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प्रधान अध्यापक की आत्महत्या मामले में पुलिस जांच जारी, विभाग दे रहा पूरा सहयोग

रायपुर। बीजापुर जिले में प्रधान अध्यापक की आत्महत्या से जुड़ी हालिया मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा बीजापुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अधूरे निर्माण कार्य के भुगतान के दबाव जैसी खबरें तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं। जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा बीजापुर द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग निष्पक्ष रूप से पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पालनार अंतर्गत प्राथमिक शाला मझारपारा में पदस्थ प्रधान पाठक श्री राजू पुजारी का 22 अप्रैल 2026 को निधन हो गया, जो एक अत्यंत दुखद घटना है। पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच के दौरान मृतक के पास से कुछ पत्र बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर जांच की कार्यवाही जारी है।
समग्र शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराया गया था, जिसमें प्रधान अध्यापक पदेन अध्यक्ष होते हैं। निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत राशि के अनुरूप प्रथम किस्त का भुगतान नियमानुसार किया गया तथा कार्य पूर्ण होने के पश्चात माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र, हस्तांतरण प्रमाण पत्र एवं फोटोग्राफ्स प्राप्त होने पर प्रगति के आधार पर रनिंग बिलों के माध्यम से राशि जारी की गई।
विभाग के अनुसार, प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष दोनों का निर्माण फरवरी 2026 में पूर्ण हो चुका था तथा शेष 60 प्रतिशत राशि राज्य स्तर से प्राप्त होना लंबित है। भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार का दबाव या अनियमितता नहीं पाई गई है।
जिला मिशन समन्वयक ने कहा कि कुछ समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में बिना तथ्यों की पुष्टि के प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं, जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने अपील की है कि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही समाचारों का प्रकाशन किया जाए।
विभाग ने पुनः स्पष्ट किया है कि इस दुखद घटना के सभी पहलुओं की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और शिक्षा विभाग द्वारा हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

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रायपुर :प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती पर रखी गई आधारशिला अब धरातल पर उतर आई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा (NH-43) तक 3147 करोड़ रूपये की लागत वाले मेगा परियोजना का निर्माण कार्य जमीनी स्तर पर शुरू कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में सबसे लंबा विस्तार

627 किलोमीटर लंबे रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का सबसे महत्वपूर्ण और विशाल हिस्सा छत्तीसगढ़ से होकर गुजरता है। कुल लंबाई का लगभग 384 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ में है। वर्तमान में 104.250 किलोमीटर लंबे पत्थलगांव-झारखंड सीमा खंड पर निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है।

382 छोटी-बड़ी संरचनाएं

इस खंड में कुल 382 छोटी-बड़ी संरचनाएं (पुल, अंडरपास आदि) बनाई जाएंगी, जो इस मार्ग को बाधारहित (Hassle-free) बनाएंगी। जिसमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर और एक एलीवेटेड वायडक्ट स्ट्रक्चर, 10 वेहिकुलर अंडरपास (VUP), 18 लाइट वेहिकुलर अंडरपास (LVUP), 26 स्मॉल वेहिकुलर अंडरपास (SVUP), 11 ईओपी, 21 मवेशी एवं पैदल यात्री अंडरपास (PUP) और 278 बॉक्स पुलिया (Culverts) का निर्माण किया जा रहा है

इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी होगी मजबूत

कोरबा परियोजना इकाई के परियोजना निदेशक श्री डी.डी. पार्लावर ने बताया कि यह खंड रायपुर-धनबाद कॉरिडोर की रीढ़ है जिसका निर्माण कार्य शुरू हो गया है। हमारा लक्ष्य इसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करना है। यह राजमार्ग छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच इंटर-स्टेट कनेक्टिविटी और व्यापारिक परिवहन को नई मजबूती देगा।

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित श्री रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत जशपुर जिले के श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम के दर्शन का अवसर निरंतर प्राप्त हो रहा है। योजना के तहत अब तक जशपुर जिले से 2640 श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर श्री रामलला के दर्शन कर चुके हैं, जिससे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना हुआ है।

