री डोला सेन की अध्यक्षता में आज रायपुर के एक निजी होटल में समिति की बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक 10 से 12 जून 2026 तक अहमदाबाद, रायपुर और भुवनेश्वर के अध्ययन दौरा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की जा रही है।
बैठक में "भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन" विषय पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।
समिति के सदस्यों द्वारा व्यापार, निवेश, निर्यात-आयात तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जा रही है ।
अध्ययन दौरे का उद्देश्य संबंधित हितधारकों एवं अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर विषय पर व्यापक रिपोर्ट तैयार करना है।
28 अधिकारियों के तबादले, कई जिलों में नए डीईओ पदस्थ
रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक कसावट और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 28 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, सहायक संचालकों एवं प्राचार्यों को विभिन्न जिलों और कार्यालयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक लागू रहेगा।
अवर सचिव छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण सूची के अनुसार महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर, नारायणपुर और बालोद सहित अनेक जिलों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गई हैं। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय, संयुक्त संचालक कार्यालयों तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयों में भी अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।
जारी आदेश के अनुसार प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय श्री बी.एल. देवांगन को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद बनाया गया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर श्री हिमांशु भारतीय को प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ किया गया है। सहायक संचालक श्री एम.जी. सतीश कुमार को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर तथा प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर श्री विजय कुमार ताण्डे के स्थान पर श्री रमेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर की जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में भी नए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। कई विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं सहायक संचालकों को पदोन्नत दायित्व सौंपते हुए जिला स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को संचालनालय और संभागीय कार्यालयों में स्थानांतरित किया गया है।
स्कूल शिक्षा श्री गजेन्द्र यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पुनर्संरचना विभागीय कार्यों में गति लाने, शैक्षणिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिलों में प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। आदेश के बाद राज्य के शिक्षा प्रशासन में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा।
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai attends meeting at Bharat Mandapam
New Delhi,Chhattisgarh Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai attended a meeting held at Bharat Mandapam on the completion of 12 years of the Central Government led by Prime Minister Shri Narendra Modi. On the occasion, he congratulated Prime Minister Shri Modi and said that the past 12 years have proven to be a golden era for the respect, empowerment, and development of India’s tribal communities.
Addressing the gathering, the Chief Minister said that under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, Chhattisgarh has made significant progress in tackling decades-old Naxalism. He said tribal communities affected by Naxal violence are now witnessing a new era of peace, security and development. Initiatives such as “Niyad Nella Nar” and “Bastar Munne” are ensuring saturation rollout of government schemes in Bastar, while security camps are being converted into “Seva Deras” to strengthen last-mile governance and public service delivery.
He further said that Prime Minister Shri Modi has given India’s tribal society a new identity and respect. Initiatives such as celebrating Bhagwan Birsa Munda’s birth anniversary as Janjatiya Gaurav Diwas and the Dharti Aaba Janjatiya Gram Utkarsh Abhiyan have accelerated development in tribal regions. He added that the leadership of Smt. Droupadi Murmu, India’s first tribal woman President, is a symbol of pride and honour for millions of tribal citizens.
Shri Sai said that under the PM JANMAN Yojana, basic amenities such as electricity, roads, drinking water, and housing are reaching remote habitations of Particularly Vulnerable Tribal Groups for the first time. He also noted that the expansion of roads, railways, and public transport in Bastar is addressing long-standing connectivity challenges.
The Chief Minister said that the state government is committed to preserving and promoting Tribal culture. He highlighted the establishment of a Tribal Museum in Nava Raipur and the Shaheed Veer Narayan Singh Tribal Museum. Events such as Bastar Pandum and Bastar Olympics have showcased a transformed, peaceful, and vibrant Bastar to the world.
He added that effective implementation of the PESA Act, record procurement of minor forest produce, better prices for paddy, pulses, and oilseeds, and schemes like the Krishak Unnati Yojana are strengthening the rural and tribal economy. Through the Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana and the Mukhyamantri Khadya Yojana, free food grains are being provided to around 2.45 crore beneficiaries in the state.
Concluding his address, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said Prime Minister Shri Narendra Modi has transformed tribal communities from beneficiaries into active partners in India’s development. He reaffirmed the state government’s commitment to building a developed Chhattisgarh and contributing to a developed India under the leadership of Prime Minister Shri Modi.
