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लंदन. भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या (62) के प्रत्यर्पण मामले में लंदन की वेस्टमिंस्टर अदालत सोमवार को फैसला सुना सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत आने पर माल्या को डर है कि राजनीति की वजह से निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। उस पर नए आरोप भी लग सकते हैं।

 

 माल्या पर भारतीयों बैंकों के 9,000 करोड़ रुपए बकाया हैं। वह मार्च 2016 में लंदन भाग गया था। भारत ने पिछले साल फरवरी में यूके से उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी। भारत में फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड में माल्या की गिरफ्तारी हुई लेकिन, जमानत पर छूट गया। उसके प्रत्यर्पण का मामला 4 दिसंबर 2017 से लंदन की अदालत में चल रहा है।

माल्या के पास प्रत्यर्पण के फैसले को 14 दिन में चुनौती देने का अधिकार होगा

  1.  

    माल्या की 5 दलील 

     

    • माल्या का कहना है कि उसके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है। उसने एक रुपया भी उधार नहीं लिया। किंगफिशर एयरलाइंस ने लोन लिया था। कारोबार में घाटा होने की वजह से लोन की रकम खर्च हो गई। वह सिर्फ गारंटर था और यह फ्रॉड नहीं है।   
    • वह कर्ज का 100% मूलधन चुकाने को तैयार है। उसने साल 2016 में कर्नाटक हाईकोर्ट में भी यह ऑफर दिया था। उसका कहना है कि रकम चुराकर भागने की बात गलत है। उसे बैंक डिफॉल्ट का पोस्टर बॉय बना दिया गया है।
    • माल्या ने यह भी कहा था कि साल 2016 में उसने प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को चिट्ठी लिखकर जांच कमेटी गठित करने की मांग की थी लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला। 
    • माल्या ने यह भी कहा था कि भारतीय जेलों की हालत अच्छी नहीं है। इसके बाद यूके की अदालत ने भारत से जेल का वीडियो मांगा था। भारत ने मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 का वीडियो भेजा था, जहां माल्या को रखा जाएगा। वीडियो देखने के बाद यूके की कोर्ट ने संतुष्टि जताई थी। 
    • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रत्यर्पण पर फैसले से पहले माल्या ने यह भी कहा है कि राजनीति की वजह से उसे भारत में न्याय मिलने के आसार कम हैं। उसके खिलाफ नए आरोप लग सकते हैं।

     

  2.  

    भारतीय जांच एजेंसियों की दलील

     

    माल्या ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया। वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत भगोड़ा घोषित है। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। वह ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भी आरोपी है।

     

  3. अक्टूबर 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस बंद हुई

     

    मार्च 2012 में माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस ने यूरोप और एशिया के लिए फ्लाइट्स बंद कर दीं। घरेलू बाजार में जहां किंगफिशर हर दिन 340 फ्लाइट्स ऑपरेट करती थीं, उन्हें घटाकर 125 कर दिया गया। लेकिन यह फॉर्मूला 8 महीने भी नहीं चला। अक्टूबर 2012 में किंगफिशर की सारी फ्लाइट्स बंद हो गईं।

     

  4.  

    साल 2013-14 तक एयरलाइंस का घाटा बढ़कर 4,301 करोड़ रुपए हो चुका था। इसी साल माल्या दुनिया के टॉप-100 अमीरों की लिस्ट से बाहर हो गया। लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर ब्याज बढ़ता गया। मार्च 2016 तक माल्या 9,000 करोड़ रुपए का कर्जदार हो गया और विदेश भाग गया।

     

  5.  

    आर्थिक अपराध के 18 मामलों में 23 भगोड़ों का प्रत्यर्पण बाकी 

     

    भारत की 48 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। साल 2014 से अब तक आर्थिक अपराध के मामलों में सिर्फ 5 अपराधियों का प्रत्यपर्ण हो पाया है। 23 भगोड़ों को अभी तक नहीं लाया जा सका है। इनके लिए संबंधित देशों से प्रत्यर्पण की अपील की जा चुकी है।

     

