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रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए ₹175 करोड़ की अतिरिक्त होमिंग सुविधा परियोजना को बताया छत्तीसगढ़ में रेल विकास की बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रेल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति किया आभार व्यक्त

रायपुर,  जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं के निर्माण हेतु ₹175 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति प्रदान किए जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना अभूतपूर्व गति से सशक्त हो रही है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह परियोजना राज्य के रेल नेटवर्क को और अधिक सक्षम एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से रायपुर में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही माल एवं यात्री परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और रेलवे परिचालन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे अधोसंरचना को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख रेल, औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति प्रदान करेगी।

उर्वरकों और प्रमाणित बीजों का पर्याप्त भंडारण, कृषि एवं सहकारिता विभाग की समन्वित व्यवस्था से किसानों को हो रही निर्बाध आपूर्ति

रायपुर, जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के दौरान किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए कृषि विभाग एवं सहकारिता तंत्र के माध्यम से प्रदेशभर में बीज और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भी किसानों को समय पर प्रमाणित बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए समुचित भंडारण, सतत निगरानी तथा सुव्यवस्थित वितरण व्यवस्था की गई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ रहा है।

कृषि विभाग द्वारा जिले में उर्वरकों की उपलब्धता पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुरूप भंडारण एवं वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। सहकारी समितियों एवं अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है। जिले में अब तक 5,201.42 टन उर्वरक का भंडारण किया गया है। इनमें से 2,800.87 टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जबकि 2,400.56 टन उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष जिले को कुल 4,214.115 टन उर्वरक प्राप्त हुआ था, जबकि इस वर्ष आवश्यकता के अनुरूप अधिक भंडारण सुनिश्चित कर किसानों की मांग को प्राथमिकता दी गई है।

इसी प्रकार खरीफ वर्ष 2026 के लिए गुणवत्तायुक्त एवं प्रमाणित बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कृषि विभाग द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे बुवाई का कार्य बिना किसी व्यवधान के संचालित हो रहा है। जिले में वर्तमान में 4,656.50 क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध हैं। इनमें से 3,649.42 क्विंटल बीज किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 1,007.08 क्विंटल बीज का सुरक्षित भंडार अभी भी उपलब्ध है। कृषि विभाग द्वारा बीजों की उपलब्धता एवं वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि जिले के किसी भी किसान को बीज की कमी का सामना न करना पड़े।

राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को खेती के प्रत्येक चरण में आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध हों। इसी उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा बीजों की गुणवत्ता, उपलब्धता और वितरण की नियमित निगरानी की जा रही है, वहीं सहकारिता विभाग एवं सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। दोनों विभागों के समन्वित प्रयासों से किसानों को खरीफ मौसम में आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे खेती की तैयारियां गति पकड़ रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गुणवत्तायुक्त बीज, पर्याप्त उर्वरक, समयबद्ध वितरण व्यवस्था तथा कृषि सेवाओं की सुलभ उपलब्धता राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है। इन प्रयासों से किसानों का विश्वास बढ़ा है और प्रदेश में कृषि उत्पादन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों एवं अधिकृत विक्रय केंद्रों से ही प्रमाणित बीज एवं उर्वरक प्राप्त करें। साथ ही वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए समय पर खरीफ फसलों की बुवाई पूर्ण करें, ताकि बेहतर उत्पादन एवं अधिक आय प्राप्त की जा सके। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता के अनुसार बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भंडारण एवं वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी भी स्तर पर कमी नहीं आने दी जाएगी।

कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध अधोसंरचनाओं तथा अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों का जायजा लिया

