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सफलता की कहानी

कमाया 70 हजार रूपए का अतिरिक्त लाभ

रायपुर,  जुलाई 2026/ देश और राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों के बीच श्राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजनाश् छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम कचनूर से एक बेहद प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहाँ एक किसान ने सूझबूझ दिखाते हुए ऑयल पाम के साथ मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती (प्दजमतबतवचचपदह) अपनाकर शानदार अतिरिक्त लाभ कमाया है।

खाली पड़ी जमीन का किया सटीक सदुपयोग

ग्राम कचनूर के प्रगतिशील किसान श्री पोटाम गणेश ने अपनी 2.20 हेक्टेयर कृषि भूमि पर ऑयल पाम के पौधे लगाए हैं। चूँकि ऑयल पाम के पौधों को पूरी तरह विकसित होकर फल देने में कुछ वर्षों का समय लगता है, तब तक पौधों के बीच की जमीन खाली रहती है। इस खाली भूमि का सही उपयोग करने के लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग की सलाह पर बीच में मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती करने का स्मार्ट फैसला लिया।

30 हजार रूपए की लागत में 70 हजार रूपए का शुद्ध मुनाफा

पोटाम गणेश का यह निर्णय आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हुआ। मूंगफली की इस अंतरवर्तीय फसल से उन्हें जो परिणाम मिला उससे वह उत्साहित है। कुल उत्पादन मूल्य लगभग एक लाख रुपए मिला किन्तु खेती में लागत मात्र 30 हजार रुपये लगा और शुद्ध मुनाफा 70 हजार रुपये मिला।

शुरुआती वर्षों में किसानों को संबल देती है यह तकनीक

अपनी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हितग्राही पोटाम गणेश ने कहा, ऑयल पाम के शुरुआती वर्षों में जब तक मुख्य फसल तैयार नहीं होती, तब तक अंतरवर्तीय फसल लेने से हमारी नियमित आय बनी रहती है। इससे खेती की लागत निकालना बहुत आसान हो जाता है और आर्थिक मजबूती मिलती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य साथी किसानों से भी अपील की है कि वे इस आधुनिक खेती पद्धति को अपनाएं।

राष्ट्रीय मिशन से मिल रहा है तकनीकी मार्गदर्शन

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयलदृऑयल पाम योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन, आवश्यक सहयोग और उन्नत खेती के तौर-तरीकों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना न केवल किसानों की व्यक्तिगत आय को बढ़ा रही है, बल्कि खाद्य तेलों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने और तिलहन उत्पादन बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

25 आत्मसमर्पित युवाओं को मिला स्वरोजगार

रायपुर,  जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में राज्य सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास नीति के तहत एक सराहनीय पहल की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुकमा में मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम संपन्न

कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस 15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम में 25 आत्मसमर्पित युवाओं ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य इन युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें समाज में एक सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है।

विशेषज्ञों ने सिखाए वैज्ञानिक खेती के गुर

प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) कराया गया। युवाओं को बेहद सरल तरीके से तकनीकी जानकारियां दी गईं, जिसके तहत धान के पुआल (पैरा) की तैयारी और उपचार रकने के बाद मशरूम के स्पॉन (बीज) का सही उपयोग कर पॉलीबैग तैयार करना और नमी का संतुलन बनाए रखना, फसल की वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई, पैकेजिंग और स्थानीय बाजार में उसकी बिक्री करना शामिल था ।

कम लागत और कम समय में अधिक मुनाफा

कृषि विशेषज्ञों ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि मशरूम उत्पादन एक ऐसा लाभकारी व्यवसाय है जिसे बहुत कम लागत, कम जगह और बेहद कम समय में शुरू किया जा सकता है। विशेषकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से इसे अपनाकर युवा हर महीने एक नियमित और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।

बाजार में बढ़ती मांग और सेहत के लिए फायदेमंद

प्रशिक्षण में मशरूम के पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह एक अत्यंत पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी तथा कई आवश्यक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम वसा (लो फैट) और कम कैलोरी होने के कारण आज के समय में बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्वरोजगार का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहा है।

