Google Analytics —— Meta Pixel
newscreation

newscreation

 

देबी ने सात साल की उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था, इसके बाद उन्हें अपने चाचा-चाची के साथ रहना पड़ा और आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा

बोकाखात में 'खेलो इंडिया सेंटर' के एक कोच के कहने पर साल 2022 में देबी ने पावर लिफ्टिंग छोड़कर कुश्ती को अपनाया

रायपुर, 02 अप्रैल 2026/ 'जब हालात मुश्किल होते हैं, तो मजबूत लोग आगे बढ़ते हैं- यह एक मशहूर कहावत है जो खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने की ललक को बयां करती है। असम की महिला पहलवान देबी डायमारी की कहानी बाधाओं को पार करने की इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। आखिरकार देबी को उन सभी प्रयासों का फल तब मिला, जब उन्होंने यहां 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' में महिलाओं की 62 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता।

असम के गोलाघाट जिले के सिसुपानी स्थित दिनेशपुर गांव की रहने वाली 28 वर्षीय देबी ने सात साल की उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद उन्हें अपने चाचा-चाची के साथ रहना पड़ा और आर्थिक तंगी के चलते अपनी ट्रेनिंग जारी रखने के लिए उन्हें छोटे-मोटे काम भी करने पड़े। बोडो ट्राइब से आने वाली देबी कहती हैं, '' इस पदक के पीछे मेरी कड़ी मेहनत है। मैंने चार साल पहले ही 2022 में गोलाघाट जिले के बोकाखात में काजीरंगा के बगल में खेलो इंडिया सेंटर में कुश्ती शुरू की थी। इसमें प्रैक्टिस करने के लिए मुझे सेंटर के आसपास रूम लेकर रहना पड़ा। रूम का 1000 रुपया किराया देने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे, इसलिए मुझे एक साल तक पार्ट टाइम जॉब भी करना पड़ा।''

वह आगे कहती हैं, '' पहले तो मुझे 2022 में 2500 रुपये मासिक वेतन पर ईजी बाजार (बोकाखात) स्टोर में काम करना पड़ा और फिर 2023 में काजीरंगा में स्थित बोन विला रिसॉर्ट में करीब 7000 रुपये के मासिक वेतन पर जॉब करना पड़ा। वहां पर मैं स्वीमिंग पूल की देखभाल और सफाई करती थीं।'' उन्होंने आगे कहा, ''सारा दिन काम करने के बाद शाम को सिर्फ दो घंटे के लिए मैं कुश्ती की प्रैक्टिस कर पाती थी। मैंने जितना भी किया, उसके बदले मुझे ये रजत मिला। लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं और मैं अब और कड़ी मेहनत करके आगे गोल्ड जीतना चाहती हूं।''

कुश्ती में मैट पर उतरने से पहले देबी पॉवरलिफ्टिंग और आर्म रेसलिंग करती थीं। लेकिन साल 2022 में उनकी मुलाकात असम टीम के कोच अनुस्तूप नाराह (ANUSTUP NARAH) से हुई, जिनके मार्गदर्शन में रहकर वह कुश्ती की दांव पेंच सीखी हैं। कोच अनुस्तूप कहते हैं, '' 2022 में जब बोकाखात में पंजा टूर्नामेंट हुआ था तो उस दौरान वह मुझे मिली और मैंने उन्हें देखते ही कह दिया कि तुम रेसलिंग करो। उसने सोच विचार के बाद मुझे हां- कह दिया और फिर मैंने उन्हें सबसे पहले सेंटर के पास ही रहने के लिए कहा ताकि ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त समय मिल सके। वह बोली कि सर यहां तो रूम लेकर रहना पड़ेगा और मेरे पास इतने पैसे तो नहीं है। फिर मैंने गोलाघाट जिले के कुश्ती सहायक सचिव से कहकर देबी को काम दिलवाया और एक साइकिल भी दिलवाई। देबी उसी साइकिल से जॉब करने लगी और फिर वह सेंटर के पास रहकर ही प्रैक्टिस भी करने लगी।''

