ईश्वर दुबे
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एक चैनल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ''जब बहुत सारे लोग कर नहीं देते, कर नहीं देने के तरीके खोज लेते हैं, तो इसका भार उन लोगों पर पड़ता है, जो ईमानदारी से कर चुकाते हैं। इसलिए, मैं आज प्रत्येक भारतीय से इस विषय में आत्ममंथन करने का आग्रह करूंगा।
भारत के करदाताओं पर मोदी सरकार की पैनी नजर है। यही वजह है कि एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करदाताओं का जिक्र करते हुए कई चौंकाने वाले आंकड़े लोगों के सामने रखें। पीएम मोदी ने कहा कि देश में 1.5 करोड़ से ज्यादा कारों की ब्रिकी हुई है। तीन करोड़ से ज्यादा भारतीय कारोबार के काम से या घूमने के लिए विदेश गए हैं, लेकिन स्थिति ये है कि 130 करोड़ से ज्यादा के हमारे देश में सिर्फ 1.5 करोड़ लोग ही आयकर देते हैं।' एक चैनल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, 'जब बहुत सारे लोग कर नहीं देते, कर नहीं देने के तरीके खोज लेते हैं, तो इसका भार उन लोगों पर पड़ता है, जो ईमानदारी से कर चुकाते हैं। इसलिए, मैं आज प्रत्येक भारतीय से इस विषय में आत्ममंथन करने का आग्रह करूंगा। क्या उन्हें ये स्थिति स्वीकार है?' इसी कार्यक्रम में पीएम ने बताया कि भारत में सिर्फ 2200 लोग ही ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सालाना आय 1 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है।
पीएम मोदी के दिए आंकड़े के बाद विपक्ष की ओर से कटाक्ष भी किया गया है। माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने सोशल मीडिया में इन आंकड़ों की सच्चाई पर उठ रहे सवालों का जिक्र करते हुये कहा कि मोदी हमेशा से ही आंकड़ों, तथ्यों और सच का अनादर करते रहे हैं। उनका मकसद सिर्फ गलत प्रचार करना है। येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘मोदी के मुताबिक प्रत्येक भारतीय चोर है, जबकि उनकी पार्टी (भाजपा) ने इलेक्ट्रोरल बॉंड के जरिये गुपचुप तरीके से करोड़ों रुपये जुटा लिये हैं।
इस सब के बीच सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) की ओर से इनकम टैक्सपेयर्स के विस्तृत आंकड़े पेश किए गए हैं। सीबीडीटी के अनुसार 2018-19 के दौरान 5.78 करोड़ लोगों ने अपने आय का खुलासा करते हुए रिटर्न दाखिल किया। इनमें से 1.03 करोड़ व्यक्तियों ने 2.5 लाख रुपये से कम की आय दर्शायी है और 3.29 करोड़ व्यक्तियों ने 2.5 लाख से 5 लाख तक की टैक्स योग्य आय का खुलासा किया है।
इस वित्तीय वर्ष के दौरान दायर 5.78 करोड़ रिटर्न में से 4.32 करोड़ व्यक्तियों ने 5 लाख रुपये तक की आय का खुलासा किया है। वित्त अधिनियम, 2019 में 5 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तिगत कर दाताओं को छूट दी गई है। इसलिए, 5 लाख रुपये तक की आय वाले इन 4.32 करोड़ व्यक्तिगत करदाताओं को चालू वित्त वर्ष 2019-20 और उसके बाद के वर्षों के लिए कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। इसलिए, लगभग 1.46 करोड़ व्यक्तिगत करदाता आयकर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।
इसके अलावा, लगभग 1 करोड़ लोगों ने 5-10 लाख रुपये के बीच की आय का खुलासा किया है। जबकि सिर्फ 46 लाख लोगों ने 10 लाख रुपये से अधिक की आय का खुलासा किया है। इसी तरह, 3.16 लाख टैक्सपेयर्स ने 50 लाख रुपये से अधिक की आय का खुलासा किया है। जबकि देश भर में 5 करोड़ रुपये से अधिक की आय की जानकारी देने वाले टैक्सपेयर्स में सिर्फ 8,600 लोग हैं।