इसी क्रम में मंगलवार को योजना के तहत 13वें जत्थे को विभिन्न जनपद पंचायतों एवं नगर पंचायतों से जनप्रतिनिधियों द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस जत्थे में जशपुर जिले के कुल 204 श्रद्धालु शामिल हैं। जशपुर एवं मनोरा क्षेत्र से नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, जनपद सदस्य श्रीमती सावित्री सिंह तथा जनपद पंचायत जशपुर के सीईओ सहित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति में बस को रवाना किया गया। इसके अतिरिक्त पत्थलगांव जनपद पंचायत से भी श्रद्धालुओं का जत्था अयोध्या के लिए प्रस्थान किया। योजना के माध्यम से शासन द्वारा श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह है।

रायपुर :  छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी एनआरएलएम (बिहान) योजना के तहत स्व-सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। मुंगेली जिले के जनपद पंचायत लोरमी के ग्राम खपरीकला की निवासी श्रीमती सम्पत्ति प्रजापति इसकी प्रेरक उदाहरण हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जीवन की दिशा बदल दी है।

समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आय का मुख्य साधन एक छोटा होटल व्यवसाय था, जिससे मुश्किल से गुजारा होता था। “जय शनिदेव महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़ने के बाद उन्हें रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड एवं बैंक लिंकेज के माध्यम से ऋण सुविधाएं प्राप्त हुईं। इन संसाधनों का उपयोग कर उन्होंने अपने होटल व्यवसाय का विस्तार किया और साथ ही सुहाग भंडार एवं किओस्क बैंकिंग कार्य प्रारंभ किया। उनकी मेहनत का परिणाम है कि मासिक आय 10 हजार रुपये से बढ़कर लगभग 25 हजार रुपये हो गई है। वार्षिक आय करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जबकि कृषि से उन्हें अतिरिक्त लगभग 1 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक सशक्तिकरण के इस सफर ने उनके परिवार के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है। आज सम्पत्ति प्रजापति ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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रायपुर :  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुकमा जिले के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज हुई है। रोड कनेक्टिविटी के विस्तार ने यहां के ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना शुरू कर दिया है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में वनांचल और नियद नेल्लानार क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। लोक निर्माण विभाग द्वारा पोलमपल्ली से अरलमपल्ली तक 7 किलोमीटर लंबी डामरीकृत सड़क का निर्माण 4 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कराया जा रहा है। यह सड़क निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, जिसके बन जाने से विकासखंड मुख्यालय कोंटा की दूरी लगभग 15 किलोमीटर कम हो जाएगी।

यह मार्ग डब्बाकोंटा, कोलाईगुड़ा, एंटापाड़, बुर्कलंका, पालाचलमा और गट्टापाड़ जैसे पूर्व में नक्सल प्रभावित गांवों को जोड़ता है। पहले जर्जर रास्तों और नक्सली गतिविधियों के कारण यहां आवागमन अत्यंत कठिन था, लेकिन अब पुलिस कैंपों की स्थापना और प्रशासनिक सक्रियता से हालात बदले हैं। कलेक्टर ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क पहुंचाना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। यह सड़क न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी। स्थानीय निवासी मड़काम भीमा ने बताया कि सड़क बनने से कोंटा तक पहुंचना आसान हो गया है। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार जताया है।

रायपुर :राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोकभवन में नो प्लास्टिक अभियान की ब्रांड एंबेसडर श्रीमती शुभांगी आप्टे ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने रायपुर नगर निगम क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों और जनजागरूकता गतिविधियों की जानकारी दी।

श्रीमती आप्टे ने बताया कि अब तक वे स्कूलों, बैंकों, बाजारों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 55 हजार से अधिक कपड़े की थैलियों का वितरण कर चुकी हैं, ताकि लोगों को प्लास्टिक उपयोग से दूर किया जा सके। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि दिव्यांगजनों के लिए ब्रेल लिपि में 6 पुस्तकों का प्रकाशन कराया गया है। साथ ही शासकीय अस्पतालों में जरूरतमंद माताओं और नवजात शिशुओं के लिए जच्चा-बच्चा किट भी उपलब्ध कराई जा रही है।

राज्यपाल ने उनके सामाजिक एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। ज्ञातव्य है कि श्रीमती आप्टे नगर निगम के स्वच्छता अभियान की ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