देबी डायमारी ने 2022 में अपने ही जिले के बोकाखात में काजीरंगा स्थित खेलो इंडिया सेंटर में कुश्ती शुरू की थी और उसी साल उन्होंने विशाखापत्तनम में हुए सीनियर चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया। इसके बाद साल बाद ही उन्होंने 2024 में स्टेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। देबी की पिछले साल ही शादी हुई है और उनका पति बेंगलोर में प्राइवेट नौकरी करता है। वह कहती हैं, '' ससुराल वाले मुझे हर तरह से बहुत सपोर्ट करते हैं। पति भी मुझे बहुत सपोर्ट करता है और वह बेंगलुरु से बराबर पैसा भेजता रहता है ताकि मुझे कोई चीज की दिक्कत ना हो।''

देबी डायमारी ने कहा, '' मेरा अगला लक्ष्य सीनियर लेवल पर और पदक जीतना है ताकि मैं उसके बाद इंटरनेशनल लेवल पर भाग ले सकूं। ये सब करने के लिए मैं दिन-रात कड़ी मेहनत कर रही हूं। यहां से जाने के बाद अब देखेंगे कि कोच साहब क्या प्लानिंग करते हैं और फिर हम उसी के हिसाब से काम करेंगे।''

 

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से राह हुई आसान

रायपुर, 2 अप्रैल 1026/ गाँव में कभी बस की पहुँच नहीं थी, आज वहाँ बस के आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सड़क पर बस दिखते ही बच्चे हाथ हिलाकर खुशी जाहिर करते हैं और हॉर्न की आवाज़ सुनते ही लोग घरों से बाहर निकल आते हैं—एक नई उम्मीद के साथ। यह उम्मीद अब शहर मुख्यालय, नगर मुख्यालय और विकासखंड मुख्यालय तक आसान पहुँच की है।

यात्री बस में बैठकर लोग उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्हें पैदल या किसी निजी वाहन के सहारे दूसरे स्थानों तक जाना पड़ता था। अब हालात बदल चुके हैं। स्कूल के बच्चे समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं, वहीं अधिकारी-कर्मचारी भी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुँच पा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ़ सुविधा का नहीं, बल्कि उन ग्रामीण परिवारों के सपनों का है जो विकसित भारत की कल्पना को अपने जीवन में साकार होते देख रहे हैं।

यह परिवर्तन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से संभव हो पाया है। इस योजना के तहत आज बसें उन गाँवों तक पहुँच रही हैं, जहाँ पहले कभी बस नहीं पहुँची थी।

पहाड़ी अंचल की महिलाओं को मिली राहत

जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें पास के गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुँचने के लिए किसी से लिफ्ट लेनी पड़ती थी, निजी वाहन या पैदल जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह बहुत कठिन था। अब ग्रामीण बस से उनकी यह समस्या दूर हो गई है। वे कहती हैं, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।”

ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

बस में सफर कर रहे ग्राम मरंगी निवासी श्री दशरथ भगत हँसते हुए बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी, इसलिए पैदल ही आना-जाना करना पड़ता था। बस का नाम लेते ही उसका चेहरा खिल गया l उन्होंने बताया कि “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”

यात्री श्री मंगलराम बताते हैं कि पहले वे छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाया करते थे। “अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।”

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से न केवल यात्रा सुगम हुई है, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक पहुँचने में भी बड़ी सुविधा मिली है। यह योजना ग्रामीण जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है और जशपुर जैसे पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई राह खोल रही है।

 

हर घर में नल से जल पहुंचने से जीवन हुआ आसान

रायपुर, 02 अप्रैल 2026/ महासमुंद जिलें के पिथौरा विकासखंड का ग्राम बिराजपाली आज “हर घर जल” के लक्ष्य का हासिल कर लिया है। कभी पेयजल के लिए हैंडपंप और दूरस्थ स्रोतों पर निर्भर रहने वाले ग्रामीण अब घर बैठे स्वच्छ पानी का लाभ उठा रहे हैं। इस सुविधा ने न केवल उनकी दिनचर्या को सरल बनाया है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाया है।