भारत मंडपम में आयोजित बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी को बधाई देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्ष देश के जनजातीय समाज के सम्मान, सशक्तिकरण और विकास के लिए स्वर्णकाल साबित हुए हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी रणनीति के कारण छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित जनजातीय समुदाय अब शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। बस्तर में ‘नियद नेल्ला नार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ जैसे अभियानों के माध्यम से योजनाओं का सैचुरेशन मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा सुरक्षा शिविरों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जनजातीय समाज को नई पहचान और सम्मान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हो या धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, इन पहलों ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि देश को पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति के रूप में श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का नेतृत्व करोड़ों आदिवासियों के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है।
श्री साय ने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के दूरस्थ इलाकों तक पहली बार बिजली, सड़क, पेयजल और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं बस्तर में सड़क, रेल और सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से कनेक्टिविटी की वर्षों पुरानी चुनौतियां दूर हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। नवा रायपुर में ट्राइबल म्यूजियम तथा शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय का निर्माण कराया गया है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों ने दुनिया के सामने बदलते, मुस्कुराते और हिंसा-मुक्त बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत की है।
उन्होंने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, लघु वनोपज की रिकॉर्ड खरीदी, किसानों को धान, दलहन और तिलहन का बेहतर मूल्य तथा कृषक उन्नति योजना जैसी पहलें ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के माध्यम से राज्य के 2 करोड़ 45 लाख जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासियों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं बनाया, बल्कि उन्हें भारत के विकास का सक्रिय सहभागी बनाया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।
Chief Minister Expresses Gratitude for Centre’s Support in Chhattisgarh’s Development Through a Letter to the Prime Minister
CM Appreciates Central Government’s Role in Naxal Eradication, Infrastructure Development, and Empowerment of Farmers, Tribals, Women and Youth
Raipur,Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai extended his congratulations and best wishes to Prime Minister Shri Narendra Modi on the completion of 12 years of his leadership at the Centre. In a letter addressed to the Prime Minister, he expressed gratitude for the unprecedented support extended by the Central Government towards the development of Chhattisgarh.
Chief Minister Shri Sai stated that the visionary, decisive, and welfare-oriented leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi has accelerated development in Chhattisgarh and played a significant role in ensuring that the benefits of government schemes reach the last person in society.
In his letter, the Chief Minister mentioned that under the Central Government’s policy of prioritising security and development in Naxal-affected areas, Chhattisgarh has received Rs. 2,080.29 crore under the Special Central Assistance (SCA) Scheme. He noted that initiatives such as the Special Infrastructure Scheme (SIS), Security Related Expenditure (SRE), modern weapon systems, jungle warfare training and air support have strengthened security forces and provided the state with a decisive advantage in the fight against Left Wing Extremism.
The Chief Minister stated that the Union Ministry of Rural Development has approved 391 roads covering 3,222 kilometres and 88 major bridges in Naxal-affected regions at a cost of Rs. 2,377 crore. These projects have strengthened both development and security while connecting remote areas, including Bastar, with the mainstream.
Highlighting financial reforms under the Prime Minister’s leadership, the Chief Minister said that increasing the state’s share in central taxes from 32 per cent to 42 per cent has provided Chhattisgarh with unprecedented fiscal autonomy. He informed that over the past 12 years, the state has received Rs. 3,46,806 crore through central tax devolution and Rs. 1,43,328 crore under various central schemes. In addition, Chhattisgarh received Rs. 22,021 crore under the Special Assistance for Capital Investment Scheme and Rs. 22,600 crore as GST compensation.
Describing road infrastructure development as one of the major achievements of the Central Government, Shri Sai said that approvals worth Rs. 4,468 crore were granted under the Central Road and Infrastructure Fund (CRIF). In comparison, Rs. 35,766 crore was sanctioned for National Highway development. These investments have accelerated projects such as the Raipur–Visakhapatnam corridor, Bilaspur–Dhanbad connectivity, the Raipur–Durg Bypass and several other strategic road projects, significantly improving connectivity across the state.
In the rural development sector, the Chief Minister stated that 24.50 lakh eligible beneficiaries have been sanctioned houses under the Pradhan Mantri Awas Yojana (Gramin), of which nearly 19.70 lakh houses have already been completed. Under MGNREGA, an expenditure of Rs. 39,123 crore over the past 12 years generated 152 crore person-days of employment. Under the Swachh Bharat Mission (Gramin), Rs. 2,398 crore in assistance enabled the construction of toilets for 36.44 lakh families.
अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु विभागीय समन्वय, डेटा आधारित नीति निर्माण और प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर
बस्तर अंजोर के माध्यम से बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की दिशा में होंगे नवाचारपूर्ण प्रयास
रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘‘अंजोर विजन-2047’’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल योजनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सटीक आंकड़ों पर आधारित नीति निर्माण और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति से संभव होगा।
नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग में आयोजित स्टेट सपोर्ट मिशन (SSM), प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) एवं मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन (M&E) यूनिट्स के इंडक्शन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार ‘‘अंजोर विजन-2047’’ राज्य के दीर्घकालिक विकास का व्यापक रोडमैप है, जिसमें आर्थिक विकास, सुशासन, सामाजिक प्रगति, निवेश संवर्धन और मानव विकास से जुड़े स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) और अंजोर विजन-2047 एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों का मूल उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को इन लक्ष्यों के अनुरूप क्रियान्वित करना होगा। इस दिशा में राज्य नीति आयोग के अंतर्गत गठित SSM, PIU एवं M&E इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
श्री मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने नीति आयोग के SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। अब राज्य का लक्ष्य केवल सूचकांकों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाना है। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि उत्पादकता, औद्योगिक विकास, महिला श्रम भागीदारी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाना हमारी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य नीति आयोग के साथ कार्य कर रही विशेषज्ञ टीमों को विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर KPI आधारित समीक्षा, नीति विश्लेषण, निगरानी एवं मूल्यांकन तथा साक्ष्य आधारित सुझावों के माध्यम से विकास की गति को और तेज करना होगा। उन्होंने अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से नवाचार, जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने का आह्वान किया।
उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और राज्य नीति आयोग के संयुक्त प्रयासों से अंजोर विजन-2047 के लक्ष्य निर्धारित समयावधि में प्राप्त किए जा सकेंगे तथा छत्तीसगढ़ समावेशी, सतत और विकसित राज्य के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा।
उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, जब छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त हुआ। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के उस संकल्प का उल्लेख किया, जिसमें बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की बात कही गई थी। श्री मिश्रा ने कहा कि बस्तर संभाग राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और ‘‘बस्तर अंजोर’’ पहल के तहत सात प्रमुख नवाचारों के माध्यम से क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को मूर्त रूप दिया जाएगा। इससे बस्तर विकास, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।
इस दौरान राज्य नीति आयोग के सदस्य सचिव श्री आशीष कुमार भट्ट, सदस्य डॉ के सुब्रह्मण्यम सहित यूएनडीपी के विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित थे।
Chief Minister Expresses Gratitude for Centre’s Support in Chhattisgarh’s Development Through a Letter to the Prime Minister
CM Appreciates Central Government’s Role in Naxal Eradication, Infrastructure Development, and Empowerment of Farmers, Tribals, Women and Youth
Raipur, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai extended his congratulations and best wishes to Prime Minister Shri Narendra Modi on the completion of 12 years of his leadership at the Centre. In a letter addressed to the Prime Minister, he expressed gratitude for the unprecedented support extended by the Central Government towards the development of Chhattisgarh.
Chief Minister Shri Sai stated that the visionary, decisive, and welfare-oriented leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi has accelerated development in Chhattisgarh and played a significant role in ensuring that the benefits of government schemes reach the last person in society.
In his letter, the Chief Minister mentioned that under the Central Government’s policy of prioritising security and development in Naxal-affected areas, Chhattisgarh has received Rs. 2,080.29 crore under the Special Central Assistance (SCA) Scheme. He noted that initiatives such as the Special Infrastructure Scheme (SIS), Security Related Expenditure (SRE), modern weapon systems, jungle warfare training and air support have strengthened security forces and provided the state with a decisive advantage in the fight against Left Wing Extremism.
The Chief Minister stated that the Union Ministry of Rural Development has approved 391 roads covering 3,222 kilometres and 88 major bridges in Naxal-affected regions at a cost of Rs. 2,377 crore. These projects have strengthened both development and security while connecting remote areas, including Bastar, with the mainstream.
Highlighting financial reforms under the Prime Minister’s leadership, the Chief Minister said that increasing the state’s share in central taxes from 32 per cent to 42 per cent has provided Chhattisgarh with unprecedented fiscal autonomy. He informed that over the past 12 years, the state has received Rs. 3,46,806 crore through central tax devolution and Rs. 1,43,328 crore under various central schemes. In addition, Chhattisgarh received Rs. 22,021 crore under the Special Assistance for Capital Investment Scheme and Rs. 22,600 crore as GST compensation.
Describing road infrastructure development as one of the major achievements of the Central Government, Shri Sai said that approvals worth Rs. 4,468 crore were granted under the Central Road and Infrastructure Fund (CRIF). In comparison, Rs. 35,766 crore was sanctioned for National Highway development. These investments have accelerated projects such as the Raipur–Visakhapatnam corridor, Bilaspur–Dhanbad connectivity, the Raipur–Durg Bypass and several other strategic road projects, significantly improving connectivity across the state.
