भारतीय अमेरिकी लेखक ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ, कहा...... Featured

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा चुने जाने के बाद भारत को अगले पांच साल में स्थिरता मिलेगी क्योंकि उन्होंने विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। भारतीय-अमेरिकी लेखक राजीव मल्होत्रा ने पीएम मोदी के तीसरी बार सत्ता में आने की उम्मीद जताई है।

साथ ही अगर वो इस बार सत्ता में आ जाते हैं तो इससे भारत को कितना फायदा मिलेगा, इसको लेकर अपनी राय भी दी है। भारत देश के बाहर से मिल रही चुनौतियों का साहसपूर्वक मुकाबला कर सकता है इसका कारण मोदी सरकार है।

एक इंटरव्यू में राजीव मल्होत्रा देश में हुए विकास पर बात करते हु्ए कहते हैं, 'आप देख सकते हैं कि गरीबों से लेकर अल्पसंख्यकों तक समाज के हर वर्ग को लाभ हुआ है।' उन्होंने आगे कहा, आप आंकड़ो के साथ ये देख सकते हैं उनके पास सड़कें, साफ पानी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, खाना और शिक्षा है। राजीव मल्होत्रा ने विपक्ष पर भी निशाना साधा, उन्होंने कहा, जबकि पिछली सरकार गरीबी से लड़ने आदि के नारे लगा रही थी, लेकिन काम नहीं कर रही थी।

राष्ट्रीय थिंक-टैंक बनाने का दिया सुझाव

राजीव मल्होत्रा कहते हैं, मोदी को अपने तीसरे कार्यकाल में भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप सहित कई प्रमुख चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कुछ संवैधानिक संशोधनों को आगे बढ़ाते हुए एक राष्ट्रीय थिंक-टैंक बनाने का सुझाव दिया,जो जाति, धर्म और जातीयता के बावजूद सभी भारतीयों को समान अधिकार और लाभ दे।

'हमले के पीछे कौन है'

वहीं राजीव मल्होत्रा ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को लेकर भी अपने विचार व्यक्त किए। 'मुझे उनका दुस्साहस और एक्टिव रिएक्शन पसंद है, लेकिन वो आतंकवाद और हमलों का पता लगाने में अभी असमर्थ हैं, इसको लेकर उन्होंने ज्यादा रिसर्च नहीं की है। उन्हें यह पता लगाने की जरूरत है कि, इस हमले के पीछे कौन है, अगला हमला कहां हो सकता है?' राजीव मल्होत्रा कहते हैं, हमारी खुफिया एजेंसी इन हमलों को रोक सकती है, या पहले से ही अंदाजा लगा सकती है, इसके लिए उसे अलर्ट होना होगा।

राजीव मल्होत्रा आगे कहते हैं,ऐसे कई उदाहरण हैं जहां वे हमलों को रोकने में सक्षम हुए हैं। लेकिन वहीं भारत के खिलाफ हिंसा भड़काने, खालिस्तान या कश्मीर अलगाववादी की बात हो। साथ ही जो मासूम बच्चे इस हिंसा का शिकार हो रहे हैं, रोते बिलखते चीख रहे हैं। अभी भारत इसका समाधान करने में सक्षम नहीं हुआ है।

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Last modified on Friday, 31 May 2024 09:08
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