Google Analytics —— Meta Pixel
newscreation

newscreation

chandra shekhar sharma

कवर्धा --- पंद्रह बरस सत्ता सुख भोगने के बाद चौथी पारी के लिए एडी चोटी का जोर लगा रही भाजपा और प्रदेश के मुखिया डाक्टर रमण सिंह इस बार सत्ता की चाबी पाने कोई रिस्क लेने के फ़िराक में नहीं है | फूंक फूंक कर कदम रख रहे है चाहे वो गृह जिले की ही विधानसभा सीट क्यों ना हो | इसका प्रत्यक्ष उदहारण जिले की कवर्धा व पंडरिया विधानसभा सीट के वर्तमान विधायको पर पुनः दांव खेल कर जातिवाद की राजनीति को पुनः हवा दी है । हाँलाकि इसके पीछे भाजपा की सोची समझी  रणनीति बताई जा रही है | जिसके लिए काफी तर्क वितर्क दिए जा रहे है , परन्तु एक चर्चा यह भी है कि भाजपा शातिर व चतुर राजनीतिज्ञ कांग्रेसी अकबर के माइंडगेम  में उलझ कर रह गई है । भाजपा के लिए पिछले चुनाव में जातिवाद के बोये गए वृक्ष अब जहरीला पोधा बन गया है जिससे ऊबरना भाजपा के लिए आसान नहीं रहा साथ ही टिकट का सपना संजोए डॉ सियाराम साहू , संतोष पांडेय , अम्बिका चंद्रवंशी, रघुराज सिंह , नंदलाल चंद्राकर , लालजी चंद्रवंशी को सक्रिय राजनीति में अब अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा है । राजनैतिक गलियारो के सूत्रों की माने तो भाजपा को भी अब भीतराघात का सामना करना पड़ेगा साथ ही साथ एन्टी इनकंबेंसी वोट का खतरा अलग से है । बहरहाल डॉ रमन के चक्रव्यूह में उलझी कांग्रेस जिले में अब तक अधिकृत प्रत्याक्षियों की घोषणा नही कर पाई है हांलाकि कवर्धा सीट से चिर परिचित पुराने प्रतिद्वंदी अशोक और अकबर फिर आमने सामने होंगे अकबर भी अपने सक्रिय राजनीतिक कैरियर के अंतिम प्रयास कर रहे है । अबकी हार उन्हें सक्रिय राजनीति से किनारा कर सकती है । अपने राजनैतिक भविष्य को बचाने जी जान से जुटे अकबर सारे दाव पेंच आजमा रहे है । पांच साल तक न्यायालय के चक्कर काटने के बाद पुनः जनता के दरबार मे किस्मत आजमा रहे है ।इन्हें भी भितराघात का पूरा खतरा रहेगा यहाँ भी कम विभिषन नहीं है जो पार्टिया अपनो कि नाराजगी को साध लेगी वो बाजी भी मार लेजायेगी | पंडरिया विधान विधानसभा सीट से कुर्मी जाती के वर्तमान विधायक को पुनःटिकट दिए जाने से बाहरी भगाओ का नारा देने वालो के मुंह टिकट वितरण के बाद से बंद है । भाजपा के साहू कुर्मी कार्ड से हतप्रद कांग्रेस पंडरिया से लालाजी चंद्रवंशी को पुनः टिकट दे कर भाजपा के जातिवाद के खेल को गड़बड़ा सकती पर पैराशूट लैंडिंग के लिए आये योगेश्वर राज की टिकट काटना कांग्रेस को गत चुनाव की तरह कही भारी ना पड़ जाए और कांग्रेस की नाव किनारे पहुंचते पहुंचते डूब न जाय। बहरहाल दोनों ही पार्टियों में उहापोह कि स्थिति है | मतदाता कि ख़ामोशी से भी उम्मीदवारों के माथे में चिंता कि लकीरे खीच आई है । 

 

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का क्रिकेट स्टेडियम अब तक दो मेगा शो का गवाह बन चुका है। पहला आयोजन वर्ष 2016 के फरवरी महीने में हुआ था। 'द ग्रेट खली रिटर्नस मेगा शो' के नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ऐसे प्रचार किया, मानो यह प्रदेश की तकदीर बदल देगा। मेगा शो को सफल बनाने के लिए कांग्रेस सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। कांग्रेस सरकार के मुखिया हरीश रावत व उनके सिपहसालारों के पांव धरती पर नहीं पड़ रहे थे। आखिर पड़ते भी कैसे?