    आर्थिक अपराधों से जुड़े प्रत्यर्पण के 3 बड़े मामले

    आरोपी मामला जिस देश से प्रत्यर्पण होना है
    विजय माल्या बैंक लोन ब्रिटेन
    नीरव मोदी पीएनबी घोटाला ब्रिटेन
    मेहुल चौकसी पीएनबी घोटाला एंटीगुआ
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के दिन शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। एग्जिट पोल से नतीजों की जो तस्वीर उभर कर सामने आई है उससे तो यह तय हो गया है कि सड़क से लेकर संसद तक हंगामा, शोर-शराबा और धूम-धड़ाका होना तय है। यदि भाजपा जीती तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए चुनाव के दौरान उठाए गए मुद्दों पर भाजपा को घेरना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन, यदि कांग्रेस कामयाब रही तो विपक्षी पार्टी ऐसे मुद्दे उठा सकती है जो राजनीतिक तापमान बढ़ा सकते हैं। सत्र के पहले ही दिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आ जाएंगे और इसका असर संसद की कार्यवाही और सरकार-विपक्ष की रणनीति पर पड़ेगा। मोदी सरकार के आखिरी संसद सत्र में विपक्ष राफेल सौदा, सीबीआई बनाम सीबीआई, आरबीआई और सरकार में टकराव, किसान और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहता है।
 
इन सबके बीच भाजपा के धुर विरोधी दल महागठबंधन बनाने के प्रयास में जुटे हैं। संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व विपक्ष की एकजुटता को लेकर प्रयास तेज हो गए हैं। आगामी 10 दिसंबर को प्रस्तावित बैठक में विपक्ष के सभी बड़े नेताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करने के प्रयास हो रहे हैं। बैठक के लिए कांग्रेस, सपा, बसपा, टीडीपी, एनसीपी, टीएमसी, पीडीपी, एनसी, राजद, जदएस, डीएमके, भाकपा, माकपा, आम आदमी पार्टी समेत अन्य कई विपक्षी दलों ने अपनी स्वीकृति दे दी है। दरअसल, इस सत्र में सरकार और भाजपा की रणनीति राम मंदिर निर्माण मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की है। इसके तहत पार्टी सांसद राकेश सिन्हा समेत कुछ अन्य भाजपा सांसद राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने संबंधी निजी बिल राज्यसभा में पेश करेंगे। दूसरी ओर कांग्रेस सरकार पर पलटवार के लिए पहले दिन से ही किसानों की बदहाली को मुद्दा बनाना चाहती है। वाम दल भी इससे सहमत हैं। जबकि टीडीपी, राजद और टीएमसी कथित तौर पर केंद्र द्वारा सीबीआई के दुरुपयोग के मुद्दे पर हमलावर होना चाहते हैं। 
 
पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने से पहले होने जा रही यह बैठक लोकसभा चुनाव के लिए महागठबंधन की नींव रखने की कवायद भी है। हालांकि बसपा प्रमुख मायावती और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस बैठक में शामिल होने को लेकर अभी असमंजस बना हुआ है। पिछले दिनों दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान विपक्ष के कई नेताओं ने एक मंच पर आकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया था। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पहल पर हो रही इस बैठक में विपक्ष के महागठबंधन बनाने की पहल तेज की जाएगी। हालांकि इस महागठबंधन का स्वरूप बहुत कुछ पांच राज्यों के चुनाव नतीजों से भी तय होगा।
 
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। अभी एनडीए अथवा यूपीए के खेमे में खड़े दल पाला भी बदल सकते हैं। यदि कांग्रेस के पक्ष में परिणाम आते हैं तो तय है कि राहुल गांधी इस महागठबंधन के निर्विरोध नेता हो जाएंगे। लेकिन उलट आने पर कांग्रेस को विपक्षी दलों के सामने झुकना पड़ सकता है। इसी तरह भाजपा के पक्ष में आने पर मोदी की रायसीना हिल्स लौटने की संभावना बढ़ जाएगी, लेकिन विपरीत आने पर भाजपा में उनकी कार्यशैली से नाराज नेता अपनी आवाज बुलंद करने लगेंगे। इसलिए सभी को 11 दिसंबर को नतीजे आने का इंतजार है। कभी एनडीए के संयोजक रह चुके चंद्रबाबू नायडू इस मुहिम में लगे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी नायडू का साथ दे रही हैं। नायडू चाहते हैं कि विपक्षी दलों के प्रमुख नेता इस बैठक में मौजूद रहें।
 
