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Now you must dream of becoming ‘Crorepati Didis’: Chief Minister Shri vishnu Deo Sai

Raipur, May 7, 2026/ In the forested interiors of Kabirdham district, a Jan Chaupal under a mango tree turned into a moment of quiet affirmation for women whose lives have changed through self-help groups and livelihood support schemes.

During his visit to Kamrakhol in Lokhan gram panchayat under Sushasan Tihar on May 4, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai sat among villagers and interacted with women who spoke openly about their journey from financial hardship to self-reliance. For many in the remote forest village, the interaction was more than a meeting with Chief Minister. It was a rare moment where years of struggle, labour and gradual progress found recognition.

As women shared their experiences, conversations moved from stories of limited opportunities and economic distress to how self-help groups under the Bihan scheme had helped them build livelihoods and financial confidence. When informed that several women in the area had become “Lakhpati Didis” through the initiative, Shri Sai encouraged them to think beyond small milestones. “You have changed your lives through hard work and confidence. Don’t stop here. Think bigger and move ahead. Now you must dream of becoming ‘Crorepati Didis’,” he told the gathering. The remark drew smiles and applause from women seated at the chaupal.

Among them was Smt. Kachra Telgam from Kukdoor village, who shared how a ₹2 lakh loan under the Bihan scheme helped her purchase shuttering plates and begin a construction material business. She said the early days were difficult, but persistence gradually changed her financial condition. Today, she owns nearly 1,700 square feet of shuttering material and has contributed to the construction of more than 22 houses. The business now earns her an annual income of around ₹2.5 lakh to ₹3 lakh.

Smt. Kachra Telgam said she was once confined largely to household responsibilities, but now contributes significantly to the family’s income, children’s education and savings for the future.
“The way Chief Minister spoke to us felt personal. It felt like someone had truly seen and understood our efforts,” she said, adding that the interaction gave her confidence to aim higher.

The visit highlighted the growing role of women-led self-help groups in bringing economic change to remote tribal and forest regions. In villages once marked by limited livelihood opportunities, women are increasingly emerging as drivers of local economic activity.

Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai said the government’s priority is to ensure that women in remote areas become self-reliant and move ahead with dignity. “When women become economically strong, families and society become stronger,” he said.

In the villages of Kabirdham’s forest belt, the gathering beneath the mango tree has now come to symbolise more than a government outreach event. For many women there, it marked the beginning of larger ambitions and a renewed sense of possibility.

Major Push to Resolve Drinking Water Crisis in Remote and Hilly Villages

Collector Gives Instructions to Ensure Completion of Works Within One Month

Raipur, May 7, 2026/ In a significant step towards ensuring permanent relief from drinking water scarcity in remote and hilly Korwa settlements of Surguja district, the administration has undertaken the work of digging 113 handpumps and borewells across the region. The initiative would ease the long-standing hardship faced by villagers who have been dependent on traditional water sources for their daily needs.

It is noteworthy that Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai had taken serious note of the drinking water problems prevailing in Surguja district and instructed the district administration to initiate immediate and effective action. Chief Minister Shri Sai had emphasised that people residing in remote forest and tribal regions should not remain deprived of basic amenities. He had further underlined that ensuring the benefits of government welfare schemes, especially essential services, reach the last person remains the government’s highest priority.

Acting promptly on the Chief Minister’s directives, Surguja Collector and District Mineral Foundation Trust Chairman Shri Ajit Vasant has instructed the concerned departments to complete all 113 handpump and borewell works within one month.

The Collector informed that the ground-level survey for the proposed works has already been completed. Under the District Mineral Foundation (DMF) fund, 113 handpump and borewell excavation works will be carried out in various development blocks, including 34 in Lundra, 22 in Lakhanpur, 20 in Mainpat, 16 in Sitapur, 11 in Ambikapur, 6 in Batauli, and 4 in Udaipur.

The proposal received approval during the Governing Council meeting of the District Mineral Foundation Trust held on April 24, in the presence of Tourism Minister Shri Rajesh Agrawal, Lundra MLA Shri Prabodh Minj and other members.

The Collector has also directed all Janpad Panchayat Chief Executive Officers to ensure speedy execution of handpump and borewell excavation works on priority so that a long-term drinking water arrangement can be established in these remote and hilly Korwa habitations within the stipulated timeframe.

The sensitive and proactive initiative of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai is expected to bring substantial relief to thousands of residents across hundreds of villages in the remote forested regions of the district, where the drinking water crisis has persisted for years.

ऑपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने वीर सैनिकों को किया नमन

नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है - मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर 7 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि नए भारत की अटूट इच्छाशक्ति, निर्भीक संकल्प और निर्णायक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आज से एक वर्ष पूर्व पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों द्वारा किए गए घिनौने हमले ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था, लेकिन भारत ने उस चुनौती का ऐसा जवाब दिया, जिसने इतिहास में शौर्य और संकल्प का स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि नया भारत अब आतंकवाद को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भारत चुपचाप सहने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि मातृभूमि की ओर उठने वाली हर बुरी नजर का निर्णायक और प्रभावशाली जवाब देने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान ने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बेजोड़ रणनीति और राष्ट्र के प्रति असीम समर्पण को अमर कर दिया। जिस सटीकता, दृढ़ता और प्रभावशाली क्षमता के साथ आतंक के सरपरस्तों और उनके आकाओं को जवाब दिया गया, उसने वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य शक्ति और मजबूत नेतृत्व की नई पहचान स्थापित की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर सिद्ध भी किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेनाओं की संयुक्त शक्ति, अत्याधुनिक युद्ध तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक और प्रभावी प्रतिकार भी करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने “ऑपरेशन सिंदूर” की प्रथम वर्षगांठ पर राष्ट्र के उन सभी वीर सपूतों को कोटिशः नमन किया, जिनके शौर्य और पराक्रम ने हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा किया है। उन्होंने पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय सेना का पराक्रम, राष्ट्रभक्ति और बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

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​रायपुर,07 मई 2026/

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह हिस्सा, जिसे कभी 'अबूझ' (अनजान) कहा जाता था, अब डिजिटल संकेतों से जुड़कर अपनी नई पहचान लिख रहा है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड में मोबाइल टावर की स्थापना ने सदियों के संचार सन्नाटे को तोड़ दिया है। अब यहाँ के ग्रामीण अपनों से बात करने के लिए पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर नहीं चढ़ते, बल्कि घर बैठे दुनिया से जुड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में संचार क्रांति का यह अध्याय वास्तव में सराहनीय है। 'नो सिग्नल' से सीधे 'कनेक्टिविटी' तक का यह सफर केवल तकनीक का नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का है।

​पहाड़ियों की चढ़ाई से मिली मुक्ति

​ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम ताहकाडोंड और उसके आसपास के क्षेत्र लंबे समय से 'नो नेटवर्क ज़ोन' में थे। ग्रामीणों के लिए एक फोन कॉल करना किसी चुनौती से कम नहीं था; उन्हें सिग्नल खोजने के लिए ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक आना पड़ता था। टावर की स्थापना के साथ ही अब ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा जैसे गांवों के लगभग 400 ग्रामीण सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं।

​विकास की नई जीवनरेखा: आपातकालीन और प्रशासनिक सेवाएँ

​कनेक्टिविटी का यह विस्तार केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन रक्षक भी सिद्ध हो रहा है।
​अब आपात स्थिति में ग्रामीण तुरंत 108 एंबुलेंस को कॉल कर सकते हैं। त्वरित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होने और समय पर इलाज मिलने से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी और गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में मदद मिलेगी।
​इंटरनेट के माध्यम से ग्रामीण अब ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन घर बैठे कर पा रहे हैं। यह डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम का संकेत है। ​पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस के साथ शासन की योजनाओं की जानकारी अब सीधे हितग्राहियों तक पहुँच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है और कार्यों में तेजी आई है।

​बदलती सामाजिक-आर्थिक तस्वीर

अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल टावर की स्थापना शासन की सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल संचार सुविधा है, बल्कि विकास का एक सशक्त माध्यम है।
​ताहकाडोंड के ग्रामीणों ने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे एक नए युग की शुरुआत बताया है। मोबाइल नेटवर्क आने से न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों के बाजार और युवाओं के लिए सूचना के नए द्वार भी खुलेंगे। शासन का यह प्रयास सिद्ध करता है कि भौगोलिक बाधाएं अब विकास के आड़े नहीं आएंगी।

प्रदेश के कुल चने का 50% अकेले खरीदा

​रायपुर, 07 मई 2026/
छत्तीसगढ़ में 'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना' को धरातल पर उतारने में धमतरी जिला एक मॉडल बनकर उभरा है। सहकारी क्षेत्र को मजबूती देने वाली केंद्र और राज्य शासन की इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत धमतरी ने न केवल भंडारण बुनियादी ढांचे में विस्तार किया है, बल्कि चना खरीदी के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए पूरे प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है।