 
कांग्रेसी बिग्रेड जनता को झांसा देकर एक नकली लड़ाई को असली लड़ाई के रूप में प्रस्तुत कर रही थी। शो के टिकट दस-दस हजार रूपए तक में बेच कर लोगों की जेब काटी गई। सरकारी तामझाम व इंतजामात के साथ हुए इस शो के टिकटों की बिक्री के लाखों रुपये एक निजी संस्था की जेब में गए।
 
मगर विगत 7-8 अक्टूबर को इसी क्रिकेट स्टेडियम में एक दूसरा मेगा शो आयोजित हुआ तो पहले शो के कर्ताधर्ता हरीश रावत व अन्य कई कांग्रेसी नकारात्मक सोच के साथ भाजपा सरकार पर हमलावर हो उठे। यह सोच-समझ व समय का अंतर है। आखिर खली का शो कराने वाले इनवेस्टर्स समिट का मतलब क्या समझेंगे? 

 
राज्य गठन के 18 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने इतने व्यापक स्तर पर निवेशक सम्मेलन आयोजित करने की पहल की। सरकार की पहल पर देश-विदेश के निवेशकों ने सकारात्मक रुझान दिखाया और लगभग सवा लाख करोड़ के निवेश के प्रस्ताव राज्य सरकार को सौंपे।
 
प्रस्तावों का धरातल पर उतारना और उनका परिणाम अभी भविष्य के गर्भ में है। मगर राज्य के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर विपक्ष द्वारा की गई राजनीति कतई शोभनीय नहीं कही जा सकती है। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री से लेकर विदेश तक के निवेशक राजधानी देहरादून में राज्य में निवेश की बुनियाद को आधार देने में जुटे हुए थे, तो दूसरी ओर उसी वक्त राज्य का मुख्य विपक्षी दल 'खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे' वाले अंदाज में धरना-प्रदर्शन में लगा हुआ था।

 
इसका अर्थ क्या लगाया जाएगा? क्या मात्र विरोध करने के लिए विरोध करना विपक्षी दल कांग्रेस का राजनीतिक धर्म है? क्या राज्य के हितों से उसे कोई लेना-देना नहीं है? राजनीतिक विरोध और लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध अपनी जगह उचित है। मगर राज्य के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे पर ओछी राजनीति की इजाजत किसी को भी नहीं होनी चाहिए। कितना अच्छा होता कि कांग्रेस नेता धरना-प्रदर्शन करने के बजाय इन्वेस्टर समिट में शामिल होते। निवेशकों का मनोबल तोड़ने वाली बयानबाजी करने से बेहतर होता कांग्रेस उनके उत्साह को बढ़ाती और राज्य में औद्योगिकीकरण के एक नए युग के आगाज के लिए सार्थक पहल करती।
 
दरअसल, विकासवादी सकारात्मक राजनीति कांग्रेस के डीएनए में नहीं है। कांग्रेस ने हमेशा से झूठ व भ्रम को अपनी राजनीति का केंद्र बिंदु बनाए रखा। यही कारण है कि वर्षों तक केंद्र व राज्यों में एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस दो राज्यों पंजाब व मिजोरम और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी तक सिमट कर रह गई है। कर्नाटक में वह गठबंधन में साझीदार है।

 
बहरहाल, वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी चुनावी सभाओं में एक नारा दिया था। शाह ने कहा था 'राज्य अटल जी ने बनाया है- मोदी जी संवारेंगे'। भाजपा सरकार आज इसको चरितार्थ करते दिख रही है। यह तथ्य गौरतलब है कि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में सरकार के गठन के फलस्वरूप भाजपा ने न केवल उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिया, अपितु इस नवोदित राज्य को विशेष राज्य की श्रेणी में शामिल किया। 
 
वर्ष 2002 में प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार गठित होने के बावजूद वाजपेई सरकार ने बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के उत्तराखंड को विशेष पैकेज दिया। वाजपेई सरकार द्वारा दिए गए औद्योगिक पैकेज का ही परिणाम था कि वर्ष 2004 के बाद राज्य में औद्योगिक विकास में तेजी आई। 
 