मोदी सरकार के पिछले साढ़े चार साल में कांग्रेस भाजपा को घेरने में असफल ही दिख रही थी। ले-देकर कांग्रेस राफेल विमान डील पर मोदी सरकार को सड़क से लेकर संसद तक घेरती दिख रही थी। राहुल गांधी से लेकर तमाम कांग्रेस के नेता राफेल विमान डील में घोटाले की बात कहकर मोदी सरकार पर कीचड़ उछाल रहे हैं। राहुल गांधी तो सीधे प्रधानमंत्री मोदी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। पांच राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान भी कांग्रेस के लगभग हर मंच व सभा में राफेल की गूंज सुनाई दी। यह माना जा रहा था कि कांग्रेस संसद के शीतकालीन सत्र में राफेल का मुद्दा पूरे जोश-खरोश के साथ उठाएगी। लेकिन इन सबके बीच राफेल विमान खरीद में भ्रष्टाचार के कांग्रेसी आरोपों की काट के लिये मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के शासन काल में अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे में बिचौलिए का धंधा करने वाले ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल को दबोचकर कांग्रेस का मुंह बंद कराने की तैयारी कर ली है। 3000 करोड़ के इस सौदे में लगभग 300 करोड़ रु. की रिश्वत बांटने वाले इस दलाल को दुबई से पकड़ कर अब दिल्ली ले आया गया है। जांच ब्यूरो के अधिकारी इससे अब सारी सच्चाई उगलवाएंगे। फौज के लिए खरीदे गए हेलिकॉप्टरों के सौदे में किस नेता और किस अफसर को कितने रुपये खिलाए गए हैं, ये तथ्य अब इस मिशेल से उगलवाए जाएंगे।
 
मिशेल के पकड़े जाने से पूर्व अगस्ता-वेस्टलैड कंपनी के जो अधिकारी पकड़े गए थे, उनकी डायरियों से कुछ नाम उजागर हुए हैं। उन नामों को सोनिया गांधी के परिवार से जोड़ा गया था। हमारी सेना के एक आला अधिकारी पर भी रिश्वतखोरी के आरोप हैं। मिशेल के जांच एजेंसियों के हत्थे चढ़ने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में यह जबर्दस्त हथियार आ गया है जिससे वह गांधी परिवार व कांग्रेस पर दबाव बना सकते हैं। सोनिया गांधी परिवार के विरुद्ध पहले ही ‘नेशनल हेरल्ड’ के मामले में आयकर विभाग जांच कर रहा है। अब मोदी ने सोनिया परिवार की तरफ अपनी चुनाव-सभा में नाम लेकर भी इशारा किया है। हो सकता है कि मिशेल जो भी सच उगले, वह कांग्रेस के गले की फांस बन जाए। यदि वह बोफोर्स की तरह सोनिया परिवार को अदालत में अपराधी सिद्ध न कर पाए तो भी चुनाव के अगले छह सात माह में भाजपा के लिए वह रामबाण सिद्ध हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी इतने तीर चलाएंगे कि कांग्रेस का महागठबंधन चूर-चूर हो सकता है। कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने में हर पार्टी सकुचाएगी। मिशेल की गिरफ्तारी के बाद इस बात की ज्यादा संभावना है कि राफेल मुद्दे पर कांग्रेस की आवाज धीमी पड़ जाएगी और संसद में राफेल का ज्यादा शोर-शराबा सुनाई नहीं देगा। 
 
 
जानकारों की मानें तो अगर पांच राज्यों के चुनाव नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं आये तो मोदी सरकार पर राम मंदिर के लिये कानून बनाने का दबाव पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ओर से पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के रवैये के बाद से राम मंदिर पर कानून लाने की मांग ने तेजी पकड़ी है। बीते 25 नवंबर को अयोध्या में धर्मसभा के बाद से अयोध्या मुद्दा लगातार सुर्खियों में है। सूत्रों की मानें तो अंदर ही अंदर भाजपा राम मंदिर के लिये बिल लाने की तैयारियों पर भी काम कर रही है। भाजपा के कई सांसद व नेता दबी जुबान से यह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने तय कर लिया है कि शीतकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए कानून पारित करा लिया जाये। मोदी सरकार ने 16 नवंबर को ही अपने सभी सांसदों को ‘व्हिप‘ जारी करते हुए संसद सत्र के दौरान दिल्ली से बाहर नहीं जाने के निर्देश दिये हैं। असल में राम मंदिर पर कानून लाकर मोदी सरकार जहां अपने वोट बैंक को एकजुट करने की चाल चलेगी वहीं संसद में जब राम मंदिर के कानून को लेकर चर्चा होगी, तब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की असलियत का भी पता चल जायेगा कि वह कितने बड़े जनेऊधारी और शिवभक्त हैं। 
 