रायपुर, जुलाई 2026/कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार अधोसंरचनाओं, सुविधाओं तथा गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की अनुसंधान प्रयोगशालाओं, कृषि अनुसंधान परियोजनाओं, एवं इन्क्यूबेशन सुविधाओं का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर संचालक कृषि श्री राहुल देव भी उनके साथ मौजूद थे। श्री परदेशी ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि एवं किसानों की समृद्धि के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा कृषि विश्वविद्यालय के विकास के लिए हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। गौरतलब है कि श्री परदेशी के कृषि उत्पादन आयुक्त का दायित्व संभालने के पश्चात कृषि विश्वविद्यालय में यह उनका पहला दौरा था।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय स्थित विभिन्न अधोसंरचनाओं, सुविधाओं, अनुसंधान योजनाओं एवं गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में लगाई गई औषधीय एवं सगंध फसलों का अवलोकन किया तथा इसमें गहरी रूचि दिखाई। उन्होंने टिशू कल्चर लैब में केला, गन्ना, बांस आदि फसलों के ऊतक प्रवर्धित पौधों में भी रूचि दर्शायी। उन्होंने कृषि संग्रहालय में प्रदर्शित प्रारूपों का भी अवलोकन किया। श्री परदेशी ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर में भारत सरकार द्वारा स्थापित आधुनिक मौसम वेधशाला का भी अवलोकन किया तथा इसके बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने वहां कृषि संग्रहालय तथा विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय हेतु स्थापित विक्रय केन्द्र का भी अवलोकन किया।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने डाॅ. आर. एल. रिछारिया जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला तथा बायोटेक पार्क का भी अवलोकन किया और वहां संचालित गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने वहां भारत के सबसे बड़े तथा विश्व के दूसरे सबसे बड़े धान जनन द्रव्य संग्रह का अवलोकन किया। कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने उन्हें बताया कि इस जर्मप्लाजम सेन्टर में चावल की 23 हजार 250 परंपरागत किस्मों के जनन द्रव्य को संग्रहित तथा संरक्षित किया गया है। इनमें से कई किस्में औषधीय तथा पोषक गुणों से भरपूर हैं। इन किस्मों का उपयोग धान की नई उन्नत किस्मों के विकास के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही यहां अन्य फसलों की 6 हजार से अधिक किस्मों का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने क्रॉप बायोफोर्टिफिकेशन लैब के अवलोकन के दौरान संजीवनी राइस, जिंको राइस, न्यूट्री रिच राइस जीनोटाइप सहित बम्बू टिश्यू कल्चर को लेकर किए जा रहे नए प्रयोगों को देखा। उन्होंने वहां स्थापित फाइटोसेनेटरी लैब का भी अवलोकन किया।
इसके पूर्व इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में कुलपति डाॅ गिरीश चंदेल ने एक प्रस्तुतिकरण के माध्यम से कृषि उत्पादन आयुक्त के कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न घटकों, अधोसंरचनाओं, शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के बारे में अवगत कराया। उन्होंने किसानों की बेहतरी हेतु विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। बैठक में कुलसचिव, संचालक अनुसंधान, निदेशक शिक्षण, निदेशक विस्तार सेवांए, अधिष्ठाता छात्र कल्याण सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

शाला प्रवेश उत्सव में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का किया आत्मीय स्वागत, अध्ययन सामग्री वितरित कर

उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं, छात्राओं को साइकिल भेंट कर बढ़ाया उत्साह

रायपुर, जुलाई 2026। पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज सरगुजा जिले के पी. एम. श्री स्वामी आत्मानन्द शासकीय अंग्रेजी विद्यालय, लखनपुर तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मेण्ड्राकला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होकर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को मिठाई खिलाकर, अध्ययन सामग्री वितरित कर तथा उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए नवीन शैक्षणिक सत्र के सफल एवं प्रेरणादायी होने की मंगलकामना की।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आज का विद्यार्थी ही कल के सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माता बनेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार और गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का विस्तार कर रही है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ सके। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन, परिश्रम और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करती है।

पी. एम. श्री स्वामी आत्मानन्द शासकीय अंग्रेजी विद्यालय, लखनपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें मन लगाकर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से भी बच्चों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।