इस पहल से न केवल आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि वे एक नए आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में अपना जीवन बिता सकेंगे।

धरमजयगढ़ जिला यूनियन के 46 हजार 840 संग्राहकों को मिलेंगे 17.43 करोड़ रुपये बोनस राशि

रायपुर, जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) का वितरण शुरू हो गया है। राज्य स्तरीय सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर 3 जुलाई से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत धरमजयगढ़ जिला वनोपज सहकारी यूनियन के संग्राहकों के बैंक खातों में 17 करोड़ 43 लाख रुपये ऑनलाइन अंतरित किए जा रहे हैं।

58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस

वनमंडलाधिकारी एवं पदेन प्रबंध संचालक, जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित धरमजयगढ़ ने बताया कि जिला यूनियन की 58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस वितरण किया जा रहा है। वर्ष 2023 के संग्रहण सीजन में जिला यूनियन की 59 समितियों के माध्यम से 70,945.485 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया था। इसके लिए 46,840 संग्राहकों को कुल 17.43 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया जा रहा है।
जिला यूनियन की प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति बोरो को सबसे अधिक 4,710.58 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से बोनस मिला है। इसके बाद प्राथमिक समिति रायमेर को 4,616.76 रुपये प्रति मानक बोरा का प्रोत्साहन पारिश्रमिक प्राप्त हुआ है।

ऑनलाइन भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता

वन विभाग द्वारा बोनस राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में ऑनलाइन भेजी जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आसान बनी है तथा संग्राहकों को समय पर राशि मिल रही है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों ने बताया कि इस बोनस राशि से वे खेती-किसानी, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। समय पर मिली आर्थिक सहायता से न केवल संग्राहकों को राहत मिली है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

डिजिटल सुशासन पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी

सेवा सेतु से आसान हुआ विवाह पंजीयन, अंकिता ओयम को समय पर मिला प्रमाण-पत्र

रायपुर,/ शासन की महत्वाकांक्षी श्सेवा सेतुश् पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुशासन की मजबूत मिसाल बन रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से लोगों को अब शासकीय सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। आय, जाति, निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक प्रमाण-पत्र अब सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रहे हैं।

डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया होने के कारण अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी

बीजापुर जिले के ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर की निवासी अंकिता ओयम को भी सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से समय पर विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने तहसील कार्यालय उसूर स्थित सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका शीघ्र निराकरण किया गया और उन्हें समय पर प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया। प्रमाण-पत्र का वितरण सेवा सेतु केन्द्र की मैनेजर श्रीमती मंजुलता दुर्गम एवं श्री शंकर मोडियम द्वारा किया गया। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी होने के कारण अंकिता को किसी प्रकार की अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी।

सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधाजनक

अंकिता बताती हैं कि पहले विवाह पंजीयन जैसे कार्यों के लिए कई बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। लेकिन सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन करना आसान रहा और निर्धारित समय के भीतर उन्हें प्रमाण-पत्र मिल गया। इससे उनके जरूरी कार्य भी बिना किसी परेशानी के पूरे हो सके। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधा है। इससे शासकीय सेवाएं घर के नजदीक, पारदर्शी और समय पर मिल रही हैं, जिससे लोगों का शासन-प्रशासन पर भरोसा भी बढ़ा है।

डिजिटल प्रशासन को मजबूत और पारदर्शी बनाने प्रभावी

राज्य शासन द्वारा संचालित सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से आय, जाति, स्थानीय निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक शासकीय सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिकों को सरल, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।