यह सुखद संयोग है कि आज जब केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकारें काबिज हैं, तो उन्होंने उत्तराखंड को संवारने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। इनवेस्टर्स समिट के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने लगभग चालीस हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों का लक्ष्य तय किया था। मगर राज्य सरकार के चतुर्दिक प्रयासों व केंद्र सरकार के सकारात्मक रूप के परिणामस्वरूप लगभग सवा लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने निवेशक सम्मेलन की बागडोर अपने हाथों में रखी और लगातार तीन माह तक सम्मेलन को सफल बनाने के लिए रात-दिन एक किए रखा। 
 
प्रदेश सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया। निवेश के लिए 12 कोर सेक्टर चिन्हित किए गए। पर्यटन, सोलर, ऊर्जा, हॉर्टिकल्चर, फ्लोरीकल्चर, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, हर्बल, एरोमेटिक जैसे क्षेत्रों पर फोकस कर मुख्यमंत्री खुद तमाम स्थानों पर निवेशकों से मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्र सरकार के तमाम वरिष्ठ मंत्रियों की उपस्थिति ने इनवेस्टर्स समिट को उड़ान भरने के लिए पंख लगा दिए। 
 
समिट में निवेशकों के उत्साह को लेकर स्पष्ट है कि राज्य सरकार उनका भरोसा जीतने में सफल रही है। निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना स्वाभाविक रूप से चुनौती भरा कार्य है। लिहाजा, सम्मेलन के तुरंत बाद से प्रदेश सरकार ने निवेश को अमली-जामा पहनाने के लिए कसरत शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में निवेश प्रस्तावों के फॉलोअप के लिए अलग से सेल का गठन करने का निर्णय लिया गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इनवेस्टर्स समिट उत्तराखंड के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को औद्योगिक विकास की एक बहु प्रतीक्षित दिशा देगा।
 
-अजेंद्र अजय
(लेखक उत्तराखंड सरकार में मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष रहे हैं।)
19 महिला पत्रकारों के यौन शोषण का आरोप आखिरकार केन्द्र की मोदी सरकार पर भारी पड़ गया। आरोपों की शुरुआत में जो भारतीय जनता पार्टी 10 दिन से गुड़ खाए बैठी थी वो आखिर आरोप लगाने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या से तनाव में आती चली गई। आखिर अकबर का वतन लौटकर मानहानि का दावा ठोंकने और इसे राजनैतिक षड़यंत्र बताने का दावा फुस्स पटाखा साबित हो गया और दो दिन में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने अकबर से अपना पीछा छुड़ा लिया। आनन फानन में केन्द्रीय मंत्रीमंडल में विदेश राज्य मंत्री के पद से एमजे अकबर को इस्तीफा देना पड़ा।

 
मोदी मंत्रिमंडल से अकबर का इस्तीफा होने के फौरन बाद ही बताना शुरु हो गया है कि पीएम नरेन्द्र मोदी महिला वोटरों को नाराज नहीं करना चाहते थे और मीटू कैम्पेन के जरिए सामने आ रहीं महिलाओं को न्याय दिलाने का समर्थन करते हैं। इस सरकारी और सत्ताधारी दल के राग के बावजूद इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी सरकार ने इस लेटलतीफी में काफी हद तक फजीती करा ली है। मीटू कैम्पेन के जरिए जब भारत में यौन शोषण के खुलासे होने शुरु हुए तो दो चार फिल्मी हस्तियों के बाद मोदी सरकार भी इससे बच नहीं सकी थी। सरकार के विदेश राज्य मंत्री और देश के नामी संपादकों में शुमार रहे एमजे अकबर पर उनकी पुरानी अधीनस्थ पत्रकार प्रिया रमानी, गजाला बहाव, मजली डै आदि ने यौन शोषण के आरोप लगा दिए।
 
