ईश्वर दुबे
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20 जून से नवीनीकरण और 1 अगस्त से नए आवेदन होंगे स्वीकार, जनवरी 2027 तक छात्रवृत्ति राशि वितरण का लक्ष्य
रायपुर, 23 जून 2026। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शिक्षा सत्र 2026-27 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीयन, स्वीकृति एवं वितरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। आदिवासी विकास विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह व्यवस्था राज्य के सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग महाविद्यालयों, पॉलिटेक्निक तथा आईटीआई संस्थानों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों पर लागू होगी।
विभाग ने बताया है कि छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन राज्य छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकरण आवेदन की प्रक्रिया 20 जून 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जबकि नवीन आवेदन 1 अगस्त 2026 से स्वीकार किए जाएंगे। विभाग द्वारा आवेदन प्राप्त होने के बाद उनके परीक्षण, सत्यापन और स्वीकृति की समस्त कार्रवाई निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जाएगी, ताकि छात्रवृत्ति राशि का वितरण एवं भुगतान जनवरी 2027 तक सुनिश्चित किया जा सके।
छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के पालकों की वार्षिक आय सीमा 2 लाख 50 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये तय की गई है। पात्र विद्यार्थियों को आवेदन के समय सक्षम अधिकारी द्वारा जारी स्थायी जाति प्रमाण पत्र, छत्तीसगढ़ का मूल निवास प्रमाण पत्र तथा पूर्व वर्ष की परीक्षा के अंकसूची एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्रवृत्ति की राशि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से सीधे विद्यार्थियों के आधार सीडेड बैंक खातों में जमा की जाएगी। इसके लिए आवेदन करते समय सक्रिय और आधार से लिंक बैंक खाते की जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा।
छात्रवृत्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2026-27 से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) से वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) प्राप्त करना भी अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा नई संस्थाओं के संस्था प्रमुख एवं छात्रवृत्ति प्रभारी के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे पात्र विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।
राज्य शासन ने सभी पात्र विद्यार्थियों से निर्धारित समयावधि में ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है, ताकि वे छात्रवृत्ति योजना का लाभ प्राप्त कर अपनी उच्च शिक्षा को सुगमता से आगे बढ़ा सकें।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 3 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित, निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन और अध्ययन सामग्री की सुविधा
रायपुर, 23 जून 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को राज्य के चयनित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक अध्ययन की सुविधा प्रदान की जाएगी। विशेष बात यह है कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस, छात्रावास, भोजन, गणवेश, लेखन सामग्री तथा अन्य आवश्यक खर्चों का पूरा वहन छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा किया जाएगा। इससे श्रमिक परिवारों को बच्चों की शिक्षा के आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण में अध्ययन का अवसर प्राप्त होगा।
प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, इसी सोच के अनुरूप राज्य सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के कमजोर और श्रमिक वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना भी इसी दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है, जिससे श्रमिकों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है।
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र एवं पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को श्रम विभाग के पोर्टल www.shramevjayate.cg.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया 22 जून से प्रारंभ हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की सुविधा श्रम विभाग के पोर्टल, निकटतम श्रम कार्यालय, लोक सेवा केंद्र तथा श्रमेव जयते एप के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, जिससे अधिक से अधिक पात्र परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।
यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाएगी तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगी।
कृषि अवशेष, गोबर और जैविक अपशिष्ट से तैयार होगी हरित ऊर्जा, किसानों की आय बढ़ाने और निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम
रायपुर 23 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (CG-CBG) नीति 2026 को मंजूरी प्रदान की गई। यह नीति राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
छत्तीसगढ़ में कृषि एवं फसल अवशेष, पैडी स्ट्रॉ, पशु गोबर, पशुधन अपशिष्ट, नगरीय ठोस अपशिष्ट, प्रेसमड, गन्ना अवशेष तथा नेपियर जैसी ऊर्जा फसलों से प्रतिवर्ष लगभग 1.65 लाख मेट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन की संभावना है। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।
