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रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कसडोल सर्किट हॉउस परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान अंतर्गत बरगद का पेड़ लगाया। उन्होंने कहा कि बरगद का पेड़ धार्मिक महत्व क़े साथ बड़ा और छायादार पेड़ होता है। बड़ा होकर बरगद का यह पेड़ इस परिसर को सुशोभित करेगा और शीतल छाया प्रदान करेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण एवं धरती माता क़े प्रति कृतज्ञता प्रकट करने क़े उद्देश्य ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस प्रेरणादायी अभियान को जन अभियान क़े रूप में लेते हुए प्रदेशवासियों से माँ क़े नाम पेड़ लगाने की अपील की है।

इस अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, जिला पंचायत क़े सभापति श्री नवीन मिश्रा, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मीना बार्वे, उपाध्यक्ष श्री रामकुमार साहू, कलेक्टर श्री दीपक सोनी, पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल, श्रीमती श्याम बाई साहू, श्री राजेश जायसवाल, श्री गणेश साहू सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कसडोल सर्किट हॉउस परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान अंतर्गत बरगद का पेड़ लगाया। उन्होंने कहा कि बरगद का पेड़ धार्मिक महत्व क़े साथ बड़ा और छायादार पेड़ होता है। बड़ा होकर बरगद का यह पेड़ इस परिसर को सुशोभित करेगा और शीतल छाया प्रदान करेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण एवं धरती माता क़े प्रति कृतज्ञता प्रकट करने क़े उद्देश्य ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस प्रेरणादायी अभियान को जन अभियान क़े रूप में लेते हुए प्रदेशवासियों से माँ क़े नाम पेड़ लगाने की अपील की है।

इस अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, जिला पंचायत क़े सभापति श्री नवीन मिश्रा, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मीना बार्वे, उपाध्यक्ष श्री रामकुमार साहू, कलेक्टर श्री दीपक सोनी, पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल, सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल, श्रीमती श्याम बाई साहू, श्री राजेश जायसवाल, श्री गणेश साहू सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मंत्री विजय शाह ने सीएम को भेजा प्रस्ताव, 3 जनजातियों को मिलेगा विशेष लाभ

भोपाल । कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने आदिवासी बटालियन बनाने की मांग की है। मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को एक प्रस्ताव देने जा रहे हैं। जिसमें हमने मध्य प्रदेश में विलुप्त होती सहरिया, बैगा और भारिया जनजातीय को मुख्य धारा से जोड़ेंगे। हमने इसके लिए एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। प्रस्ताव में एक बटालियन बनाई जाए, जैसे सिख बटालियन बनी हुई है। जिसके माध्यम से विलुप्त होती जनजाति को रोजगार और मुख्य धारा में जोड़ा जाएगा।
कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कहा कि आने वाले समय में आदिवासी बटालियन बनाई जाएगी। जैसे अन्य बटालियन में बनी है। उन्होंने इस दौरान सिख बटालियन का भी जिक्र किए। उन्होने कहा कि वैसे ही आदिवासी बटालियन का गठन किया जाएगा। आदिवासियों की 46 जातियां हैं। उसमें से तीन जातियां सहरिया ,बैगा और भारिया ऐसी जनजातीय हैं, जो विलुप्त होती जा रही है। उसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 करोड़ रुपए दिया है। उसके लिए हम अलग से विस्तार से आपको बताएंगे कि हम उनके लिए क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की बटालियन बने, उसके लिए भी हमने प्रस्ताव मुख्यमंत्री को देने जा रहे हैं।

बाल-बाल बची युवक की जान, क्रेन की मदद से निकाला कार को


भोपाल। शाहजहानाबाद थाना इलाके में स्थित मुंशी हुसैन खां तालाब में बीती रात उस समय बड़ा हादसा होने से टल गया जब टूटी हुई सड़क पर बरसात के दौरान फैली कीचड़ से एक कार फिसल कर तालाब में उतर गई। घटना के समय कार में युवक सवार था, लेकिन गनीमत रही की कोई जनहानि नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार-शनिवार देर रात तालाब किनारे बनी सड़क से एक कार गुजर रही थी। अचानक ही चलती हुई कार फिसलती हुई तालाब की ओर चली गई। मौके पर मौजूद लोगो का कहना है कि तालाब किनारे की बाउंड्रीवॉल काफी जर्जर होने के साथ ही टूटी हुई है। इस कारण कार फिसलती हुई सड़क से नीचे उतर कर पानी में चली गई। घटना के समय कार में एक युवक ही बैठा था, जो सुरक्षित बाहर निकल गया। बाद में सूचना मिलने पर रात को ही क्रेन की मदद से कार को तालाब से बाहर निकाला गया।