ग्राम बिराजपाली में 21 फरवरी 2026 को “हर घर जल” का सफल प्रमाणीकरण किया गया। योजना के तहत गांव के 182 घरों को नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे प्रत्येक परिवार तक नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। जल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 94.27 लाख रुपये की लागत से 40 किलोलीटर क्षमता की ओवरहेड टंकी का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही करीब 2270 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है, जिसके जरिए घर-घर पानी पहुंचाया जा रहा है। गांव में 13 हैंडपंप और 3 पावर पंप भी उपलब्ध हैं, जो जल स्रोतों को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करते हैं।

योजना के सुचारू संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम जल समिति का गठन किया गया है, जो प्रत्येक परिवार से 60 रुपये प्रतिमाह जलकर के रूप में संग्रहित कर रही है। इस उपलब्धि में सरपंच श्री एतराम साहू और सचिव श्रीमती पुष्पलता चौहान के नेतृत्व तथा ग्रामीणों के सहयोग की अहम भूमिका रही है। श्रीमती श्याम बाई बताती हैं कि अब पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। यह सुविधा उनके दैनिक जीवन में एक सुखद बदलाव बनी है।

 

किरण भारत के लिए खेल चुकी हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेली हैं

किसी भी पोज़िशन पर खेलने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत

रायपुर, 2 अप्रैल 2026/ जब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान किरण पिस्दा ने गोलकीपिंग के दस्ताने पहने, तब वह अपने अब तक के अनुभवों पर भरोसा कर रही थीं। उन अनुभवों पर, जिन्होंने चुनौतियों और निराशाओं के बीच उन्हें और अधिक मजबूत बनाया।

24 साल की उम्र में किरण अपने खेल कौशल के शिखर पर नजर आती हैं। वह यूरोप में लीग फुटबॉल खेल चुकी हैं और अब बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की दहलीज पर हैं।

हालांकि, उनका यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा, भले ही उन्हें स्कूल और परिवार से शुरुआती समर्थन मिला। उनके भाई गिरीश पिस्दा, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके लिए प्रेरणा बने।

किरण ने साई मीडिया से कहा, “मुझे स्कूल में काफी सपोर्ट मिला। वहीं से मुझे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मौके मिले और हर चयन के साथ मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया।” इसके बाद किरण शारीरिक शिक्षा में डिग्री हासिल करने के लिए रायपुर आईं। छत्तीसगढ़ महिला लीग के दौरान उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय शिविर के लिए बुलावा मिला।

किरण बताती हैं, “उस समय मैं शारीरिक रूप से उतनी फिट नहीं थी और मेरा मानसिक स्तर भी सीनियर खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार नहीं था।” यही कारण रहा कि उस राष्ट्रीय शिविर में उन्हें भारतीय टीम के लिए चयन नहीं मिला। वह कहती हैं, “मुझे एहसास हुआ कि वहां जो अनुभव मिला है, उस पर मुझे काम करना होगा।”

इसके बाद उनके जीवन में आत्म-सुधार का एक कठिन दौर शुरू हुआ। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, मैचों का विश्लेषण करना शुरू किया और अपनी पोज़िशनल समझ को बेहतर बनाया। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिकता में आया।

वह कहती हैं, “मैंने खुद से कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं नकारात्मक नहीं सोचूंगी। अगर आप नकारात्मक हो जाते हैं, तो उसका सीधा असर आपके प्रदर्शन पर पड़ता है।” इस बदलाव में उनके मेंटर और कोच योगेश कुमार जांगड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किरन ने कहा,“जब भी मुझे लगता है कि मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हूं या मन खराब होता है, तो मैं उनसे बात करती हूं। वह हमेशा मुझे सकारात्मक रहने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”

किरण की मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। घरेलू स्तर पर उनके प्रदर्शन ने केरल ब्लास्टर्स जैसे क्लबों के दरवाजे खोले, जहां उन्होंने खुद को और निखारा। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा बन गई। वह कहती हैं, “मैंने स्ट्राइकर के रूप में शुरुआत की, फिर मिडफील्ड में खेली और अब राष्ट्रीय टीम के लिए फुल-बैक के रूप में खेलती हूं। एक फुटबॉलर के रूप में आपको अपनी टीम के लिए कई पोज़िशन पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