नई नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रतिवर्ष लगभग 2.16 लाख टन पेट्रोल एवं डीजल के समतुल्य ईंधन की आपूर्ति सीबीजी के माध्यम से की जा सकेगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसानों, गौपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह नीति नए अवसर लेकर आएगी। कृषि अवशेषों एवं जैविक अपशिष्टों के बेहतर उपयोग से किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।
सीबीजी संयंत्रों से सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त जैविक खाद के उपयोग से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, भूमि की उर्वरता संरक्षित रहेगी और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा।
यह नीति राज्य को हरित विकास और जलवायु अनुकूल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सीबीजी के उपयोग से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी तथा छत्तीसगढ़ नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में प्रभावी योगदान दे सकेगा।
भारत सरकार द्वारा सतत एवं किफायती परिवहन को बढ़ावा देने के लिए संचालित SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) पहल के अनुरूप यह नीति तैयार की गई है। राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों में छत्तीसगढ़ की यह पहल महत्वपूर्ण योगदान देगी।
राज्य में विकसित हो रहे सिटी गैस वितरण नेटवर्क तथा गैस अधोसंरचना का लाभ भी इस नीति को मिलेगा। इससे सीबीजी उत्पादन, वितरण और उपयोग की मजबूत पारिस्थितिकी विकसित होगी तथा निवेशकों को बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) द्वारा वर्ष 2024 से सीबीजी क्षेत्र में सक्रिय पहल की जा रही है। वर्तमान में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा सहित आठ स्थानों पर बीपीसीएल एवं गेल इंडिया लिमिटेड के निवेश से सीबीजी संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन सभी परियोजनाओं के लिए भूमि आबंटन की प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है।
राज्य में निजी क्षेत्र से भी सीबीजी उद्योग के प्रति उल्लेखनीय रुचि दिखाई गई है तथा लगभग 3,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नई नीति लागू होने के बाद इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार सृजन तथा औद्योगिक विकास की संभावनाओं को और अधिक बल मिलेगा।
मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित इस नीति के छह प्रमुख आधार स्तंभ हैं - आधारभूत अधोसंरचना सहायता, फीडस्टॉक आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण, संयंत्र स्थापना एवं संचालन सहायता, जैव उर्वरक प्रबंधन एवं सहायक अधोसंरचना विकास, सीबीजी मांग सृजन एवं परिवहन क्षेत्र में एकीकरण तथा निवेश प्रोत्साहन एवं उद्योग विकास।
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (CBDA) को राज्य की नोडल एजेंसी नामित किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह नीति छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित उद्योग, जैविक कृषि और सतत विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
Date : June 23, 2026
Raipur, June 23, 2026/ In a significant push towards rural prosperity, livelihood security and sustainable development, a series of key decisions were approved at the Cabinet meeting chaired by Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, at Mantralaya (Mahanadi Bhawan) today.
1. The Cabinet approved the draft of “Viksit Bharat - Guarantee for Rozgar & Aajeevika Mission (Gramin) : VB-G RAM G Yojana, Chhattisgarh”, aimed at promoting employment, empowerment, convergence of departmental schemes and digital governance in rural areas.
Implemented in accordance with the Government of India Act, 2025, the scheme provides a statutory guarantee of 125 days of unskilled wage employment annually to eligible adult members of rural households.
This scheme will facilitate water conservation, natural resource management, creation of rural infrastructure, development of livelihood assets and generation of sustainable employment opportunities in villages. It will also promote integrated Gram Panchayat-based development, convergence of departmental schemes and coordination with the PM Gati Shakti initiative. To ensure effective planning and monitoring of development works, modern technologies and digital systems will be employed, strengthening transparency, good governance and accountability.
The expenditure under the scheme will be shared between the Centre and the State in a 60:40 ratio, and a provision of ₹4,000 crore has been made in the State Budget for the financial year 2026-27.
2. In another important decision aimed at creating local employment opportunities and boosting the rural economy, the Cabinet approved the launch of the “Atal Aajeevika Samriddhi Haat” scheme.
Under the initiative, production centres for handloom, weaving, tailoring and handicrafts; processing units for pulses, oilseeds, rice milling and dairy activities; service centres equipped with cold storage facilities, solar dryers, agricultural equipment repair units and Atal Digital Centres; along with marketing and supply centres, will be established in rural areas.