महिला पत्रकारों ने अकबर पर जिस तरह के आरोप लगाए थे वो बहुत ही गंभीर किस्म के थे, साथ ही कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ किन तरीकों से शोषण हो रहे हैं, इस बात को उजागर करते थे। मोदी सरकार ने इन गंभीर आरोपों के बावजूद भी शुरुआत में मंत्री एमजे अकबर के प्रति उतना कड़ा रवैया नहीं दिखाया जिसका आरोप लगाने वाली महिलाएं और उनसे सहानुभूति रखने वाला जनसमुदाय उम्मीद कर रहा था। 

 
अकबर के विदेश दौरे पर होने की बात कहकर मामले में अकबर को तलब करने को लटकाया गया। अकबर गंभीर यौन शोषण के अनेक आरोप लगे होने के बावजूद विदेश में भारतीय लोकतंत्र के प्रतिनिधि बने रहे और भारत सरकार की हैसीयत से सम्मान पाते रहे। यौन शोषण से जुड़े इस अहम मसले पर बीजेपी का लेटलतीफ रवैया कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। अकबर पर बीजेपी की कई दिनों तक चुप्पी सवाल खड़े करती है साथ ही इससे महिलाओं के साथ खड़े आम जनमानस में सरकार की पिछले कुछ दिनों में कुछ हद तक विपरीत छवि बनी भी है।
 
बेशक ये केवल अभी आरोप ही हैं और आरोप लगाने वाली महिला पत्रकारों ने न तो एफआईआर दर्ज करवाई हैं और अकबर के खिलाफ किसी तरह के सबूतों पर भी अब तक खुलासा नहीं हुआ है मगर फिर भी इन आरोपों को हलके में नहीं लिया जा सकता। अगर ऐसा संभव होता तो मोदी कैबीनेट से अमित शाह के करीबी और हाईप्रोफाइल मंत्री एमजे अकबर को आखिरकार इस्तीफा नहीं देना पड़ता।
 
सरकार ने इस्तीफा लेकर या अकबर ने इस्तीफा देकर देश भर में चर्चा में छाए इस मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल की कोशिश जरूर की है मगर आरोपों से इस्तीफे के बीच जितने दिन गुजरे हैं उनसे महिलाओं के साथ वाली मोदी सरकार की छवि को धक्का जरूर लगा है। 
 
मौके पर अकबर के बहाने कांग्रेस ने मोदी सरकार और पूरी भाजपा को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। इस मामले में देश के विभिन्न बुद्धिजीवियों ने भी पीड़ित महिलाओं के पक्ष में बयान दिए हैं तो नामी संपादकों और अखबारों ने एमजे अकबर पर लगे आरोपों को समर्थन देतीं कई विस्तृत घटनाओं को सोशल मीडिया पर उजागर किया है। नामी पत्रकारों और संपादकों के इन कई खुलासों को देश के लोग कैसे नकार सकते हैं।
 
इस मामले में सरकार पिछले कुछ दिनों में हर मोर्चे पर घिरी है। मोदी मंत्रिमंडल की महिला मंत्रियों को मीडिया के सवालों से बचकर निकलने वाले दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे तो भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा तक को भी उपलब्धियों पर बोलने के बीच अकबर पर सवाल किए जाने पर मौन रहकर निकलना पड़ा। सरकार को चौतरफा फंसते देख केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी ने जरूर मीटू कैम्पेन का समर्थन किया था मगर स्मृति ईरानी सरीखीं मोदी की करीबी मंत्री अकबर को लेकर सरकार को हमलों से बचाने में लगभग नाकामयाब ही रहीं थीं।
 
इस बीच भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया राहटकर ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती कार्यक्रम के दौरान पीड़ित महिलाओं पर ही सवालिया निशान लगा दिया था। आखिरकार महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर पैबंद से लग रहे मंत्री एमजे अकबर से इस्तीफा लेने में ही पार्टी ने भलाई और अगले चुनाव में सुरक्षित भविष्य समझा।
 
-विवेक कुमार पाठक

पणजी। केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने रविवार को कहा कि गोवा में स्टार्टअप की मदद करने के लिए दिसंबर में वैश्विक निवेशकों का शिखर सम्मेलन होगा। उन्होंने कहा कि अधिक रोजगार सृजित करने के लिए केंद्र सरकार गोवा को स्टार्टअप और लॉजिस्टिक का केंद्र बनाने की योजना बना रही है। इससे राज्य से कृषि निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रभु ने कहा, ‘‘स्टार्टअप के सामने आने वाली दिक्कतों में से एक है पैसे की कमी। हमने विश्व के सभी निवेशकों को बुलाया है जो वित्तपोषण करते हैं। सात दिसंबर को होने वाले इस कार्यक्रम में पहली बार इस क्षेत्र में निवेश करने वाले वैश्विक निवेशक एकजुट होंगे।’’ 

