ईश्वर दुबे
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रायपुर। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के अंतर्गत बस्तर संभाग के साथ ही नारायणपुर जिले में भी 15 जनवरी से अभियान की शुरुवात हो गयी है। इस अभियान के अन्तर्गत मलेरिया जांच टीम अब जिले के सुदुर अंचलों में भी अपनी दस्तक दे रही है। इस अभियान के अंतर्गत नारायणपुर जिले के 52 हजार 359 व्यक्तियों तक पहुंच चुकी है। इन 52 हजार 359 व्यक्तियों की जांच में 3848 व्यक्तियों में मलेरिया पॉजीटिव पाये गये है। इस अभियान के दौरान अब तक 645 गर्भवती महिलाओं के रक्त का परीक्षण किया गया, जिसमें 58 महिलाओं में मलेरिया पॉजीटिव पाया गया। यह उल्लेखनीय है कि पॉजीटिव पाये गये प्रकरणों में अधिकतर प्रकरण लक्षण रहित थे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ए.आर.गोटा ने जानकारी देते हुए बताया कि एनीमिया और कुपोषण का एक बड़ा कारण मलेरिया भी है। मलेरिया संक्रमण से रक्त की कमी हो जाती है, जिससे एनीमिया की स्थिति निर्मित होती है। साथ ही मलेरिया के कारण हीमोलिसिस होने से प्रोटीन तथा शरीर के अन्य पोषक तत्वों का भी हा्रस होता है, जो कुपोषण का कारण बनता है। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान न केवल मलेरिया से मुक्ति दिलायेगा, बल्कि एनीमिया, कुपोषण, शिशु एवं मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने में कारगर सिद्ध होगा। सर्वे दल द्वारा अपने सामने ही दवा की खुराक मरीज को खिलाई जा रही है। गंभीर प्रकरण पाये जाने पर समीप के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा जिला चिकित्सालय में रिफर करने की व्यवस्था की गयी है।
उपरोक्त गतिविधियों के साथ-साथ मलेरिया की रोकथाम एवं बचाव हेतु स्थानीय भाषा, बोली में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। मच्छर पनपने के स्त्रोतों की पहचान कर उन्हें नष्ट किया जा रहा है। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करने हेतु जनसामान्य को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। स्थानीय मितानिन द्वारा शाम को नगाड़ा, सीटी बजवाकर मच्छरदानी उपयोग हेतु समुदाय को जागरूक किया जा रहा है।