The scheme is aimed at ensuring optimal utilisation of the existing infrastructure and machinery while promoting local production, processing, service delivery and marketing activities. It is expected to generate new avenues for employment and self-employment within villages and provide better market access for locally produced goods. Chhattisgarh State Rural Livelihood Mission has been designated as the nodal agency, while the Panchayat and Rural Development Department will serve as the nodal department for implementation.
Through Atal Aajeevika Samriddhi Haat, sectors such as agriculture, food processing, service enterprises, digital technology, green energy and rural markets are expected to receive fresh momentum, laying a stronger foundation for sustainable rural livelihoods.
3. The Cabinet also approved the draft of “Chhattisgarh Compressed Biogas Policy (CG-CBG Policy), 2026”, aimed at scientifically managing agricultural residues, municipal solid waste, livestock waste and other organic resources available in the State and converting them into clean gaseous fuel in the form of compressed biogas (CBG).
The policy is expected to promote efficient waste management, environmental conservation, reduction in greenhouse gas emissions, production of bio-fertilisers and revitalisation of the rural economy.
In line with the Chhattisgarh Anjor Vision 2047, the State has an estimated potential to produce nearly five lakh tonnes of compressed biogas annually. For implementation of the policy, the Chhattisgarh Biofuel Development Authority has been designated as the State nodal agency, while the Energy Department has been authorised to issue necessary guidelines and administrative orders.
अवैध खनन और परिवहन पर सरकार का शिकंजा, अधिकारियों से अभद्रता करने वालों पर भी एफआईआर
रायपुर, 23 जून 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनिज संपदा के अवैध दोहन तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी कड़ी में संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म तथा केंद्रीय खनि उड़नदस्ता प्रभारी श्री रजत बंसल के निर्देशन में केंद्रीय खनि उड़नदस्ता और संबंधित जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने 22 जून को मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाया। शिकायतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में विभिन्न स्थानों पर खनिजों के अवैध परिवहन में संलिप्त कुल सात वाहनों को जप्त किया गया।
जांच के दौरान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के बरबसपुर क्षेत्र में निम्न श्रेणी चूना पत्थर से लदे दो हाइवा, सूरजपुर जिले के लटोरी में रेत से भरा एक हाइवा तथा खड़गवां में एक टिप्पर पकड़ा गया। वहीं सरगुजा जिले के सकालो और अंबिकापुर क्षेत्र में रेत परिवहन कर रहे तीन टिप्परों पर कार्रवाई की गई। सभी वाहनों को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत जप्त कर संबंधित थानों में सुरक्षित रखा गया है।
कार्रवाई के दौरान अंबिकापुर के गांधी चौक क्षेत्र में एक गंभीर घटना भी सामने आई। जांच कर रही टीम के साथ वाहन मालिक, चालक और उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौच और धमकी दी गई तथा शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत थाना गांधीनगर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
खनिज विभाग ने दोहराया है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने, अधिकारियों को धमकाने अथवा अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
राज्य शासन का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व हितों की रक्षा के लिए प्रभावी प्रवर्तन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में संयुक्त निरीक्षण, निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
दिनांक : 23 जून 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -
1. मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, सशक्तीकरण, विभागीय योजनाओं के अभिसरण और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के लिए आज एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ’’विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’’ के प्रारूप का अनुमोदन किया है। भारत सरकार के अधिनियम, 2025 के अनुरूप लागू की जा रही इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिवस अकुशल श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी।
इस योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत संरचना निर्माण, आजीविकामूलक परिसंपत्तियों के विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। इस योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत आधारित समेकित विकास, विभागीय योजनाओं के अभिसरण तथा पीएम गति शक्ति से समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। विकास कार्यों की बेहतर कार्ययोजना एवं निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्रणालियों का उपयोग करते हुए पारदर्शिता, सुशासन एवं जवाबदेही को सुदृढ़ किया जाएगा।
इस योजना के क्रियान्वयन में केंद्र एवं राज्य के व्यय का अनुपात 60ः40 रहेगा तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
2. मंत्रिपरिषद की बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से ’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ योजना प्रारंभ करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सृजन केंद्र (हथकरघा, बुनाई-सिलाई, हस्तशिल्प आदि), प्रसंस्करण इकाइयां (दलहन, तिलहन, राइस मिल, डेयरी आदि), सेवा केंद्र (कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत, अटल डिजिटल केंद्र आदि), विपणन केंद्र तथा आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इस योजना का उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना और मशीनरी का बेहतर उपयोग करते हुए स्थानीय उत्पादन, प्रसंस्करण, सेवा और विपणन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को नोडल एजेंसी तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