प्रभु कुदाइम इंडस्ट्रियल एस्टेट में हरित भवन केंद्र का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सालाना होने वाले इस कार्यक्रम में वित्तपोषक, वेंचर कैपिटलिस्ट, निवेशक और ग्रोथ कैपिटल प्रोवाइडर जमा होंगे। उन्होंने कहा कि वह राज्य को हरित विचारों का केंद्र बनते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम गोवा में स्टार्टअप का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की सोच रहे हैं।’’ 
 
उन्होंने कहा, ‘‘हम कई चीजों पर काम कर रहे हैं। इसके साथ साथ हमें लोगों के लिए रोजगार सृजित करने होंगे। यदि आप सिर्फ हरित के बारे में बात करेंगे तो लोगों का क्या होगा?’’ प्रभु ने कहा कि गोवा में लॉजिस्टिक का भी केंद्र बनाया जाएगा क्योंकि राज्य में इसके लिए आवश्यक सारी संरचनागत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस की कार्य संस्कृति में बदलाव के लिये अपनी सरकार की कोशिशों का रविवार को जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2019 के अंत तक पुलिस में सिपाहियों की कमी लगभग दूर कर ली जाएगी। मुख्यमंत्री ने ‘पुलिस स्मृति दिवस’ के अवसर पर कहा कि पुलिसकर्मियों की कार्यसंस्कृति को बेहतर बनाने के लिये समय-समय पर उनके प्रशिक्षण की सुचारु व्यवस्था की जाएगी। पुलिसकर्मी भी अपने परिवार की बेहतर देखभाल कर सकेंगे, जिससे वे तनाव रहित होकर कार्य कर सकेंगे।

 
योगी ने कहा कि वर्ष 2019 के अंत तक सवा लाख सिपाहियों की भर्ती पूरी होने से पुलिस बल में आरक्षियों की कमी लगभग खत्म हो जाएगी। इसका सीधा फायदा जनता को होगा। साथ ही पुलिसकर्मियों को छुट्टी मिलने में होने वाली समस्याओं का भी समाधान हो सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पुलिस बल की कमी को दूर करने और उनकी कार्य कुशलता बढ़ाने के लिये भर्ती की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इस साल 29303 पुलिस आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 5341 महिलाएं और 3828 पीएसी जवान भी शामिल हैं। इसके अलावा 42 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जा रही है।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की कार्य संस्कृति बढ़ाने के लिये सरकार ने प्रोन्नतियां प्रदान करने पर विशेष बल दिया है। वर्ष 2017 में 9892 पुलिसकर्मियों को और इस साल 37575 पुलिसकर्मियों को प्रोन्नतियां प्रदान की गयी, जो कि अब तक का एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अपराधमुक्त एवं भ्रष्टाचारमुक्त प्रदेश बनाने के लिये गम्भीरता से कार्य शुरू किया गया है और पुलिस को कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं।
 
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कर्त्तव्य का पालन करने के दौरान शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सरकार शहीद पुलिसर्मियों के साथ सहयोग करने के लिये तत्पर रहेगी। राज्य सरकार शहीदों के परिवारों के साथ है और उनके हित में सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

इस्लामाबाद। दिवालिया होने की दहलीज पर खड़े पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने शनिवार को दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से आखिरी बार कर्ज लिया जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल ही में कहा था कि मौजूदा नकदी संकट से निपटने के लिए आईएमएफ के कर्ज की शायद जरूरत नहीं पड़े। पाकिस्तान इससे पहले भी 12 बार आईएमएफ से कर्ज ले चुका है। पाकिस्तान की पिछली सरकारों ने भी विभिन्न मौकों पर आईएमएफ से लिये गये कर्ज के आखिरी होने का मौके-बेमौके दावा किया था। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार ने 2013 में इसी तरह के संकट से बचने के लिए आईएमएफ से 6.6 अरब डॉलर का कर्ज लेने के बाद ऐसा ही दावा ही किया था।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने कराची शेयर बाजार को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह आईएमएफ से लिया जाने वाला 13वां और अंतिम कर्ज है। हम तेजी से दिवालिया होने की ओर बढ़ रहे हैं। हमें 21 करोड़ पाकिस्तानियों का बचाव करना है।’’ कमर का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ ही रोज पहले पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने आने वाले साल में मुद्रास्फीति के 7.5 प्रतिशत तक पहुंच जाने तथा आर्थिक वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रहने के लक्ष्य से पीछे रह जाने की चेतावनी दी है।
 
