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बाल संरक्षण गृह में बच्चों को मिलेगी काउंसिलिंग की सुविधा भी Featured

-चौक-चौराहों पर बाल भिक्षावृत्ति पर होगी कड़ी कार्रवाई
-औद्योगिक क्षेत्रों बाल श्रम पर नजर रखने सर्वे करेगी पुलिस, श्रम और महिला एवं बाल विकास विभाग
-बाल संरक्षण गृह में नियमित रूप से होगी मेडिकल चेकअप, साइक्लाजिस्ट भी आएंगे

दुर्ग। बाल संरक्षण गृह में बच्चों को सही दिशा तय करने एवं मनोवैज्ञानिक दबावों से मुक्ति पाने के लिए कई बार अच्छी काउंसिलिंग की जरूरत होती है। सही काउंसिलिंग के माध्यम से वे रचनात्मक दिशा की ओर बढ़ सकते हैं। इसके लिए यहां पर मनोवैज्ञानिक की सेवाएं दी जाएंगी। इसके लिए शेड्यूल तय किया जाएगा। यह निर्देश कलेक्टर ने बाल संरक्षण समिति की बैठक में दिया। उन्होंने कहा कि सही रचनात्मक सलाह किशोर आयु के वर्ग के बच्चों को बेहद रचनात्मक दिशा दे सकती है। बच्चों की पढ़ाई लिखाई के साथ ही उन्हें सही काउंसिलिंग उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इस दिशा में कार्य होने से इसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे। उन्होंने बाल संरक्षण गृह में बच्चों के नियमित मेडिकल चेकअप के लिए डाक्टर्स की टीम के शेड्यूल तय करने के निर्देश भी दिये। कलेक्टर ने कहा कि चौक-चौराहों पर अपने बच्चों को लेकर माताओं द्वारा भिक्षावृत्ति किये जाने के प्रकरण प्रकाश में आ रहे हैं। ऐसे मामलों पर नजर रखें और कड़ी कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में भी बाल श्रम पर कड़ाई से नजर रखें। इसके लिए पुलिस, श्रम और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम सर्वे कर ऐसे मामलों पर नजर रखे। उन्होंने बाल संरक्षण गृह में पेयजल आदि बुनियादी सुविधाओं की खास मानिटरिंग के निर्देश दिये तथा कैंपस में चल रहे निर्माण कार्यों को समयसीमा पर समाप्त करने के निर्देश दिये। जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन ने भी विस्तार से समिति के कार्यकलापों की जानकारी दी। बैठक में अपर कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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