’’अटल आजीविका समृद्धि हाट’’ के माध्यम से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सेवा व्यवसाय, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा तथा ग्रामीण बाजारों को नई गति मिलेगी और प्रदेश की ग्रामीण आजीविका को मजबूत आधार प्राप्त होगा।
3. मंत्रिपरिषद ने आज “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” के प्रारूप का भी अनुमोदन किया है। इस नीति के माध्यम से राज्य में उपलब्ध कृषि अवशेष, नगरीय ठोस अपशिष्ट, पशुधन अपशिष्ट एवं अन्य जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उन्हें स्वच्छ गैसीय ईंधन कम्प्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित किया जाएगा।
इस नीति से अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जैव उर्वरक उत्पादन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुसार राज्य में लगभग 5 लाख टन प्रतिवर्ष CBG उत्पादन की संभावना है। इस नीति के क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को राज्य नोडल एजेंसी तथा ऊर्जा विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशासनिक आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
Chief Minister pays heartfelt tribute to the eminent nationalist thinker on his ‘Balidan Diwas’
Raipur, June 23, 2026/ Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai offered heartfelt floral tributes to the portrait of Dr Shyama Prasad Mukherjee, an eminent educationist, India’s first Minister of Industry, and a revered nationalist thinker, on the solemn occasion of his Balidan Diwas (Day of Sacrifice) at the Chief Minister's residence in Raipur today.
Speaking on the occasion, Chief Minister Shri Sai described Dr Mukherjee as the guardian of India’s unity, integrity, and national pride. "Holding the nation's interests above all else, he dedicated his entire life to the service of the motherland. His profound thoughts, lifelong struggles, and supreme sacrifice remain an invaluable heritage for Indian democracy and nationalist ideology," he said.
Chief Minister highlighted that Dr Mukherjee provided a strong ideological foundation to the political landscape of the country and made monumental contributions towards national unity. He warmly noted that Dr Mukherjee's unwavering commitment to India's territorial integrity and cultural identity continues to serve as a deep source of inspiration for every citizen today.
As India marches ahead on the path to becoming a developed, self-reliant, and empowered nation, Dr Shyama Prasad Mukherjee's ideals and core principles serve as source of inspiration and guidance, said Chief Minister Shri Sai. "By imbibing his thoughts and values, the resolve towards nation-building can be carried forward with greater effectiveness," he said.
Chairman of the Chhattisgarh Mineral Development Corporation Shri Saurabh Singh, Shri Ram Garg, and other distinguished citizens were present on the occasion.
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai lauds the transformation in Bastar, crediting the Prime Minister’s ‘Nation First’ resolve and the unwavering bravery of security forces
Raipur, June 23, 2026/ Terming the nation's fight against Naxalism as a triumph of holistic development and public confidence, Prime Minister Shri Narendra Modi has stated that the government's resolute pledge to completely root out Left-Wing Extremism has yielded promising results across the country. He emphasized that regions once paralyzed by fear, violence, and deep-seated mistrust have now transitioned into a promising new era defined by progressive infrastructure, good governance, and life-changing opportunities for the local populace.
Reflecting on the historical challenges of these zones, Prime Minister Shri Narendra Modi said that common people were previously forced to live under a perpetual shadow of fear, constantly anxious about their personal safety, livelihoods, and basic dignity. Initiating any developmental project was an uphill task, as every progressive effort ranging from laying critical roads to expanding telecommunication networks faced violent resistance from Naxalites. Infrastructure materials were routinely set ablaze, and contractors were threatened and driven away in deliberate attempts to keep these regions isolated from progress.
Despite these challenges, the Central Government accorded topmost priority to bringing development to the heart of Naxal-affected areas. over the past years, thousands of kilometers of all-weather roads have been constructed, thousands of mobile towers erected, and modern communication facilities extended to the remotest of villages. Alongside physical connectivity, the expansion of banking services, postal networks, and robust financial inclusion initiatives have successfully bridged the gap between isolated communities and the national mainstream. Prime Minister Shri Modi highlighted that this transformation extends far beyond concrete and cables. It represents a profound restoration of trust and the widening of socio-economic horizons for families who felt left behind.