नियमों के अनुसार ही मिलेंगे सेवा लाभ


रायपुर, 22 अप्रैल 2026/ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी संविलियन आदेश के तहत शिक्षक (एल.बी. संवर्ग) की सेवा अवधि की गणना संविलियन 01 जुलाई 2018 से ही की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी संविलियन आदेश 30 जून 2018 के अनुसार, ऐसे शिक्षक जिनकी सेवा अवधि 01 जुलाई 2018 को 08 वर्ष या उससे अधिक पूर्ण हो चुकी थी, उन्हें उनकी सहमति के आधार पर 01 जुलाई 2018 से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। उक्त आदेश के प्रावधानों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक (एल.बी. संवर्ग) को देय समस्त सेवा लाभों के लिए सेवा अवधि की गणना संविलियन दिनांक से ही की जाएगी। राज्य शासन शिक्षकों के हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और पारदर्शिता के साथ सभी प्रावधानों का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहा है।

शिक्षक (शिक्षक पंचायत/नगरीय निकाय) के संविलियन उपरांत सेवा गणना एवं पेंशन पात्रता के संबंध में उत्पन्न विभिन्न प्रकार की भ्रांतियों को दूर करते हुए राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इस संबंध में सभी प्रावधान नियमानुसार ही लागू किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में शासकीय शालाओं में कार्यरत शिक्षकों (पंचायत/नगरीय निकाय) की प्रारंभिक नियुक्ति पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत शिक्षाकर्मी के रूप में की गई थी, जो शासकीय कर्मचारी की श्रेणी में शामिल नहीं थे।

संविलियन प्रावधानों के अंतर्गत पंचायत/नगरीय निकाय से स्कूल शिक्षा विभाग में स्थानांतरित शिक्षकों (शिक्षक पंचायत/नगरीय निकाय संवर्ग) को शासकीय सेवकों के समान सेवा लाभ और वेतन सुविधाएं निर्धारित नियमों के तहत देय हैं। छत्तीसगढ़ में प्रमुख संविलियन निर्देश (01 जुलाई 2018) के अनुसार 08 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों का संविलियन किया गया है। 8 वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षकों के लिए भी संविलियन की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में पूरी की गई है, जिसके बाद उन्हें समान लाभ मिल रहे हैं।

राज्य के प्रचलित सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के अनुसार पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की नियमित शासकीय सेवा तथा उपदान (ग्रेच्युटी) के लिए न्यूनतम 05 वर्ष की सेवा आवश्यक है। इस परिप्रेक्ष्य में संबंधित शिक्षकों की शासकीय सेवा की गणना 01 जुलाई 2018 से किए जाने के कारण 10 वर्ष की आवश्यक सेवा अवधि 30 जून 2028 को पूर्ण होगी। फलस्वरूप नियमानुसार पेंशन का लाभ उक्त अवधि पूर्ण होने के पश्चात ही प्रदान किया जाना संभव होगा।

उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा निर्धारित सभी सेवा लाभ निर्धारित नियमों एवं संविलियन प्रावधानों के अनुरूप ही दिए जा रहे हैं तथा इस संबंध में किसी प्रकार की भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दिया जाए।

जनजातीय अंचल में खेलों के जरिए बदलाव की नई लहर - सचिन तेंदुलकर का दौरा प्रेरणादायी: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

खेलों के माध्यम से बस्तर में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

रायपुर 22 अप्रैल 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज माँ दंतेश्वरी की पावन धरा पर भारत रत्न और क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर के आगमन पर सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दंतेवाड़ा जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र छिंदनार ग्राम में सचिन तेंदुलकर का आगमन बदलते हुए बस्तर की सशक्त पहचान है। यह उस नए बस्तर की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जो अब भय और असुरक्षा की छाया से निकलकर विकास, अवसर और आत्मविश्वास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह की पहल बस्तर के युवाओं को नई दिशा देंगी और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सचिन तेंदुलकर द्वारा बच्चों के बीच जाकर समय बिताना, उन्हें खेलों के प्रति प्रेरित करना और उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार करना इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। इससे न केवल खेल प्रतिभाओं को निखरने का अवसर मिलेगा, बल्कि युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार
होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सचिन तेंदुलकर का बस्तर आगमन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और उनका आगमन यहां के बच्चों एवं युवाओं के लिए प्रेरणा का एक सशक्त स्रोत बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन एवं माणदेशी फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘मैदान कप अभियान’ खेल अधोसंरचना के विकास की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में बच्चों को खेल मैदान और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का यह प्रयास बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल और युवा विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है तथा भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

