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छत्तीसगढ़ चुनाव के दूसरे चरण के लिए 1101 उम्मीदवार मैदान में, धुआंधार प्रचार जारी
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए 1101 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनके भाग्य का फैसला इस महीने की 20 तारीख को यहां के मतदाता करेंगे। राज्य में चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के निर्वाचन वाले 72 विधानसभा क्षेत्रों में नामांकन पत्रों की समीक्षा के बाद कुल 1,249 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र विधिमान्य पाए गए। दूसरे चरण के निर्वाचन के लिए 26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के बाद से दो नवम्बर तक चली नामांकन दाखिले की प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा कुल 2,655 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। 

सोमवार पांच नवम्बर को नामांकन वापस लेने की अंतिम के बाद कुल 1,101 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। दूसरे चरण के निर्वाचन के लिए 19 जिलों की 72 विधानसभा क्षेत्रों में 20 नवम्बर को मतदान और 11 दिसम्बर को मतगणना होगी। राज्य में हो रहे विधानसभा चुनाव में दो चरणों में मतदान होगा। दोनों चरणों में कुल 1,291 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पहले चरण के तहत, नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के सात जिलों और राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के​ लिए 12 नवंबर को मतदान होगा। पहले चरण में मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके मंत्रिमंडल के दो सदस्यों और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करूणा शुक्ला के भाग्य का फैसला होगा।
 
वहीं दूसरे चरण में राज्य के नौ मंत्री रायपुर दक्षिण से बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम से राजेश मूणत, बिलासपुर से अमर अग्रवाल, बैकुंठपुर से भैयालाल राजवाड़े, प्रतापपुर से रामसेवक पैकरा, मुंगेली से पुन्नूलाल मोहिले, भिलाई नगर से प्रेम प्रकाश पांडेय, नवागढ़ से दयालदास बघेल और कुरूद से अजय चंद्राकर चुनाव मैदान में हैं। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धर्मलाल कौशिक बिल्हा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।

दूसरे चरण में ही पाटन से प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल, अंबिकापुर से विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव, दुर्ग ग्रामीण से कांग्रेस सांसद ताम्रध्वज साहू और सक्ती से पूर्व केंद्रीय मंत्री चरणदास महंत भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं जनता कांग्रेस छत्तीगसढ़ (जे) से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी मारवाही सीट से, उनकी पत्नी रेणु जोगी कोटा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। जोगी की बहू ऋचा जोगी बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर अकलतरा सीट से चुनाव मैदान में है।
 
राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी का गठन करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी छत्तीसगढ़ में बहुजन समाज पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य में दूसरे चरण के मतदान के लिए रायपुर दक्षिण सीट में सबसे अधिक 46 उम्मीदवार और बिंद्रानवागढ़ में सबसे कम छह उम्मीदवार मैदान में हैं। छत्तीसगढ़ की 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस महीने दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए नक्सल प्रभावित बस्तर ​क्षेत्र के सात जिले और राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए 12 तारीख को मतदान होगा। वहीं दूसरे चरण में 72 सीटों के लिए 20 तारीख को मत डाले जाएंगे।

राज्य में 90 में से 10 सीटें अनुसूचित जाति के लिए तथा 29 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 1,85,59,936 मतदाता हैं। इनमें से पुरूष मतदाताओं की संख्या 92,95,301 और महिला मतदाताओं की संख्या 92,49,459 है। वहीं 1059 तृतीय लिं​ग के मतदाता हैं। छत्तीसगढ़ में 19 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां 16 उम्मीदवार से ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हैं। इन सीटों पर दो से अधिक ईवीएम लगाये जाएंगे। तीन विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों की संख्या 32 से अधिक होने के कारण तीन बैलेट यूनिट लगाई जाएंगी।
 
छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव में जीत ​हासिल करने के लिए राज्य के सभी राजनीतिक दल धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। राज्य में पिछले 15 वर्षों से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री संतोष पांडेय ने कहा है कि उनकी पार्टी राज्य में चौथी बार सरकार बनाएगी। इस बार पार्टी ने 65 सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है। पांडेय ने बताया कि पार्टी के कार्यकर्ता घर घर जाकर मतदाताओं को केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धि को बता रहे हैं। वहीं ​विपक्षी दल कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस ने इस चुनाव में ​वरिष्ठों के साथ साथ युवाओं को मौका दिया है। उनकी पार्टी रमन सिंह सरकार की असफलता के बारे में मतदाताओं को बता रही है। इस बार जनता बदलाव चाहती है और उम्मीद है कि इस चुनाव में कांग्रेस की जीत होगी और वह सरकार बनाएगी।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन के दो आतंकी ढेर हो गए। उनमें से एक आतंकी, पहले सेना में था जो बाद में आतंकी संगठन में शामिल हो गया था। पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के जैनापोरा के सफानगरी इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने मंगलवार को तड़के घेराबंदी की और तलाशी अभियान चलाया था।