हितग्राही की प्रतिक्रिया

अंकिता ओयम, ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर निवासी ने बताया कि सेवा सेतु केन्द्र में विवाह पंजीयन की पूरी प्रक्रिया बहुत आसान रही। मुझे समय पर प्रमाण-पत्र मिल गया, जिससे मेरे सभी जरूरी काम बिना किसी परेशानी के पूरे हो गए। इसके लिए मैं शासन-प्रशासन और सेवा सेतु केन्द्र की पूरी टीम का हृदय से धन्यवाद देती हूँ।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में आपातकालीन सेवाएं बनीं आमजन का भरोसा

डॉयल-112 टीम की तत्परता से समय पर मिला उपचार, महिला पूरी तरह खतरे से बाहर

रायपुर,  जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम नागरिकों को त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में डॉयल-112 की सतर्क एवं त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर मानव जीवन की रक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को प्रमाणित किया है। डॉयल-112 टीम ने सर्पदंश की शिकार एक महिला को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जानकारी के अनुसार, रात्रि लगभग एक बजे डॉयल-112 गौरेला फाल्कन-1 को ग्राम जमुनिया टोला, धनौली से एक महिला के सर्पदंश की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डॉयल-112 में तैनात आरक्षक श्री रामदयाल आयाम एवं चालक श्री गोपाल पुरी तत्काल आपातकालीन वाहन लेकर घटनास्थल के लिए रवाना हुए। टीम ने मौके पर पहुंचकर पाया कि ग्राम जमुनिया टोला, धनौली निवासी 55 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर पनिका को रात्रि में जमीन पर सोने के दौरान जहरीले सर्प ने काट लिया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉयल-112 टीम ने बिना किसी विलंब के पीड़िता को परिजनों के साथ ईआरवी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार प्रारंभ किया। समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से महिला की जान बच गई और वर्तमान में उनकी स्थिति सामान्य है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित आपातकालीन सहायता प्रणाली केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की प्रत्येक घड़ी में नागरिकों की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रही है। डॉयल-112 की प्रशिक्षित टीमों की त्वरित प्रतिक्रिया, आधुनिक संचार व्यवस्था और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता मिल रही है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम धनौली में सर्पदंश की शिकार एक युवती को डॉयल-112 की तत्परता से समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसका जीवन बचाया गया था। लगातार दूसरी सफल कार्रवाई ने जिले में डॉयल-112 के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत किया है।

जिला प्रशासन एवं जिला पुलिस ने वर्षा ऋतु के दौरान नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे जमीन पर सोने के बजाय चारपाई या बिस्तर का उपयोग करें, रात्रि में मच्छरदानी का प्रयोग करें तथा घर एवं आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें ताकि सर्पों के प्रवेश की संभावना कम हो। यदि किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए तो झाड़-फूंक, टोने-टोटके अथवा घरेलू उपचार में समय न गंवाते हुए तत्काल डॉयल-112 अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, क्योंकि समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को संकट की घड़ी में तत्काल सहायता उपलब्ध हो। इसी उद्देश्य से डॉयल-112 सेवा को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी आपातकालीन सहायता शीघ्रता से पहुंच सके। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की यह घटना दर्शाती है कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से न केवल आपात स्थितियों का प्रभावी प्रबंधन हो रहा है, बल्कि नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी निरंतर सुदृढ़ हो रही है।

प्रतिभाशाली बच्चों से 31 जुलाई तक मांगे गए नामांकन

रायपुर,देश के बच्चों की असाधारण प्रतिभा और अद्वितीय उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026 के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 तय की गई है।

राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है सम्मानित

यह भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक बेहद प्रतिष्ठित पुरस्कार है, जो प्रतिवर्ष देश के राष्ट्रपति द्वारा उन बच्चों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा के दम पर देश का गौरव बढ़ाया है।

पात्रता और पुरस्कार की श्रेणियां

इस पुरस्कार के लिए 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे आवेदन करने के पात्र हैं। बच्चों को उनके द्वारा निम्नलिखित क्षेत्रों में किए गए असाधारण कार्यों के लिए नामांकित किया जा सकता है। वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित पुरस्कार किया जाएगा।

