ईश्वर दुबे
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रायपुर,07 मई 2026/
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह हिस्सा, जिसे कभी 'अबूझ' (अनजान) कहा जाता था, अब डिजिटल संकेतों से जुड़कर अपनी नई पहचान लिख रहा है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड में मोबाइल टावर की स्थापना ने सदियों के संचार सन्नाटे को तोड़ दिया है। अब यहाँ के ग्रामीण अपनों से बात करने के लिए पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर नहीं चढ़ते, बल्कि घर बैठे दुनिया से जुड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में संचार क्रांति का यह अध्याय वास्तव में सराहनीय है। 'नो सिग्नल' से सीधे 'कनेक्टिविटी' तक का यह सफर केवल तकनीक का नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का है।
पहाड़ियों की चढ़ाई से मिली मुक्ति
ग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम ताहकाडोंड और उसके आसपास के क्षेत्र लंबे समय से 'नो नेटवर्क ज़ोन' में थे। ग्रामीणों के लिए एक फोन कॉल करना किसी चुनौती से कम नहीं था; उन्हें सिग्नल खोजने के लिए ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक आना पड़ता था। टावर की स्थापना के साथ ही अब ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा जैसे गांवों के लगभग 400 ग्रामीण सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं।
विकास की नई जीवनरेखा: आपातकालीन और प्रशासनिक सेवाएँ
कनेक्टिविटी का यह विस्तार केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन रक्षक भी सिद्ध हो रहा है।
अब आपात स्थिति में ग्रामीण तुरंत 108 एंबुलेंस को कॉल कर सकते हैं। त्वरित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होने और समय पर इलाज मिलने से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी और गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में मदद मिलेगी।
इंटरनेट के माध्यम से ग्रामीण अब ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन घर बैठे कर पा रहे हैं। यह डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम का संकेत है। पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस के साथ शासन की योजनाओं की जानकारी अब सीधे हितग्राहियों तक पहुँच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है और कार्यों में तेजी आई है।
बदलती सामाजिक-आर्थिक तस्वीर
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल टावर की स्थापना शासन की सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल संचार सुविधा है, बल्कि विकास का एक सशक्त माध्यम है।
ताहकाडोंड के ग्रामीणों ने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे एक नए युग की शुरुआत बताया है। मोबाइल नेटवर्क आने से न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों के बाजार और युवाओं के लिए सूचना के नए द्वार भी खुलेंगे। शासन का यह प्रयास सिद्ध करता है कि भौगोलिक बाधाएं अब विकास के आड़े नहीं आएंगी।
प्रदेश के कुल चने का 50% अकेले खरीदा
रायपुर, 07 मई 2026/
छत्तीसगढ़ में 'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना' को धरातल पर उतारने में धमतरी जिला एक मॉडल बनकर उभरा है। सहकारी क्षेत्र को मजबूती देने वाली केंद्र और राज्य शासन की इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत धमतरी ने न केवल भंडारण बुनियादी ढांचे में विस्तार किया है, बल्कि चना खरीदी के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए पूरे प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है।
4 पैक्स समितियों में बनेंगे 2500 मीट्रिक टन के महा-गोदाम
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु NCCF रायपुर द्वारा जिले की चार प्रमुख प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) को 'गोदाम हायरिंग एश्योरेंस लेटर' जारी कर दिए गए हैं। अंवरी, कोसमर्रा, पोटियाडीह (अमदी) और कोलियारी समितियों में अत्याधुनिक भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक गोदाम की क्षमता 2500 मीट्रिक टन होगी, जिसे विशेष रूप से चने के वैज्ञानिक भंडारण के लिए तैयार किया जा रहा है।
चना खरीदी में धमतरी का दबदबा: लक्ष्य के पार पहुँचने की तैयारी
धमतरी जिले ने कृषि क्षमता और प्रशासनिक मुस्तैदी का लोहा मनवाते हुए अब तक 97 हजार क्विंटल चने की खरीदी पूरी कर ली है। प्रारंभिक लक्ष्य 1 लाख क्विंटल रखा गया है,जिसमे
वर्तमान स्थिति लक्ष्य के करीब होने के बावजूद खरीदी निरंतर जारी है। पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में हुई कुल चना खरीदी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले धमतरी जिले से दर्ज किया गया है।
प्रशासनिक सक्रियता और आगामी रणनीति
योजना को गति देने के लिए एग्रीमेंट और एमओयू की प्रक्रिया तेजी से पूर्ण कर ली गई है। जमीनी स्तर पर तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु NCCF मुख्यालय, नई दिल्ली के साथ आरसीएस (RCS) अधिकारियों और पैक्स प्रबंधकों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय बैठक की तैयारी की जा रही है।
गौरतलब है कि धमतरी जिले ने चना खरीदी और भंडारण व्यवस्था में जो उत्कृष्टता दिखाई है, वह किसानों की मेहनत और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है। इससे खाद्यान्न की बर्बादी में रोक लगेगी और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलेगा।
क्या है 'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना'?