उन्होंने बताया कि जब तलाशी अभियान चल रहा था तब छिपे हुए आतंकियों ने बल पर गोलीबारी की। जवानों ने जवाबी गोलीबारी की जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई और दो आतंकी मारे गए। मारे गए आतंकियों की पहचान मोहम्मद इदरिस सुल्तान उर्फ छोटा अबरार और आमिर हुसैन राथर उर्फ अबु सोबान के रूप में की गई। सुल्तान सफानगरी शोपियां का रहने वाला था जबकि सोबान अवनीरा शोपियां का रहने वाला था।

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधान सभा और लोकसभा चुनावों में राफेल, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों की काट निकालने के लिए ही राम मंदिर का मुद्दा उछाला है। आगामी विधान सभा और लोकसभा चुनावों को लेकर जो रणनीति तैयार की गयी है, राममंदिर का मुद्दा उसी का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट में मामला होने और केंद्र में सत्तारुढ़ होने के कारण भाजपा इस पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बच रही है। राम मंदिर मुद्दे की गेंद संघ परिवार के पाले में डाली गई है। सोची−समझी रणनीति के तहत संघ परिवार को इसमें आगे लाया गया है। यही वजह है कि संघ के प्रचारक सहित अन्य आनुषांगिक संगठन इस मुद्दे पर आगामी मोर्चा संभाले हुए हैं, वहीं भाजपा के मंत्री और पदाधिकारी इस मुद्दे पर तोतारटंत जवाब, जनभावना से जुड़ा हुआ मुद्दा है, जैसी दलील देकर इसमें सीधे दखल देने से बचने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा को यह अच्छी तरह पता है कि अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इसमें सीधे दखलंदाजी नहीं की जा सकती। इसमें अवमानना का खतरा है। इस मुद्दे पर अध्यादेश भी आसानी से नहीं लाया जा सकता। अध्यादेश के लिए सहयोगी गठबंधन दलों की सहमति जरूरी है। सहयोगी दल पहले ही कह चुके हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान्य होगा।
 
गठबंधन दलों को साथ लेकर चलना आगामी चुनावों की मजबूरी है। वैसे भी पार्टी अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट से कोई रार नहीं करना चाहती। सबरीमाला के मुद्दे पर दबे−छिपे तरीके से विरोध को लेकर पार्टी पहले से ही सुप्रीम कोर्ट की नजर में है। राफेल और सीबीआई सहित कई बड़े और सरकार को प्रभावित करने वाले मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। हालांकि केंद्र सरकार आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदलने का दांव खेल गई। यह मुद्दा सीधे भाजपा के खिलाफ जा रहा था। पार्टी के ही सांसद और विधायक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का विरोध कर रहे थे।
 
इससे अनुसूचित जाति−जनजाति के वोट बैंक खिसकने का खतरा मंडरा रहा था। विपक्ष भी इस मुद्दे पर चकरघिन्नी बन गया था। देश में हुए विरोध आंदोलन के मद्देनजर विपक्ष ने भी कानून लाकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय बदलने की मांग उठाई। राम मंदिर का मुद्दा उठाने के मामले में हालात ऐसे नहीं हैं। इसमें पार्टी को फायदा नहीं होगा तो नुकसान भी नहीं होगा। दरअसल भाजपा को इस मुद्दे से हवा सबरीमाला मंदिर मुद्दे पर लोगों को उकसाने के बाद मिली है। सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में स्थानीय लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की। यह मामला अभी तक केरल की मार्क्सवादी सरकार के गले की हड्डी बना हुआ है। केरल की पी विजयन सरकार ना तो लोगों का विरोध झेल पा रही है और ना ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करा पा रही है।
 