स्व-नामांकन की भी सुविधा, केवल ऑनलाइन स्वीकार होंगे आवेदन

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए इच्छुक बच्चे खुद भी अपना नामांकन कर सकते हैं। इसके अलावा अभिभावक, विभिन्न शैक्षणिक व सामाजिक संस्थाएं या कोई भी अन्य व्यक्ति योग्य बच्चों का नामांकन दर्ज करा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक आवेदक विस्तृत जानकारी और ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल
https://awards.gov.in/पर विजिट किया जा सकता है।

राज्य शासन ने की अधिक से अधिक आवेदन की अपील

छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने प्रदेश के सभी जिलों के प्रतिभाशाली बच्चों, उनके माता-पिता और शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इन पुरस्कारों के लिए आवेदन करें। इससे राज्य के होनहार बच्चों की छुपी हुई प्रतिभा और उपलब्धियों को राष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान मिल सकेगी।

मेधावी श्रमिक बच्चों को मिलेगी निःशुल्क आवासीय शिक्षा

ऑनलाइन आवेदन 12 जुलाई तक

रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के श्रम विभाग द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाले मेधावी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रदेश के उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में पूर्णतः निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

इन माध्यमों से कर सकते हैं आवेदन

श्रम विभाग के ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप एवं आधिकारिक वेब पोर्टल द्वारा पात्र विद्यार्थी और उनके अभिभावक निम्नलिखित माध्यमों से आसानी से आवेदन जमा कर सकते हैं। अपने निकटतम विकासखंड की जनपद पंचायत में स्थित श्रम संसाधन केंद्र में जाकर या नजदीकी चॉइस सेंटर के माध्यम से, जिला कार्यालय के श्रम पदाधिकारी के पास जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

आवेदन करते समय विद्यार्थियों को निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार श्रमिक पंजीयन कार्ड (लेबर कार्ड), छात्र-छात्रा का मूल निवास प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। आधार कार्ड (नियमों के तहत सुरक्षित रूप से आवश्यक), कक्षा 5वीं की उत्तीर्ण अंकसूची (मार्क्सशीट), वर्तमान कक्षा में अध्ययनरत होने का प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा।

योजना की प्रमुख शर्तें और पात्रता

योजना का लाभ केवल उन पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मिलेगा, जिनका श्रमिक पंजीयन आवेदन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व का हो। यह लाभ श्रमिक परिवार की प्रथम दो संतानों को ही देय होगा। विद्यार्थी का शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश लेना अनिवार्य है।

चयन के बाद मिलेंगी ये विश्वस्तरीय सुविधाएं

प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करने के बाद छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित छात्र-छात्राओं को कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक की पूरी पढ़ाई निःशुल्क कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्हें उत्कृष्ट विद्यालयों में मुफ्त आवास (हॉस्टल), पौष्टिक भोजन तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि श्रमिक परिवारों के बच्चों को एक बेहतर और प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल मिल सके।

'सेवा सेतु' केंद्र से 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्र, समय पर हुआ छात्रा का कॉलेज प्रवेश

रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य शासन की डिजिटल पहल 'सेवा सेतु पोर्टल' आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह पोर्टल शासकीय सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले से एक सुखद मामला सामने आया है, जहां सेवा सेतु केंद्र की तत्परता से मात्र 24 घंटे के भीतर एक छात्रा का आय प्रमाण पत्र बन गया और उसका कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित हो सका।

अंतिम तिथि पास होने से चिंतित था परिवार

राजनांदगांव जिले के विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम आयबांधा निवासी श्री तोरण लाल अपनी पुत्री निकिता के उच्च शिक्षा (कॉलेज) में प्रवेश को लेकर काफी चिंतित थे। कॉलेज में दाखिले के लिए आय प्रमाण पत्र अनिवार्य था और प्रवेश की अंतिम तिथि बेहद नजदीक आ चुकी थी। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने की आशंका से पूरा परिवार परेशान था।