किरण कई बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2022 के सैफ़ चैंपियनशिप स्क्वाड का हिस्सा रही हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेल चुकी हैं। फिर भी, इस मुकाम पर भी असफलताएं उनके सफर का हिस्सा रही हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एएफसी (AFC) महिला एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना उनके लिए एक और परीक्षा थी।

किरण कहती हैं, “बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना दुख देता है। हर खिलाड़ी इसे महसूस करता है। लेकिन अब मैं इसे अलग नजरिए से देखती हूं। इसे मैं और मेहनत करने और मजबूत वापसी करने की प्रेरणा मानती हूं।” दबाव को संभालना उनकी पहचान बन चुका है। चाहे टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा हो या अहम मैचों में प्रदर्शन, उन्होंने खुद को संयमित रखना सीख लिया है। वह कहती हैं, “ऊंचे स्तर पर खेलते समय दबाव हमेशा रहता है। आपको उसे संभालना सीखना पड़ता है।”

 

इंदौर-उज्जैन तथा उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग निर्माण को मिला अनुमोदन
पश्चिम भोपाल बायपास का परिवर्तित एलाइनमेंट अनुमोदित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास‍निगम के संचालक मंडल की हुई बैठक

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों से मुलाकात और चर्चा की

 

योजनाएं जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की पहल- राज्यपाल श्री पटेल
राज्यपाल श्री पटेल कन्हारीकला में दुधारू पशु वितरण एवं स्वास्थ्य शिविर में हुए शामिल

 

140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान - मुख्यमंत्री श्री साय

लोकभवन में मनाया गया विभिन्न राज्यों का स्थापना दिवस

रायपुर, /
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि यह अवसर इन राज्यों की समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक परंपराओं और विकास यात्रा को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के माध्यम से आपसी समझ और जुड़ाव को बढ़ाना है जिससे भारत की एकता और अखंडता मजबूत होती है।

राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में आज लोकभवन में 7 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय विशेष रूप से उपस्थित थे।

एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन दीव, बिहार, राजस्थान और ओडिशा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।


राज्यपाल ने मिजोरम और अरूणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संुदरता और जनजातीय संस्कृति, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव की पर्यटन एवं औद्योगिक विशेषताओं, बिहार के लोगों का अर्थव्यवस्था एवं विकास में योगदान, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत, राजस्थान के लोगों के व्यापारिक उन्नति और शौर्य परंपरा तथा ओडिशा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बहुत समानताएं हैं। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूत बनाते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत 140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है। भाषा, वेशभूषा, खान-पान में भले ही हम अलग अलग है लेकिन अनेकता में एकता हमारी देश की विशेषता हैं। एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम इसी भावना को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच रोटी बेटी के संबंध, राजस्थान के व्यापारियों का छत्तीसगढ़ के व्यापार एवं उद्योग की उन्नति में योगदान सहित अन्य राज्यों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत हम लोग विभिन्न राज्यों में जाकर वहां की संस्कृति से परिचित हो रहे हैं।

समारोह में राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने राज्यों की विशेषताओं, परंपरा, संस्कृति पर प्रकाश डाला। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सभी राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति दी। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्यपाल ने राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट किया। राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी राज्यपाल को अपने राज्य की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर राज्यपाल ने उनका सम्मान किया। इसी तरह राज्यपाल की उप सचिव सुश्री निधि साहू ने देहदान का निर्णय लिया है, जिसकी सराहना करते हुए श्री डेका ने उन्हें भी सम्मानित किया।

कार्यक्रम में विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, अन्य जनप्रतिनिधि, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर प्रसन्ना, अन्य अधिकारी एवं इन सभी राज्यों के युवा, महिलाएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

एक दूसरे के राज्य के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करने का है यह महत्वपूर्ण अवसर - राज्यपाल श्री डेका

