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धमतरी के विशाल परिवार के लिए बनी नई सुबह, बकाया मुक्त जीवन की ओर बढ़ता कदम

​रायपुर, सितंबर 2026/ ​राज्य शासन की जनकल्याणकारी नीतियां किस प्रकार जमीनी स्तर पर आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं, इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल धमतरी जिले में देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित सेवा संकल्प अभियान के तहत लागू ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026’ से राज्य भर के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर एवं बकाया बिजली बिल से परेशान परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। राज्य सरकार की इस संवेदनशील पहल का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को बढ़ते विद्युत बकाया के बोझ से मुक्त कर उन्हें पुनः नियमित भुगतान की मुख्यधारा में जोड़ना है।
​धमतरी निवासी श्री बी. एस. विशाल के परिवार के लिए भी बढ़ता हुआ बिजली बिल लंबे समय से एक बड़ी मानसिक और आर्थिक चिंता का कारण बना हुआ था। सीमित पारिवारिक आय के कारण समय पर बिल का भुगतान संभव नहीं हो पा रहा था, जिससे बकाया राशि में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। इसी दौरान जब परिवार को राज्य सरकार की इस जनहितकारी समाधान योजना की जानकारी मिली, तो उनके पुत्र श्री डेनियल विशाल ने तत्परता दिखाते हुए आवेदन प्रक्रिया पूरी की। विभागीय सहयोग और सरल व्यवस्था के चलते विशाल परिवार को शीघ्र ही योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिल गया।
​योजना के तहत परिवार को बकाया मूल राशि में पर्याप्त छूट के साथ-साथ अधिभार यानी सरचार्ज की शत-प्रतिशत माफी मिली। इसके साथ ही शेष राशि को आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलने से विशाल परिवार पर से आर्थिक तनाव का बोझ हमेशा के लिए समाप्त हो गया। अब वे पुनः नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करने की स्थिति में आ गए हैं। योजना का लाभ मिलने पर हितग्राही श्री डेनियल विशाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया और इस योजना को आम जनता के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
​धमतरी जिले में भी इस योजना की प्रगति काफी उल्लेखनीय रही है। जिले में अब तक 4,652 पात्र हितग्राहियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 4,115 उपभोक्ता ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं और 537 उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से बकाया मुक्ति का लाभ प्रदान किया जा चुका है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि योजना तेजी से आम जनता तक पहुंच रही है और लोगों को वास्तविक राहत प्रदान कर रही है।
​इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू तथा कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को विशेष राहत दी जा रही है। जहां गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को बकाया मूल राशि पर 75 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है, वहीं घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत तक की राहत दी जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी पात्र श्रेणियों के लिए सरचार्ज पूरी तरह माफ किया जा रहा है। उपभोक्ता मात्र 10 प्रतिशत की न्यूनतम राशि जमा कर शेष बकाया को निर्धारित अवधि में आसान किस्तों में चुका सकते हैं।
​उपभोक्ताओं के व्यापक हित और उत्साह को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने योजना की अवधि को बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दिया है। विद्युत विभाग द्वारा लगातार शिविरों और जागरूकता अभियानों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना न केवल आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि लोगों को एक नई शुरुआत का अवसर देते हुए राज्य सरकार की पारदर्शी, सुगम और संवेदनशील सुशासन की प्रतिबद्धता को पूरी सार्थकता के साथ दर्शा रही है।

 

उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक पशुपालन से बदली परदेशी की किस्मत

