ईश्वर दुबे
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Bhilai
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भिलाई। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देष में श्रमिकों के कल्याण के लिए ढे़र सारी योजनाएं शुरू की है लेकिन छत्तीसगढ में राज्य सरकार श्रमिकों तक यह सुविधाएं पहुँचानें में पूरी तरह से असफल है। श्रमिकों को योजनाओं का फायदा नही मिल रहा है। सांसद विजय बघेल ने कहा कि अभी असंगठित कामगारों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए ई-पोर्टल पर पंजीयन षुरू किया गया है। लेकिन छत्तीसगढ़ की हालत इतनी खराब है कि ऐेसी लाभकारी योजनाओं का निर्माण श्रमिकों को फायदा दिलाने में छत्तीसगढ़ देष में 15वें स्थान पर हैे। छत्तीसगढ़ में विकास का ऐसा हाल है।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ऐसा राज्य है जहाँ से आज भी बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। जो लोग यहा के युवाओं को रोजगार दिलाने का दावा करते है उन्हे ऐसे आकडों को देखना और समझना चाहिये। कोरोना संकट के समय में यहाॅ दूसरे राज्यों से लाखों की संख्या में श्रमिकों की वापसी हुई है। इन श्रमिकों का रोजगार छिन गया है। राज्य सरकार इन श्रमिकों अभी पूरी तरह से चिहिंत नही कर सकी है। इन्हे रोजगार दिलाया जा सकें यहाॅ बात तो कोसो दूर है। यहाॅ श्रमिकों की हर जगह ऐसी हालत है।
उन्होंने बताया कि पूरे देष में केन्द्र सरकार के द्वारा श्रमिकों का पंजीयन किया जा रहा है। ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा तथा रोजगार आधारित योजना के साथ विभिन्न योजनाओं का फायदा दिलाया जा सकें। भवन निर्माण, परिधान निर्माण, मछली पकड़ने वाले श्रमिक, स्ट्रीट वेन्डर्स, घरेलु कार्य, कृशि कार्य और सम्बद्ध, परिवहन क्षेत्र आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के असंगठित श्रमिकों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसमें पंजीयन के लिए ई-श्रम-पोर्टल षुरू किया गया है। कामगार इस पोर्टल पर स्वयं पंजीयन करा सकते है। लेकिन राज्य सरकार के जागरूकता के अभाव में आम श्रमिकों को ऐसी योजनाओं की जानकारी नही मिल रही है। हालत इतनी खराब है कि ई श्रम पोर्टल पर अभी तक सिर्फ 60000 श्रमिकों का पंजीयन हो सका है जबकि 4 लाख से अधिक श्रमिकेां की दूसरे राज्यो से छत्तीसगढ लौटे है। जिससे आम श्रमिक षासन की योजनाओं का लाभ पाने से वंचित हो रहे है। उन्होंने बताया कि पंजीकृत श्रमिकेां को किसी दुर्घटना का षिकार हो जाने पर मृत्यु या स्थाई विकलांगता की स्थिति में 2 लाख रूपये और आंषिक विकलांगता पर 1 लाख रूपये देने का प्रावधान है। राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से श्रमिकों को इन योजनाओं का लाभ नही मिल रहा है।