The Prime Minister further clarified that the battle against Naxalism was never fought purely through the lens of military force, bombs, or bullets. Instead, the government maintained an equal and deeply compassionate focus on fulfilling the genuine hopes and aspirations of ordinary citizens. Continuous efforts were channeled toward delivering grassroots welfare schemes to the very last person in the social strata, securing the rights of marginalized tribal communities, and reinforcing their faith in democratic institutions. This human-centric approach is why public trust in the democratic framework and developmental processes has grown exponentially.
Turning his focus to Bastar, Prime Minister Shri Modi observed that the region, once marred by the grim realities of terror and conflict, is now witnessing a vibrant resurgence driven by the talent and constructive energy of its youth. He cited the massive, enthusiastic participation of hundreds of thousands of young individuals in initiatives like the Bastar Olympics as a powerful testament to this generational shift. This paradigm shift proves that the region's youth are wholeheartedly choosing the pathways of education, competitive sports, and institutional growth over the destructive path of violence.
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में केबिनेट की बैठक प्रारंभ
मुख्यमंत्री ने बलिदान दिवस पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की
रायपुर, 23 जून 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में प्रख्यात शिक्षाविद्,भारत के प्रथम उद्योग मंत्री, राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के सशक्त प्रहरी थे। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा के लिए समर्पित किया। उनके विचार, संघर्ष और त्याग भारतीय लोकतंत्र एवं राष्ट्रवादी चिंतन की अमूल्य धरोहर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की राजनीति को वैचारिक आधार प्रदान किया तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र की अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श और सिद्धांत हमें निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनके विचारों को आत्मसात कर ही हम राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकते हैं।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, श्री राम गर्ग सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
योग और नृत्य का अद्भुत संगम: सारंगढ़ में बच्चों ने संगीत की धुन पर योग मुद्राओं से मोहा मन
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा की मौजूदगी में 1,000 से अधिक लोगों ने किया योगाभ्यास
रायपुर, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सारंगढ़ के कृषि उपज मंडी परिसर में जिला स्तरीय वृहद योग कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। इस वर्ष "योगा 365 डेज एम्ब्रेस योगा" और "बढ़ते उम्र के स्वास्थ्य के लिए योग" की थीम पर आधारित इस शिविर में प्रदेश के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक गरिमा के साथ भगवान श्री धनवंतरि और छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया।
इस आयोजन में प्रशासनिक और राजनीतिक अमला एक मंच पर नजर आया। मुख्य अतिथि श्री टंकराम वर्मा के साथ कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व विधायक केराबाई मनहर, बरमकेला जनपद अध्यक्ष सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, पत्रकारों और स्कूली बच्चों समेत लगभग 1,000 नागरिकों ने एक साथ बैठकर योग की विभिन्न विधाओं व प्राणायाम का अभ्यास किया।
पीएम मोदी के संदेश का वाचन और हस्ताक्षर अभियान
कार्यक्रम के दौरान राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'स्वस्थ राष्ट्र' बनाने के संदेश का वाचन किया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को बधाई देते हुए जीवन में नियमित योग अपनाने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर योग के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें मंत्री, कलेक्टर, एसपी सहित जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने अपने हस्ताक्षर किए।