अब सालाना कमाई 10 लाख रुपए पार

रायपुर, सितंबर 2026/सेवा, संकल्प और समर्पण जब शासकीय योजनाओं से जुड़ते हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी जाती है। कुछ वर्ष पहले तक केवल 8 से 10 देशी गायों के सहारे प्रतिदिन महज 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन करने वाले सारंगढ़ तहसील के ग्राम खुड़डेना निवासी किसान परदेशी लाल चंद्रा आज एक सफल और समृद्ध डेयरी उद्यमी बनकर उभरे हैं। शुरुआती दिनों में कम दूध उत्पादन और पशुओं की अचानक होने वाली बीमारियों या मृत्यु से परिवार को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, जिसके कारण उनकी आमदनी भी बेहद सीमित थी। ऐसे मुश्किल समय में राज्य सरकार का राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम उनके लिए वरदान साबित हुआ। पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने अपनी गायों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए नस्ल सुधार की शुरुआत की, जिसके सुखद परिणामस्वरूप आज उनके पास उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली एचएफ (Holstein Friesian) क्रॉसब्रीड गायें तैयार हो चुकी हैं।
​वर्तमान में परदेशी लाल चंद्रा के पास 6 उन्नत एचएफ क्रॉसब्रीड गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 65 से 70 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध को वे स्थानीय निजी होटलों और उपभोक्ताओं को 40 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं, जिससे उन्हें रोजाना लगभग 2,600 से 2,800 रुपए की आमदनी होती है। इस तरह दूध बिक्री से उनकी मासिक आय 78,000 से 84,000 रुपए और वार्षिक आय बढ़कर 9.36 लाख से 10.08 लाख रुपए तक पहुँच चुकी है। जो पशुपालन कभी परिवार के लिए केवल एक पूरक आय का जरिया था, आज वही उनकी मुख्य आजीविका और आर्थिक मजबूती का ठोस आधार बन गया है।
​भविष्य की आय को सुरक्षित करने के लिए उनके पास वर्तमान में 2 एचएफ क्रॉस, 2 जर्सी क्रॉस और 2 साहीवाल क्रॉस की कुल 6 उन्नत बछिया तैयार हो रही हैं, जो आने वाले दिनों में दूध उत्पादन और आय को और बढ़ाने का आधार बनेंगी। इसके साथ ही, पशुपालन के जोखिमों से सुरक्षा के लिए उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अपने पशुओं का 60,000 रुपए प्रति पशु की दर से तीन वर्षों का बीमा कराया है, जिसके लिए मात्र 585 रुपए प्रति पशु का प्रीमियम निर्धारित है। उन्नत मादा वत्स पालन योजना के अंतर्गत भी उनका चयन किया गया है, जिसके तहत बछियों के बेहतर पोषण के लिए उन्हें 19,500 रुपए मूल्य का संतुलित पशु आहार मिल रहा है, जिसमें हितग्राही अंशदान केवल 4,500 रुपए है।
​परदेशी लाल ने अपनी आय को केवल दूध बिक्री तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि पशुओं से प्राप्त गोबर से जैविक खाद बनाकर स्थानीय किसानों को बेच रहे हैं। इससे उन्हें न केवल अतिरिक्त कमाई हो रही है, बल्कि कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कम करने में भी मदद मिल रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई परदेशी लाल चंद्रा की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ सही हितग्राही तक पहुँचता है, तो पारंपरिक व्यवसाय भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बन सकता है।

 

‘सक्षम योजना’ से धमतरी की सफीना बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

रायपुर,  सितंबर 2026/ ​हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो तंगहाली की बेड़ियों को तोड़कर सफलता का नया इतिहास रचा जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है धमतरी जिले के मगरलोड विकासखण्ड स्थित सुदूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली श्रीमती सफीना बानो ने। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सामने आई सफीना की कहानी केवल संघर्ष की दास्तान नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों को हराकर आत्मनिर्भर बनने की एक जीवंत मिसाल है।

​जब थम सी गई थी जिंदगी

​पति द्वारा परित्यक्त किए जाने के बाद सफीना के सामने जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। बुजुर्ग माँ की देखभाल, मासूम बच्ची का पालन-पोषण और घर चलाने का खर्च—सब कुछ अकेले उनके कंधों पर आ गया। न रोजगार का कोई जरिया था और न ही कोई पैतृक संपत्ति। आर्थिक तंगी से घिरीं सफीना को एक समय लगा कि उनकी जिंदगी अब यहीं ठहर गई है।
​दिशा बदलने वाला 'सक्षम' सहारा
​घने अंधेरे के बीच उम्मीद की किरण बनकर आईं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर पर्यवेक्षक। सफीना ने उनसे अपना दर्द साझा किया। पर्यवेक्षक ने सफीना को ढांढस बंधाया और विभाग की ‘सक्षम योजना’ की जानकारी दी। सफीना के भीतर आगे बढ़ने का जज्बा देखकर उन्होंने खुद घर पहुँचकर 2 लाख रुपये के स्वरोजगार ऋण के लिए आवेदन करवाया।
​दिसंबर 2025 में ऋण स्वीकृत हुआ और यह राशि सफीना के लिए सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के सपनों की पहली उड़ान साबित हुई।