​4 पैक्स समितियों में बनेंगे 2500 मीट्रिक टन के महा-गोदाम

​योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु NCCF रायपुर द्वारा जिले की चार प्रमुख प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) को 'गोदाम हायरिंग एश्योरेंस लेटर' जारी कर दिए गए हैं। अंवरी,​ कोसमर्रा,​ पोटियाडीह (अमदी) और ​कोलियारी समितियों में अत्याधुनिक भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक गोदाम की क्षमता 2500 मीट्रिक टन होगी, जिसे विशेष रूप से चने के वैज्ञानिक भंडारण के लिए तैयार किया जा रहा है।

​चना खरीदी में धमतरी का दबदबा: लक्ष्य के पार पहुँचने की तैयारी

​धमतरी जिले ने कृषि क्षमता और प्रशासनिक मुस्तैदी का लोहा मनवाते हुए अब तक 97 हजार क्विंटल चने की खरीदी पूरी कर ली है। ​प्रारंभिक लक्ष्य 1 लाख क्विंटल रखा गया है,जिसमे
​वर्तमान स्थिति लक्ष्य के करीब होने के बावजूद खरीदी निरंतर जारी है। पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में हुई कुल चना खरीदी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले धमतरी जिले से दर्ज किया गया है।

​प्रशासनिक सक्रियता और आगामी रणनीति

​योजना को गति देने के लिए एग्रीमेंट और एमओयू की प्रक्रिया तेजी से पूर्ण कर ली गई है। जमीनी स्तर पर तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु NCCF मुख्यालय, नई दिल्ली के साथ आरसीएस (RCS) अधिकारियों और पैक्स प्रबंधकों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय बैठक की तैयारी की जा रही है।
​ गौरतलब है कि धमतरी जिले ने चना खरीदी और भंडारण व्यवस्था में जो उत्कृष्टता दिखाई है, वह किसानों की मेहनत और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है। इससे खाद्यान्न की बर्बादी में रोक लगेगी और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलेगा।

​क्या है 'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना'?

​भारत सरकार द्वारा 31 मई 2023 को शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में ही PACS के माध्यम से भंडारण, प्रोसेसिंग यूनिट और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करना है। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी, बल्कि भंडारण के अभाव में होने वाली अनाज की बर्बादी पर भी लगाम लगेगी।
​धमतरी की यह सफलता आज प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।

सुशासन तिहार में वनांचल की महिलाओं से आत्मीय संवाद: संघर्ष की कहानियों में दिखी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की तस्वीर

रायपुर 7 मई 2026/कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था।

आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे।

गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं - कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर।

जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा -
“आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।”

मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। श्रीमती कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है।

कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढ़ने का हौसला मिला है।

सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है।

कबीरधाम के इन वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल महिलाओं के भीतर जगे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है। “लखपति दीदी” से “करोड़पति दीदी” तक का यह सपना अब गांव-गांव में नई उम्मीद बनकर फैल रहा है।

 

कलेक्टर ने सम्बंधित विभाग से कहा एक माह के भीतर पूर्ण करें कार्य, ग्रामीणों को पेयजल से मिलेगी राहत

जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम


अम्बिकापुर, 07 मई 2026/ जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

विगत दिनों मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष श्री अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है।

कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को निर्देशित किया है कि हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री श्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ो गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।

 
छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, ₹25 लाख तक की संपत्ति खरीद पर मिलेगा लाभ
 
छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं के सम्मान और कल्याण को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने ₹25 लाख तक की संपत्ति की रजिस्ट्री पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया  है। माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में पंजीयन मंत्री श्री ओपी चौधरी की पहल पर विभाग द्वारा यह प्रस्ताव तैयार किया गया ।  अधिसूचना जारी होने पश्चात सैनिक एवं भूतपूर्व सैनिको को मिलने वाली यह छूट प्रभावशील हो गई है।
अधिसूचना के अनुसार, सैनिकों एवं भूतपूर्व सैनिकों  एवं दिवंगत होने पर उनके जीवन साथी को इस छूट की पात्रता केवल एक बार के लिए होगी।  ₹25 लाख तक की सीमा तक यह छूट मिलेगी । यदि संपत्ति का मूल्य इससे अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि पर नियमानुसार स्टाम्प शुल्क देय होगा।
देश की सेवा करने वाले सैनिकों के योगदान को सम्मान देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय है।
वर्तमान में अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय विलेखों पर  लगभग 5 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क देय होता है, अब इस नई व्यवस्था से पात्र हितग्राहियों को स्टाम्प शुल्क में राहत मिलेगी। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जन्मभूमि से दूर रहकर सेवा करने वाले सैनिकों को आवास क्रय लागत में कमी की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि छूट का लाभ लेने के लिए छत्तीसगढ़ का मूल निवासी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही, लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकेगा, जिसके लिए शपथ पत्र देना होगा तथा संबंधित सैनिक/पूर्व सैनिक या विधवा होने के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
 
महिला सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय
 
छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उनके नाम पर कराए जा रहे भूमि रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी करने का फैसला लिया है। माननीय मुख्यमंत्री जी श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में माननीय पंजीयन मंत्री श्री ओ पी चौधरी की पहल पर यह प्रस्ताव तैयार किया गया .मंत्रिपरिषद द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी दिेये जाने के उपरान्त अधिसूचना  प्रकाशन से यह छूट प्रभावशील हो गई है।इस निर्णय से  महिलाओं के नाम संपत्ति के रजिस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा जिससे महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा.  
अधिसूचना के अनुसार, महिलाओं के पक्ष में निष्पादित अचल संपत्ति अंतरण से जुड़े दस्तावेजों पर लागू पंजीयन शुल्क में पचास फीसदी की छूट दी जाएगी। वर्तमान में ऐसे दस्तावेजों पर संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर 4 प्रतिशत की दर से पंजीयन शुल्क लिया जाता है। अब महिलाओं के नाम पर होने वाले रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क दो प्रतिशत लगेगा।
 
महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को बढ़ावा देने के लिए यह एक दूरदर्शी और सकारात्मक पहल है। वर्ष 2024-25 में महिलाओं के नाम पर 82,755 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है।नए प्रावधान के लागू होने से अनुमानित रूप से करीब 200 करोड़ रुपये के राजस्व में कमी आ सकती है।राजस्व में कमी के बावजूद महिलाओं को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है।इस निर्णय से महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और समाज में उनकी आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी।

 

Chief Secretary Shri Vikas Sheel Takes Charge of Preparations, Issues Strict Directives on Security and Facilities

Raipur, 

The State administration has geared up for the successful organization of the upcoming Indian Premier League T20 matches scheduled to be held on May 10 and 13 at the Shaheed Veer Narayan Singh International Cricket Stadium in Nava Raipur. Chief Secretary Shri Vikasheel on Wednesday chaired a high-level review meeting with senior officials from various departments at Mahanadi Bhawan and issued detailed instructions to ensure flawless arrangements. Following these directives, the administration is fully prepared to host this major cricketing event and provide spectators with a safe and enjoyable experience.

Match Schedule

On May 10, 2026, Royal Challengers Bengaluru will face Mumbai Indians, while on May 13, 2026, Royal Challengers Bengaluru will take on Kolkata Knight Riders.

Special Focus on Security and Traffic Management

Chief Secretary Shri Vikasheel emphasized that the safety of thousands of spectators and smooth traffic management are the administration’s top priorities. In view of the large influx of visitors arriving in Raipur after online ticket bookings, the Police Commissioner, Raipur has been directed to prepare a detailed action plan. A dense network of CCTV cameras will be installed in parking areas and around the stadium. Barricading and parking management will be jointly handled by the police, NRDA, and the Board of Control for Cricket in India.

Emergency Services

Dedicated emergency routes will be marked for fire brigades and ambulances to ensure immediate response in case of any contingency. For smooth coordination, a high-level executive committee has been constituted under the chairmanship of the Collector, Raipur. It includes the Superintendent of Police (Rural), Municipal Commissioner, Director (Sports and Youth Welfare), Regional Transport Officer (RTO), CEO of NRDA, and other senior officials. While the overall responsibility rests with the Board of Control for Cricket in India and the Chhattisgarh State Cricket Association, the administration will extend full support in arranging drinking water, electricity, roads, and healthcare services.

Availability of Basic Facilities

The Public Health Engineering (PHE) Department has been tasked with ensuring uninterrupted and adequate water supply at the stadium. The power department, including Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited, has been directed to ensure uninterrupted electricity during the matches.

The meeting was attended by PWD Secretary Dr. Kamalpreet Singh, PHE Secretary Shri Mohammad Qaiser Abdul Haq, Sports Secretary Shri Yashwant Kumar, Collector Raipur Shri Gaurav Singh, and senior officials from police, energy, transport, tourism, and CSPDCL. Representatives from the Board of Control for Cricket in India and the Chhattisgarh State Cricket Association also shared updates on their preparations.

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