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राज्यपाल ने जननायक टंट्या भील के स्मारक पर अर्पित किए श्रद्धासुमन
हितग्राहियों को किये हितलाभ वितरित

 

रायपुर : 

कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ की। उन्होंने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि “हरित खाद, नीली-हरी शैवाल एवं जैव उर्वरकों” पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आगामी खरीफ सीजन से पहले किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्पों के प्रति जागरूक करना और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना था।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए हरित खाद, नीली-हरी शैवाल और जैव उर्वरक जैसे विकल्प फसलों की पोषक आवश्यकताओं का लगभग 50 प्रतिशत तक पूरा कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले दो से तीन महीनों में इन तकनीकों के उत्पादन और उपयोग को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए 150 से अधिक कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति को लेकर उभरती अनिश्चितताओं के बीच छत्तीसगढ़ ने टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दक्षिण-पूर्व एशिया और विशेषकर ईरान में जारी संघर्ष के कारण पेट्रोलियम उत्पादों एवं उर्वरक निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल के आयात पर संभावित असर को देखते हुए राज्य सरकार ने वैकल्पिक पोषक स्रोतों को बढ़ावा देने की पहल तेज कर दी है।

तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य सुधार और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए जैविक एवं पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने बताया कि नीली-हरी शैवाल नाइट्रोजन स्थिरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेषकर धान की खेती में इसकी उपयोगिता अधिक है। वहीं, हरित खाद से मृदा की संरचना बेहतर होती है और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है। समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन को भविष्य की कृषि के लिए अनिवार्य बताया गया।

कार्यक्रम में कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, जिसमें नीली-हरी शैवाल उत्पादन की तकनीक का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा खरीफ सीजन के लिए इन विकल्पों के व्यापक उपयोग की रणनीति पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन वैकल्पिक उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो न केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि किसानों की लागत में कमी और मृदा स्वास्थ्य में सुधार भी सुनिश्चित होगा। कार्यक्रम के अंत में सतत, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।

 

रायपुर : 

 

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज कोंडागांव के सुदूर अंचल स्थित ग्राम केजंग पहुंचे और क्षेत्रवासियों को लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपए के 11 विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न ग्राम पंचायतों में सड़क, भवन एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया गया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं सड़कों, पुलों, जल संरक्षण के कार्य और सामुदायिक भवनों का निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण अंचल में आवागमन को आसान बनाना, कृषि को मजबूती देना और ग्रामीण जीवनस्तर में सुधार लाना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार आम नागरिकों के हित में क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पूर्व में माओवाद से प्रभावित रहा है, किन्तु पूरा छत्तीसगढ़ माओवाद के प्रभाव से मुक्त हो गया है और अब बस्तर संभाग भयमुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ेगा और अधिक समृद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से ग्रामीणों को आवागमन, शिक्षा एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार मिलेगा।

विकास कार्याे के लिए भूमिपूजन किए गए कार्यों में ग्राम पंचायत कुधूर में 1 किमी मुरमीकरण कार्य (मांझानार से साहूपारा प्रतीक घर तक) लागत 19 लाख रुपए, तरईपारा से पंडेला घर तक सीसी सड़क निर्माण लागत 9.60 लाख रुपए, ग्राम पंचायत कोरमेल के पटेलपारा में सीसी सड़क निर्माण लागत 9.60 लाख रुपए के कार्य शामिल हैं। इसी प्रकार ग्राम पंचायत जोडेंगा में सांस्कृतिक भवन से कमलू घर तक सीसी सड़क निर्माण लागत 9.60 लाख रुपए, ग्राम पंचायत पदनार में प्राथमिक शाला भवन से समलू घर तक सीसी सड़क निर्माण लागत 9.60 लाख रुपए, ग्राम पंचायत पुसपाल में नीचेपारा में कुलधर घर से सुधीर यादव घर तक सीसी सड़क निर्माण लागत 9.60 लाख रुपए, ग्राम पंचायत मड़ागांव में सांस्कृतिक भवन से पीलाराम घर तक सीसी सड़क निर्माण लागत 9.60 लाख रुपए के कार्य शामिल हैं। ग्राम पंचायत केजंग में घोटुल गुड़ी के पास शेड निर्माण लागत 6 लाख रुपए, ग्राम पंचायत मडानार में स्कूल मुख्य द्वार से पेदेबाई घर तक सीसी सड़क निर्माण लागत 9.60 लाख रुपए एवं प्राथमिक शाला में शौचालय निर्माण लागत 5 लाख रुपए तथा ग्राम पंचायत बेतबेड़ा में मुख्य मार्ग से ढोलमांदरी सन्नू घर तक मार्ग मुरमीकरण 15.00 लाख रुपए के कार्य शामिल हैं।

कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम, उपाध्यक्ष श्री टोमेन्द्र ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, कोण्डागांव एसडीएम श्री अजय उरांव, तहसीलदार श्री मनोज रावटे एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 

रायपुर :

 

प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने रजत जयंती उद्यान को जनसेवा के लिए समर्पित किया। नगर पालिक निगम कोरबा के वार्ड क्र. 38 लालघाट चेकपास्ट बस्ती के रहवासियों को आज एक सर्वसुविधायुक्त उद्यान की सौगात प्राप्त हुई है। इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत, मेयर इन काउंसिल सदस्य हितानंद अग्रवाल, पार्षद नरेन्द्र देवांगन, पार्षद चेतन सिंह मैत्री, सत्येन्द्र दुबे, मुकुंद सिंह कंवर, मंगल बंदे सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण व काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा बालको जोनांतर्गत वार्ड क्र. 38 लालघाट के चेकपोस्ट बस्ती मुख्य मार्ग में 21 लाख 50 हजार रूपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त उद्यान का निर्माण कार्य कराया गया है, छत्तीसगढ़ गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्ष 2025 से मनाये जा रहे रजत जयंती समारोह के तहत उक्त उद्यान का नामकरण रजत जयंती उद्यान किया गया है।

इस अवसर पर उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुये प्रदेश के उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी जी ने 25 वर्ष पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया था। राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वर्ष रजत जयंती वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस उद्यान का नाम भी रजत जयंती उद्यान रखा गया, मुझे खुशी है कि आज यह सर्वसुविधायुक्त उद्यान जनताजनार्दन की सेवा हेतु समर्पित किया गया है। उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ को हमारी सरकार ने ही बनाया था और अब हमारी सरकार ही छत्तीसगढ़ को संवार रही है। 15 वर्षाे तक डॉ. रमन सिंह जी प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे तथा प्रदेश का ऐतिहासिक रूप से विकास किया, अब उन्हीं की तर्ज पर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अगुवाई में प्रदेश सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है, यह हमारा सौभाग्य है कि जनताजनार्दन के आशीर्वाद से देश-प्रदेश व कोरबा मे ट्रिपल इंजन की सरकार चल रही है तथा देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार द्वारा दर्जनों जनकल्याणकारी योजनायें संचालित कर गरीब, मजदूर, किसान, युवा, महिला सहित समाज के सभी वर्गाे के जीवन स्तर को ऊपर उठाया जा रहा है।

इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बनाये गये रजत जयंती उद्यान की यह सौगात आज लालघाट चेकपोस्ट बस्ती के नागरिक बंधुओं को प्राप्त हुई है। जिसके लिये मैं उन्हें हृदय से बधाई देती हूॅं। उन्होने कहा कि उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में कोरबा नगर निगम क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है, आमजनता की समस्याएं प्राथमिकता के साथ दूर की जा रही है, विगत 01 वर्ष के दौरान नगर निगम केारबा ने अनेक उपलब्धियॉं अर्जित की है, बर्षाे की समस्यायें दूर की गई है।

 

रायपुर :

 

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज जशपुर जिला के कुनकुरी विकासखंड के बेहराखार ग्राम का दौरा कर विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय के लोगों से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उनके रहन-सहन, जीवनशैली को नजदीक से समझा और उनसे संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। राज्यपाल ने बिरहोर समुदाय के लोगों से चर्चा करते हुए विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों तक सभी शासकीय योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके और वे मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने बिरहोर समुदाय के शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर दिया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बिरहोर समुदाय के लोगों से संवाद करते हुए उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह देते हुए कहा कि बीमारी की स्थिति में अस्पताल या स्वास्थ्य शिविरों में जाकर समय पर उपचार कराना चाहिए। राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि बिरहोर समुदाय को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकें और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास के लिए संचालित पीएम जनमन योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएं, जिससे लोगों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण हो सके। साथ ही उन्होंने बच्चों के लिए टीकाकरण को अनिवार्य बताते हुए सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को समय पर वैक्सीन लगवाने की अपील की।

रायपुर :

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बेहराखार में पीएम जनमन अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का किया अवलोकन

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बेहराखार में पीएम जनमन अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का किया अवलोकन

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम बेहराखार में पीएम जनमन योजना अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने यूनिट में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। मोबाइल मेडिकल यूनिट में ऑक्सीजन सिलेंडर, सीवीसी मशीन, आवश्यक दवाइयों सहित विभिन्न उपचार उपकरण उपलब्ध हैं। साथ ही इसमें डॉक्टर, नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ की टीम भी तैनात रहती है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है।