 लोकसभा चुनावों से पहले संभवतः यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली इस सरकार का आखिरी पूर्णकालिक सत्र होगा। लिहाजा, इस सत्र में सत्तारुढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। खासकर जब सत्र के पहले दिन ही विधानसभा चुनावों की मतगणना का असर संसद की कार्यवाही पर पड़ेगा। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को ही आएंगे। इस वक्त मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में भाजपा का शासन है जबकि तेलंगाना में टीआरएस और मिजोरम में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। एग्जिट पोल के नतीजे बदलाव व कांटे की टक्कर की तस्वीर पेश कर रहे हैं। मोदी सरकार के लिए शीतकालीन सत्र का शांतिपूर्ण ढंग से चलना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उसके बाद यह सरकार सिर्फ संक्षिप्त बजट सत्र ही बुला पाएगी, जिसमें मई 2019 तक का बजट पारित करना होगा। सरकार इस दौरान लंबित कुछ जरूरी विधेयक भी पारित कराना चाहेगी, जबकि विपक्ष सरकार को घेरना चाहेगा। राम मंदिर, राफेल, अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर जैसे तमाम मुद्दे दिसंबर में दिल्ली की सर्दी के बीच संसद का गर्माने का काम करेंगे।
 
-आशीष वशिष्ठ
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

मुंबई। अभिनेता-कॉमेडियन सुनील ग्रोवर ने कहा है कि सलमान खान ने उनसे कपिल शर्मा के दोबारा आ रहे शो में साथ काम करने को लेकर बात की थी। ऐसी चर्चा है कि कपिल शर्मा के नए कॉमेडी शो के निर्माता सलमान खान दोनों कलाकारों के साथ काम करने के लिये उनका मनमुटाव दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। सलमान की फिल्म 'भारत' में काम कर रहे 41 वर्षीय सुनील ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी सलमान से बात हुई है।

सुनील ने पीटीआई- बताया, 'सलमान सर उस शो का निर्माण कर रहे हैं। मेरी डेट्स कपिल के शो से टकराएंगी क्योंकि मैं सलमान सर की फिल्म में काम कर रहा हूं।" उन्होंने कहा "उन्होंने (सलमान ने) मुझसे दोनों के साथ आने को लेकर संक्षिप्त बातचीत की।" यह पूछे जाने पर कि क्या वह कपिल के साथ दोबारा काम करने के लिये तैयार हैं, सुनील ने कहा, "यह वक्त बताएगा, भगवान बताएगा।

फिलहाल मैं अपने शो पर ध्यान दे रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि मैं हर किसी के चेहरे पर मुस्कान लेकर आउंगा।’’ सुनील अली असगर और उपासना सिंह के साथ खुद का कॉमेडी शो 'कानपुर वाले खुरानाज" लेकर आ रहे हैं। अली असगर और उपासना पहले 'द कपिल शर्मा शो' और 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में भी काम कर चुके हैं। दोनों कलाकार पिछले साल सुनील से झगड़े के बाद कपिल शर्मा से अलग हो गए थे।

मुंबई। फिल्मकार अभिषेक कपूर ने उत्तराखंड सरकार से अपनी फिल्म ‘‘केदारनाथ’’ पर लगा प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया है। हिंदू संगठनों के विरोध के मद्देनजर जिला मजिस्ट्रेट ने उत्तराखंड के सात जिले में सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान अभिनीत ‘‘केदारनाथ’’ पर प्रतिबंध लगा दिया था। कपूर ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से राज्य में फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

निर्देशक कपूर ने ट्वीट किया, ‘‘मैं उत्तराखंड सरकार से आग्रह करता हूं कि मेरी फिल्म केदारनाथ से प्रतिबंध खत्म करें। यह देश के लोगों के बीच शांति और सद्भाव लाने की हमारी एक कोशिश है। इस मौके से हमें वंचित न करें।’’ अदाकारा सारा अली खान ने पीटीआई को एक साक्षात्कार में कहा कि वह प्रतिबंध से निराश हैं क्योंकि फिल्म का विचार लोगों को बांटने का नहीं, एकजुट करने का है।

 

अदाकारा ने कहा, ‘‘फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड में की गयी और वहां पर इसके लिए 40 दिन रहे भी। वहां के बारे में बेहतरीन यादें हैं।