भोपाल । मध्य प्रदेश कांग्रेस के खाते में एक और हार जुड़ गई। दिग्गज नेताओं के दौरे के बाद भी अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व सीएम कमलनाथ, पूर्व सांसद नकुलनाथ समेत कई नेताओं ने प्रचार किया था। 29 लोकसभा सीटों पर हार के बाद भी वापसी नहीं कर सकी। वहीं कांग्रेस ने हार का ठीकरा प्रशासन पर फोड़ा है। पीसीसा चीफ जीतू पटवारी ने इसे पैसे और प्रशासन की जीत पताई है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अमरवाड़ा उपचुनाव को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि अमरवाड़ा उपचुनाव के जो परिणाम आये हैं वह लोकप्रियता और लोकतंत्र की स्वस्थ परंपराओं पर प्रबंधन मैनेजमेंट की विजय है। दलबदलुओं द्वारा राजनैतिक प्रतिबद्धता और विचारों की प्रक्रिया को अमरवाड़ा के मतदाता नियंत्रित करना चाहते थे, किंतु शासन, सत्ता और पैसे के भीषण दुरूपयोग के बावजूद भी इतने कम वोटों का अंतर भाजपा की नैतिक पराजय है। भाजपा ने जिस तरीके से सत्ता, शासन और धनबल का दुरूपयोग कर चुनाव जीता है वह दुर्भाग्यजनक है।

कांग्रेस की पराजय का मुख्य कारण मतों का विभाजन
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस की पराजय का मुख्य कारण मतों का विभाजन है। अमरवाड़ा में गौड़वाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी को भाजपा ने ही एक सोची समझी साजिश के तहत खड़ा किया था ताकि कांग्रेस के मतों को प्रभावित किया जा सके और गौड़वाना गणतंत्र पार्टी को वहां 28000 वोट मिले। पटवारी ने अमरवाड़ा के चुनाव परिणाम को शिरोधार्य करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि अमरवाड़ा में कांग्रेस पार्टी चुनाव जीत रही थी, लेकिन भाजपा ने शासन, प्रशासन का दुरूपयोग कर लोकतंत्र पर बड़ा प्रहार किया है।

पीसीसी चीफ ने कार्यकर्ताओं का बढ़ाया मनोबल
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि कार्यकर्ता निराश न हो हम चुनाव हारे नहीं हैं। भाजपा सत्ता, प्रशासन और धनबल पर चुनाव जीती है। इससे हमें सबक मिला है और आगे सीखने को मिला है। निकट भविष्य में बुधनी, बीना और विजयपुर में भी उपचुनाव होना है हम और अधिक ताकत और एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे और क्षे,त्र की जनता के साथ मिलकर भाजपा को सबक सिखायेंगे।

नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आरोप लगाया था कि दक्षिणी राज्य में विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र धनराशि रोक रहा है। केंद्र सरकार ने उनके इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु में पिछले दिनों योजनाओं के लिए दी गई धनराशि में वृद्धि के बारे में बताया। केंद्र ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के उन आरोपों को खारिज कर दिया है। जिसमें उन्होंने वह दक्षिणी राज्य में विकास परियोजनाओं के लिए धनराशि रोक रहा है। केंद्र सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले 10 वर्षों में तमिलनाडु में रेलवे, राजमार्ग, हवाई अड्डों और सामाजिक एवं ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं के लिए धनराशि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि 2009 से 2014 के बीच रेलवे के विकास के लिए तमिलनाडु को आवंटित बजट औसतन 879 करोड़ रुपये प्रति वर्ष था। जबकि केंद्र सरकार ने 2024-25 के बजट में राज्य के लिए 6,331 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। उन्होंने बताया कि इस रिकॉर्ड बजट के परिणामस्वरूप तमिलनाडु में नई रेलवे लाइनों का निर्माण, विद्युतीकरण, नई ट्रेनों का संचालन, स्टेशनों का विकास और यात्री सुविधाओं में वृद्धि का काम रिकॉर्ड गति से हो रहा है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में राजमार्गों की कुल लंबाई 2014 में 4,985 किलोमीटर से बढ़कर 6,806 किलोमीटर हो गई है। वहीं तमिलनाडु में 2014 से अब तक 64,704 करोड़ रुपये की लागत से 2,094 किलोमीटर लंबाई वाली परियोजनाएं दी गई हैं।" उन्होंने बताया कि 48,425 करोड़ रुपये की लागत से 1,329 किलोमीटर लंबाई वाली परियोजनाएं क्रियान्वयन के अधीन हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र तमिलनाडु में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास में कुल 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है। तमिलनाडु में केंद्र द्वारा 4,000 करोड़ रुपये की पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से दो पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि तमिलनाडु में प्रमुख बंदरगाहों में कुल निवेश 10,168 करोड़ रुपये है। यही नहीं मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) के तहत केंद्र द्वारा तमिलनाडु के लिए 1,574 करोड़ रुपये की 64 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 34 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। रिकॉर्ड के अनुसार पीएम आवास योजना के तहत केंद्र ने पिछले 10 वर्षों में तमिलनाडु में 15 लाख से अधिक घरों के निर्माण के लिए 20,000 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत तमिलनाडु में रेहड़ी-पटरी वालों को 670 करोड़ रुपये के पांच लाख से अधिक ऋण वितरित किए गए हैं। तमिलनाडु के 46 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 11,000 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि जल जीवन मिशन के तहत एक करोड़ से अधिक घरों को नल के पानी के कनेक्शन दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि दक्षिणी राज्य को केंद्र की पीएम उज्ज्वला और पीएम मातृ वंदना योजना के तहत क्रमशः 700 करोड़ रुपये मिले हैं। यही नहीं केंद्र ने तमिलनाडु में मनरेगा के तहत 13,392.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो 2023-24 में देश भर में कुल खर्च का 12.71 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि केंद्र ने तमिलनाडु में 11 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी और 2,145 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की और सभी 11 मेडिकल कॉलेज अब पूरी तरह से काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मुंबई के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह गोरेगांव में एनईएससीओ प्रदर्शनी केंद्र में 29,400 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की ठाणे-बोरीवली और बीएमसी की गोरेगांव मुलुंड लिंक रोड परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, दोनों में दो सुरंगें हैं। एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मध्य रेलवे के कल्याण यार्ड रिमॉडलिंग और नवी मुंबई के तुर्भे में गति शक्ति मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही वह लोकमान्य तिलक टर्मिनस में नए प्लेटफॉर्म और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस में प्लेटफॉर्म 10 और 11 के विस्तार को देश को समर्पित करेंग। एमएमआरडीए के एकप्रवक्ता ने कहा कि ठाणे-बोरीवली सुरंग परियोजना 16,600 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से गुजरने वाली ट्यूब सुरंगें बोरीवली में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और ठाणे में घोड़बंदर रोड के बीच सीधा संपर्क बनाएंगी।उन्होंने आगे बताया कि 11.8 किलोमीटर लंबी बोरीवली ठाणे लिंक रोड बनने से ठाणे से बोरीवली की दूरी 12 किलोमीटर कम हो जाएगी और एक घंटे समय भी कम लेगागा। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री पहली बार मुंबई आ रहे हैं। राज्य सरकार का मानसून सत्र 12 जुलाई को समाप्त हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी आज विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने के बाद पश्चिमी उपनगर के नेस्को सेंटर (गोरेगांव) में एक सभा को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बैठक की तैयारियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन 6 में से सिर्फ 2 सीटें जीतने में कामयाब रहा। प्रधानमंत्री के मु्ंबई दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किया जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि वह मुकेश अंबानी के छोटे बेट अनंत अंबानी की शादी में शिरकत कर सकते हैं। जिसकों देखते हुए मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में सुरक्षा को कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। ट्राइडेटन होटल के आसपास की बिल्डिंग को सुरक्षित किया जा रहा है।पीएम मोदी आज विकास कार्यों की सौगात देंगे

शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने कांग्रेस सरकार द्वारा साल 1975 में देश में आपातकाल लागू करने के फैसले का बचाव किया है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का एलान किया। इस पर संजय राउत ने केंद्र पर हमला बोला और दावा किया कि अगर उन परिस्थितियों में अटल बिहारी वाजपेयी भी प्रधानमंत्री होते तो वह भी आपातकाल लागू कर देते। संजय राउत ने कहा 'आपातकाल लागू हुए 50 साल बीत चुके हैं और लोग भी आपातकाल को भूल चुके हैं। देश में आपातकाल क्यों लागू किया गया? कुछ लोग देश में अराजकता फैलाना चाहते थे। रामलीला मैदान से खुलेआम एलान किया गया, हमारे जवान, सेना को कहा गया कि वह सरकार के आदेश न मानें...ऐसी परिस्थिति में अगर अटल बिहारी वाजपेयी भी प्रधानमंत्री होते तो वो भी आपातकाल लागू कर देते। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला था। देश में कुछ लोग बम बना रहे थे और विभिन्न स्थानों पर बम फट रहे थे। बालासाहब ठाकरे ने खुलकर आपातकाल का समर्थन किया था। आरएसएस ने भी उसका समर्थन किया था।' शिवसेना यूबीटी नेता ने कहा 'बालासाहब ठाकरे ने खुलकर साल 1975 में लगाए गए आपातकाल का समर्थन किया था। उन्होंने इंदिरा गांधी का भी समर्थन किया था और जब वे मुंबई आईं थी तो उनका स्वागत किया गया था। उन्होंने आपातकाल का समर्थन इसलिए किया था क्योंकि उन्हें लगा था कि देश में अराजकता को नियंत्रित करने की जरूरत है। इसमें क्या गलत था?' संजय राउत ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि 'भाजपा के बीते 10 वर्षों में जो हुआ, उसे भी याद रखा जाएगा। वे भी संविधान के रक्षक नहीं हैं।'

रुवनंतपुरम। केरल के राज्यपाल और केरल सरकार के बीच मनमुटाव बना हुआ है। अब हाल ही में राज्यपाल ने केरल सरकार के फैसलों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वे ऐसे कई काम करती है जो कि कानून के मुताबिक नहीं होते हैं। दरअसल केटीयू के कुलपति के चयन के लिए कुलाधिपति के नामित व्यक्ति के बिना ही समिति गठित कर दी थी। कुछ समय से राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों सहित नियुक्तियों के मुद्दे पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और वामपंथी प्रशासन पिछले कुछ समय से आमने-सामने हैं। जहां एक ओर राज्यपाल ने सरकार पर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है, वहीं वाम मोर्चे ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान राज्य में उच्च शिक्षा का भगवाकरण करने के लिए आरएसएस और संघ परिवार के एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शनिवार को कहा कि केरल सरकार कई ऐसे काम करती है जो कानून के मुताबिक नहीं होते। दरअसल एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (केटीयू) के कुलपति का चयन करने के लिए कुलाधिपति के नामित व्यक्ति के बिना खोज समिति बनाने को लेकर राज्यपाल नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार पर निर्भर करता है कि वे क्या करना चाहते हैं। वे कई ऐसे काम कर रहे हैं जो कि कानून के मुलाबिक नहीं हैं। बता दें कि राज्य सरकार ने शुक्रवार को कथित तौर पर केटीयू के कुलपति का चयन करने के लिए पांच सदस्यीय खोज-सह-चयन समिति का गठन किया था। इस पूरे मामले पर केरल के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, आखिरकार, इस मामले का निपटारा तो अब अदालत ही करेगी।

अब जम्मू- कश्मीर को भी दिल्ली जैसे संवैधानिक अधिकार मिलेंगे। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल को भी अब दिल्ली के एलजी की तरह की प्रशासनिक शक्तियां मिलेंगी। अब जम्मू-कश्मीर में भी सरकार बिना उपराज्यपाल की इजाजत के ट्रांसफर और पोस्टिंग नहीं कर पाएगी। एजेंसी एएनआई के अनुसार, गृह मंत्रालय (एमएचए) ने उपराज्यपाल को अधिक शक्ति देने के लिए जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन किया। एमएचए ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 55 के तहत संशोधित नियमों को अधिसूचित किया है, जिसमें एलजी को अधिक शक्ति देने वाली नई धाराएं शामिल की गई हैं। आपको बता दें कि जब से जम्मू और कश्मीर का पुनर्गठन किया गया है तब से वहां चुनाव नहीं हुए हैं। लेकिन जब भी जम्मू और कश्मीर में चुनाव होंगे, तो सरकार का गठन होगा। चुनी हुई सरकार से अधिक शक्तियां उपराज्यपाल के पास ही रहेंगी। यह शक्तियां वैसी ही होंगी जैसे दिल्ली के उपराज्यपाल के पास हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) की धारा 55 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए नियम में संशोधन को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसे अधिनियम की धारा 73 के तहत जारी 31 अक्तूबर 2019 की उद्घोषणा के साथ पढ़ा गया है। एमएचए की ओर से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि इन नियमों को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर सरकार के कामकाज का लेन-देन (दूसरा संशोधन) नियम, 2024 कहा जा सकता है। यह संशोधन आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि 12 जुलाई को लागू होंगे।

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