ईश्वर दुबे
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Bhilai
68.54 लाख महिलाओं के खातों में अंतरित हुए 642.27 करोड़ रुपये
मातृशक्ति के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण को मिला नया संबल
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 68 लाख 54 हजार महिलाओं के बैंक खातों में 642 करोड़ 27 लाख 77 हजार 950 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा महतारी वंदन योजना इस दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल के रूप में सामने आई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी समाज और राज्य की प्रगति तब तक पूर्ण नहीं हो सकती, जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और सामाजिक रूप से सम्मानित न किया जाए। महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रदेश की माताओं और बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रही है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रारंभ हुई महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, पोषण तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है।
जून 2026 में जारी 28वीं किस्त के साथ ही योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश की महिलाओं को कुल 18 हजार 165 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के अनुरूप सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर में संचालित नियद नेल्लानार अभियान के माध्यम से 7 हजार 770 नई महिलाओं को महतारी वंदन योजना से जोड़ा गया है। इससे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की महिलाओं को भी आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना आज केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं रह गई है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परिवार तथा समाज में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महिलाओं की सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश की हर महिला सशक्त, स्वावलंबी और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके।
महतारी वंदन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई धारा प्रवाहित हुई
सुशासन तिहार के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा पहुंचे मुख्यमंत्री, ग्रामीणों से किया सीधा संवाद
सपेरा समाज के लिए सामुदायिक भवन, मंगल भवन, सीसी रोड और तालाब सौंदर्यीकरण सहित कई विकास कार्यों की घोषणा
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भीखमपुरा में आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा क्षेत्र के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। गौशाला परिसर में आयोजित जनचौपाल में मुख्यमंत्री पारंपरिक खाट पर बैठकर ग्रामीणों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से रूबरू हुए और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा अपेक्षाओं की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और जवाबदेही को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन से प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन तभी संभव है जब सरकार स्वयं लोगों के बीच जाकर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करे। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में जनचौपालों और समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जनचौपाल में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनकल्याण का लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे।
जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत मांगों पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने सपेरा समाज के लिए सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के निर्माण, बस्ती क्षेत्र में मंगल भवन निर्माण, गांव की आंतरिक गलियों में सीसी रोड निर्माण तथा चंडी मंदिर के समीप स्थित डबरी तालाब के सौंदर्यीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम की प्राथमिक शाला का नामकरण पंडित हृदयानंद पाणिग्राही के नाम पर किए जाने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क तथा आजीविका के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से शासन की योजनाओं का लाभ लेने और विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का सीधे गांव पहुंचकर लोगों से संवाद करना उनकी संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का परिचायक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन को नई दिशा मिली है तथा शासन की योजनाओं का लाभ तेजी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है।
कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।
28 हजार 754 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों को 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रूपए की सहायता राशि डी बी टी के माध्यम से करेंगे अंतरित
रायपुर,छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आगामी शुक्रवार 5 जून को दोपहर 2.30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर में एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले पंजीकृत श्रमिक परिवारों के 22 मेधावी बच्चों को सम्मानित करेंगे। इस गरिमामय अवसर पर श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन एवं छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय विभिन्न श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रूपए की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में अंतरित करेंगे। यह पहल श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रत्येक मेधावी छात्र को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा और आवागमन को सुगम बनाने के लिए दोपहिया वाहन क्रय करने हेतु 1 लाख रुपये का विशेष अनुदान देने का भी प्रावधान है। इस प्रकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को कुल रुपये 2 लाख रूपए का चेक वितरण कर लाभान्वित करेंगें। इस अवसर पर जनप्रतिनिधगण, गणमान्य नागरिक सहित हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित रहेगें।
पाली के ग्राम पंचायत मुड़ापार में जनसमस्या निवारण शिविर का हुआ आयोजन
238 आवेदनों का हुआ त्वरित निराकरण
रायपुर : सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आमजनो की समस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से जिला कोरबा के पाली ब्लॉक के ग्राम पंचायत मुड़ापार में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर उपाध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती निकिता मुकेश जायसवाल, जनपद अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा शोभा जगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा ग्रामीणों को स्टॉल के माध्यम से योजनाओं की जानकारी एवं विभागीय योजनाओं से लाभ प्रदान किया गया। जिसमें जनपद पंचायत पाली अंतर्गत एक हितग्राहियों को राशन कार्ड, एक हितग्राही को पेंशन स्वीकृति आदेश, 03 दिव्यांग हितग्राही को श्रवण यंत्र एवं 01 हितग्राही को वाकिंग स्टीक प्रदान किया गया। साथ ही नन्हें शिशुओं को अन्नप्राशन भी कराया गया।
शिविर में विभिन्न विभाग अंतर्गत मांग व शिकायत से सम्बंधित कुल 1065 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 238 आवेदनों का त्वरित निराकरण किया गया। शेष आवेंदनो का परीक्षण कर शीघ्रता से निराकरण किया जाएगा। इस शिविर में क्लस्टर अंतर्गत शामिल सभी ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।
शिविर को संबोधित करते हुए विधायक श्री प्रेमचंद ने कहा कि सुशासन तिहार का मुख्य उद्देश्य शासन की मंशा के अनुरूप योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने तथा ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिला एवं खंड स्तरीय अधिकारी शिविरों में उपस्थित होकर अपने विभागों से संबंधित योजनाओं की जानकारी देते हैं, जिससे योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अधिक से अधिक योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन स्तर में सुधार करें।
रायपुर 04 जून 2026/ कृषि के क्षेत्र में आधुनिक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों को अपनाकर महिलाएं अब न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा दे रही हैं। इसी कड़ी में दुर्ग जिले के विकासखंड पाटन के ग्राम उतई की एक महिला कृषक श्रीमती अंजनी ने नैनो टेक्नोलॉजी (उर्वरक) का सफल प्रयोग कर पारंपरिक खेती की पूरी तस्वीर बदल दी है। उन्होंने चालू रबी सीजन में अपने 40 डिसमिल रकबे में बोई गई गेंहू की फसल में रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग को बंद करते हुए, पूरी तरह से कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के छिड़काव को प्राथमिकता दी। इस आधुनिक तकनीकी बदलाव का सुखद परिणाम यह रहा कि उन्हें इस बार गेंहू की गुणवत्तापूर्ण और रिकॉर्ड पैदावार हासिल हुई, साथ ही खेती की इनपुट कॉस्ट (लागत) में भी भारी गिरावट आई।