यह बेहद निराशाजनक है कि उन्होंने हमें इतना कुछ दिया लेकिन हम उन्हें कुछ नहीं दे पा रहे। बस इस बात का अफसोस है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘फिल्म बांटने के बारे में नहीं, साथ आने के लिए कहती है। मुझे नहीं पता कि लोग क्यों आहत महसूस कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने फिल्म देखी है।’’

नयी दिल्ली। यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री नवंबर में 3.43 प्रतिशत घटकर 2,66,000 वाहन रह गई। नवंबर 2017 में यह 2,75,440 वाहन थी। वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार नवंबर में कारों की बिक्री मामूली तौर पर घटकर 1,79,783 वाहन रही जो पिछले साल नवंबर में 1,81,435 वाहन थी।
 
 
वहीं मोटरसाइकिल की बिक्री 9.36 प्रतिशत बढ़कर 10,49,659 वाहन रही जो नवंबर 2017 में 9,59,860 वाहन थी।

 

 
दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री नवंबर में 7.15 प्रतिशत बढ़कर 16,45,791 वाहन रही जो पिछले साल इसी अवधि में 15,36,015 वाहन थी। वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री इस दौरान 5.71 प्रतिशत बढ़कर 72,812 वाहन रही। विभिन्न श्रेणियों में वाहन की बिक्री 5.03 प्रतिशत बढ़कर 20,38,015 वाहन रही जो नवंबर 2017 में 19,40,462 वाहन थी।

मथुरा। केंद्रीय गृहमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति, विश्व की श्रेष्ठतम संस्कृति है। समकालीन सभ्यताएं उससे बहुत पीछे हैं। भारत में संस्कारों का बहुत महत्व है और यही संस्कार उसे अन्य सभ्यताओं से ज्यादा महान देश बनाते हैं। उन्होंने बताया कि एप्पल कंपनी के सीईओ स्टीव जॉब्स ने व्हाट्सएप्प और फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से कहा था कि जब कभी आपका मन कमजोर पड़े या व्याकुल हो तो भारत में नैनीताल के नींव करौरी बाबा के आश्रम चले जाना, मन को बहुत शांति मिलेगी और इतनी ऊर्जा का संचार होगा कि फिर कभी विचलन नहीं होगा।

उन्होंने यह सीख यहां एक निजी विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्रों को दी। समारोह में एक अन्य विशिष्ट अतिथि रक्षा अनुसंधान संस्थान के पूर्व महानिदेशक एवं अग्नि मिसाइल एवं सामरिक कार्यक्रम के निदेशक डॉ. वेंकटस्वामी ज्ञान शेखरन ने कहा, ‘पहले की तुलना में आज का शिक्षा तंत्र बहुत सरल हो गया है। आज इंटरनेट के माध्यम से आप किसी भी चीज को आसानी से सीख सकते हैं।’ इस मौके पर डॉ. भाटकर एवं डॉ. शेखरन को ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ की उपाधि प्रदान की गई। इनके अलावा दीक्षांत समारोह में 12 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 12 को रजत पदक, 10 को मेरिट सर्टिफिकेट तथा कुल 3196 को मास्टर एवं बैचलर डिग्रियां प्रदान की गईं।

नयी दिल्ली पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने संशोधित वृद्धि दर के आंकड़ों पर विवाद के बीच इसकी समीक्षा विशेषज्ञों द्वारा कराने की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि संदेह दूर करने और भरोसा कायम करने के लिए ऐसा किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि आंकड़ों को लेकर बनी ‘पहेली’ पर भी चीजें साफ की जानी चाहिए। नीति आयोग की ओर इशारा करते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि ऐसे संस्थान जिनके पास सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना की विशेषज्ञता नहीं है, उनको इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। सुब्रमण्यम ने हाल में अपनी नई किताब ‘आफ काउंसिल: द चैलेंजेस आफ द मोदी जेटली इकनॉमी’ में नोटबंदी की आलोचना की है। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या इस मामले में उनसे सलाह ली गई थी, तो उन्होंने इसका कोई साफ जबाब नहीं दिया। 