योग और नृत्य का अद्भुत संगम
इस जिला स्तरीय योग दिवस का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा नृत्य शैली में किया गया योग प्रदर्शन रहा। मुख्य सत्र के बाद, योग शिक्षिका (व्यायाम शिक्षिका) ममता साहू के मार्गदर्शन में सिम्मी योगा एंड फिटनेस सेंटर, योगाचार्य सुभाष पटेल की टीम और सरिया की योगिनी अकादमी के बच्चों ने 'श्रीरामचंद्र' सहित अन्य भक्ति गीतों पर सामूहिक योग मुद्राओं का विहंगम प्रदर्शन किया। इसके साथ ही, साक्षी पटेल ने एकल गीत पर योग की अत्यंत कठिन मुद्राओं को सहजता से प्रस्तुत कर मुख्य अतिथि और उपस्थित जनसमुदाय की खूब वाहवाही बटोरी।
अनुशासित भागीदारी और प्रेरक पल
आयोजन को सफल बनाने में भारत स्काउट, जूनियर रेडक्रॉस और एनएसएस (NSS) के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। स्कूल और कॉलेज के इन छात्र-छात्राओं की अनुशासित और ऊर्जावान भागीदारी ने योग के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया।
कार्यक्रम में एक भावुक और प्रेरक पल तब देखने को मिला जब मंच से हजार से अधिक नागरिकों को योग का अभ्यास करा रहीं मुख्य योग शिक्षिका ममता साहू के माता-पिता और रिश्तेदार भी इस शिविर में शामिल हुए। अपनी बेटी के इस बेहतरीन नेतृत्व और राज्य स्तर पर मिल रहे सम्मान को देखकर उनके माता-पिता भावविभोर हो उठे। यह अनूठा आयोजन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नागरिकों को स्वास्थ्य और एकजुटता का एक अमूल्य संदेश दे गया।
सारंगढ़ की सुनीता पटेल ऐसे बनीं 'लखपति ड्रोन दीदी'
रायपुर, कहते हैं कि अगर हौसलों को सही तकनीक और अवसरों के पंख मिल जाएं, तो ग्रामीण परिवेश की साधारण सी दिखने वाली महिलाएं भी कामयाबी की नई उड़ान भर सकती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एक छोटे से गांव खोरीगांव की रहने वाली सुनीता पटेल की। सुनीता आज सिर्फ अपने घर की दहलीज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आसमान में ड्रोन उड़ाकर अपने खेतों को समृद्ध बना रही हैं और खुद 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
शुरुआत एक सपने की, जिसने बदली जिंदगी
इस बदलाव की नींव तब पड़ी जब 15 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने "नमो ड्रोन दीदी" योजना की घोषणा की थी। इस योजना का मकसद देश की ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर उनकी सालाना आय को 1 लाख रुपये से ऊपर ले जाना था। सुनीता पटेल ने इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने नहीं दिया।
दिसंबर 2023 में वे अपने सपनों की पोटली बांधकर 15 दिनों के कड़े प्रशिक्षण के लिए ग्वालियर गईं। वहां उन्होंने न सिर्फ ड्रोन उड़ाने की बारीकियां सीखीं, बल्कि खेतों में कीटनाशकों और नैनो उर्वरकों के सही इस्तेमाल का तकनीकी ज्ञान भी हासिल किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जब उन्हें उर्वरक कंपनी 'इफको' (IFFCO) की ओर से कृषि ड्रोन मिला, तो मानो उनकी आजीविका को नए पंख मिल गए।
खेतों में तकनीक की क्रांति और 2 लाख रुपए तक की आय
साल 2024 से शुरू हुआ सुनीता का यह सफर आज 2026 में सफलता के शिखर पर है। सुनीता अब हर साल खेतों में दवा और खाद का छिड़काव करके 1 से 2 लाख रुपये की सम्मानजनक वार्षिक आय कमा रही हैं। सबसे खूबसूरत बात यह है कि सुनीता अपने काम को सिर्फ एक व्यवसाय नहीं मानतीं। ग्रामीण परिवेश से जुड़ी होने के कारण वे अमीर-गरीब का भेद किए बिना, पैसों की परवाह किए बगैर हर किसान के खेत में उतनी ही शिद्दत से काम करती हैं।
शनिवार को सारंगढ़ मंडी प्रांगण में जब 'खेती बचाओं अभियान' और 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला' का आयोजन हुआ, तो सुनीता के हुनर को देखने भारी भीड़ उमड़ी। वहां मौजूद प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सामने जब सुनीता ने पानी से भरे भारी-भरकम ड्रोन को रिमोट के जरिए आसमान में उड़ाया और मैदान में छिड़काव का सजीव प्रदर्शन किया, तो पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा। मंत्री जी ने भी उनके इस जज्बे और तकनीकी कुशलता की जमकर सराहना की।
कैसे काम करती है यह योजना और आप कैसे उठा सकते हैं लाभ?
