ईश्वर दुबे
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श्री राम नाम से गुंजायमान हुआ श्री नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर
मुख्यमंत्री ने पवित्र श्री नर्मदा कुंड के जीर्णोद्धार का किया भूमिपूजन
मुख्यमंत्री श्री हनुमान उत्सव एवं श्री राम कथा कार्यक्रम में हुए शामिल
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर के स्टेशन चौक स्थित नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर में आयोजित श्री हनुमान उत्सव एवं श्री राम कथा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त श्री हनुमान का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। बल, बुद्धि और विद्या के दाता हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि हमारे जीवन में निष्ठा, सेवा और समर्पण कैसा होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पवित्र श्री नर्मदा कुंड के जीर्णोद्धार का भूमिपूजन किया। श्री राम कथा के दौरान श्री नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर राम नाम से गुंजायमान हो उठा।
मुख्यमंत्री ने श्री नर्मदा कुंड राम जानकी मंदिर में विधि-विधान से श्री हनुमान का दर्शन और आरती पूजन किया। उन्होंने श्री हनुमान जी से छत्तीसगढ़ वासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उल्लेखनीय है कि श्री हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर 01 से 05 अप्रैल तक नर्मदा कुंड मंदिर में स्वामी श्री राजीव लोचन दास जी द्वारा श्री राम कथा का भी आयोजन किया जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय को कहा छत्तीसगढ़ प्रभु श्री राम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु श्री राम ने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताया। रामायण काल में वर्णित दंडकारण्य अबूझमाड़ क्षेत्र का इलाका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा प्रभु श्री रामलला दर्शन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम के दर्शन कराए जा रहे हैं। अभी तक लगभग 42 हजार भक्त रामलला के दर्शन कर चुके हैं। 5 हजार से अधिक बुजुर्ग विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन कर चुके हैं। तीर्थयात्रा के लिए 19 जगहों को चिन्हांकित किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभी हमने धर्मांतरण रोकने छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया है। इस कानून के अंतर्गत देश के सभी प्रदेशों से कठोर नियम बनाए गए हैं। इन कड़े प्रावधानों से निश्चित ही धर्मांतरण पर अंकुश लगेगा। गौ माता के भी संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार द्वारा सुरभि गौधाम योजना लागू की गई है। इसके तहत 29 गौधाम का शुभारंभ किया गया है। सुरभि गौधाम में गौमाता के लिए चारे और अन्य व्यवस्था के साथ ही गौपालकों को गोबर के विभिन्न उत्पाद के निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रत्येक जिले में 10 सुरभि गौधाम के साथ प्रदेश में 330 गौधाम का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में रुद्र सेना और रुद्र शक्ति के पोस्टर का विमोचन भी किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा,विधायक श्री किरण सिंहदेव और श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, नर्मदा कुंड श्री राम जानकी मंदिर के महंत श्री सुरेंद्र दास जी, श्री राम गर्ग, श्रीमती विभा अवस्थी सहित गणमान्यजन और भक्तगण उपस्थित थे।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में उत्तरप्रदेश सरकार के राज्यमंत्री जलशक्ति विभाग श्री रामकेश निषाद ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए श्री निषाद का राज्य में स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट का प्रतीक चिन्ह और बस्तर पंडुम की पुस्तिका भेंट की।
मुख्यमंत्री श्री साय को श्री निषाद ने छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के सफल आयोजन पर हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने श्री निषाद से छत्तीसगढ़ में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
मल्लखंभ प्रतियोगिता के प्रथम दिन छत्तीसगढ़ की पुरूष टीम 124.35 अंक के साथ रही विजेता
रायपुर,/खेलो इंडिया ट्राईबल गेम्स 2026 के अंतर्गत आज सरगुजा जिले के अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में डेमो खेल मल्लखंभ प्रतियोगिता की शुरुआत हुई। प्रतियोगिता में आज रोप मल्लखंभ, पोल मल्लखंभ, हैंगिंग मल्लखंभ का आयोजन हुआ। जिसमें खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। हिस्सा ले रहे 14 राज्यों की टीम में से राजस्थान, तमिलनाडु उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र झारखंड, मध्य प्रदेश,दिल्ली ,गुजरात, छत्तीसगढ़ के पुरुष टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा हुई।