ऑनलाइन आवेदन के बाद 24 घंटे में समाधान

इसी दौरान तोरण लाल को डोंगरगांव में स्थित 'सेवा सेतु केंद्र' की जानकारी मिली। वे तुरंत आवश्यक दस्तावेजों के साथ केंद्र पहुंचे। केंद्र संचालक ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई और 22 जून 2026 को उनका ऑनलाइन आवेदन दर्ज किया। डिजिटल प्रक्रिया के त्वरित निराकरण (Fast-track Processing) के चलते मात्र 24 घंटे के भीतर ही आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके चलते निकिता का कॉलेज में प्रवेश बिना किसी बाधा के समय-सीमा के भीतर हो गया।

समय और धन दोनों की हो रही बचत

अपनी खुशी साझा करते हुए हितग्राही तोरण लाल ने कहा, "पहले शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए विभिन्न दफ्तरों के कई चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। लेकिन सेवा सेतु केंद्र की डिजिटल व्यवस्था से हमारा काम बेहद सरल और कम समय में हो गया। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से मेरी बेटी का भविष्य सुरक्षित हुआ है।"

घर बैठे मिल रहीं 400 से अधिक सेवाएं

'सेवा सेतु पोर्टल' के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे या अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी सेवाएं, राशन कार्ड और पेंशन सहित 400 से अधिक शासकीय सेवाओं का लाभ आसानी से उठा रहे हैं। यह व्यवस्था आम जनता को समयबद्ध सेवाएं देने के साथ-साथ उनके समय और धन की बड़ी बचत कर रही है, जिसके लिए नागरिकों ने राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के प्रति आभार व्यक्त किया है।

1 नवंबर को होगा पुरस्कार का वितरण

रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के कृषि विभाग द्वारा प्रतिष्ठित डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार 2026 के लिए राज्य के इच्छुक और पात्र प्रगतिशील किसानों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले चयनित किसान को राज्य स्थापना दिवस (1 नवंबर 2026) के अवसर पर गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

यहाँ से मिलेंगे नि:शुल्क आवेदन पत्र

पुरस्कार के लिए निर्धारित आवेदन पत्र अपने नजदीकी उप संचालक कृषि या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय से बिना किसी शुल्क के प्राप्त किए जा सकते हैं। पूरी तरह भरे हुए आवेदन पत्र को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित कार्यालय में ही जमा करना होगा।

आवेदन के साथ ये चीजें संलग्न करना अनिवार्य

आवेदक किसान को अधिकतम दो पृष्ठों में अपने कृषि कार्यों की सफलता की कहानी लिखनी होगी। कृषि गतिविधियों के छायाचित्र, आधुनिक या नवाचारी खेती का प्रदर्शन करती हुई एक वीडियो सीडी, संलग्न करना होगा।

पुरस्कार के लिए क्या हैं पात्रता

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की पात्रता के लिए विभाग ने निम्नलिखित कड़े मापदंड तय किए हैं। किसान छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पिछले कम से कम 10 वर्षों से निरंतर कृषि कार्य कर रहा हो। किसान की कुल वार्षिक आय का न्यूनतम 75 प्रतिशत हिस्सा केवल कृषि गतिविधियों से प्राप्त होता हो। आवेदक किसान पर तकाबी, सिंचाई शुल्क या सहकारी बैंकों का कोई भी कालातीत ऋण बकाया नहीं होना चाहिए।

इन पैमानों पर होगा किसानों का मूल्यांकन

विजेता का चयन पूरी तरह वैज्ञानिक और पारदर्शी पद्धति से किया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं का मूल्यांकन होगा। खेती में नवीन तकनीकों, बेहतर फसल सघनता, फसल विविधीकरण और समन्वित कृषि प्रणाली को अपनाना। पिछले तीन वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों की उत्पादकता का रिकॉर्ड। कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में किए गए नए प्रयोग तथा अन्य किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रेरित करने के प्रयास। भूमि एवं जल संरक्षण की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा।

