ईश्वर दुबे
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रायपुर। धार्मिक न्यास, धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, वन मंत्री मोहम्मद अकबर एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने आज 9 फरवरी से शुरू होने वाले राजिम माघी पुन्नी मेला की तैयारियों की समीक्षा की। राजिम के सांस्कृतिक भवन में आयोजित केन्द्रीय समिति की बैठक में विधायक धनेन्द्र साहू, अमितेश शुक्ल, डमरूधर पुजारी सहित समिति के सदस्य मौजूद थे। बैठक श्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि 9 फरवरी से 21 फरवरी तक राजिम माघी पुन्नी मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में स्वच्छता और पर्यावरण का नुकसान नहीं हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजिम पुन्नी मेला को उसका मूल स्वरूप में लाकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बढ़ावा दिया है।
श्री साहू ने कहा कि नदियों में प्रदूषण नही हो इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा । इस बार भी नदी के भीतर मुरूम की सड़क नहीं बनेगी। दर्शनार्थी पद यात्रा कर कुलेश्वर महादेव का दर्शन करने जायेंगे। जरूरत के अनुसार नदी की रेत को दोनो ओर से खींच कर सड़क बनाया जाएगा। मेले में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग मंच बनाए जाएगें। इन मंचों में नाचा, पंडवानी, भरथरी, राउत नाचा, पंथी जैसे छत्तीसगढ़ी संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम होंगे। सांस्कृतिक मंचों में प्रवचन के लिए इस बार प्रदेश के प्रबुद्धजनों को पर्याप्त समय दिया जायेगा। इसी प्रकार सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रदर्शन के लिए प्रमुख रूप से स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जायेगा। मेले के दौरान कबड्डी, फुगड़ी, जलेबी दौड़ और स्थानीय खेलों जैसे भौरा, गेड़ी का भी आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के मेला, महोत्सव,प्रमुख पर्यटन स्थलों और संस्कृति के सरक्षण तथा लुप्त हो रहे संस्कृति को संजोने का प्रयास भी किया जाएगा और उनका मॉडल मेले में प्रदर्शित किया जाएगा। मेले में मादक द्रव्य और पॉलीथिन पर पूर्णरूप से प्रतिबंध रहेगा। पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने राजिम माघी पुन्नी मेले के सफल आयोजन के लिए की जा रही तैयारी की विभागवार समीक्षा की। पीने का साफ पानी की व्यवस्था, शौचालय, पार्किंग, 24 घण्टे बिजली, सड़कों की मरम्मत की जाएगी। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का किसी भी प्रकार का चालान पुलिस द्वारा नही काटा जाएगा। वहीं कुलेश्वर महादेव के दर्शन के लिए कम से कम समय लगे इसकी समुचित ब्यवस्था की जाएगी। मेले की व्यवस्था में शासन की ओर से कोई कमी नहीं होगी। कोई भी उचित मांग आएगी, उसे पूरा किया जायेगा।
बैठक में संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि लोकभावना के अनुरूप राजिम माघी-पुन्नी मेले अत्यंत महत्वपूर्ण है, इस मेले में वर्षाे से काफी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों को विशेष महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू के प्रस्ताव पर मेले का मूल स्वरूप फिर से वापस आ सका। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि मेले के आयोजन में कोई कसर नही छोड़ी जाएगी। इसे गरिमा के अनुरूप आयोजित किया जाएगा।
बैठक में पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय, नगर पंचायत राजिम के अध्यक्ष श्रीमती रेखा सोनकर, नवापारा के अध्यक्ष धनराज मध्यानी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, रायपुर संभाग के कमिश्नर एवं मेला अधिकारी जी.आर. चुरेन्द्र, संस्कृति विभाग के सचिव अविनाश चंपावत सहित गरियाबंद, महासमुंद और धमतरी के कलेक्टर पुलिस अधीक्षक वन मण्डलाधिकारी विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं केन्द्रीय समिति के सदस्य और नागरिकगण उपस्थित थे।