ईश्वर दुबे
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Bhilai
कवर्धा। देवी उपासना और आराधना का पर्व नवरात्रि की धूम इन दिनों नगर सहित पूरे क्षेत्र में बना हुआ है। पुरानी कचहरी पारा में नवदुर्गा उत्सव समिति द्वारा लगातार 60 साल से नवरात्रि पर्व में देवी की प्रतिमा स्थापना की जा रही है। वहीं दूसरी ओर देवी मंदिरों में जगमगाते ज्योति कलश की तेज और जसगीतों की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया है।
समिति के संरक्षक एवं शिक्षक रमेश पांंडेय ने बताया कि मातारानी की स्थापना प्रारंभिक काल में मोहल्ले के युवा-बुजुर्गों तथा बच्चों के सहयोग से की जाती थी। उस समय मूर्तिकार सालिग राम देवांगन पूरी तरह तन्मय होकर जीवंत प्रतिमा बनाते थे, जो लोगों के आस्था का केंद्र बना रहता था। अधिक उम्र तथा उनके अस्वस्थ होने के समय तक वे मूर्तियां बनाते रहे। इसके बाद गजानन कुंभकार द्वारा प्रतिवर्ष मातारानी की मूर्ति बनाया जाने लगा, जो आज भी जारी है। दोनों मूर्तिकार कवर्धा नगर के सर्वश्रेष्ठ कलाकार माने जाते हैं।
प्रारंभिक काल के बच्चे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए आज जीवन के हर क्षेत्र का अनुभव लेते हुए बुजुर्ग हो गये हैं। इनमें आत्मानन्द उपाध्याय, द्वारका सोनी, राधेश्याम सोनी, महानंद उपाध्याय, हरिलाल विश्वकर्मा आदि समिति संरक्षक के रूप में आज भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
1959 से हो रही है देवी उपासना
समिति के संरक्षक श्री पांडेय ने बताया कि दुर्गा उत्सव समिति द्वारा 61 वें साल 2019 में भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ" आदिशक्ति" देवी मां की स्थापना की गई है। उन्होने बताया कि यहां प्रारंभिक काल से आज भी स्थापना से विसर्जन होने तक माता की सेवा शास्त्रोक्त विधि से किया जाता है। जो स्वयं में आकर्षण है।