त्रि-स्तरीय छानबीन प्रक्रिया से होगा अंतिम चयन

प्राप्त आवेदनों की प्रामाणिकता की जांच के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाई गई है। सबसे पहले आवेदनों का तथ्यात्मक सत्यापन विकासखंड (ब्लॉक) स्तरीय छानबीन समिति करेगी। इसके बाद जिला स्तरीय छानबीन समिति द्वारा स्क्रीनिँग की जाएगी और अंत में राज्य स्तरीय जूरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ किसान का अंतिम चयन किया जाएगा। जूरी का निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होगा। योजना और नियमों से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए किसान कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

'इंटरनेशनल मून मिशन' के लिए रागनी साहू का राष्ट्रीय स्तर पर चयन

रायपुर,  जुलाई 2026/ महासमुंद जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह एक अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक क्षण है। शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद की होनहार छात्रा रागनी साहू का चयन अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन 'शक्तिसैट' (ShaktiSat) के लिए 'नेशनल फाइनलिस्ट' के रूप में हुआ है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक अभियान की सूची में जगह बनाने वाली रागनी पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से चुनी गईं इकलौती छात्रा हैं।

देशभर से चुनी गईं सिर्फ 20 प्रतिभाएं

इस वैश्विक अभियान के तहत पूरे भारत से कड़े राष्ट्रीय मूल्यांकन और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के बाद 'केवल 20 राष्ट्रीय फाइनलिस्ट' का चयन किया गया है, जिसमें रागनी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए अपना स्थान पक्का किया है। रागनी ने वर्ष 2025 में अपने स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से इस मिशन में पंजीयन कराया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने लगभग 120 घंटे की ऑनलाइन प्रशिक्षण श्रृंखला के अंतर्गत 21 विस्तृत मॉड्यूल तथा 550 से अधिक स्पेस, सैटेलाइट, विज्ञान, नवाचार (इन्नोवेशन) और इंजीनियरिंग आधारित लेसन सफलतापूर्वक पूरे किए।

108 देशों के छात्र मिलकर बनाएंगे चंद्र उपग्रह

'मिशन शक्तिसैट' एक अंतर्राष्ट्रीय चंद्र सैटेलाइट मिशन है, जिसमें भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस सहित विश्व के 108 देशों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। इस ऐतिहासिक मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा दो चंद्र उपग्रह (Moon Satellites) विकसित किए जाएंगे। इनमें से एक उपग्रह चंद्रमा की कक्षा (Orbit) में स्थापित होकर परिक्रमा करेगा। दूसरा रोवर चंद्रमा की सतह (Surface) पर उतरकर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा।

इसरो (ISRO) द्वारा 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग

विद्यार्थियों द्वारा विकसित किए जा रहे इन उपग्रहों का प्रक्षेपण 11 अक्टूबर 2026 (अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस) के अवसर पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो (ISRO) द्वारा किया जाएगा। इससे पहले, रागनी साहू 22 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में आयोजित होने वाली 8 दिवसीय नेशनल वर्कशॉप में भाग लेंगी। इस कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर होगा। यहाँ रागनी को इसरो व IN-SPACe के वैज्ञानिकों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और वैश्विक अंतरिक्ष विशेषज्ञों से सीधा संवाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा।

नीति आयोग से सम्बद्ध है मिशन

यह मिशन अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग से सम्बद्ध है। इस वैश्विक पहल का संचालन 'स्पेस किड्ज इंडिया' की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. श्रीमती केसन के नेतृत्व में किया जा रहा है, जबकि विंग कमांडर जाया तारे (रिटायर्ड) इस मिशन की भारत की राष्ट्रीय राजदूत हैं।

कलेक्टर और शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महासमुंद कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने छात्रा रागनी साहू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय स्कूल के प्राचार्य जी.आर. सिन्हा तथा अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी चंद्रशेखर मिथलेश के सतत मार्गदर्शन को दिया। जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन एवं जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने भी रागनी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

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