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की वजह से भाजपा ने इसमें भी सीधे जुड़ने से बचने की गली तलाश ली। स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं को आगे कर दिया, जबकि राष्ट्रीय स्तर के नेता और केंद्र सरकार के मंत्री जो दलील राम मंदिर के मामले में दे रहे हैं, वही सबरीमाला में भी दी है। इसे राम मंदिर की तरह जन भावना का निर्णय करार दिया है ताकि दोनों ही मामलों में सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की तलवार से बचा जा सके। सबरीमाला प्रकरण में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को समर्थन देकर भाजपा ने इस पर लिटमस टेस्ट भी कर लिया। भाजपा को राजनीतिक रूप से इससे फायदा हुआ। केरल सरकार विवादों में घिर गई। 
सबरीमाला मामले में भाजपा केरल में काफी हद तक ध्रुवीकरण करने में कामयाब रही है। इससे मिली सफलता से ही पार्टी राम मंदिर को फिर से उठा रही है, फर्क सिर्फ इतना है कि सत्ता में होने के कारण संघ परिवार को इसमें आगे किया गया है। संघ के संगठनों ने मंदिर बनाने के लिए आंदोलन चलाने के लिए आगामी छह महीने का समय निर्धारित किया है। इसी अवधि में विधान सभा और लोकसभा चुनाव होने हैं। पहले चूंकि विधानसभा चुनाव होने हैं, इससे पता भी चल जाएगा कि राम मंदिर का मुद्दा उठाना पार्टी के लिए कितना फायदेमंद रहा। यदि परिणाम अपेक्षित रहे तो इसे लोकसभा तक खींचा जाएगा।
 
केंद्र की भाजपा सरकार इन दिनों राफेल और विकास के दूसरे मुद्दों पर विपक्ष के निशाने पर है। राफेल के मामले में कांग्रेस लगातार नए−नए आरोप लगा रही है। इसके अलावा डीजल−पेट्रोल, महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार और पार्टी की घेराबंदी कर रखी है। इन मुद्दों पर विपक्ष और देश के लोगों की अपेक्षाएं पूरा करना आसान नहीं है। इसके अलावा विधान सभा चुनावों में एंटीइनक्मबेंसी भी मौजूद रहेगी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भाजपा की वापसी आसान नहीं मानी जा रही। विधान सभा के चुनाव परिणाम भी काफी हद तक इन राज्यों में लोकसभा के परिणामों को प्रभावित करेंगे।
 
इस राह को आसान बनाने के लिए पार्टी विकास और राम मंदिर के मुद्दे का कॉकटेल तैयार कर रही है। केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों के किए विकास का सोशल मीडिया सहित हरसंभव तरीके से प्रचार किया जा रहा है। इसके बावजूद पार्टी चुनावों में बहुमत हासिल करने को लेकर आश्वस्त नहीं है। पार्टी और सरकार को इस बात पर पूरा भरोसा नहीं है कि सिर्फ विकास के मुद्दे पर फिर से सत्ता पाई जा सकती है। कारण भी स्पष्ट है विकास के विभिन्न मोर्चों पर सरकार को इतनी कामयाबी हासिल नहीं हो सकी। इससे बने हुए अंतर को भरने के लिए उठाए गए राममंदिर जैसे भावनात्मक और धार्मिक मुद्दे का विपक्ष के लिए विरोध करना आसान नहीं है। विपक्ष की मजबूरी यह है कि देश में व्यापक जनभावना का मुद्दा होने के कारण यही नहीं कहा जा सकता कि मंदिर नहीं बनना चाहिए। विपक्ष अनुसूचित जाति−जनजाति प्रकरण की तरह राम मंदिर पर अध्यादेश लाने या कानून बनाने की दलील भी नहीं दे सकता। इससे विपक्ष का अल्पसंख्यक वोट बैंक खिसक सकता है। विपक्ष भाजपा की चुनावी चाल बताते हुए सवाल खड़े कर रहा है। जबकि संघ परिवार का सारा जोर इसी बात पर है कि इस मुद्दे पर कैसे कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों को उलझाए रखा जाए। हालांकि भाजपा ने इस मुद्दे पर देश में अपनी राजनीतिक इमारत बुलंद की है, किन्तु पार्टी सिर्फ इसी के बलबूते सत्ता में वापसी को लेकर आशान्वित नहीं है। यह निश्चित है कि भाजपा के लिए यदि राममंदिर मुद्दा चुनावी तौर पर फायदेमंद साबित हुआ, पार्टी तभी इसे आगे जारी रखेगी, अन्यथा जैसे केंद्र सरकार के साढ़े चार साल के दौरान यह हाशिये पर पड़ा रहा, वैसे ही पड़ा रहेगा।
 

इंदौर। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत बताया है कि नोटबंदी के बाद वापस आये कुल 15,310.73 अरब रुपये मूल्य के विमुद्रित बैंक नोटों को नष्ट करने की प्रक्रिया इस वर्ष मार्च के आखिर में खत्म हो चुकी है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने आरटीआई कानून के एक प्रावधान का हवाला देते हुए यह जाहिर करने में असमर्थता जतायी है कि 500 और 1,000 रुपये के इन बंद हो चुके नोटों को नष्ट करने में सरकारी खजाने से कितनी रकम खर्च हुई। 

मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने मंगलवार को बताया कि उन्हें आरबीआई के मुद्रा प्रबंध विभाग के 29 अक्टूबर को भेजे पत्र से विमुद्रित बैंक नोटों को नष्ट किये जाने के बारे में जानकारी मिली। गौड़ की आरटीआई अर्जी पर आरबीआई के एक आला अधिकारी ने जवाब दिया, "मुद्रा सत्यापन एवं प्रसंस्करण प्रणाली (सीवीपीएस) की मशीनों के जरिये 500 एवं 1,000 रुपये के विनिर्दिष्ट बैंक नोटों (एसबीएन) को नष्ट किया गया। यह प्रक्रिया मार्च अंत तक खत्म हुई।" 
 
यहां एसबीएन से तात्पर्य 500 एवं 1,000 रुपये के बंद नोटों से है। आरटीआई के तहत यह भी बताया गया कि आठ नवंबर 2016 को जब नोटबंदी की घोषणा की गयी, तब आरबीआई के सत्यापन और मिलान के मुताबिक 500 और 1,000 रुपये के कुल 15,417.93 अरब रुपये मूल्य के नोट चलन में थे। विमुद्रीकरण के बाद इनमें से 15,310.73 अरब रुपये मूल्य के नोट बैंकिंग प्रणाली में लौट आये। 
आरटीआई के जवाब से स्पष्ट है कि नोटबंदी के बाद केवल 107.20 अरब रुपये मूल्य के विमुद्रित नोट बैंकों के पास वापस नहीं आ सके। 

बेंगलुरु। कर्नाटक में शनिवार को हुए उपचुनावों के लिए डाले गए मतों की गिनती आज सुबह से शुरू हो गई और शुरूआती रुझान के मुताबिक सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन के उम्मीदवार लोकसभा की दो सीटों और विधानसभा की दो सीटों पर आगे चल रहे हैं। वहीं भाजपा शिवमोगा लोकसभा सीट पर आगे चल रही है। निर्वाचन अधिकारियों ने बताया कि कांग्रेस को बेल्लारी सीट पर बढ़त है और गठबंधन की उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) मांड्या संसदीय सीट पर आगे है।

  • मलकानगिरी के भैजंगवाड़ा के जंगलों में नक्सलियों ने जवानों पर की फायरिंग
  • चुनाव के मद्देनजर सर्चिंग पर निकले थे जवान, बड़ी मात्रा में हथियार बरामद 

सुकमा. ओडिशा बॉर्डर पर सोमवार को मुठभेड़ में जवानों ने नक्सली नेता समेत 5 साथियों को मार गिराया। आगामी विधानचुनाव में सुरक्षा के मद्देनजर जवान सर्चिंग पर निकले थे। इसी दौरान नक्सलियों ने उन पर फायरिंग कर दी थी। नक्सलियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद हुए हैं।

 एडीजी ऑपरेशन आरपी कोचे के मुताबिक, जवान सुबह 5:30 बजे सर्चिंग पर निकले थे। इसी दौरान बॉर्डर क्षेत्र के कालीमेजा जिले में मलकानगिरी के भैजंगवाड़ा जंगल में नक्सलियों ने हमला कर दिया। नक्सलियों के साथ आधे घंटे तक मुठभेड़ चली। 

 कालीमेला दलम का मुखिया ढेर

मारे गए नक्सलियों में कालीमेला दलम का मुखिया रणदेब भी शामिल है। मौके से जवानों को 2 आईएनएसएएस राइफल, एक एसएलआर, 1303 राइफल बरामद हुई है। क्षेत्र में सर्चिंग जारी है। 

  • घायल का इलाज भिलाई के निजी अस्पताल में, पुलिस कर रही हमलावरों की तलाश 
  • दो दिन बातचीत करने की हालत में नहीं था पीड़ित, अब हालत में हो रहा है सुधार 

भिलाई. चुनावी सभा से लौट रहे एक युवा कांग्रेसी पर अज्ञात लोगों द्वारा हमला कर होंठ और जीभ काट देने का मामला सामने आया है। घायल का इलाज नेहरु नगर स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है। घटना एक नवंबर रात की है। रविवार को इस संबंध में सुपेला पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर घायल के बयान लिए हैं। 