महिला किसान अंजनी ने अपने इस सफल जमीनी अनुभव को साझा करते हुए बताया कि पूर्व के वर्षों में उन्हें गेंहू की बुवाई से लेकर बालियां आने तक पारंपरिक बोरी वाले खादों पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता था। कई बार ऐन वक्त पर बाजार या सोसायटियों में रासायनिक खादों की किल्लत होने से फसल का सही चक्र प्रभावित हो जाता था, जिससे फसलों की ग्रोथ रुक जाती थी और जेब पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता था। इस बार उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए जिला कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों से संपर्क किया। कृषि विशेषज्ञों की सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने गेंहू की फसल में पारंपरिक यूरिया व डीएपी की जगह नैनो उर्वरकों के लिक्विड (तरल) फॉर्मूलेशन का इस्तेमाल किया। यह लिक्विड खाद पौधों द्वारा बेहद कम मात्रा में भी आसानी से सोख ली जाती है, जिससे पौधों को हर स्तर पर भरपूर पोषण मिला और फसलों की हरियाली तथा बालियों का आकार पिछले सालों के मुकाबले कहीं बेहतर रहा। श्रीमती अंजनी के मुताबिक, नैनो उर्वरकों का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुलभता और कम कीमत के रूप में सामने आया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कम खर्च में अधिक और स्वस्थ उत्पादन मिलने से शुद्ध मुनाफे में खासी बढ़ोतरी हुई है, जिसने उनकी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति को पहले से ज्यादा मजबूत किया है।
फ्लाई-ऐश और औद्योगिक कचरे की रिसाइक्लिंग से बन रहीं पर्यावरण-अनुकूल सड़कें
एनएचएआई का पर्यावरण-हितैषी निर्माण पर जोर
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने आधुनिक सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। प्रकृति, वन्य जीव और आधुनिकता के बीच बेहतरीन संतुलन स्थापित करने का यह अनूठा मॉडल विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की विभिन्न परियोजनाओं में धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देकर पर्यावरण-अनुकूल सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।
औद्योगिक कचरे की रिसाइक्लिंग से राजमार्गों का निर्माण
राजमार्ग निर्माण में थर्मल पावर प्लांट की फ्लाई-ऐश (राख) का उपयोग करके एनएचएआई ने पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है, जिसका बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ की बिजली परियोजनाओं से निकलने वाले कचरे को खपाने में काम आ रहा है। छत्तीसगढ़ में विभिन्न परियोजनाओं में वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 2.17 करोड़ मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 62 लाख मीट्रिक टन से अधिक फ्लाई-ऐश को सड़क निर्माण में खपाया गया, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लगभग 20 लाख मीट्रिक टन फ्लाई-ऐश का उपयोग किया जा चुका है। इतना ही नहीं, स्टील उद्योग के अपशिष्ट यानी स्लैग, अनुपयोगी टायरों के रबर और बायो-बिटुमेन जैसी वैकल्पिक सामग्रियों को रिसायकल कर वर्ष 2024-25 में 30,477 मीट्रिक टन तथा वर्ष 2025-26 में 2691 मीट्रिक टन सामग्रियों का उपयोग करके ग्रीन-हाइवे की परिकल्पना को साकार किया गया है।
जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के प्रयास
सड़क निर्माण के साथ-साथ जल संरक्षण और भूजल संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर सुधर सके। छत्तीसगढ़ के राजमार्गों के आस-पास के ग्रामीण अंचलों सहित देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 13 अमृत सरोवरों का जीर्णोद्धार और निर्माण किया गया है। वर्षा जल संचयन को गति देने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स की संख्या को वर्ष 2024-25 में 14 से बढ़ाकर अगले ही वर्ष 105 कर दिया गया। निर्माण कार्यों और पौधों की सिंचाई में पीने योग्य साफ पानी की बर्बादी रोकने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से प्राप्त 323 किलोलीटर शोधित जल का उपयोग किया गया, जो जल प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
संवेदनशील वनों में इको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर
वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए एनएचएआई ने छत्तीसगढ़ की विभिन्न परियोजनाओं में बेहद संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्रों में अत्याधुनिक इको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है। छत्तीसगढ़ के सीतानदी-उदंती अभ्यारण्य के संवेदनशील क्षेत्र में करीब 3 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक सुरंग इसका नायाब उदाहरण है। इस निर्माण से वाहनों का आवागमन भूमिगत होगा और जंगल के शांत माहौल पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। इस क्षेत्र में विशेष ध्वनि-अवरोधक (साउंड बैरियर्स) लगाए जा रहे हैं, ताकि वन्य जीव और पक्षी वाहनों के शोर से विचलित न हों। साथ ही, पेड़ों पर रहने वाले जीवों के लिए सड़क के ऊपर मंकी-कैनोपी और हाथियों व अन्य वन्य जीवों के बेरोकटोक विचरण के लिए विशेष एलिफेंट-पास एवं एनिमल-अंडर विकसित किए जा रहे हैं।
बी-कॉरिडोर और मेडिसीन पार्क से स्थानीय समृद्धि
हाइवे को एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने छत्तीसगढ़ के मैदानी और वनांचल मार्गों के किनारों पर एनएचएआई द्वारा कई अनोखे प्रयोग किए जा रहे हैं। सड़कों के किनारे विशेष बी-कॉरिडोर (मधुमक्खी गलियारा) विकसित किया जाएगा, जिससे आसपास के खेतों में प्राकृतिक परागण बढ़ेगा और स्थानीय किसानों की फसल उत्पादकता में वृद्धि होगी। वहीं, बंजर और खाली पड़ी जमीनों पर मेडिसीन पार्क (औषधि वन) तैयार कर नीम, तुलसी, एलोवेरा और आंवला जैसे हजारों औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, एनएचएआई ने "एक पेड़ माँ के नाम 2.0" अभियान के अंतर्गत बीते वर्ष छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे और डिवाइडर्स पर ढाई लाख से अधिक पौधों का रोपण कर हरित राजमार्ग का एक नया कीर्तिमान रचा है।
कम लागत, बेहतर परिणाम: कृषक भागबली देवांगन ने अपनाई नैनो उर्वरक आधारित खेती
रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ शासन किसानों को सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। कृषि को अधिक लाभकारी एवं आधुनिक बनाने के उद्देश्य से किसानों को समय पर खाद-बीज, उन्नत कृषि आदान तथा नवीन तकनीकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। शासन की इस किसान हितैषी नीतियों और योजनाओं के प्रभाव से कोरबा जिले के किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत कम करने में भी सफल हो रहे हैं।जिला कोरबा के ग्राम छुरीकला निवासी श्री भागबली देवांगन एक मेहनती और प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रिय जीवन को अपनाते हुए खेती को अपनी प्राथमिकता बनाया है। उनका मानना है कि किसान कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, बल्कि अपने अनुभव और परिश्रम से खेती को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य करता है। इसी सोच के साथ वे आज भी पूरी लगन और समर्पण के साथ कृषि कार्यों में जुटे हुए हैं।
श्री देवांगन लगभग साढ़े तीन एकड़ कृषि भूमि में मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। वर्षों से खेती से जुड़े होने के कारण वे समय के साथ कृषि में आ रहे बदलावों को अपनाने के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने बताया कि खेती में अच्छे उत्पादन के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही समय पर सही तकनीक और उर्वरकों का उपयोग भी आवश्यक है। इसी सोच के तहत पिछले दो वर्षों से वे अपनी फसलों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं।
उनके अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसल की बढ़वार बेहतर हुई है तथा पौधों का विकास अधिक संतुलित रूप से हुआ है। इसके साथ ही उत्पादन में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि पहले जहां पारंपरिक उर्वरकों पर अधिक खर्च करना पड़ता था, वहीं नैनो उर्वरकों के उपयोग से लागत में कमी आई है, जिससे खेती अधिक लाभकारी बनी है।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा किसानों को समय पर खाद-बीज एवं कृषि आदान उपलब्ध कराए जाने से खेती की तैयारियां आसान हुई हैं। वे मानते हैं कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
लोक भवन में तीन दिवसीय ध्यान शिविर के दूसरे दिन अधिकारियों-कर्मचारियों ने किया ध्यान अभ्यास