आज हुई स्पर्धा में छत्तीसगढ़ की मल्लखंभ टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय खेल खेलो इंडिया एवं बीच गेम्स आदि के दोनों वर्गों में विजेता रहे। छत्तीसगढ़ ने 124.35 अंक के साथ प्रथम, महाराष्ट्र ने 118.35 अंक के साथ द्वितीय एवं झारखंड ने 86.95 अंक के साथ तृतीय स्थान हासिल किया।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना से वर्षों से कटे गांव अब विकास की मुख्यधारा में
ककनार घाटी में समावेशी विकास की नई तस्वीर उभर रही है, हर गांव जुड़ रहा है, हर जीवन बदल रहा है – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
रायपुर 2 अप्रैल 2026/बस्तर की ककनार घाटी, जो कभी वामपंथी उग्रवाद और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अलग-थलग पड़ी थी, आज विकास की नई रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है। यहां बस सेवा की शुरुआत केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि उस बदलाव का प्रतीक है, जिसने भय और अलगाव को पीछे छोड़कर विश्वास और प्रगति की राह खोली है।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत ककनार घाटी के सुदूर गांव - कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम - अब मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। यह जुड़ाव केवल रास्तों का नहीं, बल्कि अवसरों का है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के नए द्वार खुले हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा 4 अक्टूबर 2025 को शुरू की गई यह योजना आज लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का आधार बन चुकी है। एक समय था जब इन गांवों में पक्की सड़क की कल्पना भी असंभव लगती थी। दुर्गम घाटियों और खतरनाक रास्तों के बीच संकरी पगडंडियां ही जीवन का सहारा थीं। लेकिन आज उन्हीं मार्गों पर बसों की आवाजाही एक नए बस्तर की कहानी कह रही है - एक ऐसा बस्तर, जो अब पीछे नहीं, बल्कि आगे बढ़ रहा है।
योजना के लगभग छह माह पूरे होने पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना ने ककनार घाटी में बदलाव को गति दी है। दूरस्थ गांव अब नियमित रूप से मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। यह परिवर्तन हमारे समावेशी विकास और मजबूत आधारभूत संरचना के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।”
इस योजना के तहत बस सेवाएं कोंडागांव जिले के मर्दापाल से शुरू होकर घाटी के कठिन मार्गों से गुजरते हुए धरमाबेड़ा, ककनार जैसे गांवों को जोड़ते हुए जगदलपुर तक पहुंच रही हैं। दशकों से परिवहन सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों के लिए यह सेवा अब जीवन को आसान और सुलभ बना रही है। यह पहल केवल यात्रा को सरल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे और सुरक्षा की नई भावना को भी मजबूत कर रही है। वामपंथी उग्रवाद के समाप्त होने और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने से अब इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिली है। सड़क नेटवर्क के विस्तार से गांवों का अलगाव कम हुआ है और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा बाजार तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही शासकीय योजनाओं का लाभ अब सीधे घर-घर तक पहुंच रहा है, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस बदलाव को ऐतिहासिक मानते हैं। चंदेला के सरपंच श्री तुलाराम नाग के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक माओवादी प्रभाव के कारण विकास कार्य बाधित थे, लेकिन अब सड़कों के निर्माण से क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खुला है और आवश्यक सुविधाएं सुलभ हो गई हैं।
ककनार के सरपंच श्री बलीराम बघेल ने बताया कि पहले लोहण्डीगुड़ा तहसील या जिला मुख्यालय तक पहुंचना बेहद कठिन था, लेकिन अब सालभर संपर्क सुनिश्चित हो गया है।
ककनार के साप्ताहिक हाट-बाजार में लौटी रौनक इस परिवर्तन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है।
यह पहल इस बात का प्रमाण है कि जब सुशासन, सुरक्षा और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र भी प्रगति की मुख्यधारा में शामिल हो जाते हैं। ककनार घाटी आज उसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है।
Gramin Bus Yojana Connects long-isolated villages to mainstream life
Raipur,
In a significant achievement for development in Bastar, the introduction of bus services to the eco-tourism destination Kaknar Valley marks a major step in bringing left-wing extremism-affected areas into the mainstream.
Under the Mukhyamantri Gramin Bus Sewa Yojana, remote and interior villages such as Kudhur, Dharamabeda, Chandela, Kaknar, and Palam have now been successfully connected, opening new pathways for education, mobility, and economic progress. Launched on October 04, 2025, by Union Home Minister Shri Amit Shah and Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, the scheme has transformed the lives of people who for decades lived in isolation due to difficult terrain and the shadow of Maoist activity.
For the residents of these villages, even the idea of a paved road was once unimaginable. Development had long been stalled, and narrow foot trails through steep and risky terrain were the only means of movement. Today, newly constructed roads and the regular movement of buses stand as powerful symbols of change, reflecting a new and evolving Bastar.
Marking almost six months since the launch of the Mukhyamantri Gramin Bus Sewa Yojana, the Chief Minister Shri Sai said, “Since the launch of the Mukhyamantri Gramin Bus Sewa Yojana, Kaknar Valley has witnessed visible progress and improved connectivity. Remote villages are now regularly linked to the mainstream, enabling better access to education, healthcare, and livelihoods. This rapid transformation reflects the success of our efforts in strengthening infrastructure and ensuring inclusive development in Bastar.”
Under the scheme, bus services now operate on selected routes, beginning from Mardapal in Kondagaon district and passing through challenging stretches of the valley, connecting villages like Dharamabeda and Kaknar before reaching Jagdalpur. This has made travel significantly easier for people who had waited for decades for reliable connectivity.
More than just a transport facility, the bus service represents a growing sense of trust, security, and inclusion. With the weakening of left-wing extremism and increased vigilance by security forces, infrastructure development in these sensitive areas has now become possible. The expanding network of roads has reduced isolation and improved access to education, healthcare, and markets, allowing villagers to participate more actively in economic and social life. The service is also helping deliver the benefits of government schemes directly to households, strengthening the link between governance and citizens.
Local representatives underline the depth of this transformation. Chandela Sarpanch Shri Tularam Nag noted that until a few years ago, development remained stalled due to Maoist influence, but the construction of roads has now given a new direction to the region, with schools, Anganwadi centres, health facilities, and essential supplies becoming accessible.
Similarly, Kaknar Sarpanch Shri Baliram Baghel highlighted that earlier, traveling to Lohandiguda tehsil or the district headquarters was extremely difficult, whereas now year-round connectivity has been ensured. The renewed vibrancy of the weekly market in Kaknar further reflects the positive impact of improved connectivity.
This initiative stands as a clear testament to how focused governance, improved security, and infrastructure development can transform even the most remote and previously affected regions into active participants in the journey of growth and prosperity.
छत्तीसगढ़ ने पुरुषों की 4x400 मीटर रिले में रजत पदक जीता, जबकि मनीष कुमार (पुरुष 1500 मीटर) ने मेज़बान राज्य के खाते में कांस्य जोड़ा
पूर्व विश्व जूनियर चैंपियन कोमालिका बारी और कृष्णा पिंगुआ ने झारखंड के लिए रिकर्व मिक्स्ड टीम का स्वर्ण जीता
कर्नाटक 23 स्वर्ण के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर, जबकि ओडिशा (20 स्वर्ण) और झारखंड (12 स्वर्ण) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर
रायपुर, 2 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ की महिला फुटबॉल टीम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के पहले संस्करण में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए फाइनल में झारखंड को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। टीम की कप्तान किरण पिस्दा की व्यक्तिगत प्रतिभा इस जीत की सबसे बड़ी वजह रही।
मेज़बान राज्य ने जगदलपुर में ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिताओं के अंतिम चरण में पुरुषों की 4x400 मीटर रिले में रजत और पुरुषों की 1500 मीटर में कांस्य पदक भी अपने नाम किया। वहीं झारखंड के शिव कुमार सोरेन ने 100 मीटर के बाद 200 मीटर में भी स्वर्ण जीतकर शानदार डबल पूरा किया।
छत्तीसगढ़ की महिला टीम ने आक्रामक झारखंड के खिलाफ मिले एकमात्र मौके का पूरा फायदा उठाया, जब कप्तान किरण पिस्दा ने 61वें मिनट में विपक्षी डिफेंस की गलती का फायदा उठाते हुए गोल दागा। इसके बाद मेज़बान टीम ने बढ़त को अंत तक बरकरार रखते हुए खिताब अपने नाम कर लिया।
किरण ने कहा, “यह हमारे लिए बहुत खास पल है क्योंकि पहली बार इतने सारे दर्शक हमें समर्थन देने आए। मुझे बहुत खुशी है कि हम अपने घरेलू दर्शकों के सामने स्वर्ण पदक जीत सके।”
पहली बार आयोजित हो रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 3800 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। प्रतियोगिता में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती जैसे सात खेल शामिल हैं, जबकि मल्लखंभ और कबड्डी प्रदर्शन खेल हैं।
जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स के अंतिम दिन सोरेन के अलावा कर्नाटक की रीथुश्री और नागिनी ने भी अपने-अपने दूसरे स्वर्ण पदक जीते।
सोरेन, जो मंगलवार को इन खेलों के सबसे तेज धावक बने थे, ने 21.51 सेकंड के समय के साथ 200 मीटर का स्वर्ण जीता। इससे पहले रीथुश्री ने 25.87 सेकंड में 200 मीटर जीतकर 400 मीटर के बाद दूसरा स्वर्ण हासिल किया। वहीं नागिनी ने 4:43.87 सेकंड के समय के साथ 800 मीटर और 1500 मीटर दोनों में जीत दर्ज कर डबल पूरा किया।
मेज़बान छत्तीसगढ़ ने पुरुषों की 4x400 मीटर रिले में ओडिशा के बाद दूसरे स्थान पर रहकर रजत पदक जीता। ओडिशा ने 3:18.47 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण जीता, जबकि छत्तीसगढ़ ने 3:19.26 सेकंड में दौड़ पूरी की। झारखंड (3:19.62 सेकंड) को कांस्य मिला। इससे पहले मनीष कुमार ने पुरुषों की 1500 मीटर फाइनल में 4:01.50 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक जीतकर छत्तीसगढ़ की झोली भरी। इस स्पर्धा का स्वर्ण झारखंड के राहुल उरांव (4:01.18 सेकंड) ने जीता, जबकि महाराष्ट्र के कार्तिक करिहारपाल (4:01.23 सेकंड) को रजत पदक मिला।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के समापन से एक दिन पहले पदक तालिका में हलचल
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण के समापन में अब सिर्फ एक दिन शेष है और मेज़बान छत्तीसगढ़ तीन स्वर्ण, नौ रजत और छह कांस्य पदकों के साथ नौवें स्थान पर पहुंच गया है।
कर्नाटक की रीथुश्री और नागिनी के दो स्वर्ण पदक जोड़ने के साथ तालिका में शीर्ष पर काबिज़ राज्य के खाते में अब 23 स्वर्ण, आठ रजत और सात कांस्य पदक हो गए हैं।
ओडिशा 20 स्वर्ण, 13 रजत और 21 कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि झारखंड ने एथलेटिक्स में चार और तीरंदाजी में एक स्वर्ण जीतकर अपना कुल बढ़ाकर 14 स्वर्ण, सात रजत और 11 कांस्य कर लिया है।
झारखंड को तीरंदाजी में स्वर्ण पूर्व विश्व जूनियर चैंपियन कोमालिका बारी और कृष्णा पिंगुआ की जोड़ी ने दिलाया, जिन्होंने रिकर्व मिक्स्ड टीम फाइनल में ओडिशा के अर्जुन खरा और ममता ओराम को हराया।
ओडिशा ने लहराया परचम, झारखंड को दूसरा स्थान
रायपुर, 2 अप्रैल 2026/ बस्तर के हृदय स्थल जगदलपुर स्थित धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में आयोजित प्रथम श्खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्सश् की एथलेटिक्स स्पर्धाओं का गुरुवार को भव्य समापन हो गया। 30 मार्च से शुरू हुए इस चार दिवसीय खेल महाकुंभ ने देशभर की जनजातीय प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान किया, जहाँ एथलीटों ने अपने अदम्य साहस और उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन जैसे ही अंतिम दौर के मुकाबले समाप्त हुए, पदक तालिका की तस्वीर साफ हो गई। इस रोमांचक खेल आयोजन में ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों ने अपनी खेल परंपरा और श्रेष्ठता को बरकरार रखते हुए शीर्ष स्थानों पर कब्जा जमाया।
पदक तालिका के आंकड़ों पर गौर करें तो ओडिशा की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 8 स्वर्ण, 7 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ अंक तालिका में पहला स्थान हासिल किया। ओडिशा को झारखंड से कड़ी टक्कर मिली, जिसने भी 8 स्वर्ण पदक अपने नाम किए, लेकिन अन्य पदकों के समीकरण के आधार पर वह दूसरे स्थान पर रहा। वहीं, कर्नाटक की टीम 5 स्वर्ण पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रही, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र के खिलाड़ियों ने क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर रहकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। मेजबान छत्तीसगढ़ के एथलीटों ने भी घरेलू मैदान पर दर्शकों के भारी उत्साह के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और 1 स्वर्ण, 4 रजत व 1 कांस्य पदक जीतने में सफलता प्राप्त की।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स प्रतियोगिता के समापन सत्र के दौरान खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के लिए क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य रूप से वन मंत्री श्री केदार कश्यप, जिला पंचायत में खेल एवं युवा समिति के सभापति श्री बनवासी मौर्य, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक श्री सुन्दरराज पी, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा ने कार्यक्रम में शिरकत की। अतिथियों ने विजेता प्रतिभागियों को पदक पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। इस आयोजन ने न केवल जनजातीय युवाओं के खेल कौशल को निखारा है, बल्कि बस्तर की धरती पर खेल संस्कृति को एक नई दिशा भी प्रदान की है।
बस्तर की धरा पर संपन्न हुई खेलो इंडिया एथलेटिक्स स्पर्धाएं
रायपुर, 2 अप्रैल 2026/ बस्तर की पावन धरा जगदलपुर के धरमपुरा स्थित आधुनिक क्रीड़ा परिसर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत गुरुवार को एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के अंतिम दिन ट्रैक पर रफ्तार, शक्ति और अटूट संकल्प का अद्भुत संगम देखने को मिला। बीते 30 मार्च से भव्यता के साथ शुरू हुए इस खेल महाकुंभ के समापन अवसर पर देश के कोने-कोने से आए जनजातीय एथलीटों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कई रोमांचक पदक अपने नाम किए। दिन की सबसे चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में से एक, पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में नागालैंड के धावक वेडे टमेरो ने शुरू से ही अपनी लय बरकरार रखी और 32ः28.46 के शानदार समय के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उनके ठीक पीछे महाराष्ट्र के जुझारू एथलीट कमलाकर लक्ष्मण देशमुख रहे, जिन्होंने रजत पदक जीता, जबकि जम्मू-कश्मीर के हंस राज ने कांस्य पदक जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इसी स्पर्धा के महिला वर्ग में पश्चिम बंगाल की संजीता ओरांव ने अपनी सहनशक्ति का परिचय देते हुए 40ः21.18 के समय के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया, जहाँ ओडिशा की संध्या मुर्मू को रजत और मेघालय की बलारिशा थिरनियांग को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
मैदान पर रोमांच तब और बढ़ गया जब एथलेटिक्स के इस अंतिम पड़ाव पर लघु दूरी की स्पर्धाओं में धावकों ने अपनी बिजली जैसी तेजी दिखाई। पुरुषों की 200 मीटर दौड़ में झारखंड के धावक शिव कुमार सोरेन ने 21.51 सेकंड के रिकॉर्ड समय के साथ फिनिशिंग लाइन पार कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के अर्पण ताई और राजस्थान के जगदीश मीणा ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए।
महिला वर्ग की 200 मीटर स्पर्धा में कर्नाटक की ऋतुश्री ने 25.87 सेकंड की रफ्तार से स्वर्ण पदक अपने नाम कर राज्य का गौरव बढ़ाया। मध्यम दूरी की 1500 मीटर दौड़ में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहाँ महिला वर्ग में कर्नाटक की नागिनी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, वहीं पुरुष वर्ग में झारखंड के राहुल उरांव ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उल्लेखनीय है कि मेजबान छत्तीसगढ़ के मनीष कुमार ने घरेलू मैदान पर दर्शकों के भारी समर्थन के बीच तीसरा स्थान हासिल कर राज्य की झोली में कांस्य पदक डाला।
शक्ति और तकनीक के संगम वाली भाला फेंक (जैवलीन थ्रो) स्पर्धा में मध्य प्रदेश के गुलाब सिंह ने 62.80 मीटर की प्रभावशाली दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के प्रमोद हागजेर मात्र कुछ ही फासले से पीछे रहकर रजत पदक के हकदार बने। टीम वर्क और बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन करते हुए महिला 4x400 मीटर रिले दौड़ में झारखंड की आशा किरण बारला और तनीषा कुमारी की टीम ने स्वर्ण पदक जीता, वहीं पुरुषों की इसी स्पर्धा में ओडिशा की टीम ने चौंपियन बनकर अपनी धाक जमाई। मेजबान छत्तीसगढ़ की पुरुष रिले टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। एथलेटिक्स मुकाबलों के इस अंतिम दिन की अंतिम रोमांचक स्पर्धाओं में महिला लंबी कूद शामिल रही, जहाँ झारखंड की प्रीति लकड़ा ने 5.54 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। केंद्रीय खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित यह महाकुंभ न केवल पदक तालिका में उलटफेर कर रहा है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों की छिपी हुई प्रतिभाओं को एक सशक्त राष्ट्रीय मंच प्रदान कर बस्तर के खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है।
अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की बैठक सम्पन्न
रायपुर, 02 अप्रैल 2026/छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के ऐसे विस्थापित परिवार जो किन्ही कारणों बस्तर संभाग के सीमावर्ती तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश में प्रवासित है, ऐसे परिवारों के पुनर्वास की कार्ययोजना बनायी जा रही है। मंत्रालय महानदी भवन में आज अपर मुख्य सचिव गृह श्री मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में पुनर्वास हेतु गठित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के संबंध में कार्ययोजना तैयार करने विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में बताया गया कि जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के लोग तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश राज्य में प्रवासित हो गए है। इसके लिए प्रवासित परिवारों की ओर से राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में याचिका दायर किया गया है। इसके तहत माननीय आयोग द्वारा एक माह के भीतर सर्वे कर प्रवासित परिवारों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके परिपालन में बस्तर संभाग के संभागायुक्त द्वारा एक समयबद्ध कार्यक्रम के तहत कलेक्टर दंतेवाड़ा, सुकमा एवं जिला बीजापुर को प्रवासित परिवारों के सर्वे किया जाकर 15 दिन के भीतर प्रतिवेदन प्रेषित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वे अनुसार जिला दंतेवाड़ा से तेलंगाना प्रदेश के 60 ग्राम में 618 परिवार के 2654 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से तेलंगाना प्रदेश के 293 ग्राम में 2733 परिवार के 12026 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से तेलंगाना प्रदेश के 114 ग्राम में 994 परिवार के 5029 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से तेलंगाना राज्य के 467 ग्राम में 4345 परिवार के 19709 व्यक्ति प्रवासित है।
इसी तरह जिला दंतेवाड़ा से आंध्रप्रदेश के 25 ग्राम में 125 परिवार के 568 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से आंध्रप्रदेश के 155 ग्राम में 2462 परिवार के 10787 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से आंध्रप्रदेश के 04 ग्राम में 07 परिवार के 34 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह से छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से आंध्रप्रदेश राज्य के 184 ग्राम में 2594 परिवार के 11389 व्यक्ति प्रवासित है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के 667 ग्राम से तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश राज्य के 651 ग्राम में 6939 परिवार के 31098 व्यक्ति प्रवासित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बस्तर संभाग श्री डोमन सिंह एवं पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज श्री सुन्दरराज से चर्चा कर अन्य प्रांतों में प्रवासित परिवारों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए एक बार और सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर लें।
अपर मुख्य सचिव गृह श्री पिंगुआ ने कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों से अन्य प्रांतों में प्रवासित लोगों के बारे में उनके मूल ग्राम एवं निवास स्थान से आवश्यक जानकारी तैयार कर लें। जिससे पुनर्वास योजना बनाने आसानी होगी। इसी तरह से पुनर्वास योजना बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित दिए गए है कि वे शीघ्र ही अपने-अपने विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त कर दें, जिससे शीघ्र पुनर्वास योजना बनाने में आसानी होगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंस में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, आईजी बस्तर श्री सुन्दरराज, कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह सहित कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा शामिल हुए। इसी तरह से बैठक में सामान्य प्रशासन, वित्त विभाग, राजस्व, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, वाणिज्य एवं उद्योग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
रायपुर, 02 मार्च 2026/ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक स्टेडियम कोटा में खेले गए महिला फुटबॉल के फाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने मजबूत खेल का प्रदर्शन किया। पहले हाफ की समाप्ति तक दोनों टीमें 0-0 की बराबरी पर रहीं। दोनों पक्षों के खिलाड़ियों ने शानदार रक्षा और आक्रमण का प्रदर्शन करते हुए मुकाबले को बेहद रोमांचक बनाए रखा।
दूसरे हाफ में छत्तीसगढ़ की टीम ने आक्रामक खेल दिखाते हुए छत्तीसगढ़ की कप्तान किरण पिस्दा ने एक महत्वपूर्ण गोल किया और 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद टीम ने अपनी इस बढ़त को अंत तक बनाए रखा। अंततः छत्तीसगढ़ ने झारखंड को 1-0 से हराकर महिला फुटबॉल प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही छत्तीसगढ़ की टीम ने शानदार खेल कौशल और टीमवर्क का परिचय दिया। यह मुकाबला पूरे समय दर्शकों के लिए रोमांच से भरपूर रहा और खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, संचालक खेल एवं युवा कल्याण श्रीमती तनुजा सलाम, खेल विभाग के अधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में खिलाड़ी तथा खेल प्रेमी उपस्थित रहे।