पाकिस्तान की मौजूदा सरकार आईएमएफ से लिये जा रहे 13वें कर्ज के बारे में विरोधाभासी बयान दे रही है। उमर के इस बयान से पहले इमरान ने इसी सप्ताह कहा था कि संभवत: आईएमएफ से इस कर्ज की जरूरत नहीं पड़े। आईएमएफ का एक दल कर्ज की शर्तों पर बातचीत के लिए नवंबर की शुरुआत में पाकिस्तान आने वाला है।

काबुल। अफगानिस्तान में संसदीय चुनाव में हुई हिंसा में शनिवार को लगभग 170 लोग हताहत हुए है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि एक ताजा हमले में एक आत्मघाती हमलावर ने काबुल के एक मतदान केन्द्र में खुद को उड़ा लिया जिससे कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गये। इस तरह अफगानिस्तान की राजधानी में मृतकों की संख्या 19 पहुंच गई जबकि लगभग 100 लोग घायल है।

विस्फोट की तत्काल किसी भी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन तालिबान ने इससे पूर्व कहा था कि उसने ‘‘फर्जी चुनाव’’ पर 300 से अधिक हमलों को अंजाम दिया। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि हिंसा से मतदान बाधित हुआ। उत्तरी कुंदुज शहर में तीन लोगों की मौत हुई और 39 अन्य घायल हो गये। प्रांतीय आईईसी निदेशक मोहम्मद रसूल उमर ने बताया कि कुंदुज शहर से कई किलोमीटर दूर एक मतदान केन्द्र पर तालिबान हमले में स्वतंत्र निर्वाचन आयोग (आईईसी) के कर्मचारी की मौत हो गई और सात अन्य लापता हो गये। कई मतपत्र बक्सों को भी नष्ट कर दिया गया।
 
प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता ने बताया कि पूर्वी प्रांत नांगरहार में आठ विस्फोट हुए जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और पांच घायल हो गये। चुनाव आयोजकों ने बताया कि प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 27 प्रांतों में मतदान केन्द्रों में कम से कम 15 लाख मतदाताओं ने मतदान किया। कई मतदान केन्द्रों पर हिंसा हुई जिसके कारण इन केन्द्रों को नहीं खोला जा सका और मतदाता घंटों पंक्तियों में खड़े रहे।
 
तालिबान ने ‘‘अपने जीवन की रक्षा के लिए’’ मतदाताओं को चुनावों का बहिष्कार किये जाने की चेतावनी दी थी। चुनाव आयोजकों का कहना है कि मतदाता पंजीकरण सूचियों और बॉयोमीट्रिक सत्यापन उपकरणों में गड़बड़ी के कारण विलंब होने से 371 मतदान केन्द्रों पर रविवार तक मतदान की अवधि बढाई जायेगी। हिंसा के खतरे के बावजूद प्रमुख शहरों में मतदान केन्द्रों पर बड़ी संख्या में मतदाता दिखाई दिये जहां उन्होंने कई घंटों तक मतदान केन्द्र खुलने का इंतजार किया। 
 
लंबे समय बाद हो रहे संसदीय चुनाव के लिए लगभग 90 लाख मतदाता पंजीकृत थे। हमले के बाद कंधार में मतदान में एक सप्ताह तक का विलंब हुआ। चुनावी मैदान में उतरे 2,500 से अधिक उम्मीदवारों में से कम से कम 10 उम्मीदवारों की चुनाव से पहले हत्या कर दी गई थी। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मतदान की शुरुआत में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने ‘‘हर अफगानी,युवाओं और वृद्धों, महिलाओं और पुरूषों’’ से मतदान करने का आग्रह किया। शुरूआती परिणाम 10 नवम्बर को जारी किये जायेगे लेकिन इस तरह की चिंताएं है कि यदि बायोमीट्रिक सत्यापन उपकरण टूटे हुए या नष्ट पाये जाते है तो समस्या हो सकती है।