सुनीता की यह सफलता दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) की ताकत को दर्शाती है। इस योजना के तहत देश की सात प्रमुख उर्वरक कंपनियां महिलाओं को ट्रेनिंग और ड्रोन सप्लाई में मदद कर रही हैं।
अगर गांव की कोई भी अन्य महिला सुनीता की तरह 'ड्रोन दीदी' बनना चाहती है, तो उसकी प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो, वह कम से कम 10वीं पास हो और किसी पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हो। चयन होने के बाद नजदीकी रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (RPTO) में 15 दिनों की मुफ्त पायलट और असिस्टेंट ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके बाद DGCA द्वारा आधिकारिक 'रिमोट पायलट सर्टिफिकेट' मिलता है। ड्रोन खरीदने के लिए सरकार की तरफ से 80 प्रतिशत या अधिकतम 8 लाख रुपये तक की भारी सब्सिडी दी जाती है। बाकी बची रकम पर भी एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के जरिए महज 3 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर लोन मिल जाता है।
CM Shri Sai to flag off journey from Raipur railway station on Monday
Raipur, As part of the nationwide Somnath Swabhiman Parv, Chhattisgarh will arrange travel of 1,000 distinguished participants to Gujarat’s Somnath Dham on a special train for the five-day Somnath Swabhiman Cultural Yatra from June 22 to 26.
The journey will be flagged off from Raipur Railway Station at 11:00 AM on Monday by Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai. Tourism, Culture & Religious Trusts Minister Shri Rajesh Agrawal will preside over the programme. Public representatives, including MPs, MLAs and the Mayor of Raipur, along with several eminent citizens to mark the occasion.
Somnath Swabhiman Parv symbolizes India’s enduring cultural consciousness and heritage that has preserved its faith and identity despite centuries of challenges. Organised under a national initiative of the Ministry of Culture, Government of India, the programme aims to connect younger generations with the country’s cultural roots, spiritual legacy and national pride.
The delegation will comprise selected distinguished personalities from across Chhattisgarh, including Padma Shree awardees, nationally and internationally honoured artists, litterateurs, cultural practitioners, social workers and public representatives. The Yatra will also showcase the state’s folk traditions, cultural diversity and heritage at the national level. Participants will carry sacred soil and river water from their respective regions to Somnath, symbolising India’s cultural unity, spiritual harmony and national integration.
During the visit, participants will offer prayers at the Somnath Temple and take part in a range of cultural and religious activities. Temple visits, cultural performances, art tours and excursions to sites of historical and religious significance will form key attractions of the programme.
The Somnath Swabhiman Cultural Yatra is being projected as more than a religious pilgrimage, serving as a celebration of India’s cultural consciousness, historical legacy and national unity.
आमाकोनी को मिली 28 लाख के विकास कार्यों की सौगात, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने किया लोकार्पण
रायपुर, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा अपने जिला प्रवास के दौरान रविवार को तहसील सुहेला के ग्राम आमाकोनी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ग्रामवासियों को बड़ी सौगात देते हुए 10 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित सामुदायिक भवन तथा 18 लाख रुपए की लागत से तैयार प्रार्थना शेड एवं अहाता निर्माण का लोकार्पण किया।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि सुहेला क्षेत्र में अब विकास के कार्य लगातार गति पकड़ रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि क्षेत्र की जो भी समस्याएं हैं, उन सभी का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित समाधान किया जाएगा।
समग्र विकास के लिए सरकार कृत संकल्पित
राजस्व मंत्री ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए पूरी तरह कृत संकल्पित है। हमने जनता से की गई 'मोदी की गारंटी' के सभी प्रमुख वादों को पूरा कर दिया है।
3 से 4 वर्षों में हर परिवार को मिलेगा पक्का आशियाना
ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा देते हुए श्री वर्मा ने बताया कि वर्तमान में आमाकोनी ग्राम में 51 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण तेजी से चल रहा है और आने वाले समय में और भी आवास स्वीकृत किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि अगले 3 से 4 साल के भीतर क्षेत्र में कोई भी घर कच्चा नहीं रहेगा। सरकार हर घर में शुद्ध पेयजल, बिजली और शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है। पात्र लोगों को जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलने से हर परिवार में खुशहाली आएगी। उन्होंने ग्रामीणों से आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ रहकर गांव के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
लोकार्पण समारोह के इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य,जनपद सदस्य, सरपंच सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।