इसके पश्चात शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेण्ड्राकला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने छात्राओं को साइकिल वितरित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि साइकिल वितरण जैसी योजनाएं बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वच्छ और हरित पर्यावरण भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।

कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी विद्यार्थी परिश्रम, अनुशासन और लगन के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे तथा प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रायपुर,  जुलाई 2026/ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों को फसल सुरक्षा और बेहतर उत्पादन का लाभ दिलाने के लिए राज्य स्तरीय मौसम आधारित विशेष कृषि निर्देशिका जारी की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने वर्तमान में गन्ने की वृद्धि काल अवस्था (ग्रोथ स्टेज) को देखते हुए किसानों को हानिकारक कीटों के नियंत्रण और प्रबंधन के लिए विशेष सलाह दी है। वैज्ञानिकों ने मौसम को ध्यान में रखते हुए गन्ना उत्पादकों को खेतों में कीटनाशक दवाई का छिड़काव केवल मौसम साफ रहने पर ही, सुबह या शाम के समय करने को कहा है।

कृषि वैज्ञानिकों ने फसल को होने वाले नुकसान के प्रति सचेत करते हुए बताया कि इस अवस्था में गन्ने की फसल पर सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई) का आक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है। इस कीट के शिशु और प्रौढ़ दोनों ही अवस्थाओं में गन्ने की पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पौधों की सामान्य वृद्धि पूरी तरह रुक जाती है। पत्तियों का रस चूसे जाने के कारण गन्ने में शर्करा (शक्कर) का प्रतिशत भी काफी घट जाता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस नुकसानदायक कीट से गन्ने की फसल को सुरक्षित रखने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा पुख्ता वैज्ञानिक उपाय सुझाए गए हैं। जारी निर्देशिका के अनुसार, सफेद मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए किसानों को फेनिट्रोथियान 50 ईसी की 2 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 15 दिनों के अंतराल में छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं।

रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के किसानों को मक्का की फसल से ज्यादा से ज्यादा पैदावार दिलाने और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा राज्य स्तरीय कृषि निर्देशिका जारी की गई है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के वर्तमान मौसम को देखते हुए किसानों को सही समय पर और वैज्ञानिक पद्धति से बोनी कार्य पूर्ण करने की सलाह दी है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अनुकूल मौसम को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने कृषकों को तत्काल खेतों में मक्का की सीधी बुवाई और कतार बोनी का कार्य शुरू करने की सलाह दी है।

वैज्ञानिकों ने उन्नत और समृद्ध खेती के तकनीकों को साझा करते हुए कहा है कि मक्का की भरपूर फसल के लिए संकर जातियों के बीज की दर 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा संयुक्त/संकुल किस्मों के लिए 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखना सबसे उपयुक्त होता है। बेहतर फसल प्रबंधन के लिए बुवाई हमेशा कतारों (पंक्तियों) में ही की जानी चाहिए, जिसमें सामान्यतः कतार से कतार की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, मध्यम एवं देर से पकने वाली विशेष किस्मों के लिए वैज्ञानिकों ने 75ग25 सेंटीमीटर (कतार से कतार व पौधे से पौधे) के अंतर पर बुवाई करने का निर्देश दिया है।

इसके अलावा, भूमि की सेहत और पौधों के समुचित पोषण व बेहतर उत्पादन के लिए विश्वविद्यालय ने संतुलित उर्वरक मात्रा की अनुशंसा की है। वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को प्रति हेक्टेयर 80 से 120 किलोग्राम नत्रजन (नाइट्रोजन), 50 से 75 किलोग्राम स्फुर (फास्फोरस) तथा 30 से 50 किलोग्राम पोटाश की निर्धारित दर से ही खाद का प्रयोग करना चाहिए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने समय पर सही बुवाई, बेहतर उत्पादन हमारी जिम्मेदारीश् के संदेश के साथ प्रदेश के समस्त किसानों से अपील की है कि वे इस वैज्ञानिक मार्गदर्शन और मौसम आधारित सलाह को अनिवार्य रूप से अपनाएं, ताकि कृषि लागत में कमी आए, उत्पादन में वृद्धि हो और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बन सके।

रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों को सोयाबीन की खेती से बम्पर पैदावार दिलाने और उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा राज्य स्तरीय कृषि निर्देशिका जारी की गई है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के मौसम को देखते हुए किसानों को सही समय पर और वैज्ञानिक पद्धति से बोनी कार्य पूर्ण करने की सलाह दी है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में घने बादल छाए रहने के साथ ही हल्की से मध्यम वर्षा होने की पूरी संभावना है। इस अनुकूल मौसम को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने कृषकों को तत्काल खेतों में सोयाबीन की सीधी बुवाई और कतार बोनी का कार्य शुरू करने की सलाह दी है।

वैज्ञानिकों ने उन्नत और समृद्ध खेती के गुर साझा करते हुए कहा है कि सोयाबीन की भरपूर फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 65 से 75 किलोग्राम बीज दर का उपयोग करना सबसे उपयुक्त होता है। बेहतर फसल प्रबंधन और कतारों की सुगमता के लिए बुवाई हमेशा कतारों (पंक्तियों) में ही की जानी चाहिए, जिसमें कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 7 से 10 सेंटीमीटर रखना अनिवार्य है। इसके साथ ही फसल को शुरुआती दौर में कीटों एवं रोगों से सुरक्षित रखने के लिए बीजोपचार को सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया है। किसानों को कहा गया है कि वे राइजोबियम कल्चर 5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज तथा पी.एस.बी. 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से अच्छी तरह उपचारित करने के बाद ही बुवाई संपन्न करें।

इसके अलावा, भूमि की सेहत और पौधों के समुचित पोषण के लिए विश्वविद्यालय ने संतुलित उर्वरक मात्रा की अनुशंसा की है।, वैज्ञानिकों ने बताया है कि किसानों को प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम नत्रजन (नाइट्रोजन), 60 से 80 किलोग्राम स्फुर (फास्फोरस) तथा 30 से 40 किलोग्राम पोटाश की निर्धारित मात्रा का ही प्रयोग करना चाहिए।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स के समक्ष राज्य की पर्यटन संभावनाओं का प्रभावी प्रदर्शन, बी2बी बैठकों से निवेश और पर्यटकों की नई संभावनाओं को मिला बल

टूरिज्म फेयर में छत्तीसगढ़ पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र

रायपुर,2026। देश के पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले प्रतिष्ठित ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ)-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने प्रभावी और आकर्षक सहभागिता दर्ज कराते हुए राज्य की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। 10 से 12 जुलाई तक कोलकाता के विश्व बंगला प्रांगण में आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा विशेष थीम पर आधारित भव्य पवेलियन स्थापित किया गया है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक एवं जनजातीय पर्यटन, इको-टूरिज्म तथा आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के प्रभावशाली प्रदर्शन के कारण आगंतुकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
टीटीएफ-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के स्टॉल का उद्घाटन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर गोवा के पर्यटन मंत्री श्री रोहन ए. खंवटे, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष, थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सुश्री सिरीपोर्न तांतीपन्याथेप सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया। अतिथियों ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों, जनजातीय संस्कृति तथा पर्यटन विकास की संभावनाओं की सराहना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की ओर से सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
भारत के सबसे बड़े बी 2 बी ट्रैवल ट्रेड आयोजनों में शामिल टीटीएफ पर्यटन उद्योग से जुड़े राज्यों, देशों, ट्रैवल एजेंसियों, होटल, एयरलाइंस, टूर ऑपरेटर्स तथा पर्यटन विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराता है। इस मंच के माध्यम से नए व्यावसायिक संबंध स्थापित होते हैं, पर्यटन पैकेज विकसित किए जाते हैं तथा घरेलू और विदेशी पर्यटकों तक पर्यटन स्थलों की व्यापक पहुंच सुनिश्चित होती है। पूर्वी भारत के सबसे बड़े पर्यटन बाजार में आयोजित यह आयोजन छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी एवं पूर्वाेत्तर भारत से बड़ी संख्या में पर्यटक धार्मिक, प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वन्यजीव पर्यटन की ओर आकर्षित होते हैं।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ इस वर्ष बोर्ड में पंजीकृत छत्तीसगढ़ तथा अन्य राज्यों के लगभग 28 टूर ऑपरेटर्स, होटल संचालक, होम-स्टे संचालक एवं पर्यटन उद्यमी भी सहभागिता कर रहे हैं। पवेलियन में चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव, बस्तर की जनजातीय संस्कृति, राज्य के पर्यटन रिसॉर्ट्स तथा विभिन्न पर्यटन परिपथों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शनी में आने वाले आगंतुकों एवं पर्यटन व्यवसाय से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा छत्तीसगढ़ के पर्यटन उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई जा रही है।
आयोजन में प्रत्यक्ष बी2बी बैठकों तथा पर्यटन निवेश एवं सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों और पर्यटन विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ में पर्यटन निवेश, संयुक्त पर्यटन पैकेजों के विकास, विपणन सहयोग तथा पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की रणनीतियों पर सार्थक चर्चा हुई।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि वे मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल का संदेश लेकर इस आयोजन में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और जनजातीय पर्यटन का अद्भुत संगम है। टीटीएफ जैसा राष्ट्रीय मंच राज्य को देश और दुनिया के पर्यटन उद्योग से सीधे जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। हमारा लक्ष्य अधिक से अधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ तक लाना, स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना तथा राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करना है। उन्होंने सभी टूर ऑपरेटर्स, पर्यटन उद्यमियों और यात्राप्रेमियों को छत्तीसगढ़ भ्रमण कर यहां की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और आत्मीय आतिथ्य का अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने अपने प्रस्तुतीकरण में राज्य की पर्यटन संभावनाओं, पर्यटन बोर्ड की योजनाओं तथा पर्यटन व्यवसाय से जुड़ने के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीयन कर टूर ऑपरेटर्स राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकते हैं। बोर्ड पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिक से अधिक टूर ऑपरेटर्स से अपने पर्यटन पैकेजों में छत्तीसगढ़ को शामिल करने तथा स्वयं राज्य का भ्रमण कर इसकी संभावनाओं से परिचित होने का आग्रह किया।
इस वर्ष टीटीएफ-2026 में पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार, अनेक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संस्थानों तथा पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, गुजरात, ओडिशा, राजस्थान, गोवा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, सिक्किम, असम, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों एवं पर्यटन बोर्डों की सक्रिय सहभागिता रही। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पूर्वी भारत सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने, नए पर्यटन साझेदार विकसित करने, निवेश आकर्षित करने तथा राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होने की उम्मीद है।

Gram Panchayats to Take Charge of Rural Water Supply Systems; Social Audits to Ensure Transparency and Quality

Raipur,  In a significant step towards ensuring the long-term sustainability and efficient management of rural drinking water infrastructure, a high-level meeting on the Operation and Maintenance (O&M) Policy under Jal Jeevan Mission 2.0 was held today at Mantralaya (Mahanadi Bhawan). The meeting, chaired by Chief Secretary Shri Vikas Sheel, brought together senior officials of the Public Health Engineering (PHE) Department and Chhattisgarh Jal Jeevan Mission to deliberate on the policy framework and issue key directions for its implementation.

Gram Panchayats to Manage Rural Water Supply Systems

At the meeting, Chief Secretary directed that all the Nal-Jal schemes established across the state will be operated in accordance with the prescribed government standards. He emphasised the need to formulate a comprehensive strategy to ensure the supply of safe drinking water through household taps every day to every rural household.

He further stated that the institutional management of all rural drinking water schemes would be transferred to the respective Gram Panchayats, which would receive all necessary support from the government. The operation and maintenance of these schemes will be carried out through Village Water and Sanitation Committees (VWSCs), ensuring greater community participation and local ownership.

Mandatory to Conduct Social Audits and Gram Sabha Discussions

To strengthen transparency and accountability, the Chief Secretary instructed officials to conduct social audits to assess the proper functioning of drinking water schemes and verify the quality of water being supplied. He also directed that issues relating to drinking water supply under the Jal Jeevan Mission be made a mandatory agenda item in every Gram Sabha meeting, ensuring regular public review and community involvement.

Focus on Water Meter Installation and Financial Sustainability

At this high-level meeting, detailed deliberations were held on several measures aimed at ensuring the long-term sustainability of rural water supply schemes. Discussions covered budget management for operation and maintenance, as well as the rational determination of water cess. Officials also explored the future installation of water meters, subject to budgetary provisions, to reduce water losses, discourage wastage and improve revenue collection. Detailed presentations were made on drinking water quality assessment, multi-tier monitoring mechanisms, compliance systems and community-based audit processes.

During the meeting, Public Health Engineering Department Secretary Shri Mohammad Kaiser Abdulhaque presented the draft Chhattisgarh Jal Jeevan Mission Policy, highlighting its key features and implementation framework. This high-level meeting on the Operation and Maintenance (O&M) Policy under Jal Jeevan Mission 2.0 was attended by Panchayat and Rural Development Department Secretary Shri Bhim Singh, along with senior officials from the Jal Jeevan Mission, the Public Health Engineering Department, and other concerned departments

 

आधुनिक अधोसंरचना से व्यापार, रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति

प्रदेशवासियों एवं व्यापारियों को मिलेगा आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय व्यापारिक परिसर

रायपुर, 7 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा रायपुर के डूमरतराई में विकसित अत्याधुनिक नवीन थोक बाजार का नामकरण एवं लोकार्पण समारोह अब 8 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का लोकार्पण एवं नामकरण कर इसे प्रदेशवासियों और व्यापारियों को समर्पित करेंगे। समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी करेंगे।

उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम पूर्व में 5 जुलाई 2026 को प्रस्तावित था, किन्तु अपरिहार्य कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह समारोह 8 जुलाई को आयोजित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह अत्याधुनिक थोक बाजार व्यापारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, सुगम यातायात व्यवस्था, सुव्यवस्थित व्यापारिक अवसंरचना तथा आवश्यक नागरिक सुविधाओं का समुचित प्रावधान किया गया है। यह बाजार रायपुर सहित पूरे प्रदेश के व्यापारिक विकास को नई दिशा देने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा।

डूमरतराई व्यापारिक परिसर का विकास चरणबद्ध रूप से किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें एवं हॉल निर्मित किए गए, जिससे व्यापारियों को आधुनिक एवं सुव्यवस्थित व्यावसायिक सुविधाएँ उपलब्ध हुईं। वहीं द्वितीय चरण में लगभग 145 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति से विभिन्न श्रेणियों की 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने के साथ प्रदेश को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित एवं समग्र थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिलेगी।

यह नवीन थोक बाजार प्रदेश के व्यापार, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। साथ ही रोजगार के नए अवसरों का सृजन करते हुए रायपुर को एक सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने वाली यह परियोजना उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक व्यावसायिक वातावरण उपलब्ध कराएगी।

लोकार्पण एवं नामकरण समारोह में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री राजेश मूणत, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा एवं श्री सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, व्यापारी, गणमान्य नागरिक तथा मंडल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहेंगे।

डूमरतराई का नवीन थोक बाजार छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की गुणवत्ता, नवाचार एवं जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। यह परियोजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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