 

पुलिस के मुताबिक धमधा में आयोजित चुनावी सभा में शामिल होने के बाद युवा कांग्रेस नेता राहुल दानी मोटरसाइकिल से पथरिया जा रहा था। राहुल

 

ने बयान में बताया कि 1 नवंबर की रात 12 बजे शिवनाथ नदी के पास उसे एक कार ने पीछे से टक्कर मारी। इसके बाद कार में बैठे तीन अज्ञात युवकों ने उससे विवाद शुरू कर दिया। फिर तीनों ने राहुल पर धारदार हथियार से हमला किया। इससे उसकी जीभ और होंठ कट गए। राहुल इसके बाद बेहोश हो गया। 


पीड़ित ने लगाए आरोप 
राहुल दानी ने बताया कि वह साजा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी रवींद्र चौबे का प्रचार कर रहा था। उन्हीं की चुनावी सभा से वह लौट रहा था। उसका कहना है कि हमलावर पिटाई करते समय कह रहे थे तुझे भाजपा के खिलाफ भाषण देने का बहुत शौक है। इसके बाद उन्होंने धारदार हथियार से वारकर जीभ और होंठ काट दिए। 


हमलावरों की तलाश कर रही पुलिस 
मामले में शून्य पर कायमी कर धमधा पुलिस को मामला भेजा गया है। घायल युवा कांग्रेस नेता के बयान लिए गए हैं। हमलावरों की तलाश की जा रही है। श्याम सुंदर शर्मा, सीएसपी 


जीभ में लगे टांके 
राहुल ने बताया कि हमले में होंठ, नाक, माथा पर चोट लगने के साथ जीभ भी कट गई। इस वजह से वह अपनी बात नहीं कह पा रहा था। दो दिन पहले हुई सर्जरी के बाद राहुल बोलने की स्थिति में है। राहुल ने बताया कि जीभ कटने के कारण वह अपने साथ हुई घटना के बारे में किसी को नहीं बता सका था। उसने बताया कि हमले से पहले कार सवार युवक काफी देर से उसका पीछा कर रहे थे। 

  • कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने साधा भाजपा पर निशाना, कहा- भाजपा ने लोगों का दिवाला निकाल दिया
  • देश में सबसे ज्यादा महंगा सिलेंडर छत्तीसगढ़ में, वहां उर्जित पटेल आंसू बहा रहे, यहां पर गृहणियां

रायपुर. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और स्टार प्रचारक मनीष तिवारी ने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। चुनाव प्रचार के लिए सोमवार को रायपुर पहुंचे मनीष तिवारी ने कहा कि पूरे देश में दिवाली मनाई जा रही है और सरकार ने लोगों का दिवाला निकाल दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 4 साल में टैक्स के 11 लाख करोड़ बटोरकर अपनी तिजोरी भर ली। देश में गैस सिलेंडर की सबसे ज्यादा कीमत 1037 रुपए पर छत्तीसगढ़ में है। वहां उर्जित पटेल आंसू बहा रहे हैं और यहां पर गृहणियां। 

 कांग्रेस भवन में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि पेट्रोल पर 53 महीने में 211% टैक्स बढ़ाया गया है। डीजल पर 433% कर बढ़ा है, कुल मिलाकर 11 लाख करोड़ लोगों की जेब से पैसा सरकार की तिजोरी में चला गया है। इसका सबसे बुरा असर किसानों पर पड़ा है। 

 राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि घर का बजट हो या बाहर का, सरकार ने अर्थव्यवस्था में सारे बजट बिगाड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जब सरकार छोड़ी थी तब सिलेंडर की कीमत 450 रुपये थी अब वही 7 सौ से 8 सौ रुपए हो गया है। दूध के दाम बढ़ गए हैं।  इस व्यवस्था का दयनीय ओर नकारात्मक नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है। इसलिए 13 सौ 44 किसानों ने आत्महत्या कर ली है।

 अर्थव्यवस्था नहीं संभाल पा रही सरकार

कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना आता तो इसकी जरूरत नही पड़ती। 53 महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 डॉलर के लगभग रही। 10 वर्ष पहले यही दिन थे,  कच्चे तेल की कीमत आसमान छू रही थी। रोज़ पेट्रोल और डीजल की कीमत को लेकर भाजपा प्रदर्शन करती थी।  कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर थी, तब पेट्रोल 50.36 रुपए, डीजल 34 रुपए और 344 रुपए एलपीजी था। आज उसके मुकाबले आधी है तो आज इतना महंगा क्यों। 

