ईश्वर दुबे
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वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर वाराणसी के सौंदर्यीकरण की परियोजना को समय से शुरू कराने में सहयोग नहीं देने का शुक्रवार को आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर संपर्क मार्ग का शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पहले तीन सालों में प्रदेश सरकार ने हमें सहयोग नहीं किया। वाराणसी में विकास की परियोजनाएं तभी शुरू हुई जब प्रदेश की जनता ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया। अगर पिछली सरकार से सहयोग मिला होता तो हम इन परियोजनाओं को पहले शुरू कर सकते थे।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 70 साल के दौरान किसी ने भी बाबा विश्वनाथ के बारे में नहीं सोचा। सब ने अपनी-अपनी चिंता की। मगर काशी की फिक्र नहीं की। मोदी ने कहा कि उन्हें काशी विश्वनाथ के लिए निर्माण कार्य शुरू करने पर बेहद खुशी है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मेरा सपना था कि इस स्थान के लिए कुछ काम करूं। जब मैं राजनीति में नहीं था तब अक्सर यहां आया करता था और सोचता था कि यहां कुछ न कुछ होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भोले बाबा ने तय किया होगा, बातें बहुत करते हो। यहां आओ कुछ करके दिखाओ।
वाराणसी के सौंदर्यीकरण के बारे में मोदी ने कहा कि यह काशी विश्वनाथ विश्वनाथ धाम की मुक्ति की परियोजना है जो पहले अतिक्रमण से घिरा हुआ था। उन्होंने कहा, ‘ऐसा पहली बार हुआ है जब हमने काशी विश्वनाथ धाम के आसपास की इमारतों का अधिग्रहण किया और अतिक्रमण को हटाया, जिसके बाद 40 प्राचीन मंदिर सामने आए। उनमें से अनेक पर अतिक्रमण कर लिया गया था और लोगों ने अपनी रसोई घर बना लिए थे।’ प्रधानमंत्री ने इस परियोजना में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि मैंने अनेक सरकारी कर्मचारियों को देखा है, क्योंकि मैं लंबे समय तक मुख्यमंत्री भी रहा लेकिन मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा यहां जिन अधिकारियों की टीम को काम सौंपा गया वह भक्ति और सेवा भाव से काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी संपत्ति देने के लिए मनाना और इसे राजनीतिक रंग ना लेने देना एक बहुत बड़ा काम था। मैं काशी के लोगों को भी धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने अपनी संपत्ति बाबा विश्वनाथ को दे दी। यह उनका सबसे बड़ा दान है। मोदी ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर को शत्रुओं ने निशाना बनाया था और इसे नष्ट करने की कोशिश की थी लेकिन लोगों की आस्था के कारण इसमें पुनर्जन्म लिया। जब महात्मा गांधी यहां आए थे तो उन्होंने इस स्थान की दुर्दशा पर दुख जताया था। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दिए गए अपने संबोधन में अपने इन विचारों को व्यक्त किया था। प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालय को सुझाव दिया कि वह इस संपूर्ण परियोजना को एक केस स्टडी बनाकर उस पर शोध करें ताकि जब यह परियोजना पूरी हो तो पूरी दुनिया इसके बारे में जाने।
मोदी ने कहा कि हम खुदाई में अतिक्रमण हटाने के दौरान मिले 40 प्राचीन मंदिरों के इतिहास के बारे में पता लगाने की भी कोशिश करेंगे और सरकार इन मंदिरों का पूरा ख्याल रखेगी। यह परियोजना मंदिरों के संरक्षण कार्य का मॉडल होगा, जिसमें प्राचीन आस्था और आधुनिक तकनीक का संयोजन होगा इससे काशी को एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘यह काम मेरे ही नसीब में लिखा था। वर्ष 2014 में जब मैं यहां आया था तो कहा था कि मैं यहां आया नहीं बल्कि लाया गया हूं। हो सकता है कि भोले बाबा ने मुझे यहां बुलाया हो।’ इसके पूर्व प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए।
हर हर महादेव!
आज बाबा भोलेनाथ के आशीर्वाद से श्री काशी विश्वनाथ धाम के शिलान्यास का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। pic.twitter.com/0PoYpKYqA8
— Narendra Modi (@narendramodi) March 8, 2019