छोटे कदम से बड़ा मुकाम: मुर्गी पालन से ईंट-भट्ठा तक

​ऋण राशि मिलते ही सफीना ने मुर्गी और खरगोश पालन से अपना छोटा-सा व्यवसाय शुरू किया। उनकी दिन-रात की मेहनत और लगन रंग लाई। देखते ही देखते फार्म में सैकड़ों मुर्गियाँ हो गईं और बिक्री से अच्छी आय होने लगी।
​सफीना यहीं नहीं रुकीं; अपनी व्यावसायिक समझ को बढ़ाते हुए उन्होंने ईंट-भट्ठा निर्माण का काम भी शुरू किया। आज वे अपनी माँ की दवाइयों, घर के खर्च और बच्ची की पढ़ाई को बिना किसी परेशानी के पूरा कर रही हैं।

​"पहले बेचारी कहते थे, आज काम माँगने आते हैं"

​आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ-साथ सफीना के आत्मविश्वास में जो बदलाव आया, वह सबसे बड़ा परिवर्तन है। अपनी इस यात्रा पर भावुक होते हुए सफीना कहती हैं कि दीदी, पहले लोग मुझे बेचारी कहते थे, आज वही लोग मुझसे काम माँगने आते हैं।

​समाज के लिए नई मिसाल

​सफीना की यह सफलता दर्शाती है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति को सरकारी योजनाओं का सही संबल और मार्गदर्शन मिलता है, तो कोई भी राह असंभव नहीं रहती। कभी परिस्थितियों के आगे बेबस दिखने वाली महिला आज दूसरों को रोजगार दे रही है। उनकी यह प्रेरक यात्रा प्रदेश की हज़ारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही है।

सोनिबाई की संघर्ष और सफलता की कहानी

​रायपुर,सितंबर 2026/प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में विकास की बयार हर जरूरतमंद के द्वार तक पहुँच रही है। राज्य सरकार की सुशासन नीति से दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के ऐसे हज़ारों परिवारों के सपने साकार हो रहे हैं, जो वर्षों से एक पक्की छत की आस में संघर्षरत थे। ऐसी ही एक सुखद और जीवन बदलने वाली कहानी नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत भरंडा की रहने वाली श्रीमती सोनिबाई पति श्री संनु राम की है।
​सोनिबाई और उनका परिवार सालों से कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर था। बारिश के दिनों में टपकती छत, कड़कड़ाती ठंड में ठिठुरती रातें और तेज आंधियों का डर—हर मौसम उनके लिए एक नया इंतहान लेकर आता था। कच्चे घरौंदे में असुरक्षा और परेशानियों के बीच बीतते हर दिन के साथ एक सुरक्षित और पक्के मकान की आस धुंधली पड़ती जा रही थी। ​लेकिन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सोनिबाई के परिवार के लिए एक नया सवेरा और वरदान बनकर आई। योजना के तहत स्वीकृत राशि और प्रशासन की सहज प्रक्रिया से उनका पक्के घर का सपना हकीकत में बदल गया। जब घर की पक्की नींव पड़ी और छत ढली, तो केवल एक मकान ही नहीं खड़ा हुआ, बल्कि उस परिवार का आत्मसम्मान और नए कल का भरोसा भी सुदृढ़ हुआ।
​अपनी खुशी और अनुभव साझा करते हुए श्रीमती सोनिबाई कहती हैं कि पुराने दिनों की तकलीफें याद कर आज भी मन सिहर उठता है। टपकती छत और कड़कड़ाती ठंड में नींद उड़ जाती थी। अब पक्का मकान मिलने से जिंदगी से असुरक्षा का साया हमेशा के लिए हट गया है। यह योजना हमारे जैसे गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचे। ग्राम भरंडा की सोनिबाई की यह सफलता की कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि राज्य सरकार के उस अटूट संकल्प की प्रतीक है, जो हर नागरिक को सम्मानजनक, सुरक्षित और खुशहाल जीवन देने के लिए कटिबद्ध है।

 

2 वर्ष 8 माह में 7,650 संपत्तियों का विक्रय, वार्षिक औसत में 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पारदर्शी, सरल और हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था को मिली नई गति

1,609.18 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विक्रय, ओटीएस-2 से 1,584 संपत्तियों का हुआ निराकरण

• श्री सुनील त्रिपाठी
सहायक संचालक, जनसंपर्क

रायपुर, 21 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों में गति, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।

मंडल के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मात्र 2 वर्ष 8 माह की अवधि में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 2,869 संपत्ति रहा है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में मंडल की विक्रय क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों की अवधि में मंडल द्वारा कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया गया था। इस दौरान वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 की वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत बढ़कर लगभग 2,869 संपत्ति हो गया है। अर्थात पिछले पांच वर्षों की तुलना में वर्तमान अवधि में मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