अवलोकन के उपरांत राज्यपाल ने संतोष व्यक्त किया। साथ ही अधिकारियों से कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से भ्रमण कर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए, ताकि इन समुदायों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। इस अवसर पर पद्म श्री जागेश्वर यादव, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में माओवाद पर निर्णायक विजय: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जताया आभार

रायपुर, 4 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के 31 मार्च 2026 को माओवादी आतंक से मुक्त होने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह, शहीद जवानों, बस्तर की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र, सुरक्षा बलों और बस्तर की जनता के सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

उन्होंने सर्वप्रथम देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साहसपूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट किया, जिनके मार्गदर्शन, संकल्प और सतत प्रेरणा ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध इस निर्णायक अभियान को दिशा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2015 में दंतेवाड़ा में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस संदेश को भी स्मरण किया, जिसमें उन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़ने का आह्वान करते हुए युवाओं से मानवता के दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा दी थी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रति भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें माओवादी उन्मूलन की रणनीति का प्रमुख शिल्पी बताया। उन्होंने कहा कि श्री अमित शाह ने रायपुर में 31 मार्च 2026 तक माओवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, जिसे पूरी दृढ़ता के साथ पूरा किया गया। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक संसाधन और निरंतर प्रोत्साहन मिला, साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा का उत्तर दृढ़ता से दिया जाएगा, जबकि शांति का मार्ग अपनाने वालों का स्वागत किया जाएगा।

शहीदों के बलिदान से लिखी गई बस्तर की नई कहानी: मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद जवानों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके सर्वोच्च बलिदान ने इस ऐतिहासिक सफलता की नींव रखी है। साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों के उन बहादुर जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने साहस और संकल्प के साथ अपनी जान की परवाह किए बिना माओवाद की जड़ों पर प्रहार किया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर की जनता के प्रति भी विशेष कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही इस परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने उस दौर को याद किया जब मतदान करने पर उंगली काटने की धमकियाँ दी जाती थीं, इसके बावजूद लोगों ने निर्भय होकर लोकतंत्र को मजबूत किया। यही जनविश्वास एक ऐसे नेतृत्व को स्थापित करने में निर्णायक सिद्ध हुआ, जिसने एक दशक के भीतर इस चुनौती का समाधान किया।

हिंसक माओवादी विचारधारा ने वर्षों तक अनगिनत परिवारों को पीड़ा दी - मांओं की कोख उजड़ी, बहनों का सुहाग छिना और मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, जबकि देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए हजारों जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी; यह संघर्ष केवल सुरक्षा बलों का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के आत्मबल और संकल्प का प्रतीक रहा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद माओवादी हिंसा के विरुद्ध एक निर्णायक और सुनियोजित रणनीति पर कार्य प्रारंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप देश के कई राज्य इस चुनौती से मुक्त हुए, हालांकि छत्तीसगढ़ और उसके पड़ोसी क्षेत्रों में यह समस्या बनी रही; ऐसे में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से राज्य में डबल इंजन सरकार के गठन के बाद पिछले ढाई वर्षों में सामूहिक संकल्प के बल पर इस सशस्त्र माओवादी नासूर का समूल नाश संभव हो सका।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने उन लोगों का स्वागत किया है, जिन्होंने माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताया है, और यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं बल्कि विश्वास, पुनर्वास और विकास के समन्वित प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि जनता के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने कहा कि अब बस्तर में एक नया अध्याय प्रारंभ हो चुका है - जहाँ बच्चे निर्भय होकर विद्यालय जाएंगे, माताएं और बहनें स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सकेंगी और विकास का प्रकाश हर गांव तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब कहीं रेड कॉरिडोर नहीं, हर तरफ ग्रीन कॉरिडोर है। इसी विश्वास और संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ एक उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है।

 

सिद्दी समुदाय के पहलवानों ने जीते तीन स्वर्ण और एक रजत पदक

रायपुर, 4 अप्रैल 2026/ 'प्रतिभा को किसी परिचय की जरूरत नहीं होती'- यह कहावत 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026' में सच साबित हुई, जहां कर्नाटक के 'सिद्दी समुदाय' के पहलवानों ने मैट पर अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है। उनकी यह सफलता अब सिर्फ़ पदकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय के कुश्ती के क्षेत्र में एक ताकत के तौर पर उभरने का प्रतीक है। अफ़्रीकी मूल के भारत में लगभग 50,000 सिद्दी लोग रहते हैं, जिनमें से एक-तिहाई कर्नाटक में निवास करते हैं।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में कर्नाटक के 9 पहलवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 4 सिद्दी समुदाय से थे। इन चार पहलवानों में से तीन ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि एक को रजत पदक मिला। स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवानों में मनीषा जुआवा सिद्दी (76 किग्रा), रोहन एम डोड़ामणि (ग्रीको रोमन 60 किग्रा) और प्रिंसिता पेदरू फर्नांडिस सिद्दी (68 किग्रा) शामिल हैं जबकि शालिना सेयर सिद्दी (57 किग्रा) को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

इन पहलवानों की सफलता न सिर्फ उनके संघर्ष और मेहनत की कहानी कहती है, बल्कि कुश्ती जैसे खेलो में सिद्दी समुदाय के बढ़ते वर्चस्व को भी दिखाता है। कर्नाटक के इन चारों पहलवानों का दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ट्रायल हुआ था और वहां भी ये पहले नंबर पर रहे थे।

सिद्दी समुदाय के प्रदर्शन से कर्नाटक कुश्ती टीम की कोच ममता बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं।

ममता ने कहा, ''जैसे हमारे देश में कुश्ती में हरियाणा का दबदबा है तो ठीक वैसे ही हमारे राज्य में अहलियाल क्षेत्र का कुश्ती में वर्चस्व रहता है। राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ यूथ एंड डेवलपमेंट एंड सेंटर मुख्य रूप से इन्हीं सिद्दी समुदाय के लिए है। इनके बच्चे यहीं पर ट्रेनिंग करते हैं। पिछले कुछ समय से इस समुदाय के लोगों के अंदर कुश्ती का क्रेज बढ़ा है और वे अब अपने बच्चों को कुश्ती में भेजने लगे हैं।

उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले से आने वाले पुरुष पहलवान रोहन एम. डोड़ामणि भी इसी समुदाय से आते हैं। डोड़ामणि की मां सरकारी स्कूल में खाना पकाती हैं जबकि पिता का छह साल पहले ही देहांत हो चुका है।

रोहन ने कहा, “सिद्दी समुदाय के अंदर समय-समय पर छोटे दंगल होते रहते हैं और जो इनमें जीतता है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया जाता है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में स्वर्ण जीतने से पहले मैं सीनियर नेशनल चैंपियनशिप, नेशनल गेम्स और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी भाग ले चुका हूं।''

देश में खिलाड़ियों के अंदर छिपी प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें एक बेहतर मंच देने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने मिलकर 2018 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की शुरुआत की थी। उसके बाद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शुरुआत हुई है।

साई के टैलेंट डेवलपमेंट कमेटी के सदस्य महा सिंह राव कहते हैं, '' साई और खेल मंत्रालय की तरफ से हम कम उम्र के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करते हैं ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जो सपना है कि 2036 ओलंपिक खेल भारत में हो, उस सपने को साकार करने के लिए ये सरकार की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री के अलावा खेल मंत्री, साई और हम इस सपने को साकार करने में लगे हुए हैं कि आगे आने वाले ओलंपिक खेलों में हम ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते।''

उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से आने वाली शालिना सेयर सिद्दी ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने के बाद कहा, ''हमारे समुदाय में कुश्ती को लेकर अब लोग दिलचस्पी लेने लगे हैं। मैंने अपने अंकल के कहने पर कुश्ती शुरू की थी और शुरू से ही वह मुझे ट्रेनिंग देते आ रहे हैं। मैंने इस प्रतियोगिता के लिए मेहनत तो पूरी की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और मैं स्वर्ण जीतने से चूक गई।''

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ कारवार जिले से ही आने वाली प्रिंसिता सिद्दी ने कहा, ''शुरुआत में मुझे कुश्ती में दिलचस्पी नहीं थी और मैं बहुत रोई थी। लेकिन फिर धीरे-धीरे जब हमारे समुदाय के बच्चे इसमें भाग लेने लगे तो उन्हें देखकर मैं भी प्रैक्टिस करने लगी। यहां तक पहुंचने के लिए मैं शाम-सुबह दो-दो घंटे प्रैक्टिस करती हूं। मुझे इंटरनेशनल लेवल पर मेडल लाना है और इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।''

इन पहलवानों की सफलता इस बात को सिद्ध करती है कि जब सही मंच, ट्रेनिंग और सपोर्ट मिलता है, तो दूरदराज के समुदायों से भी प्रतिभाएं शिखर तक पहुंच सकती हैं और भारत के खेल भविष्य को आकार दे सकती हैं।

 


पारदर्शी प्रबंधन और तकनीकी नवाचार से हासिल हुई सफलता

रायपुर 4 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विaष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है।

खनिज विभाग के सचिव श्री पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है।

इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है।

खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय
सुधार हुआ है।

आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।


छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी - श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

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