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मायावती के शासन काल के ‘स्मारक घोटाला’ मामले में ईडी ने की छापेमारी Featured

नयी दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जुड़े खनन मामले के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को राज्य में बसपा सुप्रीमो मायावती के शासन के दौरान बनाए गए स्मारकों के निर्माण में 111 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं के सिलसिले में छापेमारी की। अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने 2014 की राज्य सतर्कता विभाग की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए इन मामलों की जांच के लिये धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि यह छापेमारी सात जगहों पर की गई और इनमें कुछ अधिकारियों और निजी लोगों के ठिकाने शामिल हैं। 
 
सतर्कता विभाग की शिकायत दंड प्रक्रिया संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गयी थी और यह स्मारकों के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के 2007 से 2012 के कार्यकाल के दौरान बसपा के संस्थापक कांशीराम और पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘हाथी’ की प्रतिमाएं भी शामिल हैं। यह आरोप है कि इस कृत्य से “सरकारी खजाने को 111,44,35,066 रुपये का नुकसान हुआ और लोकसेवकों व निजी व्यक्तियों को अवैध फायदा हुआ।” मायावती के नेतृत्व वाली सरकार ने लखनऊ, नोएडा और राज्य में कुछ अन्य जगहों पर 2600 करोड़ रुपये की लागत से स्मारक, मूर्तियां और पार्क बनवाए थे।
 
उप्र लोकायुक्त ने पूर्व में मायावती के दो मंत्रिमंडलीय सहयोगियों- नसीमुद्दीन सिद्दकी और बाबू सिंह कुशवाहा के अलावा 12 बसपा विधायकों और कुछ अन्य को स्मारकों के लिये बलुआ पत्थरों की खरीद में कथित “गड़बड़ियों” में दोषी ठहराया था। लोकायुक्त की रिपोर्ट पर सतर्कता विभाग द्वारा उनके खिलाफ 2014 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। 
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