केवल संख्या नहीं, विक्रय मूल्य में भी बड़ी छलांग
मंडल की उपलब्धि केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल द्वारा कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 603 करोड़ रुपये रहा। वहीं वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य 272.44 करोड़ रुपये रहा। वर्तमान अवधि में यह औसत बढ़कर लगभग 603 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य में पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

ये आंकड़े बताते हैं कि मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के प्रबंधन और विक्रय को लेकर अपनाई गई कार्ययोजना प्रभावी रही है। संपत्तियों के बेहतर उपयोग, मांग के अनुरूप विक्रय व्यवस्था, हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने तथा लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देने से विक्रय गतिविधियों में तेजी आई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास और सुशासन पर जोर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ शासन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो, इस दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में सामने आई यह वृद्धि इसी व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग से एक ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।

 

अपने नाम संपत्ति होने से बढ़ा आत्मविश्वास, बची राशि से परिवार की आर्थिक योजना को मिली मजबूती

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत रचना सोनी ने साझा किया अनुभव, महिलाओं के लिए शुल्क रियायत को बताया उपयोगी पहल

रायपुर, 21 सितम्बर 2026/ शासन की जनहितकारी नीतियों का लाभ जब किसी परिवार की आर्थिक योजना को आसान बनाता है, तो उसका प्रभाव केवल कागजों पर नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य में भी दिखाई देता है। बिलासपुर की श्रीमती रचना सोनी के लिए महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत ऐसा ही एक अवसर लेकर आई। अपने नाम संपत्ति का पंजीयन कराने पर उन्हें लगभग 35 हजार रुपये की बचत हुई। रचना सोनी ने बताया कि शुल्क में मिली इस राहत से संपत्ति पंजीयन का खर्च कम हुआ और परिवार के लिए आर्थिक रूप से भी सहूलियत मिली।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप, वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत दी जा रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन पहलों के जमीनी प्रभाव, उनके अनुभव और सुझावों को जान रहा है।

रजिस्ट्री का खर्च घटा, परिवार के लिए बनी आर्थिक राहत

श्रीमती रचना सोनी ने बताया कि संपत्ति अपने नाम कराने के दौरान पंजीयन शुल्क में मिली 50 प्रतिशत की छूट से उन्हें 35 हजार रुपये की बचत हुई। उनके अनुसार, संपत्ति खरीदने या पंजीयन कराने में होने वाले खर्च के बीच यह बचत परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत है। इससे एक ओर पंजीयन का आर्थिक बोझ कम हुआ, वहीं दूसरी ओर बची राशि का उपयोग परिवार की अन्य आवश्यकताओं और भविष्य की आर्थिक योजना में किया जा सकता है।

रचना सोनी के लिए यह सुविधा केवल शुल्क में कमी तक सीमित नहीं रही। अपने नाम संपत्ति का पंजीयन होने से उन्हें संपत्ति पर अपने स्वामित्व का अनुभव मिला और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी को भी मजबूती मिली। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व से जोड़ने वाली ऐसी पहल उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित और आत्मविश्वासी बनाने में सहायक होती है।

4 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत हुआ पंजीयन शुल्क

महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इस तरह महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिल रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करना और उन्हें सीधे आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना है।

रचना सोनी की कहानी इसी पहल के जमीनी प्रभाव को सामने लाती है। 35 हजार रुपये की बचत उनके लिए पंजीयन प्रक्रिया में मिली आर्थिक राहत है, लेकिन इसके साथ अपने नाम संपत्ति का स्वामित्व उनके लिए आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास से भी जुड़ा है।

‘सेवा संकल्प’ से सामने आ रही बदलाव की कहानियां

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विभाग द्वारा हितग्राहियों से किए जा रहे सीधे संवाद से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि शासन की सुविधाओं और सुधारों का नागरिकों के जीवन पर किस तरह प्रभाव पड़ रहा है। रचना सोनी का अनुभव बताता है कि जब किसी नीति का लाभ सीधे परिवार तक पहुंचता है, तो वह बचत, सुविधा और आत्मविश्वास के रूप में दिखाई देता है।

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहन देने वाली यह पहल आर्थिक राहत के साथ महिलाओं की संपत्ति में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। रचना सोनी ने इस सुविधा के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को संपत्ति पंजीयन में मिल रही यह रियायत उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उपयोगी कदम है।

बिहान से मिली उड़ान, साय सरकार की योजनाओं से मजबूत हुआ आत्मविश्वास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन की दिख रही जमीनी तस्वीर