भारत सरकार द्वारा 31 मई 2023 को शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में ही PACS के माध्यम से भंडारण, प्रोसेसिंग यूनिट और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करना है। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी, बल्कि भंडारण के अभाव में होने वाली अनाज की बर्बादी पर भी लगाम लगेगी।
धमतरी की यह सफलता आज प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।
सुशासन तिहार में वनांचल की महिलाओं से आत्मीय संवाद: संघर्ष की कहानियों में दिखी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की तस्वीर
रायपुर 7 मई 2026/कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था।
आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे।
गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं - कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर।
जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा -
“आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।”
मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की श्रीमती कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। श्रीमती कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है।
कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढ़ने का हौसला मिला है।
सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है।
कबीरधाम के इन वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल महिलाओं के भीतर जगे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है। “लखपति दीदी” से “करोड़पति दीदी” तक का यह सपना अब गांव-गांव में नई उम्मीद बनकर फैल रहा है।
कलेक्टर ने सम्बंधित विभाग से कहा एक माह के भीतर पूर्ण करें कार्य, ग्रामीणों को पेयजल से मिलेगी राहत
जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम
अम्बिकापुर, 07 मई 2026/ जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
विगत दिनों मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष श्री अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है।
कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को निर्देशित किया है कि हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री श्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ो गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।
Chief Secretary Shri Vikas Sheel Takes Charge of Preparations, Issues Strict Directives on Security and Facilities
Raipur,
The State administration has geared up for the successful organization of the upcoming Indian Premier League T20 matches scheduled to be held on May 10 and 13 at the Shaheed Veer Narayan Singh International Cricket Stadium in Nava Raipur. Chief Secretary Shri Vikasheel on Wednesday chaired a high-level review meeting with senior officials from various departments at Mahanadi Bhawan and issued detailed instructions to ensure flawless arrangements. Following these directives, the administration is fully prepared to host this major cricketing event and provide spectators with a safe and enjoyable experience.
Match Schedule
On May 10, 2026, Royal Challengers Bengaluru will face Mumbai Indians, while on May 13, 2026, Royal Challengers Bengaluru will take on Kolkata Knight Riders.
Special Focus on Security and Traffic Management
Chief Secretary Shri Vikasheel emphasized that the safety of thousands of spectators and smooth traffic management are the administration’s top priorities. In view of the large influx of visitors arriving in Raipur after online ticket bookings, the Police Commissioner, Raipur has been directed to prepare a detailed action plan. A dense network of CCTV cameras will be installed in parking areas and around the stadium. Barricading and parking management will be jointly handled by the police, NRDA, and the Board of Control for Cricket in India.
Emergency Services
Dedicated emergency routes will be marked for fire brigades and ambulances to ensure immediate response in case of any contingency. For smooth coordination, a high-level executive committee has been constituted under the chairmanship of the Collector, Raipur. It includes the Superintendent of Police (Rural), Municipal Commissioner, Director (Sports and Youth Welfare), Regional Transport Officer (RTO), CEO of NRDA, and other senior officials. While the overall responsibility rests with the Board of Control for Cricket in India and the Chhattisgarh State Cricket Association, the administration will extend full support in arranging drinking water, electricity, roads, and healthcare services.