सुब्रमण्यम ने पीटीआई भाषा से साक्षात्कार में कहा, ‘‘एक अर्थशास्त्री के रूप में मेरा मानना है कि जीडीपी श्रृंखला की नवनिर्धारित पिछली कड़ियों कुछ ‘पहेली जरुर है जिन्हें स्पष्ट किया जाना चाहिए।’’ चूंकि कुछ चीजों को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है, ऐसे में भरोसा कायम करने और किसी तरह के संदेह को दूर करने के लिए मुझे लगता है कि विशेषज्ञों को इसकी गहन जांच करनी चाहिए और अपना जवाब देना चाहिए।’’ 

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा पिछले महीने जीडीपी की पिछली श्रृंखला के आंकड़ों के दौरान नीति आयोग की मौजूदगी को लेकर पैदा हुए विवाद पर सुब्रमण्यम ने कहा कि आंकड़ें बनाने और उनपर चीजें स्पष्ट करने की मुख्य जिम्मेदारी विशेषज्ञों की है। ‘‘मुझे लगता है कि जीडीपी की गणना काफी तकनीकी काम है और तकनीकी विशेषज्ञों को ही यह काम करना चाहिए। ऐसे संस्थान जिनके पास तकनीकी विशेषज्ञता नहीं हैं उन्हें इससे दूर रखा जाना चाहिए।’’ सीएसओ ने पिछले महीने 2004-05 के बजाय 2011-12 के आधार वर्ष का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के जीडीपी आंकड़ों को घटा दिया था। इस आलोचना पर कि जब वह सरकार के साथ काम कर रहे थे तो उन्होंने नोटबंदी पर कुछ नहीं कहा था और अब वह इस मुद्दे को अपनी किताब बेचने के लिए उठा रहे हैं, सुब्रमण्यम ने कहा कि लोगों को जो कहना हैं वे कहें।

उन्होंने कहा कि अपनी नई किताब के जरिये वह उस पहेली बड़ी पहेली की ओर ध्यान खींच रहा हूं कि 86 प्रतिशत करेंसी बंद हो जाती है और अर्थव्यवस्था पर काफी कम असर पड़ा है। पूर्व सीईए का इशारा था कि क्या अर्थव्यवस्था पर इतना कम असर पड़ना जीडीपी की गणना के मौजूदा तरीके की वजह से है। 

सुब्रमण्यम ने कहा कि अर्थव्यवस्था पर कम असर पड़ने की वजह क्या है? क्या हम जीडीपी का आंकड़ा सही तरीके से नहीं निकाल रहे या हमारी अर्थव्यवस्था काफी ठोस है।’’ सुब्रमण्यम फिलहाल हार्वर्ड केनेडी स्कूल में पढ़ाते हैं। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच हालिया विवाद के बारे में पूछे जाने पर सुब्रमण्यम ने कहा कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को कायम रखा जाना चाहिए क्योंकि जब संस्थान मजबूत होते हैं तभी देश को भी फायदा होता है। देश में बढ़ती असहिष्णुता पर पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि दुनिया भर के देशों में देखा गया है जब देश में अधिक सामाजिक शांति होगी तभी आर्थिक वृद्धि भी बेहतर होगी। 

न्यूयॉर्क। पाकिस्तान आतंकियों को लगातार पनाह दे रहा है, वे आतंकवादी आकर अमेरिकी सैनिकों की हत्या करते हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हैली ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि जब तक पाकिस्तान इस समस्या का समाधान नहीं निकालता है तब तक वॉशिंगटन को उसे एक डॉलर की भी मदद नहीं देनी चाहिए।
हैली ऐसी पहली भारतीय-अमेरिकी हैं जिन्हें अमेरिका में राष्ट्रपति शासन में कैबिनेट पद पर नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को उन देशों को पैसा देने की कोई जरूरत नहीं है जो अमेरिका का अहित चाहते हैं, उसके पीठ पीछे गलत काम करते हैं और ‘‘उसे काम करने से रोकते हैं।’’ 
 

हैली ने अमेरिकी पत्रिका ‘ दी एटलांटिक ’से कहा‘‘ मुझे लगता है कि किन देशों के साथ साझेदारी करना है इस बारे में रणनीतिक रूप से सोचने की जरूरत है मसलन कुछ चीजों पर मिलकर काम करने के लिए हम किन देशों पर भरोसा कर सकते हैं आदि। मुझे लगता है कि हम आंख मूंद कर पैसे को यूं ही जाने देते हैं, यह भी नहीं सोचते कि उसका कुछ फायदा है भी या नहीं। उन्होंने कहा,‘‘ मैं आपको एक उदाहरण देती हूं। पाकिस्तान को ही लीजिए, उन्हें एक अरब डॉलर देते हैं तो भी वे आतंकवादियों पनाह देते हैं और वे आतंकवादी आकर हमारे सैनिकों की हत्या करते हैं।
 