रायपुर, 5 जून 2026/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि मेडिटेशन (ध्यान) को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। आज के तनावपूर्ण और व्यस्त जीवन में ध्यान मानसिक शांति, एकाग्रता और कार्यकुशलता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। लोक भवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आयोजित तीन दिवसीय ध्यान शिविर के दूसरे दिन राज्यपाल श्री रमेन डेका भी उपस्थित रहे। इस दौरान हार्टफुलनेस संस्था, अमलेश्वर से आए प्रशिक्षकों ने अधिकारियों और कर्मचारियों को ध्यान की विभिन्न विधियों की जानकारी दी तथा उनका व्यावहारिक अभ्यास भी कराया।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कार्यभार के कारण तनाव एक सामान्य समस्या बन गया है। ऐसे में ध्यान व्यक्ति को मानसिक संतुलन बनाए रखने, तनाव कम करने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य करने में सहायता करता है। राज्यपाल ने अधिकारियों और कर्मचारियों से प्रतिदिन कुछ समय ध्यान के लिए निकालने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नियमित ध्यान का अभ्यास व्यक्ति के जीवन में आत्मिक संतोष, सकारात्मकता और अद्भुत आनंद का अनुभव कराता है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में बेहतर संतुलन स्थापित कर सकता है।
शिविर में हार्टफुलनेस संस्था, अमलेश्वर के प्रशिक्षकों ने ध्यान के महत्व, उसकी प्रक्रिया और दैनिक जीवन में उसके लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को ध्यान के व्यावहारिक सत्र में शामिल कराकर उसका अनुभव भी कराया। इस अवसर पर प्रशिक्षकों ने राज्यपाल श्री डेका को मेडिटेशन और आत्मिक विकास से संबंधित पुस्तकें भी भेंट कीं।
किसानों से 5 करोड़ रूपए से अधिक का मक्का खरीदा गया
605 किसानों ने 1763 एकड़ में की पॉपकॉर्न मक्का की खेती
अनुबंध खेती से बढ़ी आय और मिला मार्केट
रायपुर, 04 जून 2026/ फसल विविधीकरण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और भूमि की उर्वरता में सुधार हो रहा है। पारंपरिक फसलों से हटकर नई और उच्च-मूल्य वाली फसलें उगाने से किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है और जोखिम कम होता है। धान के बदले मक्का की खेती अपनाना फसल विविधीकरण की दिशा में एक बेहतरीन और अत्यधिक लाभदायक कदम है। इससे न केवल भूमि की उर्वरता और जल स्तर में सुधार होता है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
किसानों को बेहतरीन आर्थिक लाभ
राजनांदगांव जिले में फसल चक्र परिवर्तन के तहत ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्के की खेती अपनाने वाले किसानों को बेहतरीन आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। गौरमेड पॉपकॉर्न कंपनी के साथ अनुबंध खेती करने वाले किसानों ने उत्पादन एवं आय के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। कंपनी द्वारा जिले के किसानों से 5 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य का पॉपकॉर्न मक्का खरीदा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
1700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मक्का की खरीदी
रबी वर्ष 2025-26 में गौरमेड पॉपकॉर्न कंपनी द्वारा जिले के 605 किसानों के साथ अनुबंध कुल 1763 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कराई गई। किसानों को औसतन 19.33 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। कंपनी ने 1700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मक्का की खरीदी करते हुए 5 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य का मक्का खरीदा, इसमें से अब तक 3.73 करोड़ रूपए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है तथा शेष भुगतान की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
सर्वाधिक क्षेत्र में मक्का उत्पादन करने का गौरव ललित कुमार को
छुरिया विकासखंड के ग्राम भरीटोला के किसान श्री ललित कुमार साहू ने 23.56 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर जिले में सर्वाधिक क्षेत्र में मक्का उत्पादन करने का गौरव प्राप्त किया। उन्हें इस खेती से 6 लाख 95 हजार रूपए से अधिक की आय हुई। इसी प्रकार राजनांदगांव विकासखंड के किसान श्री वेद प्रकाश चंद्राकर ने 9.5 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर 32.66 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त किया। उन्हें इस खेती से 5 लाख 27 हजार रूपए से अधिक की आय हुई। वहीं ग्राम जमलेश्वर के किसान श्री देवराम पटेल ने 35.5 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त कर लगभग 4 लाख 67 हजार रूपए की आमदनी अर्जित की।
फसल विविधीकरण को मिला बढ़ावा
इन किसानों की सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। कृषि विभाग के अनुसार धान के स्थान पर मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने से किसानों को अधिक लाभ मिलने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता तथा फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। जिले के किसानों की यह सफलता अन्य किसानों को भी फसल चक्र परिवर्तन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।