Availability of Basic Facilities
The Public Health Engineering (PHE) Department has been tasked with ensuring uninterrupted and adequate water supply at the stadium. The power department, including Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited, has been directed to ensure uninterrupted electricity during the matches.
The meeting was attended by PWD Secretary Dr. Kamalpreet Singh, PHE Secretary Shri Mohammad Qaiser Abdul Haq, Sports Secretary Shri Yashwant Kumar, Collector Raipur Shri Gaurav Singh, and senior officials from police, energy, transport, tourism, and CSPDCL. Representatives from the Board of Control for Cricket in India and the Chhattisgarh State Cricket Association also shared updates on their preparations.
50% Rebate on Land Registration in the Name of Women in Chhattisgarh
Raipur, /
In a landmark step towards making half the population of Chhattisgarh economically self-reliant and property owners, the State Government has taken a historic decision. On the initiative of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, and under the leadership of Finance Minister Shri O.P. Choudhary, the government has decided to reduce land registration fees by 50 percent for properties registered in the name of women. The official notification of this significant decision has been published in the Gazette on Wednesday.
Objective of the Decision
The primary aim of this initiative is to encourage women to acquire property. The government believes that this rebate will motivate more families to register their assets in the name of women. Ownership of property will enhance women’s social and economic security. This decision will further strengthen women empowerment and enable them to play a more effective role in decision-making processes.
Chief Minister’s Vision – Empowered Women, Empowered State
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai termed this decision as historic and stated that the State Government is committed to the holistic development of women. He emphasized that ownership of land will boost women’s confidence and make them feel more economically secure.
Investment in Revenue, Gains for the Future
Finance Minister Shri O.P. Choudhary highlighted the economic aspects of the scheme, stating that the rebate in registration fees will put an estimated burden of around Rs 153 crore on the State’s revenue. However, he clarified that this is not a loss but a significant investment in women empowerment, which will yield long-term social benefits.
What Does the Notification Say?
According to the notification published in the Gazette, if documents related to the transfer of any immovable property are executed in favor of women, a direct 50 percent rebate will be provided on the applicable registration fee. This provision will come into effect immediately.
मुख्य सचिव ने तैयारियों की कमान संभाली, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए कड़े निर्देश
रायपुर, /नवा रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आगामी 10 और 13 मई को होने वाले टाटा आईपीएल टी-20 मैचों के सफल आयोजन के लिए राज्य प्रशासन ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की और आयोजन से जुड़ी तमाम व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव के इन कड़े निर्देशों के बाद अब नवा रायपुर का प्रशासन क्रिकेट के इस महाकुंभ की मेजबानी के लिए पूरी तरह मुस्तैद है, जिससे दर्शकों को एक सुरक्षित और आनंदमयी अनुभव मिल सके।
मैचों का शेड्यूल
10 मई 2026 केा रॉयल चौलेंजर्स बेंगलुरु (त्ब्ठ) बनाम मुंबई इंडियंस (डप्) और 13 मई 2026 को रॉयल चौलेंजर्स बेंगलुरु (त्ब्ठ) बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स (ज्ञज्ञत्) के मध्य मैच खेला जाएगा।
सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर विशेष जोर