समिति गठन, प्रशिक्षण और “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचारों पर जोर

रायपुर, 22 अप्रैल 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि शासकीय संस्थानों, मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, महाविद्यालयों एवं निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए सक्रिय प्रयास करें । उन्होंने कहा कि परंपरागत समुदायों और पुरातात्विक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पांडुलिपियां और ज्ञान-संपदा मिल सकती है, इसलिए इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचारों के आयोजन का सुझाव दिया गया, जिससे आम नागरिक भी इस अभियान से जुड़ सकें।

मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ‘ज्ञानभारतम्’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वेक्षण अभियान समिति के सदस्य तथा सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण कार्य 31 मई तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि यह सर्वे केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि जिलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए है। साथ ही प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समिति का गठन, नोडल अधिकारी की नियुक्ति तथा सर्वेक्षण दलों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय पत्रकारों, साहित्यकारों, इतिहासकारों और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ने पर बल दिया गया। यह अभियान पूरे देश के लिए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और उसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वेक्षण कार्य के दौरान पांडुलिपियों के स्वामित्व अधिकारों का सम्मान, बिना अनुमति स्थानांतरण न करने और सभी गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया।

बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से ज्ञानभारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत रूपरेखा, उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि शोधकर्ताओं के सहयोग से सुदूर अंचलों से भी पांडुलिपियों की महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा सकती है, जिससे इस अभियान को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. फरिहा आलम सिद्दीकी, संचालक संस्कृति श्री विवेक आचार्य सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Over 13 lakh families engaged in tendu leaf collection across Chhattisgarh

Raipur, April 22, 2026/ Tendu leaves, often called ‘green gold’ in Chhattisgarh and other forest regions, remain a key source of livelihood for tribal and forest-dwelling communities. Recent policy measures and government initiatives have led to a rise in the income of collectors. More than 13 lakh families are engaged in the activity, with total payments expected to be around Rs 920 crore.

On the directions of Forest Minister Kedar Kashyap, the state government has revised tendu leaf collection rates to raise the income of minor forest produce collectors, especially from tribal communities. Since 2024, the rate per standard bag has been increased from Rs 4,000 to Rs 5,500, benefiting lakhs of rural families. In 2026, tendu leaf collection is planned across 902 primary societies under 31 district forest produce cooperative unions. The total collection is estimated at over 15 lakh standard bags. Each standard bag contains 1,000 bundles, with 50 leaves in each bundle.

Collection expands across regions

In Bastar division, about 4 lakh standard bags are expected to be collected through 216 societies under 10 district unions. In the remaining areas, around 11 lakh standard bags are likely to be collected through 868 societies. The number of families involved in Bastar has increased from 3.90 lakh last year to 4.04 lakh this season, with over 14,000 new families joining the activity.

Operations resume in remote areas

For the first time, 10 new tendu leaf collection centres have been set up in the Abujhmad region of Narayanpur, with an estimated collection of over 2,100 standard bags. Additional centres have also been added in Sukma and Keshkal. Last year, collection could not take place at 351 centres due to disruptions in Maoist-affected areas. This year, preparations have been completed to ensure operations begin at all centres.

Smooth operations and transparent payments

Arrangements such as collector cards, collection bags, twine, storage facilities, and transport have been put in place to ensure smooth operations. Insurance cover is also being provided for stored tendu leaves. An online system has been introduced to ensure timely payments, with funds to be transferred directly to collectors’ bank accounts through DBT.

Estimated payout of Rs 920 crore

At the current rates, payments to collectors this year are expected to be around Rs 920 crore. The earnings are likely to support rural and tribal households and improve living conditions. The initiative is aimed at raising incomes of forest-dependent communities while supporting the rural economy.

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