In the rural development sector, the Chief Minister stated that 24.50 lakh eligible beneficiaries have been sanctioned houses under the Pradhan Mantri Awas Yojana (Gramin), of which nearly 19.70 lakh houses have already been completed. Under MGNREGA, an expenditure of Rs. 39,123 crore over the past 12 years generated 152 crore person-days of employment. Under the Swachh Bharat Mission (Gramin), Rs. 2,398 crore in assistance enabled the construction of toilets for 36.44 lakh families.
रोज सुबह उठते ही घर में नल से साफ पानी आते देखने की खुशी क्या होती है, इसे कमली से पूछिए। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव को अपने आंगन में लगे नल से आ रहे पानी की धार को दिखाते खुशी से उनकी आंखें डबडबा गईं। जल जीवन मिशन ने कमली जैसी हजारों महिलाओं को अमूल्य खुशियां दी हैं। कभी पीने और निस्तारी के पानी के लिए दिनभर चिंतित रहने वाली इन महिलाओं का जीवन घर में लगे नल ने बदल दिया है।
उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव अपने चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान जल जीवन मिशन का काम देखने कमली के भी गांव पहुंचे। कमली के गांव बस्तर जिले के तोकापाल विकासखण्ड के दुगनपाल में उन्होंने कुछ और घरों में भी जाकर नल से पानी आते देखा। जल जीवन मिशन से घर में पानी पहुंचने की खुशी सभी महिलाओं के चेहरे पर दिख रही थी।
जल जीवन मिशन दूरस्थ गांवों और वनांचलों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है। आधी आबादी के एक बड़े हिस्से को पीने के पानी के लिए रोज जूझना पड़ता था। खासतौर से गर्मियों के दिनों में जब हर साल सिर पर पानी के बर्तन का सफर कुछ सौ मीटरों से कुछ किलोमीटरों में बदल जाता था।
जीवन के लिए अनिवार्य जरुरत पानी की व्यवस्था गर्मियों में महिलाओं का जीवन दुष्कर बना देती थी। दुगनपाल में भी महिलाओं को रोज गांव के हैंडपंप या कुआं पर जाकर घर के सभी लोगों के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता था। घर में नल लग जाने से अब इस समस्या से निजात मिल गई है। जल जीवन मिशन के काम जैसे-जैसे पूरे होते जा रहे हैं, महिलाओं की बाहर से पानी लाने की चिंता और तकलीफ दूर होते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक साढ़े आठ हजार से अधिक योजनाओं को पूर्ण कर संचालन के लिए पंचायतों को सौंपा जा चुका है।
जल जीवन मिशन महज हर घर तक पेयजल पहुंचाने की योजना नहीं है। यह महिलाओं की दिनचर्या और जीवन में भी बड़ा बदलाव ला रहा है। गांवों में परंपरागत रूप से घर में पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी के इंतजाम का जिम्मा महिलाओं पर ही है। घर तक पानी की पहुंच न होने के कारण उन्हें हैंडपंपो, सार्वजनिक नलों, कुंओं या अन्य स्रोतों से रोज पूरे परिवार के लिए जल संग्रहण करना पड़ता है।
रोजाना का यह श्रमसाध्य और समयसाध्य काम बारिश तथा भीषण गर्मी के दिनों में और कठिन हो जाता है। कई इलाकों में गर्मियों में जलस्रोतों के सूख जाने के कारण दूर-दूर से पानी लाने की मजबूरी रहती है। परिवार के लिए पानी की व्यवस्था हर दिन का संघर्ष बन जाता है। महिलाओं के दिन के कई घंटे इसी काम में निकल जाते हैं।
जल जीवन मिशन हर घर तक नल से जल पहुंचाने के साथ ही महिलाओं को कई समस्याओं से निजात दिला रहा है। घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचने से वे कई चिंताओं से मुक्त हो गई हैं। अब रोज-रोज पानी के लिए बहुत सारा श्रम और समय नहीं लगाना पड़ता। इससे उन्हें घर के दूसरे कामों, बच्चों की परवरिश, खेती-बाड़ी एवं आजीविका के अन्य कार्यों के लिए अधिक समय मिल रहा है और वे इन कार्यों पर अपना ज्यादा ध्यान व समय दे पा रही हैं।
जल जीवन मिशन से बारहों महीने घर पर ही जलापूर्ति से लगातार बारिश तथा गर्मी के दिनों में बाहर से पानी लाने की मुसीबत दूर हो गई है। गर्मियों में जलस्तर के नीचे चले जाने से तथा बरसात में लगातार बारिश से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। गुणवत्ताहीन पेयजल से पेट तथा निस्तारी के लिए खराब जल के उपयोग से त्वचा संबंधी रोगों का खतरा रहता है। जल जीवन मिशन ने सेहत के इन खतरों को भी दूर कर दिया है।