 आरबीआई गवर्नर को हटाना चाहती है सरकार
सरकार की नजर आरबीअाई के 3 लाख रुपये पर है. इसलिए सरकार RBI के गवर्नर को हटाना चाहती है. धारा 7 को हटाना चाहती है। आजादी के बाद से किसी ने धारा 7 का इस्तेमाल नहीं किया। अगर ऐसा हुआ तो देश आर्थिक महामंदी से बर्बाद हो जाएगा। जब 1991 में देश को सोना बेचना पड़ा तब भी सरकार की नजर रिजर्व बैंक के पैसों पर नहीं थी।

 न तो राम पर विश्वास, न राम मंदिर पर, सिर्फ वोट की राजनीति

अयोध्या में राममंदिर निर्माण विवाद को लेकर मनीष तिवारी ने कहा कि इनका विश्वास न तो राम मंदिर बनाने में है और न ही राम पर है। इनका विश्वास सिर्फ राम के नाम पर है राजनीति करने और वोट बटोरने की है। राम मंदिर की जमीन सरकार के पास है, सरकार चाहे तो राम मंदिर बना ले। 

  • भाजपा ने अब तक 193 प्रत्याशियों के नाम तय किए, पहली लिस्ट में 176 नाम थे
  •  37 सीटों पर नामों का ऐलान बाकी, पांच मौजूदा विधायकों के नाम काटे

इंदौर. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सोमवार को 17 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की। इसमें भी इंदौर की सभी नौ और भोपाल की गोविंदपुरा सीट पर उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया गया है। भाजपा ने पहली सूची में 176 प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया था। इस तरह भाजपा अब तक 193 प्रत्याशियों के नाम तय कर चुकी है। राज्य में 28 नवंबर को मतदान होगा। जबकि 11 दिसंबर को परिणाम आएंगे।

 

 

इन्हें मिला टिकट

 

  सीट प्रत्याशी
1  शुजालपुर इंदरसिंह परमार
2 पेटलावद (एससी) निर्मला भूरिया
3 उज्जैन दक्षिण मोहन यादव
4 बड़नगर जितेन्द्र पंड्या
5  भितरवार अनूप मिश्रा
6  कोलारस वीरेंद्र रघुवंशी
7 बिजावर पुष्पेन्द्र पाठक
8 जबेरा धमेन्द्र लोधी
9 अनूपपुर (एसटी) रामलाल रौतेले
10 जबलपुर उत्तर शरद जैन
11 जबलपुर पश्चिम हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू
12 बिछिया (एसटी) शिवराज शाह
13 निवास (एसटी) रामप्यारे कुलस्ते
14 मुलताई राजा पंवार
15 ब्यावरा नारायण पंवार
16 बासौदा लीना संजय जैन
17 कुरवाई

हरी सप्रे 

 

इन 5 विधायकोंं के टिकट कटे : दूसरी सूची में पांच मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए गए। इनमें चंद्रशेखर देशमुख (मुलताई), जसवंत सिंह हाड़ा (शुजालपुर), मुकेश पंड्या (बड़नगर), पंडित सिंह धुर्वे (बिछिया) और वीर सिंह पंवार (कुरवाई) के नाम शामिल हैं।

 

37 सीटों पर नाम तय होना बाकी: पार्टी को अभी 37 सीटों पर नामों का ऐलान करना है। इनमें इंदौर की क्षेत्र क्रमांक एक से पांच, महू, राऊ, देपालपुर और सांवेर की सीट शामिल है। भोपाल की गोविंदपुरा सीट पर भी पार्टी अभी तक उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर 10 बार से विधायक हैं। गौर ने बताया, "मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का शनिवार को उनके पास फोन आया था। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि वे पार्टी में बात करेंगे। मैंने उनसे कह दिया है कि अब सब आपके हाथ में हैं।" उन्होंने कहा कि सोमवार या मंगलवार को कृष्णा गौर पहले पर्चा भरेंगी। इसके एक-दो दिनों बाद वे हुजूर से पर्चा दाखिल करेंगे।

 

सुमित्रा-कैलाश की वजह से इंदौर की सीटें अटकीं: ऐसा कहा जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय अपने बेटों के टिकट के लिए अड़ गए हैं। दोनों इंदौर की एक सीट चाहते हैं। फैसला भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर छोड़ दिया गया है।

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