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने स्पष्ट किया कि स्टेडियम में आने वाले हजारों दर्शकों की सुरक्षा और सुगम यातायात प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। ऑनलाइन बुकिंग के बाद रायपुर पहुंचने वाली दर्शकों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कमिश्नर रायपुर को विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। पार्किंग एरिया और स्टेडियम के चारों ओर CCTV कैमरों का सघन जाल बिछाया जाएगा। बैरिकेडिंग और पार्किंग की जिम्मेदारी पुलिस, NRDA और BCCI की संयुक्त टीम संभालेगी।
आपातकालीन सेवाएं
फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस के लिए डेडिकेटेड रूट (Emergency Route) चिन्हांकित किए जाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके। आयोजन के सुचारू संचालन के लिए कलेक्टर रायपुर की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय कार्यकारिणी का गठन किया गया है। इसमें पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), आयुक्त नगर निगम, संचालक (खेल एवं युवा कल्याण), क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO), और NRDA के CEO सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यद्यपि संपूर्ण आयोजन का उत्तरदायित्व BCCI और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ का है, लेकिन प्रशासन पेयजल, बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
नियादी सुविधाओं की उपलब्धता
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को स्टेडियम में पानी के सुचारू प्रवाह और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। बिजली विभाग को मैचों के दौरानछत्तीसग्ढ विद्युत वितरण कंपनी को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, PHE सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, खेल सचिव श्री यशवंत कुमार और कलेक्टर रायपुर श्री गौरव सिंह सहित पुलिस विभाग, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और CSPDCL के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही BCCI और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के प्रतिनिधियों ने भी अपनी तैयारियों का ब्यौरा साझा किया।
रायपुर, 06 मई 2026/जब हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिल जाए, तो शारीरिक बाधाएं भी प्रगति का रास्ता नहीं रोक सकतीं। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम गोविंदपुर (सरगड़ी) में रहने वाले कृष्णा पहाड़ी कोरवा और उनकी पत्नी अनिता की कहानी आज सुशासन और संवेदनशीलता की जीवंत मिसाल बन चुकी है। विशेष पिछड़ी जनजाति से ताल्लुक रखने वाला यह दंपति दृष्टिबाधित है, लेकिन आज इनके चेहरे की मुस्कान सरकार की अंतिम व्यक्ति तक विकास की प्रतिबद्धता को बयां कर रही है।
प्रधानमंत्री के हाथों मिली खुशियों की चाबी
कृष्णा और अनिता के परिवार के जीवन का सबसे ऐतिहासिक मोड़ राज्य स्थापना की रजत जयंती (2025) के अवसर पर आया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अपने हाथों से कृष्णा को प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत निर्मित पक्के घर की चाबी सौंपी। यह मात्र एक कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि वर्षों के अभाव और असुरक्षा के बाद मिला वह सम्मान था, जिसकी इस दंपति ने कल्पना की थी। अपनी मेहनत और शासकीय अनुदान के मेल से इन्होंने न केवल घर बनाया, बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षित बुनियाद भी रखी।
मनरेगा- आत्मनिर्भरता की नई इबारत
पक्के घर के साथ-साथ आर्थिक स्वावलंबन के लिए महात्मा गांधी नरेगा (डळछत्म्ळ।) इस परिवार का सबसे बड़ा संबल बना। दृष्टिबाधित होने के बावजूद कृष्णा और अनिता ने हार नहीं मानी। वे मनरेगा कार्यस्थलों पर श्रमिकों को पानी पिलाने का कार्य करते हैं। वर्ष 2024-25 में 86 दिनों का रोजगार और चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 14 दिनों का काम मिलने से उन्हें दैनिक जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। कृष्णा और अनिता के लिए सुशासन का अर्थ केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अवसर और भविष्य की एक नई किरण है।
योजनाओं के सुरक्षा कवच और बदला जीवन
शासन की बहुआयामी योजनाओं ने इस परिवार के इर्द-गिर्द सुरक्षा का एक घेरा तैयार कर दिया है। अंत्योदय अन्न योजना के तहत राशन की उपलब्धता, आयुष्मान भारत कार्ड के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी मिली, जिससे इलाज की चिंता खत्म हुई और दिव्यांग पेंशन के माध्यम से निरंतर वित्तीय सहायता के साथ सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हुआ।
'अंधेरे से उजाले की ओर' कृष्णा और अनिता के जीवन में सुशासन के सकारात्मक प्रभाव की एक प्रतीकात्मक कहानी है, जो दर्शाती है कि कैसे सरकारी योजनाएं, पारदर्शिता और जवाबदेही आम नागरिकों का जीवन बदल सकती हैं।