नयी दिल्ली। गृह मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को जम्मू कश्मीर का दौरा करेंगे । इस दौरान वह राज्य में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेंगे और विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि एक दिवसीय दौरे में सिंह राज्यपाल सत्य पाल मलिक और सिविल, पुलिस तथा सुरक्षाबलों के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करेंगे तथा मौजूदा स्थिति का आकलन करेंगे।

 
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि गृह मंत्री जम्मू कश्मीर में खासतौर से घाटी और पाकिस्तान के साथ लगती सीमा पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेंगे। गृह मंत्री का जम्मू कश्मीर का दौरा शहरी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद हो रहा है। राज्य के दो बड़े राजनीतिक दल नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन चुनावों का बहिष्कार किया था।
 
पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों ने भी चुनाव प्रक्रिया बाधित करने की धमकी दी थी। अधिकारी ने बताया कि सिंह के जम्मू कश्मीर में राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात करने की भी संभावना है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भाजपा के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद जून में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद से राज्य में राज्यपाल शासन लागू है।

नयी दिल्ली/सिंगापुर। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद के परोक्ष संदर्भ में शनिवार को कहा कि भारत ने आतंकी समूहों और उनके संरक्षकों की गतिविधियों को बाधित करने और रोकने के तरीकों का प्रदर्शन किया है और अगर जरूरत पड़ी तो फिर ऐसा करने से नहीं हिचकेगा।

सिंगापुर में आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि ‘‘निकटस्थ पड़ोस’’ में आतंकी ढांचों की मौजूदगी और आतंकवादियों को मिलने वाले समर्थन ने भारत के सब्र की परीक्षा ली है और एक जिम्मेदार शक्ति के तौर पर उसने इस खतरे से निपटने में ‘‘काफी संयम’’ दिखाया है। 

नयी दिल्ली में रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि भारत ने आतंकी संगठनों और उनके संरक्षकों की गतिविधियों को बाधित करने और उसपर लगाम लगाने के उपायों का प्रदर्शन किया है और भविष्य में अगर जरूरत पड़ी तो ऐसा फिर से करने में नहीं हिचकेगा।’’ सीतारमण ने आतंकवाद के खतरे की वजह से अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थायित्व को मिलने वाली व्यापक चुनौतियों को लेकर भारत की चिंताओं पर जोर दिया।

जयपुर । आम आदमी पार्टी का राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर घोषणा पत्र आगामी 28 अक्टूबर को जारी होगा, और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यह घोषणा पत्र जारी करेंगे। प्रदेश घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष रामपाल जाट ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि आगामी 23 अक्टूबर से जयपुर में आम आदमी पार्टी क तरफ से किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर अनशन भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अनशनस्थल पर ही घोषणा पत्र को लेकर सुझाव और खुली बहस की जाएगी। साथ ही 27 अक्टूबर तक घोषणा पत्र पर सुझाव लिए जाएंगे और फाइलन किया जाएगा । उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की जनसभा में यह घोषणा पत्र जारी होगा।
उन्होंने बताया कि किसानों के लिए प्रदेश के 4500 गांवों में 247 खरीद केंद्र बनाएं जो ऊंट के मुंह में जीरा जैसे है। सरकार की इन नीतियों की वजह से किसानों को अपना माल बिचौलियों को औने—पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। मूंगफली की फसल कट चुकी है लेकिन, ज्यादातर केंद्रों पर खरीद अभी तक शुरू नहीं की गई।

इसी तरह राजस्थान का किसान एक और बड़ी समस्या से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल किसानों का प्रीमियम उनके खातों से आॅनलाइन काट लिया गया। इस योजना में जिन किसानों की फसल खराब हुई हैं उनके क्लेम आज तक पास नहीं किए गए। ये किसान बीमा कंपनियों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं।

Ads

R.O.NO. 13784/149 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक