ईश्वर दुबे
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Raipur April 28, 2026/ In a find that adds depth to Central India’s documented intellectual history, a set of 326-year-old handwritten manuscripts has been identified and digitised at the Sadhguru Kabir Ashram in Damakheda, located in Simga block of Chhattisgarh's Balodabazaar-Bhatapara district. The discovery has emerged from the ongoing Gyan Bharatam National Manuscript Survey, an initiative aimed at mapping the presence of manuscripts across India and laying the groundwork for their systematic preservation, research, and digitisation.
The exercise, carried out under the guidance of District Collector Shri Kuldeep Sharma, has brought into focus a body of work that dates back to 1700 AD. Beyond their religious significance, the manuscripts reflect a sustained tradition of knowledge writing in the region, preserved across generations.
Four ancient texts were documented at the site. These include Anurag Sagar, Ambu Sagar, Deepak Sagar, and Gyan Prakash. All four works, written in Devanagari and attributed to the ninth Acharya Pragat Naam Saheb, stand as records of the region’s literary tradition. The manuscripts have been digitised using the “Gyan Bharatam” mobile application in the presence of the village sarpanch.
Meanwhile, the survey has also led to another important archival recovery. At the Sonakhan Museum, officials documented a manuscript dated 10 December 1857. It records the execution order issued by the British administration against Shaheed Veer Narayan Singh, recognised as Chhattisgarh’s first freedom fighter. The document serves as direct evidence of his martyrdom during the early phase of the freedom struggle.
Collector Shri Kuldeep Sharma has urged residents to come forward if they possess handwritten manuscripts, copper plates, or palm-leaf records. He clarified that ownership of original documents will remain with individuals or institutions, and only digital copies will be created for preservation. The “Gyan Bharatam” initiative aims to preserve India’s intellectual and cultural heritage for future generations, and he has appealed to citizens to take part in the campaign.
रायपुर, 28 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखण्ड-अम्बागढ़ चौकी की रेगाकठेरा जलाशय जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 2 करोड़ 7 लाख 82 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। प्रस्तावित कार्यों के पूर्ण होने के उपरांत रूपांकित सिंचाई क्षमता 80 हेक्टेयर के विरुद्ध 60 हेक्टेयर की हो रही कमी की पूर्ति सहित पूर्ण रूपांकित क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग रायपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
रायपुर, 28 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा, बलरामपुर रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड-बलरामपुर जलाशय (बांध) निर्माण कार्य के लिए 6 करोड़ 33 लाख 89 हजार रुपये की राशि स्वीकृत किये गये हैं। योजना के निर्माण से 150 हेक्टेयर में खरीफ और 50 हेक्टेयर में रबी सहित कुल 200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।
ब्रेहबेड़ा की नन्हीं बच्ची की सफल हार्ट सर्जरी, अबूझमाड़ से रायपुर तक पहुंची उम्मीद की धड़कन
रायपुर, 25 अप्रैल 2026: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने नारायणपुर के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा को नया जीवन दिया है। जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त पारूल की रायपुर के श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है।‘प्रोजेक्ट धड़कन’ अब नारायणपुर जिले में योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है।
थकान से जूझती थी नन्हीं पारूल
अबूझमाड़ अंचल के ब्रेहबेड़ा गांव की पारूल कुछ समय पहले तक जल्दी थक जाती थी और सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को उसकी गंभीर बीमारी का पता ही नहीं था।
फरवरी 2026 में शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट धड़कन’
नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए फरवरी 2026 में ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती पहचान करना है। यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित थीं।
3000 बच्चों की स्क्रीनिंग, तीन में मिली बीमारी
अभियान के पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर 3000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की। तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण मिले, जिनमें पारूल भी शामिल थी। जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत इलाज की व्यवस्था की। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया।
10 अप्रैल को हुई सफल सर्जरी
रायपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद पारूल के हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि की। 10 अप्रैल 2026 को उसकी सफल हार्ट सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में देखभाल हुई। आज पारूल स्वस्थ है, खेल रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है।
मील का पत्थर साबित हो रही पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’
कलेक्टर नारायणपुर ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ का उद्देश्य सिर्फ बीमारी की पहचान नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी।
बदलाव की कहानी
पारूल की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जहां जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है
रायपुर, 28 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत वनांचल के उन हिस्सों तक डॉक्टर और दवाइयां पहुँच रही हैं, जहाँ पहुँचना कभी नामुमकिन सा लगता था। यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर की पहाड़ियों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवन का नया उजाला बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान आज सुकमा के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है।
दहलीज पर डॉक्टर- घर-घर जांच और उपचार
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पहुँच है। स्वास्थ्य कर्मी अब केवल अस्पतालों में मरीजों का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि खुद पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुँच रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों की मौके पर जांच कर रहे हैं। जीवनशैली बीमारियां, बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की पहचान कर उपचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
संकल्प की शक्ति- 310 किलोमीटर का जीवन सफर
हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुँचाने की घटना स्वास्थ्य विभाग के समर्पण का जीवंत उदाहरण है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम से होते हुए सुकमा जिला अस्पताल पहुँचाया। 310 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा केवल एक रेफरल नहीं था, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग, समय पर निर्णय और मजबूत फॉलो-अप का परिणाम था, जिसने एक अनमोल जीवन बचा लिया।
आयुष्मान भारत- आर्थिक बेड़ियों से आजादी
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के अनुसार आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 5 लाख रूपए तक का मुफ्त इलाज अब ग्रामीणों को इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, ताकि इलाज में एक क्षण की भी देरी न हो।
आयुर्वेद और आधुनिकता का संगम
छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र औषधीय गुणों का खजाना है। मुख्यमंत्री ने श्री साय ने पद्मश्री हेमचंद मांझी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक आयुर्वेद से कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। राज्य सरकार अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ इन प्राकृतिक संसाधनों को भी बढ़ावा दे रही है।
जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव
अभियान के अंतर्गत केवल गंभीर रोगों का ही नहीं, बल्कि सामान्य विकारों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है कोंटा क्षेत्र के 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण और मोतियाबिंद का परामर्श, अस्थमा और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित कर उपचार किया गया।
पोटकपल्ली और मरईगुड़ा जैसे अंदरूनी इलाकों से आती सफलता की ये कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी सेवा भाव से जुटते हैं, तो भूगोल की बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।
Raipur,
Chief Secretary Shri Vikas Sheel chaired a meeting of the Steering Committee constituted for the Chhattisgarh State Climate Change Action Plan, held at Mahanadi Bhawan on April 27. He directed officials to prepare Gram Panchayat-wise climate action plans to make rural areas of Chhattisgarh resilient to climate change. He also asked departments to propose effective utilisation of available CSR funds for climate-related programmes in the state.
Discussions focused on the functioning of the Chhattisgarh State Climate Change Centre, the implementation of climate programmes across the state, the formation of the State Climate Change Authority, and the execution of carbon credit-based initiatives. Departmental secretaries also reviewed detailed strategies for implementing sector-wise climate action plans.
Additional Chief Secretary, Forest and Climate Change Department, Smt. Richa Sharma presented an overview of climate change, its major causes, and the adverse effects already being observed in Chhattisgarh. Senior forest officials, including PCCF Shri Srinivas Rao and APCCF Shri Sunil Mishra, were present.
Chhattisgarh Ranked First in India in Tree Cover Growth
Officials of the State Climate Change Centre informed that several climate-focused initiatives are underway, with large-scale plantation drives being a key component. Under the 'Ek Ped Maa Ke Naam' campaign, nearly 7 crore saplings have been planted. Under the Kisan Vriksh Mitra Yojana, 3.68 crore saplings have been planted. According to ISFR 2025, Chhattisgarh recorded the highest increase in forest and tree cover in the country, adding 683 square kilometres, securing the top national rank. Officials said the public is encouraged to adopt electric vehicles, while solar pumps are being distributed to farmers to promote the use of clean energy.
Officials informed that the state is actively promoting organic farming. During 2025–26, organic cultivation was undertaken on around 55,050 hectares of land. More than 300 dams in the state have undergone hydrological planning, while sedimentation surveys of 24 major and medium reservoirs have already been completed. Officials also shared suggestions for establishing a dedicated Climate Change Knowledge Centre in the state.
Representatives from the departments of Agriculture and Farmers Welfare, Forest and Climate Change, Water Resources, Urban Administration, Transport, Commerce and Industry, Minerals, Energy, Health and Family Welfare, Revenue and Disaster Management, Women and Child Development, and Panchayat & Rural Development presented departmental updates on implementation of climate change action plan.
Secretary, Panchayat and Rural Development Department, Smt. Niharika Barik Singh; Principal Secretary, Law and Legislative Affairs Department, Smt. Sushma Sawant; Principal Secretary, Agriculture and Farmers Welfare Department, Smt. Shahla Nigar; Secretary, Mineral Resources Department and Secretary to the Chief Minister, Shri P. Dayanand; Secretary, Urban Administration and Development Department and Secretary to the Chief Minister, Shri Basavaraju S.; Secretary, Commerce and Industry Department, Shri Rajat Kumar; Secretary, Energy Department, Dr. Rohit Yadav; Secretary, Transport Department, Shri S. Prakash; Secretary, Housing and Environment Department, Shri Ankit Anand; Special Secretary, Revenue and Disaster Management Department, Ms. Iffat Ara; along with officials from the State Planning Commission, NABARD, Centre for Environment Education, Indian Institute of Science, the Agrometeorology Department, Indira Gandhi Krishi Vishwavidyalaya, and various departments of the State Government were present.
रायपुर, ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने अपने सामूहिक प्रयास, मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर ऐसी सफलता की कहानी रची है, जो न केवल आर्थिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएँ यदि अवसर और सहयोग प्राप्त करें, तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकती हैं। धमतरी जिले के छोटे से ग्राम नारी में आज आत्मनिर्भरता, परंपरा और नवाचार का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कभी सीमित संसाधनों और अवसरों वाला यह गाँव अब ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।
परंपरा से जुड़ी नई शुरुआत
नारी गाँव में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी, लेकिन पड़ोसी राज्य ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस क्षेत्र में कदम रखा। संबलपुरी साड़ियाँ अपनी विशेष इकत डिज़ाइन और आकर्षक रंगों के लिए जानी जाती हैं, जिन्हें बनाने के लिए उच्च कौशल और धैर्य की आवश्यकता होती है।
सरकार का मजबूत सहयोग
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समिति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत नियमित रूप से धागा प्रदाय किया जा रहा है, जिससे बुनकरों को नियमित रोजगार तथा समितियों को सुचारु संचालन हेतु सेवा प्रभार के रूप मे आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही नवीन बुनाई प्रशिक्षण तथा बुनकरों को नवीन करघे वितरण से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इस सहयोग से समिति आर्थिक रूप से सशक्त हुई है तथा बाजार मांग के अनुरूप वस्त्र तैयार करने मे सक्षम हुई है।
बढ़ता बाजार और आय
आज ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ग्राम नारी द्वारा तैयार की गई साड़ियों की बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के बाजारों में होती है। वर्तमान मे समिति द्वारा माह मे 300-400 साड़ियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समिति का मासिक कारोबार लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जो ग्रामीण स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।
महिलाओं का सशक्तिकरण
इस पहल ने न केवल आय के स्रोत को बढ़ाया है बल्कि, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दी है तथा सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित की है। जो महिलाएँ पहले इस कार्य से अनभिज्ञ थीं, वे आज कुशल बुनकर बन चुकी हैं और आत्मविश्वास के साथ उत्पादन में योगदान दे रही हैं। पूर्व मे शासकीय वस्त्र उत्पादन से जो महिलाएं प्रतिदिन 300-350 रुपये कमाती थी, वे आज 550-600 रुपये काम रही है। भविष्य मे अतिरिक्त कौशल उन्नयन प्रशिक्षण तथा दक्षता से वे 1000-1200 रुपये प्रतिदिन कमाने मे सक्षम हो सकेंगी।
भविष्य की दिशा
ग्राम नारी की यह सहकारी समिति आज आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रही है। यदि इसे आगे ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुँच का समर्थन मिले, तो यह और भी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। यह कहानी दर्शाती है कि जब सरकारी सहयोग और समुदाय की मेहनत साथ आती है, तो छोटे गाँव भी सफलता की बड़ी मिसाल बन सकते हैं।
Chhattisgarh is not only the “Rice Bowl” but also a land of service, dedication, and faith – Chief Minister Shri Sai
Raipur,
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai attended the nine-day Shri Ram Katha at Ram Milenge Ashram, Tendua Dham, Kuriyari, located in Shivrinarayan of Janjgir-Champa district. Accompanied by his wife Smt. Kaushalya Sai, he performed rituals and prayers, wishing for the happiness, prosperity, and well-being of the people of the state. He also received blessings from Padma Vibhushan awardee Jagadguru Rambhadracharya Maharaj.
In his address, Chief Minister Shri Sai said that the sacred land of Chhattisgarh has been blessed by the presence of Lord Shri Ram. Referring to Lord Ram’s exile period and the deep devotion of Mata Shabari, he highlighted the region’s rich tradition of faith, dedication, and belief. He noted that Tendua Dham is emerging as a major center of religious and cultural awakening, where thousands of devotees are gathering to listen to Shri Ram Katha.
Describing the occasion as highly fortunate, he said receiving blessings from multiple saints on one stage was a unique experience. He expressed gratitude to the ashram management for inaugurating several religious and cultural facilities, including Harivansh Aushadhalaya and Panchakarma Center, Shri Ram-Janaki Mandapam, Harivansh Vedic School, Maa Durga Gau Mandir, and Hanumat Entrance Gate.
The Chief Minister stated that Chhattisgarh, while known as the “Rice Bowl,” is equally a land of service, dedication, and faith. He recalled that during the construction of the Shri Ram Temple in Ayodhya, Chhattisgarh contributed 11 truckloads of rice and sent a team of doctors, reflecting the deep devotion of its people. He noted that after nearly 500 years, Lord Shri Ram is now enshrined in a grand temple, symbolizing the nation’s cultural unity and pride. Through the Shri Ramlala Darshan Yojana, thousands of devotees are benefiting from visits to Ayodhya Dham.
Chief Minister Shri Sai further said that under the leadership of Prime Minister Shri Narendra Modi, the guidance of Union Home Minister Shri Amit Shah, and the courage of security forces, Naxalism has been eliminated from the state, with peace, development, and social harmony now being prioritized. He added that “Chhattisgarhiya Sable Badiya” reflects the true identity of the state’s culture and values.
On this occasion, various religious and cultural projects were inaugurated in the presence of Param Pujya Vasudevanand Saraswati Maharaj, Kinnar Akhada head Maa Tina, and several other saints.
Dr. Ashok Harivansh, head of Raghav Seva Samiti, informed that the site is located in Shivrinarayan, believed to be the birthplace of Mata Shabari, where a grand Shri Ram Temple is being constructed in Kalinga architectural style. The ashram runs multiple social and religious initiatives, including a dispensary, Vedic school, Gau Mandir, Panchmukhi Hanuman Temple, Gita Vatika, Shabari Rasoi, and mass marriage programs for underprivileged girls. Special days are also being organized for different groups, including specially abled, blood donors, leprosy patients, and meritorious students.
The event was attended by MP Smt. Kamlesh Jangde, Mahant Shri Ramsundar Das, other public representatives, officials, and a large number of devotees.
परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाई, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा
एक किसान की सफलता बनी प्रेरणा, गांव के अन्य किसान भी बढ़ा रहे कदम
रायपुर,/ परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।
राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान श्री ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
श्री पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।
फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद श्री पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
जलवायु परिवर्तन कार्य योजना हेतु गठित स्टियरिंग समिति की बैठक सम्पन्न
रायपुर, 27 अप्रैल 2026/मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ श्री श्रीनिवास राव, एपीसीसीएफ श्री सुनील मिश्रा शामिल हुए।
वृक्ष-आवरण में देश में प्रथम स्थान पर रहा छत्तीसगढ
छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।
बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।