ईश्वर दुबे
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सभी प्लांटों में छग राज्य औद्योगिक नीति की उड़ाई जा रही धज्जियां
जमीन लेने के बावजूद नौकरी देने आनकानी कर रहे है संयंत्र प्रबंधन
जांजगीर-चांपा। जिले के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में छग राज्य औद्योगिक नीति का पालन नहीं किया जा रहा है। स्थानीय कुशल, अकुशल युवाओं को नौकरी देना तो दूर, जिन किसानों की जमीन ली गई है, उन्हें भी विभिन्न कंपनियों में कई साल बाद भी नौकरी नहीं मिल रही है। ऐसे में स्थानीय युवा व किसानों में आक्रोश है और आए दिन संयंत्रों में धरना प्रदर्शन व काम बंद हड़ताल आम है।
राज्य सरकार की औद्योगिक नीति के अनुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए अनुदान, छूट व रियायतें उन्हीं औद्योगिक उपक्रमों को दिए जाने का प्रावधान है, जो उपक्रम राज्य के मूल निवासियों में से 90 फीसदी अकुशल श्रमिक, 50 फीसदी कुशल श्रमिक तथा प्रशासकीय व प्रबंधकीय पदों पर न्यूनतम एक तिहाई रोजगार राज्य के मूल निवासियों को प्रदान करें, मगर राज्य की इस औद्योगिक नीति का खुलेआम उल्लंघन इन उद्योगों द्वारा किया जा रहा है। जिले में पहले से स्थापित औद्योगिक संयंत्र व निर्माणाधीन उद्योगों में ज्यादातर कुशल, अकुशल, प्रबंधकीय व प्रशासकीय पदों पर दूसरे प्रांत के लोग कार्यरत हैं। एक ओर काम के अभाव में जिले के ग्रामीण बड़ी संख्या में पंजाब, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर हर साल पलायन करते हैं। इधर यहां के संयंत्रों में दूसरे प्रांत के लोग नौकरी कर रहे हैं। जिले के औद्योगिक संस्थानों में दूसरे प्रांत के कर्मचारियों का बोलबाला है। भू-विस्थापितों को नौकरी के लाले हैं तो आम युवा इन कंपनियों में रोजगार पाने की कल्पना भी नहीं कर सकते, मगर इससे कोई सरोकार नहीं है।
कैंम्पस सलेक्शन से परहेज
स्थानीय लोगों को कंपनियों में रोजगार दिलाने बड़े उद्योगों को राज्य तकनीकी एवं प्रबंधकीय संस्थानों में कैम्पस सलेक्शन करने का नियम है, मगर जिले का संयंत्र प्रबंधन कहीं कैम्पस सलेक्शन नहीं करता। इससे स्थानीय उम्मीदवार रोजगार से वंचित हो रहे हैं। जिले में लगने वाले रोजगार मेले में इंश्योरेंस कंपनी के एजेन्ट नियुक्ति के लिए स्टाल जरूर लगता है लेकिन औद्योगिक संयंत्रों के द्वारा भर्ती के लिए कभी उदारता नहीं दिखाई गई। इसके चलते यहां बेरोजगारों का आंकड़ा सवा लाख पार कर गया है।
रिक्त पदों की नहीं देते सूचना
रिक्त पदों के संबंध में बने नियमों का पालन जिले में नहीं हो रहा है। ऐसे सभी प्रतिष्ठान हैं जिनमें 25 या इससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं उनके लिए यह अनिवार्य है कि ये प्रतिष्ठान किसी भी पद पर भर्ती के लिए रिक्त पदों की अधिसूचना स्थानीय रोजगार कार्यालय में दें। यह प्रावधान रिक्तियों संबंधी अनिवार्य सूचना अधिनियम 1959 की धारा 4 (1) व 4 (2) में है। इस प्रावधान का उल्लंघन पर संबंधित संस्थान के विरूद्घ दण्ड का प्रावधान भी है मगर कार्रवाई नहीं होने के चलते संयंत्र व संस्थान प्रबंधन रिक्त पदों की सूचना रोजगार कार्यालय में नहीं देते।
आए दिन धरना हड़ताल और वार्ता
जिले में भूमि अधिग्रहण के बाद रोजगार नहीं दिए जाने के कारण विभिन्न कंपनियों में धरना प्रदर्शन और समझौते के लिए आंदोलनकारी, प्रबंधन और प्रशासन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता आए दिन होती है। ऐसे में जिले का औद्योगिक माहौल भी खराब हो रहा है मगर कंपनियों को इससे कोई सरोकार नहीं है। केएसके पावर प्लाण्ट, आरकेएम, अथेना, मड़वा सहित अन्य संयंत्रों में प्रभावित किसान समय-समय पर नौकरी की मांग करते हैं। यह समस्या सालों से बनी हुई है।