रायपुर, 21 सितंबर 2026/ कभी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहने वाली ग्राम पंचायत चुकतीपानी की श्रीमती बबली यादव आज अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर उन्होंने एक नहीं, बल्कि कई आजीविका गतिविधियों को अपनाया। फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे अलग-अलग कामों से उन्होंने अपनी आय का मजबूत आधार तैयार किया है। आज उनकी कहानी गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अपने पैरों पर खड़ा होकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सपना देखती हैं।

श्रीमती बबली यादव जागृति महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने उपलब्ध अवसरों का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर उन्होंने कंप्यूटर खरीदा और अपने घर से ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। शुरुआत भले ही छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और निरंतर प्रयास ने इस काम को उनकी नियमित आय का जरिया बना दिया।

बबली की मेहनत का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। गांव में ही फोटो कॉपी, प्रिंटिंग और कंप्यूटर से जुड़े काम की सुविधा मिलने लगी। पहले जिन छोटे-छोटे कामों के लिए ग्रामीणों को बाहर जाना पड़ता था, वे अब स्थानीय स्तर पर ही पूरे होने लगे। इस तरह उनका स्वरोजगार ग्रामीणों के लिए सुविधा और उनके परिवार के लिए आय का माध्यम बन गया।

मशरूम की खेती से बढ़ी आमदनी, महुआ खरीदी से जुड़ा नया अवसर

श्रीमती बबली यादव ने अपनी आय को एक ही साधन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने मशरूम उत्पादन की शुरुआत की। कम जगह में शुरू किए गए इस कृषि आधारित व्यवसाय से उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिलने लगी। मशरूम उत्पादन ने उन्हें यह विश्वास दिया कि स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग कर गांव में रहते हुए भी आय के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।

इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी के कार्य से भी जुड़ी हैं। इस गतिविधि के जरिए वे स्वयं आय अर्जित करने के साथ ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। इस तरह फोटो कॉपी से लेकर मशरूम और महुआ तक, बबली ने अपनी आजीविका को कई आय स्रोतों से जोड़ा है।

लगभग 10 हजार रुपये मासिक आय से मजबूत हुआ परिवार

श्रीमती बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसी गतिविधियों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इस अतिरिक्त आय से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। पहले जहां परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आय के सीमित साधन थे, वहीं अब उनके पास अपनी मेहनत से कमाई का नियमित माध्यम है।

उनके लिए यह बदलाव केवल आमदनी बढ़ने तक सीमित नहीं है। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके भीतर निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। आज वे अपने परिवार की जरूरतों में सहयोग देने के साथ अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

बिहान ने दिया अवसर, साय सरकार की योजनाओं से मिली आगे बढ़ने की राह

छत्तीसगढ़ में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इन प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बबली यादव की कहानी इसी व्यवस्था का स्थानीय उदाहरण है, जहां समूह से जुड़ाव, ऋण की सुविधा और आजीविका के अवसर ने एक ग्रामीण महिला को अपने पैरों पर खड़े होने का रास्ता दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ और महिला नेतृत्व वाले विकास के विजन से जुड़ी कहानी

श्रीमती बबली यादव की सफलता उस व्यापक सोच से भी जुड़ती है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों की सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विकसित भारत की मजबूत कड़ी बताते हुए ‘लखपति दीदी’ के माध्यम से महिलाओं की आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया है।

केंद्र सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को वित्तीय, तकनीकी और बाजार से जुड़ी सहायता के माध्यम से आजीविका मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। मिशन में ग्रामीण महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से संगठित कर ऋण और अन्य संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

यही सोच गांव की महिलाओं के जीवन में धीरे-धीरे बदलाव ला रही है। बबली यादव ने समूह से मिली ताकत को अपने स्थानीय ज्ञान और मेहनत से जोड़ा और अलग-अलग गतिविधियों को अपनी आजीविका का आधार बनाया।

आवास और महतारी वंदन से मिला सामाजिक-आर्थिक संबल

श्रीमती बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। इन योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार की बुनियादी जरूरतों को मजबूत आधार दिया है। एक ओर जहां आवास ने परिवार को सुरक्षित आश्रय का संबल दिया, वहीं दूसरी ओर नियमित आर्थिक सहायता ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहयोग किया।

बबली कहती हैं कि शासन की योजनाओं और बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। उनके अनुसार, यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, समूह का साथ और आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिले तो वे न केवल अपने परिवार को संभाल सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और प्रेरणा का माध्यम बन सकती हैं।