140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान - मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर, 01 अप्रैल 2026 / राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में आज लोकभवन में 7 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय विशेष रूप से उपस्थित थे।

एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन दीव, बिहार, राजस्थान और ओडिशा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

राज्यपाल ने कहा कि यह अवसर इन राज्यों की समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक परंपराओं और विकास यात्रा को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के माध्यम से आपसी समझ और जुड़ाव को बढ़ाना है जिससे भारत की एकता और अखंडता मजबूत होती है।

राज्यपाल ने मिजोरम और अरूणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संुदरता और जनजातीय संस्कृति, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव की पर्यटन एवं औद्योगिक विशेषताओं, बिहार के लोगों का अर्थव्यवस्था एवं विकास में योगदान, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत, राजस्थान के लोगों के व्यापारिक उन्नति और शौर्य परंपरा तथा ओडिशा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बहुत समानताएं हैं। राज्यपाल ने कहा कि भारत की विविधता की उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूत बनाते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत 140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है। भाषा, वेशभूषा, खान-पान में भले ही हम अलग अलग है लेकिन अनेकता में एकता हमारी देश की विशेषता हैं। एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम इसी भावना को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच रोटी बेटी के संबंध, राजस्थान के व्यापारियों का छत्तीसगढ़ के व्यापार एवं उद्योग की उन्नति में योगदान सहित अन्य राज्यों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत हम लोग विभिन्न राज्यों में जाकर वहां की संस्कृति से परिचित हो रहे हैं।

समारोह में राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने राज्यों की विशेषताओं, परंपरा, संस्कृति पर प्रकाश डाला। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सभी राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति दी। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्यपाल ने राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होंने भी राज्यपाल को अपने राज्य की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर राज्यपाल ने उनका सम्मान किया। इसी तरह राज्यपाल की उप सचिव सुश्री निधि साहू ने देहदान का निर्णय लिया है जिसकी सराहना करते हुए श्री डेका ने उन्हें भी सम्मानित किया।

कार्यक्रम में विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, अन्य जनप्रतिनिधि, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर प्रसन्ना, अन्य अधिकारी एवं इन सभी राज्यों के युवा, महिलाएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति

जल जीवन मिशन से हर घर पहुंचा नल जल

रायपुर /केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन ने सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम सालातोंग में बदलाव की नई इबारत लिख दी है। 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में इसी लक्ष्य को साकार करते हुए नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत कोंटा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम सालातोंग में अब हर घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है।

ग्राम सालातोंग, जो कोंटा से लगभग 100 किमी तथा जिला मुख्यालय सुकमा से 90 किमी दूर स्थित है, लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट से जूझता रहा। गांव के लगभग 80 घरों के लोग पीने और घरेलू उपयोग के लिए एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में जब महीनों तक बारिश नहीं होती थी, तब नाले का जलस्तर इतना घट जाता था कि ग्रामीणों को बेहद सीमित मात्रा में पानी निकालना पड़ता था। कई बार पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी होती थी।

अब जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव में 100 नल कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य तेजी से किया गया, जिससे ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध जल उपलब्ध होने लगा है। मिशन के लागू होने के बाद गांव में न केवल जल संकट दूर हुआ, बल्कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है।

जल जीवन मिशन के तहत सालातोंग में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। गांव के जल स्रोतों सोलर आधारित सिस्टम एवं हैंडपंप का नियमित रूप से जल गुणवत्ता परीक्षण किया जा रहा है। इस कार्य में “जल बहिनियाँ” भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और गांव की शिक्षित महिलाएं शामिल हैं। इन्हें जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है, ताकि वे स्वयं पानी की जांच कर ग्रामीणों को सुरक्षित जल उपलब्धता सुनिश्चित कर सकें।

ग्रामीणों ने इस मिशन के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता, घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे हमारा जीवन आसान और सुरक्षित हुआ है। जल जीवन मिशन ने सालातोंग में स्वच्छ जल पहुंचाकर यह साबित कर दिया है कि सरकार की योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है।

Ads

R.O.NO. 13784/149 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक