ईश्वर दुबे
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Bhilai
प्रतिमाह 14-15 हजार रुपये की हो रही आमदनी
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाए जा रहे आजीविका संवर्धन प्रयासों के जमीनी स्तर पर सकारात्मक और दूरगामी परिणाम सामने आ रहे हैं। राज्य शासन द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों और 'सेवा संकल्प अभियान' के माध्यम से नारायणपुर जिले के वनांचल क्षेत्र की महिलाएं अब स्वरोजगार अपनाकर अपनी तकदीर खुद लिख रही हैं।
इसी कड़ी में विकासखंड नारायणपुर के ग्राम पंचायत बेनूर की निवासी श्रीमती बसंती नाग ने इच्छाशक्ति और लगन की एक अनूठी मिसाल पेश की है। बसंती नाग स्थानीय 'रिद्धी सिद्धी स्व-सहायता समूह' की एक सक्रिय सदस्य हैं। समूह की बैठकों के दौरान उन्हें IFC परियोजना के तहत चलाए जा रहे चूजा पालन गतिविधि की विस्तृत जानकारी मिली। आजीविका को नई दिशा देने की सोच के साथ उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाने का संकल्प लिया।
मात्र 2,700 रुपये के शुरुआती निवेश से की शुरुआत
आईएफसी परियोजना के तकनीकी और व्यावहारिक सहयोग से बसंती दीदी ने शुरुआत में 30 दिन के 30 चूजे 90 रुपये प्रति चूजा की दर से खरीदे। इसमें उनका कुल 2,700 रुपये का शुरुआती खर्च आया। उन्होंने चूजों के नियमित दाना-पानी, टीकाकरण और उचित देख-रेख पर विशेष ध्यान दिया। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और पहली ही बार में बेहतर प्रबंधन से उन्होंने लगभग 500 से 600 चूजों का सफल उत्पादन एवं विक्रय किया।
14 से 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय
चूजों के विक्रय से उन्हें लगभग 14 से 15 हजार रुपये की मासिक आमदनी हुई। इस अतिरिक्त आय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान की, बल्कि उनमें खुद के व्यवसाय को और आगे बढ़ाने का अटूट आत्मविश्वास भी जगाया।श्रीमती बसंती नाग ने कहा कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने और IFC परियोजना के मार्गदर्शन से मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का नया अवसर मिला है। अब मैं दोबारा बड़े पैमाने पर चूजा पालन कर रही हूँ ताकि अपनी आय को और बढ़ा सकूँ।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
बसंती नाग की यह सफलता दर्शाती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग और अवसर मिले, तो वे न सिर्फ अपने घर की दहलीज लांघकर आर्थिक रूप से सक्षम बन सकती हैं, बल्कि समाज के लिए भी एक मिसाल पेश कर सकती हैं। आज बेनूर गाँव की अन्य महिलाएं भी उनके इस प्रयास से प्रेरित होकर स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका के नए साधनों को अपनाने के लिए आगे आ रही हैं।