छोटी शुरुआत से बड़ी पहचान तक

बबली यादव की कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता के लिए हमेशा बड़े कारोबार से शुरुआत करना जरूरी नहीं है। एक कंप्यूटर और फोटो कॉपी मशीन से शुरू हुआ काम, उसके बाद मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से जुड़ी गतिविधियां, इन छोटे-छोटे प्रयासों ने मिलकर उनकी आय को मजबूत किया।

आज बबली के लिए उनके घर का छोटा-सा व्यवसाय केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की पहचान बन चुका है। उनके हाथों में अब सिर्फ काम नहीं, बल्कि अपने परिवार और गांव की दूसरी महिलाओं के लिए नई संभावनाओं की उम्मीद भी है।

बबली यादव की सफलता इस बात की मिसाल है कि जब महिला को समूह का साथ, वित्तीय अवसर, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलता है, तो वह अपनी परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखती है। चुकतीपानी की बबली अब केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं कर रहीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी यह संदेश दे रही हैं कि मेहनत, अवसर और आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भरता की राह गांव से भी शुरू की जा सकती है।

मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स के साथ की वीडियो कॉन्फ्रेंस

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा की

रायपुर, 21 सितंबर 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा की गई।

प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान को केवल एक आयोजन के रूप में नहीं लेकर इसे जनभागीदारी और एक-दूसरे की मदद की संस्कृति को मजबूत करने के अवसर के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्होंने कलेक्टरों एवं अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में अभियान की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आयोजित करते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि जिलों में प्रभारी मंत्री के मार्गदर्शन में ब्लाक एवं तहसील स्तर पर सेवा संकल्प अभियान के दौरान आयोजित होने वाले शिविरों में लोगों को भागीदार बनाकर उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाए। इस संबंध में माननीय मंत्रीगणों से आवश्यक बैठक एवं चर्चा सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव ने कहा कि शिविरों में केन्द्र शासन की चिन्हित 26 प्रमुख योजनाओं को शामिल किया जाना है। इस संबंध में योजनाओं के हितग्राहियों की जानकारी अद्यतन कर ली जाए। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स को फसल गिरदावरी सर्वे, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

सेवा मेरा योगदान के तहत विभिन्न गतिविधियां

23 से 25 सितंबर तक सभी जिलों के नगरीय निकाय क्षेत्रों में तथा 2 से 8 अक्टूबर तक प्रदेशभर में सेवा मेरा योगदान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें सेवा एवं स्वच्छता, अन्न एवं वस्त्र दान, विद्या दान एवं शिक्षा सहयोग, कौशल एवं ज्ञान दान, हरित छत्तीसगढ़ एवं पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य एवं रक्तदान, अंगदान एवं देहदान, सामाजिक सुरक्षा एवं जागरूकता तथा स्थानीय उत्पादन एवं महिला सशक्तिकरण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि इन गतिविधियों में एनसीसी, एनएसएस, स्वयंसेवक, स्व-सहायता समूह, सामाजिक संस्थाओं, युवा संगठनों तथा ‘मेरा युवा भारत’ सहित विभिन्न सहयोगी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। सभी गतिविधियों को माय भारत पोर्टल पर फोटोग्राफ्स सहित अपलोड करने के निर्देश दिए गए।

देहदान, अंग दान करने वाले परिवारों को किया जाए सम्मानित

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिन परिवारों के मृत परिजनों द्वारा देह एवं अंग दान किया जाता है उन परिवारों को सम्मानित किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि जिन लोगों को दान के अंगों का उपयोग किया गया है। उनके परिवारों को भी कार्यक्रम में शामिल किया जाए एवं उनसे उनकी त्वरित प्रतिक्रिया भी ली जाए। यह कार्यक्रम सिर्फ अभियान तक सीमित न रहे इसके लिए समय-समय पर लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित हो, जिससे लोग अंग दान करने सहर्ष तैयार हो एवं आगे आए।

‘हरित छत्तीसगढ़ अभियान को एक पेड़ मां के नाम’ के साथ शामिल कर किया जाएगा 10 हजार पौधों का रोपण

हरित छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत स्थानीय प्रजातियों के 10 हजार पौधों का रोपण करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य सचिव ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

रायपुर 21 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने ओडिशा प्रवास के दौरान आज भुवनेश्वर में छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ राजनेता श्री विश्वभूषण हरिचंदन से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की।

रायपुर 21 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई।

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