यह बिलकुल भी ठीक नहीं है। जब तक इसमें कोई सुधार नहीं होता तब तक हमें उन्हें एक डॉलर भी नहीं देना चाहिए। बल्कि हमें उस अरब डॉलर का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि यह कोई मामूली राशि नहीं है।’’ इस वर्ष के अंत में हैली संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत का पद छोड़ देंगी। पिछले हफ्ते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हीथर नोर्ट को इस पद के लिए नामित किया था।
लागोस। एमनेस्टी इण्टरनेशनल ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (आईसीसी) से बोको हराम विद्रोहियों के अत्याचारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नाइजीरिया पर गुनहगारों को न्याय के दायरे में लाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। आईसीसी की प्रमुख अभियोजक फातिमा बेंसौदा ने युद्ध में होने वाले अपराधों और हिंसा के दौरान मानवता विरोधी कृत्यों से जुड़े आठ संभावित मामलों में वर्ष 2010 में प्राथमिक जांच शुरू की थी।
 
 
छह मामले जिहादी संबंधी थे, जिनमें नागरिकों की हत्या, बड़ी संख्या में लोगों का अपहरण करना, स्कूलों तथा पूजा के स्थानों पर हमले, यौन हिंसा, साथ ही संघर्ष में बच्चों का उपयोग करना शामिल है। बोको हराम के इस्लामी उग्रवाद में वर्ष 2009 से अभी तक उत्तर पूर्व नाइजीरिया में 27,000 लोगों की हत्या की जा चुकी है और करीब 18 लाख लोग बेघर हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र में मानवीय संकट काफी बढ़ गया है।
 
 
नाइजीरिया के राष्ट्रपति मोहम्मद बुहारी ने जून 2015 में वादा किया था कि मानवाधिकारों के दुरुपयोग के सभी मामलों से निपटने के लिए कानून के शासन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कदम उठाये जाएंगे। बेंसौदा ने पांच दिसम्बर को प्रकाशित हुई अपनी रिपोर्ट में कहा कि नाइजीरिया ने आरोपों की जांच के लिए "ठोस कदम" उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि बोको हराम के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की "ठोस संभावना" दिखाई दी, लेकिन सैनिकों के खिलाफ नहीं "क्योंकि नाइजीरियाई अधिकारी किसी भी ऐसे आरोप को अस्वीकार करते हैं।’’
पांच राज्यों के चुनाव नतीजे मंगलवार हो आ जाएंगे। यदि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सत्ता गई तो उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी। दरअसल कांग्रेस इस ताक में है कि उसकी सरकार बनी तो राज्य के चर्चित नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले की जांच भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो, आर्थिक अपराध शाखा और सीबीआई से कराएगी।
 
 
इस मामले में सामने आई एक डायरी ने कांग्रेस को भाजपा पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। पार्टी के मुताबिक डायरी में मुख्यमंत्री और उनके परिजन सहित कई मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाहों के नाम कोड वर्ड में अंकित हैं। इस मामले में कई महीने बाद खासकर चुनाव के दौरान जांच एजेंसियां कुछ बड़े नौकरशाह के खिलाफ सक्रिय हुईं। इससे पहले छोटे कर्मचारी और अधिकारी ही जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे। 

‘छोटी मछलियों का शिकार कर बड़ों को बचा रहीं जांच एजेंसी’

जांच एजेंसियों को पिछले साल तब बिलासपुर हाईकोर्ट से झटका लगा, जब उनकी ओर से पेश किए गए तीन सरकारी गवाहों को अदालत ने आरोपी बनाने का आदेश दिया था। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस घोटाले का संज्ञान लिया था। 

घोटाले से जुड़ी डायरी सामने लाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे के मुताबिक यह हजारों करोड़ रुपये का घोटाला है और इसमें सरकार के शीर्ष पर बैठे नेता, अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। जांच एजेंसियां बड़े लोगों के बदले छोटी मछलियों का शिकार कर मामले पर पर्दा डाल रही हैं। आरोपों के घेरे में रहे शीर्ष नेता व नौकरशाहों से पूछताछ तक नहीं हुई है।

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