ईश्वर दुबे
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रायपुर, 03 जून 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ की नदियों और बड़े नालों में रेत खनन की गतिविधियों को वैज्ञानिक, संतुलित और व्यवस्थित ढंग से संचालित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि रेत राज्य के विकास और आधारभूत संरचना निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है, इसलिए इसके उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इनके अनियंत्रित दोहन से पर्यावरण और जल संसाधनों पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहती है।
लोक भवन में आज राज्यपाल ने खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद से इस विषय पर चर्चा की और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रेत खनन निर्धारित नियमों एवं वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों उद्देश्यों को समान रूप से साधा जा सके। राज्यपाल ने राज्य में चल रहे ड्रोन आधारित निगरानी और खनिज 2.0 पोर्टल के माध्यम से मॉनिटरिंग की जानकारी लेते हुए इसकी सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि नदियों और बड़े नालों की प्राकृतिक संरचना तथा जलधारण क्षमता को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अनियोजित खनन गतिविधियों से नदी तटों, भू-जल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए खनन कार्यों की नियमित निगरानी और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नदियों एवं जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने तथा भू-जल संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने निर्देश दिए कि रेत खनन से संबंधित क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे विशेषज्ञ संस्थानों से सर्वे और तकनीकी अध्ययन कराया जा सकता है, ताकि खनन गतिविधियों के प्रभावों का आकलन कर बेहतर प्रबंधन की दिशा में कदम उठाए जा सकें।
राज्यपाल डेका ने कहा कि रेत जैसे खनिज संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।